हे सरकार, सुनो तेजस्वी की पुकार

वक़्त की दरकार, जनहित में हमारी पुकार:- अधिक से अधिक जाँच केंद्र स्थापित करे बिहार सरकार. पहले कम से कम हर प्रमंडल और फिर ज़िला में जाँच केंद्र हो. हॉट स्पॉट्स पर अधिक से अधिक लोगों का टेस्ट किया जाए. रैंडम टेस्ट किए जाए. स्वास्थ्यकर्मियों को पर्याप्त जाँच व सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए सरकार जांच केंद्रों में तत्काल सारी सुविधा पहुँचे. पर्याप्त वेंटीलेटर की व्यवस्था हो. किसानों को क्षतिग्रस्त फ़सल का मुआवज़ा यथाशीघ्र मिले तीन माह के बिजली बिल माफ़ हो छात्रों की तीन माह की फ़ीस माफ़ हो ग़ैर-राशन कार्डधारियों को भी आर्थिक सहायता मिले प्रवासी कामगारों तक राशन-भोजन की व्यवस्था हो बेरोज़गारों को विशेष आर्थिक सहायता भत्ता मिले जनप्रतिनिधियों के अलावा उच्च अधिकारियों के वेतन में भी कटौती हो ग़रीबों और प्रवासी मज़दूरों के राशन एवं राशि भुगतान में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हो प्राथमिकता पर इसमें पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए.

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नहीं रहे बिहार के पूर्व मंत्री

पूर्व मंत्री उपेन्द्र प्रसाद वर्मा का निधन (पीपी) बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और जमालपुर विधान सभा के पूर्व विधायक उपेन्द्र प्रसाद वर्मा का 72 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. पटना के उमा हॉस्पीटल में उनका इलाज चल रहा था. 1980 से वर्ष 2005 तक यानी 25 वर्षों तक वे लगातार जमालपुर के विधायक रहे. तीन बार वे लालू प्रसाद की सरकार में मंत्री रहे. वित्त और श्रम विभाग उन्हें मिला था. मुंगेर से 2019 में लोक सभा का चुनाव भी उन्होंने लड़ा पर हार गए. 2005 में शैलेश कुमार ने विधान सभा चुनाव में उनको हरा दिया था. वे एक बार फिर जमालपुर से चुनाव लड़ना चाहते थे और इसकी तैयारी में जुट गए थे.दो साल पहले उनके हार्ट की बायपास सर्जरी हुई थी.

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केन्द्र की राह चले नीतीश

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी केंद्र की राह पर चलते नजर आ रहे हैं. बुधवार को बिहार कैबिनेट की बैठक में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री समेत तमाम विधायकों और विधान पार्षदों के वेतन में 15 फ़ीसदी कटौती की घोषणा की है. बिहार कैबिनेट ने एक साल के लिए मंत्री और विधायकों के वेतन में कटौती का फैसला लिया. इसके तहत एक साल तक बिहार के सभी विधायकों और मंत्रियों के वेतन में 15 फीसदी की कटौती की जाएगी. पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में सरकार ने कुल 29 फैसले लिए. बिहार के मंत्रियों व विधायकों के वेतन को कोरोना उन्‍मूलन कोष में दिया जाएगा. बता दें कि बिहार में नीतीश सरकार ने कोरोना उन्‍मूलन कोष का गठन किया गया है. इसमें सांसदों, विधायकों व विधान पार्षदों से 50-50 लाख देने का अनुरोध किया गया था. बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय कैबिनेट से मुहर लगवा कर सभी सांसदों के वेतन में 1 साल के लिए 30 फ़ीसदी की कटौती कर दी थी.

