रघुपति ने भरा पैक्स अध्यक्ष का नामांकन 

आरा. पिरौटा पंचायत के किसानों के समस्याओं के समाधान करने वाले जाप जिलाध्यक्ष और चर्चित समाजिक कार्यकर्ता रघुपति यादव ने पैक्स के चुनाव में भी जोर आजमाने की ठानी है. बताते चलें कि एक पहले भी वे इसके लिए जोर आजमा चुके हैं. लेकिन जंग के लिए दूसरी बार पुनः तैयारी के साथ पिरौटा पैक्स अध्यक्ष पद के लिए मंगलवार को नामांकन पत्र दाखिल किया. समाजिक समस्याओं को सुलझाने वॉर किसानों के कंधा से कंधा मिलाकर उनके दुःख सुख के भागीदार रघुपति बिल्कुल अपने नाम के अनुकूल हैं. उन्होंने नामांकन भरने से पूर्व पिरौंटा पंचायत के किसान बंधुओं से अपील किया कि जिस प्रकार पूर्व में किसानों के हक की लड़ाई लड़ी उसको आगे भी जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि किसानों को जितना सुविधा मिलना चाहिए, उतना सरकार नहीं दे पा रही है जो दुखद है. किसान कड़ी मेहनत करके अपने फसल को तैयार करता है, लेकिन उसका समर्थन मूल्य नहीं मिल पाता है, जिसके कारण किसान के हाल बेहाल है. बताते चलें कि 2 दिन पूर्व ही रघुपति और जाप संरक्षक राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव पटना में मुख्यमंत्री के समक्ष किसानों के लिए प्रदर्शन किया था. उन्होंने अपने अंतिम सांस तक किसानों की लड़ाई लड़ने की बात कही.  यदि सरकार चाहे तो किसानों के हाल सुधर सकता है, लेकिन सरकार के उदासीनता रवैया के चलते आज किसानों के हाल दयनीय है. रघुपति की अगली लड़ाई बिहार सरकार और केंद्र सरकार दोनों से है क्योंकि दोनों सरकार मिलकर किसानों के बारे में सकारात्मक सोच नहीं रखता है, जिससे उनकी

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राजद प्रखण्ड अध्यक्ष का चुनाव सम्पन्न, रफी रिजीवी बने अध्यक्ष

गड़हनी. प्रखंड के गडहनी बाजार अवस्थित निवास यादव के आवास पर शनिवार को राष्ट्रीय जनता दल(राजद) गडहनी प्रखंड के कार्यकर्ताओं की बैठक की गयी.बैठक की अध्यक्षता द्वारिका पाल एवं संचालन देवेंद्र यादव ने किया. बैठक में संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रखण्ड अध्यक्ष की चुनाव के लिए जिला से मनोनित प्रखंड निर्वाचित पदाधिकारी पूर्व जिला पार्षद सीताराम पासवान की उपस्थिति में गडहनी प्रखण्ड राजद अध्यक्ष का चुनाव संपन्न हुआ. प्रखण्ड अध्यक्ष पद के लिये नाम का प्रस्ताव मोहम्मद सलीम उर्फ बबलू ने मोहम्मद रफी रिजवी का नाम प्रस्तावित किया जिसको ले उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से प्रखंड अध्यक्ष पद के लिए रफी रिजीवी को निर्वाचित किया. जिसका समर्थन भिखारी राम के साथ साथ सभी क्रियाशील सदस्यों ने किया. बैठक में मुख्य रूप से निवास यादव,संजय कुमार निराला,विनोद यादव सुअरी दशरथ यादव रुस्तम अंसारी जंगी यादव,रमजानी कुरैसी,विद्या भूषण,मेही लाल यादव, सकल यादव,सुनील कुमार,आफताब आलम,जुबैर आलम, प्रकाश यादव, पिंटू और अरुण यादव सहित पार्टी के सैकड़ो कार्यकर्ता उपस्थित होकर चुनाव को सम्पन्न कराया. गड़हनी से मुरली मनोहर जोशी की रिपोर्ट

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बिहार में दो नावों पर राजनीतिक सवारी का खतरा अपने मुकाम की ओर अग्रसर

