बड़ा फैसला: 1 साल तक 30%वेतन दान करेंगे सांसद

कोरोनावायरस ने ना सिर्फ इंसानी शरीर बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था को भी करारी चोट दी है. भारत भी ऐसे देशों में से एक है जहां 21 दिनों के लॉक डाउन के कारण अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है. इन सब को देखते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने आज एक बड़ा फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी कैबिनेट मंत्रियों और सांसदों की वेतन में 30 फीसदी की कटौती की गई है और यह कटौती एक साल तक की जाएगी. देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और कई राज्यों के राज्यपाल ने स्वेच्छा से सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में वेतन कटौती का फैसला किया है. यह धनराशि भारत के समेकित कोष में जाएगी. फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कैबिनेट ने भारत में कोरोना वायरस के प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन के लिए 2020-21 और 2021-22 के लिए सांसदों को मिलने वाली निधि यानी MPLAD फंड को अस्थाई तौर पर निलंबित कर दिया है. दो साल के लिए MPLAD फंड के 7900 करोड़ रुपये का उपयोग भारत की संचित निधि में किया जाएगा.

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ध्यान से पढ़ें और सुनें, पीएम का ये संबोधन

प्रधानमंत्री का राष्ट्र  के नाम संबोधन नमस्कार ! मेरे प्यारे देशवासियों, मैं आज एक बार फिर, कोरोना वैश्विक महामारी पर बात करने के लिए आपके बीच आया हूं। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का जो संकल्प हमने लिया था, एक राष्ट्र के नाते उसकी सिद्धि के लिए हर भारतवासी ने पूरी संवेदनशीलता के साथ, पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना योगदान दिया। बच्चे-बुजुर्ग, छोटे-बड़े, गरीब-मध्यम वर्ग-उच्च वर्ग, हर कोई परीक्षा की इस घड़ी में साथ आया। जनता कर्फ्यू को हर भारतवासी ने सफल बनाया। एक दिन के जनता कर्फ़्यू से भारत ने दिखा दिया कि जब देश पर संकट आता है, जब मानवता पर संकट आता है तो किस प्रकार से हम सभी भारतीय मिलकर, एकजुट होकर उसका मुकाबला करते हैं। आप सभी जनता कर्फ़्यू के लिए प्रशंसा के पात्र हैं। साथियों, आप कोरोना वैश्विक महामारी पर पूरी दुनिया की स्थिति को समाचारों के माध्यम से सुन भी रहे हैं और देख भी रहे हैं। आप ये भी देख रहे हैं कि दुनिया के समर्थ से समर्थ देशों को भी कैसे इस महामारी ने बिल्कुल बेबस कर दिया है। ऐसा नहीं है कि ये देश प्रयास नहीं कर रहे हैं या उनके पास संसाधनों की कमी है। लेकिन कोरोना वायरस इतनी तेजी से फैल रहा है कि तमाम तैयारियों और प्रयासों के बावजूद, इन देशों में ये चुनौती बढ़ती जा रही है। इन सभी देशों के दो महीनों के अध्ययन से जो निष्कर्ष निकल रहा है, और एक्सपर्ट्स भी यही कह रहे हैं कि कोरोना से प्रभावी मुकाबले के लिए एकमात्र विकल्प है- Social Distancing. यानि एक दूसरे से दूर रहना, अपने घरों में ही बंद रहना। कोरोना से बचने का इसके अलावा कोई तरीका नहीं है, कोई रास्ता नहीं है। कोरोना को फैलने से रोकना है, तो इसके संक्रमण की सायकिल को तोड़ना ही होगा। कुछ लोग इस गलतफहमी में हैं कि social distancing केवल बीमार लोगों के लिए आवश्यक है। ये सोचना सही नहीं। social distancing हर नागरिक के लिए है, हर परिवार के लिए है, परिवार के हर सदस्य के लिए है। कुछ लोगों की लापरवाही, कुछ लोगों की गलत सोच,  आपको, आपके बच्चों को, आपके माता पिता को, आपके परिवार को, आपके दोस्तों को, पूरे देश को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देगी। अगर ऐसी लापरवाही जारी रही तो भारत को इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। साथियों, पिछले 2 दिनों से देश के अनेक भागों में लॉकडाउन कर दिया गया है। राज्य सरकार के इन प्रयासों को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। हेल्थ सेक्टर के एक्सपर्ट्स और अन्य देशों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए, देश आज एक महत्वपूर्ण निर्णय करने जा रहा है। आज रात 12 बजे से पूरे देश में, ध्यान से सुनिएगा, पूरे देश में, आज रात 12 बजे से पूरे देश में, संपूर्ण Lockdown होने जा रहा है। हिंदुस्तान को बचाने के लिए, हिंदुस्तान के हर नागरिक को बचाने के लिए आज रात 12 बजे से, घरों से बाहर निकलने पर, पूरी तरह पाबंदी लगाई जा रही है। देश के हर राज्य को, हर केंद्र शासित प्रदेश को, हर जिले, हर गांव, हर कस्बे, हर गली-मोहल्ले को अब लॉकडाउन किया जा रहा है। ये एक तरह से