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बिहार में कोरोना पॉजिटिव केस बढ़े

बिहार में मंगलवार को 6 और लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए सरकार की परिस्थितियों पर पैनी नजर, लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है:- मुख्यमंत्री राज्य में जरूरी सामानों की कोई कमी नहीं है, लोगों को खाद्य सामग्री एवं जरूरी चीजें उपलब्ध होती रहेंगी। लाॅकडाउन के कारण बिहार के बाहर फंसे लोगों की हर सुविधाओं का ख्याल रखा जा रहा है बिहार में आज कुल कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़कर 38 तक पहुंच गई है. 6 अप्रैल तक बिहार में कुल 32 कोरोना पॉजिटिव थे. स्वास्थ्य सचिव संजय कुमार ने बताया कि मंगलवार को सीवान से चार और दो लोग बेगूसराय में कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. हालांकि 38 में से अब तक 15 मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं. इन सबके बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को 1, अणे मार्ग में कोरोना संक्रमण से निपटने के लिये उठाये जा रहे कदमों की अद्यतन स्थिति की मुख्य सचिव एवं अन्य वरीय अधिकारियों के साथ गहन समीक्षा की. समीक्षा के क्रम में राज्य में दवाओं, मास्क और अन्य जरूरी इक्यूपमेंट्स की उपलब्धता के संबंध में जानकारी दी गयी. संक्रमित लोगों के इलाज के लिये जरूरी कदम उठाये गये हैं, उनकी उचित देखभाल की जा रही है. कोरोना संदिग्धों की अधिक से अधिक टेस्टिंग करायी जा रही है.संदिग्ध लोगों की स्क्रीनिंग तेजी से करायी जा रही है.समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देेेश देते हुये कहा कि दवाओं, मास्क और अन्य जरूरी इक्यूपमेंट्स की उपलब्धता सुनिष्चित करायी जाय और यह ध्यान रखा जाय कि इसकी कमी न हो.

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बड़ा फैसला: 1 साल तक 30%वेतन दान करेंगे सांसद

कोरोनावायरस ने ना सिर्फ इंसानी शरीर बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था को भी करारी चोट दी है. भारत भी ऐसे देशों में से एक है जहां 21 दिनों के लॉक डाउन के कारण अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है. इन सब को देखते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने आज एक बड़ा फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी कैबिनेट मंत्रियों और सांसदों की वेतन में 30 फीसदी की कटौती की गई है और यह कटौती एक साल तक की जाएगी. देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और कई राज्यों के राज्यपाल ने स्वेच्छा से सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में वेतन कटौती का फैसला किया है. यह धनराशि भारत के समेकित कोष में जाएगी. फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कैबिनेट ने भारत में कोरोना वायरस के प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन के लिए 2020-21 और 2021-22 के लिए सांसदों को मिलने वाली निधि यानी MPLAD फंड को अस्थाई तौर पर निलंबित कर दिया है. दो साल के लिए MPLAD फंड के 7900 करोड़ रुपये का उपयोग भारत की संचित निधि में किया जाएगा.

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ध्यान से पढ़ें और सुनें, पीएम का ये संबोधन