पटना (वरिष्ठ पत्रकार अनुभव सिन्हा की कलम से) | बिहार में दो नावों पर राजनीतिक सवारी का खतरा अपने मुकाम की ओर अग्रसर है. बस समय की प्रतीक्षा की जा रही है. यह तब है जब एक तरफ नीतीश कुमार को एनडीए का सीएम भी बताया जा रहा है और दूसरी तरफ उनके रणनीतिकार प्रशांत किशोर अमित शाह को चुनौती दे रहे हैं. घुसपैठ को मुसलमानों से जोड़कर राजनीति की यह कवायद बंगाल में जोर पकड़ेगी जहां 2021 में चुनाव होने वाले हैं और प्रशांत किशोर ममता बनर्जी की चुनावी जीत सुनिश्चित करने की रणनीति तैयार कर रहे है. यह अंदेशा तो पहले से ही था कि नीतीश कुमार अमित शाह के मुकाबले प्रशांत किशोर को प्रोजेक्ट करने में लगे हुए थे. एनआरसी का दूसरी बार जोरदार तरीके से विरोध करके जदयू ने इसे सामने ला दिया है. इससे कांग्रेस को या गैर एनडीए को सियासी खुराक मिलेगी , यह एक बात है जो भाजपा की मुश्किलें बढ़ाने वाली होंगी. राजनीतिक लाइन यही है. तथ्य अपनी जगह कायम है कि अल्पसंख्यक घुसपैठियों और पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान तथा बंगलादेश से प्रताड़ित छह हिन्दू समुदाय के अल्पसंख्यकों को भरतीय नागरिकता प्रदान करने का भाजपा का इरादा सियासी आग में झुलसेगा या तप कर सामने आएगा यह देखना बाकी है. घुसपैठ को सही नही ठहराया जा रहा लेकिन मुसलमानों की वजह से उसे अंतरराष्ट्रीय और मानवाधिकार से जोड़कर बड़ा फलक देने की आधी-अधूरी कोशिश को परवान चढ़ने की तैयारी जरूर है. हालांकि भारत की मौजूदा अंतरराष्ट्रीय छवि और शाख अपनी जगह है जिसकी गहराई

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“अभावों के आर्यभट्ट” डॉ वशिष्ठ की मौत या मारे गए ?

अभावों के आर्यभट्ट डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह को सिस्टम ने पहले ही सुला दी थी “मौत की तीन नींद“ आरा,15 नवम्बर. गणित के महान वैज्ञानिक डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह जिन्होंने न सिर्फ भोजपुर की शान का परचम पूरे विश्व मे लहराया था बल्कि पूरे भारतवर्ष का मान विश्व पटल पर स्थापित किया था. उनकी मौत के बाद सोशल मीडिया पर देश-विदेश के लोगों द्वारा उनको श्रद्धांजलि देने का सिलसिला गुरुवार से ही चालू है. उनकी मौत से आहत छात्र,सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक और साहित्यकार से लेकर पत्रकार तक अपने दर्द को सार्वजनिक साझा कर रहे हैं. दैनिक भास्कर के बक्सर ब्यूरो चीफ मंगलेश कुमार तिवारी ने दिल झकझोरने वाली बातों को बेवाकी से फेसबुक पर पोस्ट किया है. उनकी लेखनी में बातों और तथ्यों का हक्कीकत सचमुच वर्तमान में सोचने पर मजबूर कर देता है कि उनकी मौत कहीं सजिशन हत्या तो नही ? सवाल कई हैं जो हम मनुष्यो की संवेदना पर भी सवाल है.  क्योंकि मौत तो एक बार ही होती है लेकिन डर कर जीना और घूँटन व दर्द में जीना हजारों बार मरना है. मंगलेश तिवारी ने लिखा है कि जीतू कलसरा लिखित शेर ‘मौत को तो यूँ ही बदनाम करते हैं लोग, तकलीफ तो साली ज़िन्दगी अधिक देती है’ महान गणितज्ञ बाबू वशिष्ठ नारायण सिंह पर सटीक बैठती है. क्योंकि उन्होंने मौत से अधिक दुखदाई जिंदगी न सिर्फ देखी है, बल्कि उसे जीया भी हैं। जी हां! आईन्स्टीन के सिद्धांत ई=एमसी स्क़वायर और मैथ में रेयरेस्ट जीनियस कहे जाने वाले गॉस थ्योरी को चुनौती देने वाले

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तरंग महोत्सव में क्या हुआ गड़बड़ कि विजेता ही बन गए विरोधी !