कर्फ्यू ही है। जनता कर्फ्यू से भी कुछ कदम आगे की बात, जनता कर्फ्यू से और सख्त। कोरोना महामारी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए ये कदम अब बहुत आवश्यक है। निश्चित तौर पर इस लॉकडाउन की एक आर्थिक कीमत देश को उठानी पड़ेगी। लेकिन एक-एक भारतीय के जीवन को बचाना इस समय मेरी, भारत सरकार की, देश की हर राज्य सरकार की, हर स्थानीय निकाय की, सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसलिए मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप इस समय देश में जहां भी हैं, वहीं रहें। अभी के हालात को देखते हुए, देश में ये लॉकडाउन 21 दिन का होगा। आने वाले 21 दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो, कोरोना वायरस की संक्रमण सायकिल तोड़ने के लिए कम से कम 21 दिन का समय बहुत अहम है। अगर ये 21 दिन नहीं संभले तो देश और आपका परिवार 21 साल पीछे चला जाएगा। अगर ये 21 दिन नहीं संभले तो कई परिवार हमेशा-हमेशा के लिए तबाह हो जाएंगे। इसलिए बाहर निकलना क्या होता है, ये इन 21 दिनों के लिए भूल जाइए। घर में रहें, घर में रहें और एक ही काम करें कि अपने घर में रहें। साथियों, आज के फैसले ने, देशव्यापी लॉकडाउन ने आपके घर के दरवाजे पर एक लक्ष्मण रेखा खींच दी है। आपको ये याद रखना है कि घर से बाहर पड़ने वाला आपका सिर्फ एक कदम, कोरोना जैसी गंभीर महामारी को आपके घर ला सकता है। आपको ये याद रखना है कि कई बार कोरोना से संक्रमित व्यक्ति शुरुआत में बिल्कुल स्वस्थ लगता है, वो संक्रमित है इसका पता ही नहीं चलता। इसलिए ऐहतियात बरतिए, अपने घरों में रहिए। वैसे, जो लोग घर में हैं, वो सोशल मीडिया पर नए-नए तरीकों से, बहुत इनोवेटिव तरीके से इस बात को बता रहे हैं। एक बैनर मुझ भी पसंद आया है। ये मैं आपको भी दिखाना चाहता हूं। कोरोना यानि कोई रोड पर ना निकले। साथियों, एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है कि आज अगर किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस पहुंचता है तो उसके शरीर में इसके लक्षण दिखने में कई–कई दिन लग जाते हैं। इस दौरान वो जाने–अनजाने हर उस व्यक्ति को संक्रमित कर देता है जो उसके संपर्क में आता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट बताती है कि इस महामारी से संक्रमित एक व्यक्ति सिर्फ हफ्ते–दस दिन में सैकड़ों लोगों तक इस बीमारी को पहुंचा सकता है। यानि ये आग की तरह तेज़ी से फैलता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन का ही एक और आंकड़ा बहुत महत्वपूर्ण है। साथियों, दुनिया में कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्तियों की संख्या को पहले 1 लाख तक पहुंचने में 67 दिन लगे थे। इसके बाद सिर्फ 11 दिन में ही एक लाख नए लोग संक्रमित हो गए। सोचिए, पहले एक लाख लोग संक्रमित होने में 67 दिन लगे और फिर इसे 2 लाख लोगों तक पहुंचने में सिर्फ 11 दिन लगे। ये और भी भयावह है कि दो लाख संक्रमित लोगों से तीन लाख लोगों तक ये बीमारी पहुंचने में सिर्फ चार दिन लगे। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कोरोना वायरस कितनी तेजी से फैलता है। और जब ये फैलना शुरू करता है, तो इसे रोकना बहुत मुश्किल होता है। साथियों, यही वजह है कि चीन, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली-ईरान जैसे देशों में जब कोरोना वायरस ने फैलना शुरू किया, तो हालात बेकाबू हो गए। और ये भी याद रखिए, इटली हो या अमेरिका, इन देशों की स्वास्थ्य सेवा, पूरी दुनिया में बेहतरीन मानी जाती है। बावजूद इसके, ये देश कोरोना का प्रभाव कम नहीं कर पाए। सवाल ये कि इस स्थिति में उम्मीद की किरण कहां है? उपाय क्या है, विकल्प क्या है? साथियों, कोरोना से निपटने के लिए उम्मीद की किरण, उन देशों से मिले अनुभव हैं जो कोरोना को कुछ हद तक नियंत्रित कर पाए। हप्तों तक इन देशों के नागरिक घरों से बाहर नहीं निकले, इन देशों के नागरिकों ने शत-प्रतिशत सरकारी निर्देशों का पालन किया और इसलिए ये कुछ देश अब इस महामारी से बाहर आने की ओर बढ़ रहे हैं। हमें भी ये मानकर चलना चाहिए कि हमारे सामने यही एक मार्ग है- हमें घर से बाहर नहीं निकलना है। चाहे जो हो जाए, घर में ही रहना है। कोरोना से तभी बचा जा सकता है जब घर की लक्ष्मण रेखा न लांघी जाए। हमें इस महामारी के वायरस का संक्रमण रोकना है, इसके फैलने की चेन को तोड़ना है। साथियों, भारत आज उस स्टेज पर है जहां हमारे आज के एक्शन तय करेंगे कि इस बड़ी आपदा के प्रभाव को हम कितना कम कर सकते हैं। ये समय हमारे संकल्प को बार-बार मजबूत करने का है। ये समय कदम-कदम पर संयम बरतने का है। आपको