प्रधानमंत्री का राष्ट्र  के नाम संबोधन नमस्कार ! मेरे प्यारे देशवासियों, मैं आज एक बार फिर, कोरोना वैश्विक महामारी पर बात करने के लिए आपके बीच आया हूं। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का जो संकल्प हमने लिया था, एक राष्ट्र के नाते उसकी सिद्धि के लिए हर भारतवासी ने पूरी संवेदनशीलता के साथ, पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना योगदान दिया। बच्चे-बुजुर्ग, छोटे-बड़े, गरीब-मध्यम वर्ग-उच्च वर्ग, हर कोई परीक्षा की इस घड़ी में साथ आया। जनता कर्फ्यू को हर भारतवासी ने सफल बनाया। एक दिन के जनता कर्फ़्यू से भारत ने दिखा दिया कि जब देश पर संकट आता है, जब मानवता पर संकट आता है तो किस प्रकार से हम सभी भारतीय मिलकर, एकजुट होकर उसका मुकाबला करते हैं। आप सभी जनता कर्फ़्यू के लिए प्रशंसा के पात्र हैं। साथियों, आप कोरोना वैश्विक महामारी पर पूरी दुनिया की स्थिति को समाचारों के माध्यम से सुन भी रहे हैं और देख भी रहे हैं। आप ये भी देख रहे हैं कि दुनिया के समर्थ से समर्थ देशों को भी कैसे इस महामारी ने बिल्कुल बेबस कर दिया है। ऐसा नहीं है कि ये देश प्रयास नहीं कर रहे हैं या उनके पास संसाधनों की कमी है। लेकिन कोरोना वायरस इतनी तेजी से फैल रहा है कि तमाम तैयारियों और प्रयासों के बावजूद, इन देशों में ये चुनौती बढ़ती जा रही है। इन सभी देशों के दो महीनों के अध्ययन से जो निष्कर्ष निकल रहा है, और एक्सपर्ट्स भी यही कह रहे हैं कि कोरोना से प्रभावी मुकाबले के लिए एकमात्र विकल्प है- Social Distancing. यानि एक दूसरे से दूर रहना, अपने घरों में ही बंद रहना। कोरोना से बचने का इसके अलावा कोई तरीका नहीं है, कोई रास्ता नहीं है। कोरोना को फैलने से रोकना है, तो इसके संक्रमण की सायकिल को तोड़ना ही होगा। कुछ लोग इस गलतफहमी में हैं कि social distancing केवल बीमार लोगों के लिए आवश्यक है। ये सोचना सही नहीं। social distancing हर नागरिक के लिए है, हर परिवार के लिए है, परिवार के हर सदस्य के लिए है। कुछ लोगों की लापरवाही, कुछ लोगों की गलत सोच,  आपको, आपके बच्चों को, आपके माता पिता को, आपके परिवार को, आपके दोस्तों को, पूरे देश को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देगी। अगर ऐसी लापरवाही जारी रही तो भारत को इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। साथियों, पिछले 2 दिनों से देश के अनेक भागों में लॉकडाउन कर दिया गया है। राज्य सरकार के इन प्रयासों को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। हेल्थ सेक्टर के एक्सपर्ट्स और अन्य देशों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए, देश आज एक महत्वपूर्ण निर्णय करने जा रहा है। आज रात 12 बजे से पूरे देश में, ध्यान से सुनिएगा, पूरे देश में, आज रात 12 बजे से पूरे देश में, संपूर्ण Lockdown होने जा रहा है। हिंदुस्तान को बचाने के लिए, हिंदुस्तान के हर नागरिक को बचाने के लिए आज रात 12 बजे से, घरों से बाहर निकलने पर, पूरी तरह पाबंदी लगाई जा रही है। देश के हर राज्य को, हर केंद्र शासित प्रदेश को, हर जिले, हर गांव, हर कस्बे, हर गली-मोहल्ले को अब लॉकडाउन किया जा रहा है। ये एक तरह से कर्फ्यू ही है। जनता कर्फ्यू से भी कुछ कदम आगे की बात, जनता कर्फ्यू से और सख्त। कोरोना महामारी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए ये कदम अब बहुत आवश्यक है। निश्चित तौर पर इस लॉकडाउन की एक आर्थिक कीमत देश को उठानी पड़ेगी। लेकिन एक-एक भारतीय के जीवन को बचाना इस समय मेरी, भारत सरकार की, देश की हर राज्य सरकार की, हर स्थानीय निकाय की, सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसलिए मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप इस समय देश में जहां भी हैं, वहीं रहें। अभी के हालात को देखते हुए, देश में ये लॉकडाउन 21 दिन का होगा। आने वाले 21 दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो, कोरोना वायरस की संक्रमण सायकिल तोड़ने के लिए कम से कम 21 दिन का समय बहुत अहम है। अगर ये 21 दिन नहीं संभले तो देश और आपका परिवार 21 साल पीछे चला जाएगा। अगर ये 