तरंग महोत्सव में गड़बड़ी को लेकर छात्र अड़े, महिला कॉलेज के स्टेज पर अनशन में बैठे छात्र विजेताओं के नाम घोषित लेकिन फिर भी नही मिला प्रमाण, छात्र आयोजन स्थल पर ही रातभर जमे रहे आरा,7 नवम्बर. क्या आपने कभी पुरस्कार मिलने के बाद आयोजन के विरोध मे किसी को अनशन करते देखा है? अगर नही तो अचंभित होने की जरूरत नही. आरा के वीर कुंवर सिंह विवि द्वारा आयोजित आयोजित “तरंग 2019 अंतर महाविद्यालय सांस्कृतिक प्रतियोगिता” में यह मामला सामने आया है. महिला कॉलेज में आयोजित इस प्रतियोगिता में लगभग 27 विधाओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों में से मात्र विवि के 6 कॉलेजों ने भाग लिया. बताते चलें कि VKSU के अंतर्गत कुल 17 सरकारी कॉलेज और 54 अर्द्ध सरकारी कॉलेज हैं. विवि द्वारा आनन-फानन में तो तरंग महोत्सव के लिए दिनाक घोषित कर दिया लेकिन तैयारियां पूरी नही हुई. न तो ढंग का तोरण द्वार बना और न ही मंचीय साज-सज्जा. इतना ही नही छात्रों की माने तो किसी ने प्रतिभागियों के रिफ्रेशमेंट तक की व्यवस्था भी नही की. इसके बावजूद भी प्रतिभागियों ने अपना परफॉर्मेंस दिया. हद्द तो तब हो गई जब प्रतियोगिता समाप्ति के बाद इनामो की घोषणा की गई तो सिर्फ प्रथम आने वाले विजेताओं के नाम ही घोषित किये गए. विजेता द्वितीय और तृतीय नामो की घोषणा सुनने के लिए बैठे रहे लेकिन न तो उन नामो की घोषणा हुई और न ही विजेताओं को मेडल या सर्टिफिकेट ही दिया गया. काफी देर तक इंतजार करने के बाद छात्र भड़क उठे और उन्होंने

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कहाँ गयी बाबू कुँवर सिंह की सुरंग ?

तो क्या किताब के पन्नो तक ही सिमट गई इतिहासकारी सुरंग ? किताबों में पढ़ा, लोगों से सुना,कि कुंवर सिंह ने लड़ा जंग, पर आंखें खोज रही किले तक जाने वाली बाबू वीर कुंवर सिंह का सुरंग Patna now Exclusive report आरा, 20 अक्टूबर. 1857 की क्रांति के नायक वीर बांकुड़ा बाबू कुँवर सिंह को कौन नही जानता. उनका नाम सुनते ही शौर्य से खून में रवानित आ जाती है और किले और वहाँ तक जाने के लिए सुरंग की बातें दिमाग मे घर कर लेती है. लेकिन सुरंग की बात को लेकर ऐसा लगता है कि कहीं ये काल्पनिक बातें तो नही. हालाँकि आरा हाउस में सुरंग की बची-खुची रचनाएं सुरंग होने का प्रमाण तो जरूर देती हैं लेकिन 23 किमी तक लंबे सुरंग का उद्गम और समापन कहाँ तक था इसपर कई तरह के मंतब्य हैं. 2 साल पहले काफी चर्चा में भी यह बात थी कि जब विजयोत्सव की 160वीं वर्षगाँठ मनाई गयी थी कि बाबू कुँवर सिंह की वह सुरंग जगदीशपुर के किले तक बनाया जाएगा जिसे पर्यटकों के लिए खोला जाएगा पर आरा हाउस की घेराबंदी तक कि काम सिमट गया. इतिहास बताता है कि 1857 में उत्तर और मध्य भारत में एक शक्तिशाली जनविद्रोह उठ खड़ा हुआ था जो ब्रिटिश शासन की जड़ें तक हिला कर रख दिया था. कहा जाता है कि इस विद्रोह का प्रमुख केन्द्र दिल्ली, कानपुर लखनऊ ,बरेली, झाँसी और आरा था. दिल्ली में प्रतीक रूप में कहने को विद्रोह के नेता सम्राट बहादुरशाह थे परन्तु वास्तविक नियंत्रण  एक सैनिक

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निर्विरोध फिर पार्टी अध्यक्ष बने नीतीश

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए. नीतीश कुमार निर्विरोध पार्टी के अध्यक्ष निर्वाचित किए गए हैं।