याद रखना है- जान है तो जहान है। साथियों, ये धैर्य और अनुशासन की घड़ी है। जब तक देश में lockdown की स्थिति है, हमें अपना संकल्प निभाना है, अपना वचन निभाना है। मेरी आपसे प्रार्थना है कि घरोंमें रहते हुए आप उन लोगों के बारे में सोचिए, उनके लिए मंगलकामना करिए जो अपना कर्तव्य निभाने के लिए, खुद को खतरे में डालकर काम कर रहे हैं। उन डॉक्टर्स, उन नर्सेस, पैरा-मेडिकल स्टाफ, pathologists के बारे में सोचिए, जो इस महामारी से एक-एक जीवन को बचाने के लिए, दिन रात अस्पताल में काम कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन के लोग, एंबुलेंस चलाने वाले ड्राइवर, ward boys, उन सफाई कर्मचारियों के बारे में सोचिए जो इन कठिन परिस्थितियों में दूसरों की सेवा कर रहे हैं। आप उन लोगों के लिए प्रार्थना करिए जो आपकी सोसायटी, आपके मोहल्लों, आपकी सड़कों, सार्वजनिक स्थानों को sanitize करने के काम में जुटे हैं, जिससे इस वायरस का नामो-निशान न रहे। आपको सही जानकारी देने के लिए 24 घंटे काम कर रहे मीडिया के लोगों के बारे में भी सोचिए, जो संक्रमण का खतरा उठाकर सड़कों पर हैं, अस्पतालों में हैं। आप अपने आस पास के पुलिस कर्मियों के बारे में सोचिए जो अपने घर परिवार की चिंता किए बिना, आपको बचाने के लिए दिन रात duty कर रहे हैं, और कई बार कुछ लोगों का गुस्सा भी झेल रहे हैं। साथियों, कोरोना वैश्विक महामारी से बनी स्थितियों के बीच, केंद्र और देशभर की राज्य सरकारें तेजी से काम कर रही है। रोजमर्रा की जिंदगी में लोगों को असुविधा न हो, इसके लिए निरंतर कोशिश कर रही हैं। सभी आवश्यक वस्तुओं की supply बनी रहे, इसके लिए सभी उपाय किए गए हैं और आगे भी किए जाएँगे। निश्चित तौर पर संकट की ये घड़ी, गरीबों के लिए भी बहुत मुश्किल वक्त लेकर आई है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के साथ समाज के अन्य संगठन, सिविल सोसायटी के लोग, गरीबों को मुसीबत कम हो, इसके लिए निरंतर जुटे हुए हैं। गरीबों की मदद के लिए अनेकों लोग साथ आ रहे हैं। साथियों, जीवन जीने के लिए जो जरूरी है, उसके लिए सारे प्रयासों के साथ ही जीवन बचाने के लिए जो जरूरी है, उसे सर्वोच्च प्राथमिकता देनी ही पड़ेगी। इस नई महामारी से मुकाबला करने के लिए देश की स्वास्थ्य सुविधाओं को तैयार करने का काम केंद्र सरकार लगातार कर रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, भारत के बड़े चिकित्सा और अनुसंधान संस्थानों तथा स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह और सुझाव पर कार्य करते हुए सरकार ने निरंतर फैसले लिए हैं। अब कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए, देश के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने आज 15 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इससे कोरोना से जुड़ी टेस्टिंग फेसिलिटीज, पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्वीपमेंट्स, Isolation Beds, ICU beds, ventilators, और अन्य जरूरी साधनों की संख्या तेजी से बढ़ाई जाएगी। साथ ही मेडिकल और पैरामेडिकल मैनपावर की ट्रेनिंग का काम भी किया जाएगा। मैंने राज्य सरकारों से अनुरोध किया है कि इस समय उनकी पहली प्राथमिकता, सिर्फ और सिर्फ स्वास्थ्य सेवाएं ही होनी चाहिए, हेल्थ केयर ही प्राथमिकता होनी चाहिए। मुझे संतोष है कि देश का प्राइवेट सेक्टर भी पूरी तरह से कंधे से कंधा मिलाकर संकट और संक्रमण की इस घड़ी में देशवासियों के साथ खड़ा है। प्राइवेट लैब्स, प्राइवेट अस्पताल, सभी इस चुनौतीपूर्ण दौर में सरकार के साथ काम करने के लिए आगे आ रहे हैं। लेकिन साथियों, ये भी ध्यान रखिए कि ऐसे समय में जाने-अनजाने कई बार अफवाहें भी फैलती हैं। मेरा आपसे आग्रह है कि किसी भी तरह की अफवाह और अंधविश्वास से बचें। आपके द्वारा केंद्र सरकार, राज्य सरकार और medical fraternity द्वारा दिए गए निर्देश और सुझावों का पालन करना बहुत जरुरी है। मेरी आपसे प्रार्थना है कि इस बीमारी के लक्षणों के दौरान, बिना डॉक्टरों की सलाह के, कोई भी दवा न लें। किसी भी तरह का खिलवाड़, आपके जीवन को और खतरे में डाल सकता है। साथियों, मुझे विश्वास है हर भारतीय संकट की इस घड़ी में सरकार के, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करेगा। 21 दिन का लॉकडाउन, लंबा समय है, लेकिन आपके जीवन की रक्षा के लिए, आपके परिवार की रक्षा के लिए, उतना ही महत्वपूर्ण है। मुझे विश्वास है, हर हिंदुस्तानी इस संकट का न सिर्फ सफलता से मुकाबला करेगा बल्कि इस मुश्किल घड़ी से विजयी होकर निकलेगा। आप अपना ध्यान रखिए, अपनों का ध्यान रखिए। जय हिंद !