21 दिन नहीं संभले तो कई परिवार हमेशा-हमेशा के लिए तबाह हो जाएंगे। इसलिए बाहर निकलना क्या होता है, ये इन 21 दिनों के लिए भूल जाइए। घर में रहें, घर में रहें और एक ही काम करें कि अपने घर में रहें। साथियों, आज के फैसले ने, देशव्यापी लॉकडाउन ने आपके घर के दरवाजे पर एक लक्ष्मण रेखा खींच दी है। आपको ये याद रखना है कि घर से बाहर पड़ने वाला आपका सिर्फ एक कदम, कोरोना जैसी गंभीर महामारी को आपके घर ला सकता है। आपको ये याद रखना है कि कई बार कोरोना से संक्रमित व्यक्ति शुरुआत में बिल्कुल स्वस्थ लगता है, वो संक्रमित है इसका पता ही नहीं चलता। इसलिए ऐहतियात बरतिए, अपने घरों में रहिए। वैसे, जो लोग घर में हैं, वो सोशल मीडिया पर नए-नए तरीकों से, बहुत इनोवेटिव तरीके से इस बात को बता रहे हैं। एक बैनर मुझ भी पसंद आया है। ये मैं आपको भी दिखाना चाहता हूं। कोरोना यानि कोई रोड पर ना निकले। साथियों, एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है कि आज अगर किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस पहुंचता है तो उसके शरीर में इसके लक्षण दिखने में कई–कई दिन लग जाते हैं। इस दौरान वो जाने–अनजाने हर उस व्यक्ति को संक्रमित कर देता है जो उसके संपर्क में आता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट बताती है कि इस महामारी से संक्रमित एक व्यक्ति सिर्फ हफ्ते–दस दिन में सैकड़ों लोगों तक इस बीमारी को पहुंचा सकता है। यानि ये आग की तरह तेज़ी से फैलता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन का ही एक और आंकड़ा बहुत महत्वपूर्ण है। साथियों, दुनिया में कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्तियों की संख्या को पहले 1 लाख तक पहुंचने में 67 दिन लगे थे। इसके बाद सिर्फ 11 दिन में ही एक लाख नए लोग संक्रमित हो गए। सोचिए, पहले एक लाख लोग संक्रमित होने में 67 दिन लगे और फिर इसे 2 लाख लोगों तक पहुंचने में सिर्फ 11 दिन लगे। ये और भी भयावह है कि दो लाख संक्रमित लोगों से तीन लाख लोगों तक ये बीमारी पहुंचने में सिर्फ चार दिन लगे। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कोरोना वायरस कितनी तेजी से फैलता है। और जब ये फैलना शुरू करता है, तो इसे रोकना बहुत मुश्किल होता है। साथियों, यही वजह है कि चीन, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली-ईरान जैसे देशों में जब कोरोना वायरस ने फैलना शुरू किया, तो हालात बेकाबू हो गए। और ये भी याद रखिए, इटली हो या अमेरिका, इन देशों की स्वास्थ्य सेवा, पूरी दुनिया में बेहतरीन मानी जाती है। बावजूद इसके, ये देश कोरोना का प्रभाव कम नहीं कर पाए। सवाल ये कि इस स्थिति में उम्मीद की किरण कहां है? उपाय क्या है, विकल्प क्या है? साथियों, कोरोना से निपटने के लिए उम्मीद की किरण, उन देशों से मिले अनुभव हैं जो कोरोना को कुछ हद तक नियंत्रित कर पाए। हप्तों तक इन देशों के नागरिक घरों से बाहर नहीं निकले, इन देशों के नागरिकों ने शत-प्रतिशत सरकारी निर्देशों का पालन किया और इसलिए ये कुछ देश अब इस महामारी से बाहर आने की ओर बढ़ रहे हैं। हमें भी ये मानकर चलना चाहिए कि हमारे सामने यही एक मार्ग है- हमें घर से बाहर नहीं निकलना है। चाहे जो हो जाए, घर में ही रहना है। कोरोना से तभी बचा जा सकता है जब घर की लक्ष्मण रेखा न लांघी जाए। हमें इस महामारी के वायरस का संक्रमण रोकना है, इसके फैलने की चेन को तोड़ना है। साथियों, भारत आज उस स्टेज पर है जहां हमारे आज के एक्शन तय करेंगे कि इस बड़ी आपदा के प्रभाव को हम कितना कम कर सकते हैं। ये समय हमारे संकल्प को बार-बार मजबूत करने का है। ये समय कदम-कदम पर संयम बरतने का है। आपको याद रखना है- जान है तो जहान है। साथियों, ये धैर्य और अनुशासन की घड़ी है। जब तक देश में lockdown की स्थिति है, हमें अपना संकल्प निभाना है, अपना वचन निभाना है। मेरी आपसे प्रार्थना है कि घरोंमें रहते हुए आप उन लोगों के बारे में सोचिए, उनके लिए मंगलकामना करिए जो अपना कर्तव्य निभाने के लिए, खुद को खतरे में डालकर काम कर रहे हैं। उन डॉक्टर्स, उन नर्सेस, पैरा-मेडिकल स्टाफ, pathologists के बारे में