क्या शिक्षा बनेगी PK की ताकत? हलफनामे ने बढ़ाई बांकीपुर की सियासी दिलचस्पी
पटना,15 जुलाई (ओ. पी. पाण्डेय). अब तक दूसरों के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाले जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर पहली बार खुद चुनावी मैदान में हैं. बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए दाखिल उनके नामांकन पत्र और शपथपत्र ने उनकी राजनीतिक ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक और पेशेवर प्रोफाइल को भी चर्चा का विषय बना दिया है.
प्रशांत किशोर का शैक्षणिक सफर बिहार के एम.पी. हाई स्कूल, बक्सर और पटना साइंस कॉलेज से शुरू होकर लखनऊ विश्वविद्यालय, एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया और जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी (अमेरिका) के सहयोग से संचालित हेल्थकेयर मैनेजमेंट कार्यक्रम तक पहुंचता है. इतना ही नहीं, उन्होंने फ्रांस के क्लेरमों-फेरां विश्वविद्यालय से फ्रेंच भाषा का विशेष कोर्स भी किया है, यानी वे हिंदी और अंग्रेजी के साथ फ्रेंच भाषा का भी ज्ञान रखते हैं.

बिहार की राजनीति में जहां नेताओं की शिक्षा अक्सर चर्चा का विषय बनती रही है, वहीं प्रशांत किशोर की अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें अलग पहचान देती है.
शपथपत्र में क्या-क्या सामने आया?




नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे के अनुसार, प्रशांत किशोर ने वित्त वर्ष 2024-25 में 58.45 लाख रुपये की आय घोषित की है, जबकि उनकी पत्नी की आय 40.23 लाख रुपये बताई गई है. उनके पास 22.19 करोड़ रुपये से अधिक की चल संपत्ति है, जबकि उनकी अचल संपत्तियों का बाजार मूल्य करीब 74 करोड़ रुपये बताया गया है. पत्नी के नाम भी करोड़ों रुपये की संपत्ति दर्ज है. हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ 8 आपराधिक मामले लंबित हैं, लेकिन किसी भी मामले में उन्हें अब तक सजा नहीं हुई है.
रणनीतिकार से उम्मीदवार तक


देशभर में कई चुनावों के रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर अब पहली बार अपने नाम और अपनी राजनीति के दम पर जनता से वोट मांग रहे हैं. बांकीपुर का उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि यह भी तय करेगा कि चुनावी रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर को जनता नेता के रूप में कितना स्वीकार करती है.
बांकीपुर का मुकाबला इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां अब बहस केवल राजनीतिक वादों की नहीं, बल्कि अनुभव, शिक्षा, विजन और जनाधार की भी होगी.