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22 मार्च, 2020 से 14 अप्रैल, 2020 तक की अवधि “अप्रत्याशित घटना”

रेलवे ने लॉक डाउन को अप्रत्याशित घटना करार देते हुए 22 मार्च से 14 अप्रैल 2020 तक की अवधि के दौरान सभी तरह के शुल्क चाहे वो विलंब शुल्क हो, कैंसिलेशन चार्ज हो या फिर पार्सल चार्ज, सब माफ कर दिया है. वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि, “आकस्मिक घटना” का अर्थ है असाधारण घटनाएं या परिस्थियां जो मनुष्य के नियंत्रण में नहीं है जैसे ईश्वरीय आपदा (प्राकृतिक आपदा)। कोरोना वायरस के फैलाव को प्राकृतिक आपदा मानना चाहिए और इसके लिए ‘आकस्मिक घटना’ उपनियम का उपयोग किया जा सकता है. इसे ध्यान में रखते हुए रेल मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि 22 मार्च, 2020 से 14 अप्रैल, 2020 तक की अवधि “आकस्मिक घटना” के तहत मान्य होगी और इस अवधि के दौरान निम्न में से कोई भी शुल्क नहीं लगाया जाएगा. 1. विलम्ब शुल्क 2. स्थान शुल्क 3. माल ढेर लगाने का शुल्क 4. शेड/स्थान में माल रखने का शुल्क यदि निजी/संयुक्त स्वामित्व का स्टॉक हो तो विलम्ब शुल्क 5. पार्सल ट्रैफिक पर विलम्ब शुल्क 6. पार्सल ट्रैफिक पर स्थान शुल्क 7. कंटेनर ट्रैफिक के मामले में आवरोध शुल्क 8. कंटेनर ट्रैफिक के मामले में स्थान उपयोग करने का शुल्क इससे पहले 23 मार्च, 2020 को रेलवे बोर्ड ने निर्देश जारी किए थे कि 24 मार्च, 2020 तक की अवधि में खाली कंटेनरों/खाली फ्टैल वैगनों की आवाजाही के लिए कोई ढुलाई-शुल्क नहीं लगाया जाएगा.