सोचिए, जो इस महामारी से एक-एक जीवन को बचाने के लिए, दिन रात अस्पताल में काम कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन के लोग, एंबुलेंस चलाने वाले ड्राइवर, ward boys, उन सफाई कर्मचारियों के बारे में सोचिए जो इन कठिन परिस्थितियों में दूसरों की सेवा कर रहे हैं। आप उन लोगों के लिए प्रार्थना करिए जो आपकी सोसायटी, आपके मोहल्लों, आपकी सड़कों, सार्वजनिक स्थानों को sanitize करने के काम में जुटे हैं, जिससे इस वायरस का नामो-निशान न रहे। आपको सही जानकारी देने के लिए 24 घंटे काम कर रहे मीडिया के लोगों के बारे में भी सोचिए, जो संक्रमण का खतरा उठाकर सड़कों पर हैं, अस्पतालों में हैं। आप अपने आस पास के पुलिस कर्मियों के बारे में सोचिए जो अपने घर परिवार की चिंता किए बिना, आपको बचाने के लिए दिन रात duty कर रहे हैं, और कई बार कुछ लोगों का गुस्सा भी झेल रहे हैं। साथियों, कोरोना वैश्विक महामारी से बनी स्थितियों के बीच, केंद्र और देशभर की राज्य सरकारें तेजी से काम कर रही है। रोजमर्रा की जिंदगी में लोगों को असुविधा न हो, इसके लिए निरंतर कोशिश कर रही हैं। सभी आवश्यक वस्तुओं की supply बनी रहे, इसके लिए सभी उपाय किए गए हैं और आगे भी किए जाएँगे। निश्चित तौर पर संकट की ये घड़ी, गरीबों के लिए भी बहुत मुश्किल वक्त लेकर आई है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के साथ समाज के अन्य संगठन, सिविल सोसायटी के लोग, गरीबों को मुसीबत कम हो, इसके लिए निरंतर जुटे हुए हैं। गरीबों की मदद के लिए अनेकों लोग साथ आ रहे हैं। साथियों, जीवन जीने के लिए जो जरूरी है, उसके लिए सारे प्रयासों के साथ ही जीवन बचाने के लिए जो जरूरी है, उसे सर्वोच्च प्राथमिकता देनी ही पड़ेगी। इस नई महामारी से मुकाबला करने के लिए देश की स्वास्थ्य सुविधाओं को तैयार करने का काम केंद्र सरकार लगातार कर रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, भारत के बड़े चिकित्सा और अनुसंधान संस्थानों तथा स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह और सुझाव पर कार्य करते हुए सरकार ने निरंतर फैसले लिए हैं। अब कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए, देश के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने आज 15 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इससे कोरोना से जुड़ी टेस्टिंग फेसिलिटीज, पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्वीपमेंट्स, Isolation Beds, ICU beds, ventilators, और अन्य जरूरी साधनों की संख्या तेजी से बढ़ाई जाएगी। साथ ही मेडिकल और पैरामेडिकल मैनपावर की ट्रेनिंग का काम भी किया जाएगा। मैंने राज्य सरकारों से अनुरोध किया है कि इस समय उनकी पहली प्राथमिकता, सिर्फ और सिर्फ स्वास्थ्य सेवाएं ही होनी चाहिए, हेल्थ केयर ही प्राथमिकता होनी चाहिए। मुझे संतोष है कि देश का प्राइवेट सेक्टर भी पूरी तरह से कंधे से कंधा मिलाकर संकट और संक्रमण की इस घड़ी में देशवासियों के साथ खड़ा है। प्राइवेट लैब्स, प्राइवेट अस्पताल, सभी इस चुनौतीपूर्ण दौर में सरकार के साथ काम करने के लिए आगे आ रहे हैं। लेकिन साथियों, ये भी ध्यान रखिए कि ऐसे समय में जाने-अनजाने कई बार अफवाहें भी फैलती हैं। मेरा आपसे आग्रह है कि किसी भी तरह की अफवाह और अंधविश्वास से बचें। आपके द्वारा केंद्र सरकार, राज्य सरकार और medical fraternity द्वारा दिए गए निर्देश और सुझावों का पालन करना बहुत जरुरी है। मेरी आपसे प्रार्थना है कि इस बीमारी के लक्षणों के दौरान, बिना डॉक्टरों की सलाह के, कोई भी दवा न लें। किसी भी तरह का खिलवाड़, आपके जीवन को और खतरे में डाल सकता है। साथियों, मुझे विश्वास है हर भारतीय संकट की इस घड़ी में सरकार के, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करेगा। 21 दिन का लॉकडाउन, लंबा समय है, लेकिन आपके जीवन की रक्षा के लिए, आपके परिवार की रक्षा के लिए, उतना ही महत्वपूर्ण है। मुझे विश्वास है, हर हिंदुस्तानी इस संकट का न सिर्फ सफलता से मुकाबला करेगा बल्कि इस मुश्किल घड़ी से विजयी होकर निकलेगा। आप अपना ध्यान रखिए, अपनों का ध्यान रखिए। जय हिंद !