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बीजेपी-जेडीयू की कु’त्ता-बि’ल्ली वाली लड़ाई में….तेजस्वी

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | आरजेडी नेता और बिहार विधान मंडल में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सत्ता पक्ष को जमकर लताड़ लगाईं. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि बीजेपी-जेडीयू की कुत्ता-बिल्ली वाली लड़ाई में राज्यवासियों का भारी नुक़सान हो रहा है. उन्होंने कहा कि दिनदहाड़े जनादेश की ड़कैती कर जनभावना का अपमान करने वाले CM बतावें कि क्या इसी दिन के लिए जनादेश का अपमान कर भाजपा संग बिना नीति, सिद्धांत और विचार की अनैतिक सरकार बनाई थी? इससे बिहार को क्या फ़ायदा हुआ? प्रतिदिन बिहारवासी आपके अनैतिक कुर्सी प्रेम की सज़ा भुगत रहे है. अब आप जनता की अंतरात्मा की आवाज़ सुनिए.

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असंगठित कामगारों के बेहतरी के लिए कांग्रेस पार्टी बेहद गम्भीर – वीरेंद्र सिंह राठौर

पटना (ब्यूरो) | रविवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय सदाक़त आश्रम में बिहार प्रदेश असंगठित कामगार कांग्रेस के राज्य कार्यकारिणी एवं ज़िला अध्यक्षों की बैठक सम्पन्न हुई. इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सचिव व बिहार प्रभारी वीरेंद्र सिंह राठौर एवं प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डाo मदन मोहन झा के साथ असंगठित कामगार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरबिंद सिंह, संगठन के मध्य भारत प्रभारी डा. अजय उपाध्याय, असंगठित कामगार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश गुरनानी उपस्थित रहें. बैठक के मुख्य अतिथि वीरेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि असंगठित कामगारों के बेहतरी के लिए कांग्रेस पार्टी बेहद गम्भीर है. उन्होंने कहा कि संगठन का मुख्य उद्देश्य असंगठित कामगारों तक केन्द्र सरकार के श्रम क़ानूनों में हो रहे बदलाव की सूचनाएँ पहुँचाना और कामगारों के बेहतरी के लिए काम करना है. वर्तमान सरकार में असंगठित क्षेत्र के कामगारों द्वारा जो कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, उससे किस प्रकार निबटा जाएँ, इस पर संगठन को विशेष ज़ोर देना होगा. बैठक को सम्बोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा मदन मोहन झा ने कहा कि बिहार में असंगठित कामगारों की स्थिति बेहद दयनीय होने का कारण राज्य सरकार की ग़लत नीतियाँ हैं. ग़रीब विरोधी नीतीश-भाजपा सरकार मज़दूरों की बात करना तो दूर उनके मुँह से निवाला छिनने को आतुर हैं. इसबार के चुनाव में आम ग़रीब मज़दूर वर्ग इन्हें ज़रूर सबक़ सिखाएगी.वही असंगठित कामगार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरबिंद सिंह ने राज्य में वेण्डिंग एक्ट २०१४ के पूर्णतः अनुपालन, वेण्डिंग ज़ोन बनाने और फुटफाथी दुकानदारों के लिए मार्केटिंग समितियाँ बनाने

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सदस्यता दिलाये और विरोधी के पास भी जाए – नमिता

पटना (आमोद कुमार) | बाढ़ विधानसभा की राजद नेत्री सह बिहार प्रदेश महासचिव (महिला) नमिता नीरज सिंह ने पटना जिला राष्ट्रीय जनता दल का सदस्यता अभियान की समीक्षात्मक बैठक में शिरकत की एवं कार्यकर्ताओं से घर घर जाकर लोगों को सदस्यता दिलाने की अपील की. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कार्यकर्ता अपने समर्थकों को सदस्यता दिलाने के साथ-साथ अपने विरोधी के पास भी जाए और उन्हें राजद की नीतियों से अवगत कराएं ताकि अधिक से अधिक लोग राजद से जुड़ सकें और आगामी 2020 विधानसभा चुनाव में बिहार में राजद की सरकार बने. उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पटना जिला प्रभारी रामबली चंद्रवंशी, देवमुनि यादव, पटना जिला अध्यक्ष आभा लता, सुरेंद्र कुमार यादव, प्रदेश अध्यक्ष पंचायती राज प्रकोष्ठ सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.

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