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दिल्ली सरकार पर क्यों भड़के बिहार के श्रम मंत्री

बिहार के श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि लॉकडाउन को फेल करने की साजिश करने वाले देश के दुश्मन बिहार और यूपी के लोगों में अफवाह और भ्रम की स्थिति पैदा कर वापस जाने के लिए विवश कर रहे हैं. दिल्ली किसी की जागीर नहीं है लेकिन कुछ लोग अपनी गंदी राजनीति से इस लॉकडाउन को फेल कर भारत को इटली और इरान बनाना चाहतें हैं. दिल्ली सरकार और वहाँ के सामाजिक संगठन से करबद्ध प्रार्थना करते हुए आग्रह किया है कि सब लोग मानवता के हित में सहयोग करें और चालाक बनकर अफवाह और भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर मानवता को शर्मसार करने के बजाय एक चालक बनकर इस विपदा की घड़ी से उबरने के लिए सबकी जिन्दगी को सुरक्षित और स्वस्थ्य रखने के संकल्प को सिद्धि तक पहुँचाने का कार्य करने में सहयोग करें. पूरे विश्व को भारत से उम्मीद है लेकिन कुछ राष्ट्र के गद्दार माँ भारती के संतानों को पीड़ित करने का षड्यंत्र कर अपनी गंदी राजनीति को सिद्ध करना चाहतें हैं किन्तु ये उनकी नैतिक हार है और ऐसे लोग को राज्य के जवाबदेह पद पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है.  मंत्री ने सभी सांसदों से आग्रह किया है कि दिल्ली में विद्यालय, कम्यूनिटी हॉल एवं अन्य बडे़ स्थानों में सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए रहने, खाने की व्यवस्था कर भगदड़ की स्थिति को संभाले. मानवीय आधार पर भी हमारी जिम्मेदारी है कि पूरे राष्ट्र के गरीबों के हित में खड़ा होना है ताकि कोई भूख से न मरे

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अजीम प्रेमजी ने दान किए रू 50 हजार करोड़

देश के सबसे धनी व्यक्तियों में शुमार अजीम प्रेमजी ने एक बार फिर चैरिटी के लिए अपना खजाना खोला है. जानकारी के मुताबिक उन्होंने इस बार 50 हजार करोड़ रुपये दान दिया है. विप्रो के चेयरपर्सन अजीम प्रेमजी कई सालों से शिक्षा के लिए दान कर रहे हैं. उन्होंने कमजोर वर्ग के छात्रों की शिक्षा के लिए पहले भी हजारों करोड़ का दान किया है.