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दिल्ली सरकार पर क्यों भड़के बिहार के श्रम मंत्री

बिहार के श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि लॉकडाउन को फेल करने की साजिश करने वाले देश के दुश्मन बिहार और यूपी के लोगों में अफवाह और भ्रम की स्थिति पैदा कर वापस जाने के लिए विवश कर रहे हैं. दिल्ली किसी की जागीर नहीं है लेकिन कुछ लोग अपनी गंदी राजनीति से इस लॉकडाउन को फेल कर भारत को इटली और इरान बनाना चाहतें हैं. दिल्ली सरकार और वहाँ के सामाजिक संगठन से करबद्ध प्रार्थना करते हुए आग्रह किया है कि सब लोग मानवता के हित में सहयोग करें और चालाक बनकर अफवाह और भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर मानवता को शर्मसार करने के बजाय एक चालक बनकर इस विपदा की घड़ी से उबरने के लिए सबकी जिन्दगी को सुरक्षित और स्वस्थ्य रखने के संकल्प को सिद्धि तक पहुँचाने का कार्य करने में सहयोग करें. पूरे विश्व को भारत से उम्मीद है लेकिन कुछ राष्ट्र के गद्दार माँ भारती के संतानों को पीड़ित करने का षड्यंत्र कर अपनी गंदी राजनीति को सिद्ध करना चाहतें हैं किन्तु ये उनकी नैतिक हार है और ऐसे लोग को राज्य के जवाबदेह पद पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है.  मंत्री ने सभी सांसदों से आग्रह किया है कि दिल्ली में विद्यालय, कम्यूनिटी हॉल एवं अन्य बडे़ स्थानों में सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए रहने, खाने की व्यवस्था कर भगदड़ की स्थिति को संभाले. मानवीय आधार पर भी हमारी जिम्मेदारी है कि पूरे राष्ट्र के गरीबों के हित में खड़ा होना है ताकि कोई भूख से न मरे

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सैनिटाइजर की कमी और कालाबाजारी पर बोले तेजस्वी

पटना,26 मार्च. इधर पूर्व डिप्टी CM, नेता प्रतिपक्ष, बिहार विधानसभा तेजस्वी यादव ने राज्य में हैंड सेनिटाइज़र की भारी क़िल्लत, कालाबाज़ारी और बढ़ती क़ीमतों को देखते हुए बिहार सरकार से सैनिटाइजर बनाने के सुझाव दिए हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से मदद नहीं मिलने की स्थिति में बिहार सरकार को राज्य में बंद पड़ी अल्कोहल फैक्ट्रियों अथवा डिस्टलरी को अपनी निगरानी में लेकर अथवा हैंड सेनिटाइज़र बनाने वाली कंपनियों से एमओयू कर इसका उत्पादन युद्ध स्तर पर शुरू करना चाहिए ताकि स्वास्थ्य कर्मियों, डॉक्टरों और इसका प्रयोग करने वाली आम जनता को यह कम क़ीमत पर आसानी से मिल सके. ऐसी असाधारण परिस्थितियों में जनहित में असाधारण फ़ैसले भी लेने चाहिए. तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार भर के अस्पतालों के स्वास्थ्यकर्मी और डॉक्टर खुलकर हैंड सेनिटाइज़र, मास्क, पीपीई और दूसरे उपकरणों की कमी के बारे में बता रहे है और यथाशीघ्र उसकी उपलब्धता की भी माँग कर रहे है. उन्होंने कहा कि बिहार सरकार जनहित में राज्य की चीनी मिलों को हैंड सेनिटाइज़र उत्पादकों को बनाने के लिए एथनॉल उत्पादन, एथिल अल्कोहल की निरंतर सप्लाई का भी निर्देश दे सकती है. पटना नाउ ब्यूरो की रिपोर्ट

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केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कोरोना के खिलाफ लड़ाई हम अवश्य जीतेंगे

पटना,26 मार्च. वैश्विक महामारी कोरोना को ले अपने संदेश में  केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना को हम सभी संकल्प व संयम के साथ हराएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो आह्वान किया है, उसका अक्षरश : पालन करते हुए घर में ही रहेंगे. अपने और अपने परिवार जनों को सुरक्षित रखेंगे. 21 दिनों की लक्ष्मण रेखा को पार नही करने के संकल्प को हम सबको पूरा करना है. हम सभी को सुरक्षित और स्वस्थ रहना है. उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों से लेकर दवाइयों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए पैनिक होने की जरूरत नहीं है. इसकी देश में कमी नहीं है. सरकार सभी का भरपूर ख्याल रख रही है.  स्लम , गांव या  शहर सभी जगह विशेष ध्यान सरकार द्वारा रखा जा रहा है. आपसे विनती है कि आप सभी केंद्र एवं राज्य सरकारों के दिशा निर्देशों का पालन करें. कोरोना के खिलाफ हम सभी इस जंग को हर हाल में जीत लेंगे.

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तेजस्वी का तेज पहल : एक माह की सैलरी के साथ अपने आवास को जाँच केंद्र बनाने के लिए कहा

पटना, 24 मार्च. पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कोरोना से आई आफत के इस घड़ी में अपनी दरियादिली दिखाते हुए एक जिम्मेदार नागरिक का भी परिचय दिया है. उन्होंने वर्तमान सरकार से कहा है कि अगर सरकार चाहे तो कोरोना से लड़ने में नेता प्रतिपक्ष के नाते आवंटित आवास का isolation, जाँच केंद्र या क्वारंटाइन के लिए इस्तेमाल कर सकती है. तेजस्वी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में एक माह की सैलरी देने का किया ऐलान. कोरोना से लड़ेंगे, मिलकर उसे हराएँगे, बिहार को सुरक्षित बनाएँगे. तेजस्वी ने कहा इस कठिन घड़ी में सभी सामर्थ्यवान राज्यवासी ज़िम्मेदारी से अपना-अपना कर्तव्य निभाएँ. साथ ही बिहारवासियों के जीवन सुरक्षा का ज़िम्मा लें. जितना बन सके, उतना करें. मास्क, हैंड सैनिटाइजर और ज़रूरी वस्तुओं की कालाबाज़ारी ना करे.

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