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लॉक डाउन के दौरान सील हुई दुकाने, PR बांड भरवाया 

लॉक डाउन के दौरान आरा में मनमाने ढंग से दुकाने खोलने वालों पर बड़ी कार्रवाई, दुकाने हुई सील आरा,25मार्च. कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जारी लॉक डाउन के दौरान जारी किए गए जीवनपयोगी 12 वस्तुओं के अलावे खोली गई दुकानो पर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद हड़कम्प मचा हुआ है. लॉक डाउन को मजाक के तौर पर लेने वालों पर इस कार्रवाई के बाद शहर में फालतू तर्कों और बहस करने वालों पर लगाम लग गया है और वे सरकार द्वारा जारी आदेश का पालन कर रहे हैं. सदर अनुमंडल पदाधिकारी ने मंगलवार को आरा शहर के चंदवा एवं सपना सिनेमा के समीप स्थित हार्डवेयर, पेंट, सीमेंट छड़, खैनी एवं पान के होलसेल, तथा स्पेयर पार्ट्स के दुकानों को सील किया. उक्त कार्रवाई जिला में व्याप्त लॉक डाउन को सुनिश्चित करवाने को लेकर की गई. दुकानदारों से PR बांड भी भरवाया गया. जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने मंगलवार को भी भोजपुर के चैम्बर ऑफ कॉमर्स के सदस्यों के साथ बैठक की और सदस्यों को बताया कि खाद्य सामग्री की कोई कमी नही होगी एवम उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी. सदस्यो ने कहा कि जिला में लॉक डाउन को प्रभावी बनाने के लिए वे दुकानदारों से अनुरोध करेंगे कि सुबह 5 बजे से 10 बजे तक एवम शाम में 4 बजे से 7 बजे तक राशन दुकानों को खोलें ताकि एक ही समय मे खरीददारों की भीड़ को रोक जा सके. बताते चलें कि सोमवार को भी DM भोजपुर ने एक बैठक कर उक्त बातों कही थी.

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आज रात से घरेलू उड़ाने भी हुई स्थगित

नई दिल्ली, 24 मार्च. कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए इंडियन एयरलांइस ने घरेलू कर्मशियल उड़ानों के समय सारणी को 24 मार्च के मध्य रात्रि 23:59 बजे तक जारी रखा है. इस अवधि के बाद सभी घरेलू उड़ानो पर भी रोक लगा दी गयी है जो आज रात्रि के बाद प्रभावी हो जाएगा. इस घोषणा के बाद सभी कर्मशियल उड़ानों के लिए तैयार एयरलाइन्स अपनी कार्य योजना बना रही हैं जो इस अवधि तक अपने यात्रियों को उनके गन्तव्य तक पहुचायेगी. मध्य रात्रि से प्रभावी हवाई उड़ानों पर रोक जरूर है लेकिन कार्गो उड़ानों पर इसका कोई प्रभाव नही रहेगा. पटना नाउ ब्यूरो रिपोर्ट

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बिहार सरकार ने जनता के लिए खोला दिल, सहायता पैकेज की घोषणा

चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को एक माह के मूल वेतन के समतुल्य प्रोत्साहन राशि के साथ कई अन्य एलान पटना,23 मार्च (ओ पी पांडेय). बिहार सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लागू किये गये लॉकडाउन के दौरान जनता के लिए बड़ा एलान किया है. कोरोना संकट की इस घड़ी में घरों में स्थिर लोगों की धैर्यता को देखते हुए सरकार ने अपने बड़े दिल का परिचय देते हुए सहायता पैकेज का एलान किया है. 1 अणे मार्ग स्थित संकल्प में सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस से उत्पन्न संक्रमण की गंभीर स्थिति की समीक्षा की. समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा तथा मुख्य सचिव दीपक कुमार सहित वरीय अधिकारीगण उपस्थित थे. बैठक में लॉकडाउन के परिपे्रक्ष्य में लोगों को सहायता पैकेज देने के संबंध में निम्न निर्णय लिये गयेः सभी राशन कार्डधारी परिवारों को एक माह का राशन मुफ्त में दिया जायेगा सभी प्रकार के पेंशनधारियों (मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन, दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन) को अगले तीन माह की पेंशन अग्रिम तौर पर तत्काल दी जायेगी. यह राशि उनके खाते में सीधे अंतरित की जायेगी. लॉकडाउन क्षेत्र के सभी नगर निकाय क्षेत्रों एवं प्रखंड मुख्यालय की पंचायत में अवस्थित सभी राषन कार्डधारी परिवारों को एक हजार रूपये प्रति परिवार दिया जायेगा. यह राशि डी0बी0टी0 के माध्यम से उनके खाते में अंतरित की जायेगी. वर्ग 1 से 12 के सभी छात्र/छात्राओं को देय छात्रवृति 31 मार्च 2020 तक उनके खाते में दे दी जायेगी.

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आरा में मुंबई और पुणे से पहुँचे 243 यात्रियों की हुयी जाँच

HOME QUARANTINE की मोहर लगा भेजा गया घर आरा. 22 मार्च को पुणे और मुम्बई से आई विशेष ट्रेन के यात्रियों की पूरी जांच ज़िला प्रशाशन द्वारा कराई गई.. इन दोनों विशेष रेलगाड़ियों से कुल 36+207 =243 व्यक्ति आरा स्टेशन उतरे. सभी की जांच के पश्चात उन्हें HOME QUARANTINE की मोहर लगा कर घर जाने दिया गया. साथ कि अगले 14 दिन तक घर में ही रहने की सलाह दी गयी. सभी यात्रियों का नाम, पूरा पता, मोबाइल का रिकॉर्ड भी बनाया गया है. उक्त दो विशेष ट्रैन के अलावा भी अन्य सभी ट्रेनों से आये व्यक्तियों की भी पूरी जांच की जा रही है. 4 व्यक्ति को बुखार की शिकायत पर observation में रखा गया है. भोजपुर जिला प्रशासन ने भोजपुरवासियों से अपील है कि केवल अतिआवश्यक कार्य पर ही घर से निकालें और घर के अंदर रहते हुए corona वायरस से लड़ने में सहयोग दें. आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट

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कोरोना से बिहार में हुई पहली मौत

मृतक मुंगेर का निवासी,AIIMS ने की मौत की हुई पुष्टि 114 सैम्पलों में दो की आई पॉजिटिव रिपोर्ट, एक की मौत फुलवारी शरीफ, 22 मार्च. बिहार से एक बड़ी खबर आ रही है. पटना में कोरोना से एक व्यक्ति की मौत हो गयी है. दो दिन पहले पटना AIIMS में मुंगेर का एक मरीज किडनी रोग का इलाज कराने आया था, उसकी मौत कोरोना की वजह से हो गयी. AIIMS के चिकित्सकों ने उसे संदिग्ध कोरोना मरीज माना था और आइसोलेशन वार्ड में रख उसका इलाज कर रहे थे. इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गयी. मरीज की मौत के घंटो बाद जब उसकी रिपोर्ट पटना के RMRI से AIIMS पहुंची तब पता चला कि किडनी रोग ग्रस्त मरीज की मौत कोरोना से ही हुई है. सूत्रों की माने तो मुंगेर निवासी किडनी रोगग्रस्त मरीज 38 वर्षीय सैफ अली की मौत कोरोना से हो गयी. कोरोना रोग की पॉजिटिव रिपोर्ट आने के पहले ही उसकी मौत हो गयी थी. इसके बाद उसके परिजन डेड़ बॉडी लेकर अपने गाँव चले गए. सूत्र बताते हैं कि सैफ विदेश में कतर में काम करता था जहां से बीमार होने पर बिहार आया और फिर उसके परिजनो ने उसे AIIMS में भर्ती कराया. पटना AIIMS के निदेशक डॉ प्रभात कुमार सिंह ने कहा कि मुंगेर निवासी एक मरीज किडनी रोग का इलाज कराने आया था जिसे आइसोलेशन वार्ड में रखा गया था. शनिवार की सुबह ही उसकी मौत इलाज के दौरान हो गयी लेकिन उसकी रिपोर्ट RMRI से शनिवार की देर शाम मिली.

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