एक को जानो, एक को मानो, एक हो जाओ – निरंकारी मिशन

परोपकार ही पूण्य हैं:-नवल नववर्ष पर गड़हनी में सत्संग का आयोजन गड़हनी. गडहनी में बुधवार को नव वर्ष के मौके पर रामदहिन मिश्र उच्च विद्यालय का साफ-सफाई के साथ-साथ जिलास्तरीय निरंकारी संत समागम का आयोजन किया गया था. सत्संग की अध्यक्षता पटना क्षेत्र के क्षेत्रीय संचालक नवल किशोर सिंह व संचालन चरपोखरी शाखा के मुखी महात्मा शिवकुमार शर्मा ने की. निरंकारी संत समागम में पीरो, चरपोखरी,जितौरा,भकुरा, आरा,सहित आसपास के जिला के विभिन्न संत महात्माओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. गडहनी में निरंकारी मिशन का एक अलग ही पहचान है. गडहनी के साथ-साथ पूरे विश्व में भी निरंकारी मिशन विख्यात है. अध्यक्षता कर रहे नवल किशोर ने बताया कि संत निरंकारी मिशन आपसी भाईचारा एवं शांति का संदेश देता है. मिशन का उद्देश्य है कि मानव का कद्र दिल से करें ताकि मानवता जो है वह खिल उठे साथी ही परमात्मा को सतगुरु के द्वारा जाना जा सकता हैं. साथ ही परोपकार ही पुण्य का रास्ता हैं. यह शरीर नश्वर है और इसे मिट्टी में ही मिल जाना है. बैठा पंडित पढ़े पुराण, बिन देखे का करे बखान, तू कहे कागज़ की लेखी, मैं कहू आँखन की देखी ‘ कि मतलब जो ये पढ़ने-लिखने का ही सिलसिला है, जो वो सिर्फ वही तक सीमित है, एक जिसने ये ज्ञान की नज़र नही प्राप्त करी, उसके लिये तो सिर्फ वो अक्षर सिर्फ अक्षर तक ही रह जाते है,पर जिस तरह की वो कह रहे है, तू कहे कागज़ की लेखी- कि कागज़ में जो लिखा है तू तो वो ही बता रहा

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स्वामी रामनरेशाचार्य जी महाराज का पांच दिवसीय पटना प्रवास

पटना (प०ना० रिपोर्ट) | रामानंद संप्रदाय के प्रधान आचार्य स्वामी रामनरेशाचार्य जी महाराज पांच दिवसीय प्रवास पर 4 दिसम्बर को पटना आ रहे हैं. वे 5 दिसम्बर से राजधानी के राजेन्द्र नगर में सनातनी श्रद्धालुओं को संबोधित करेंगे. स्वामीजी के सत्संग की तैयारियां अंतिम चरण में है. जगदगुरु रामानंदाचार्य पद प्रतिष्ठित स्वामी रामनरेशाचार्य रामानंदी वैष्णवों की मूल आचार्यपीठ श्रीमठ, पंचगंगा घाट, काशी के वर्तमान पीठाधीश्वर हैं. इस पीठ को सगुण और निर्गुण रामभक्ति परंपरा और रामानंद संप्रदाय का मूल गादी होने का गौरव प्राप्त है. रामानंदाचार्य आध्यात्मिक मंडल, बिहार से जुड़े सतेन्द्र पांडेय के मुताबिक स्वामीजी का पटना प्रवास रामभाव प्रसार यात्रा के तहत हो रहा है. इसके निमित्त वे वैष्णव विश्व दर्शन फाउंडेशन के सभागार में निवास करेंगे तो राजेन्द्र नगर में गणपति उत्सव के सामने है. राजधानी के भक्त सुबह में आचार्यश्री का दर्शन, पूजन करेंगे. दोपहर में भंडारा होगा और सायं चार बजे से सत्संग का आयोजन होगा, जिसमें जगदगुरु रामानंदाचार्य के प्रवचनों का लाभ श्रद्धालु ले पाएंगे. रामालय ट्रस्ट के संयोजक हैं रामनरेशाचार्यजगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्य रामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर बनाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हराव की पहल पर गठित रामालय ट्रस्ट के संयोजक रहे हैं. उस ट्रस्ट में द्वारा पीठ और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती और श्रृंगेरी पीठ शंकराचार्य स्वामी भारती तीर्थ जी भी थे. रामनरेशाचार्य जी ने राममंदिर आंदोलन से आम जन को जोड़ने के लिए देशव्यापी यात्राएं की थी. रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए बने रामजन्मभूमि न्यास के पहले अध्यक्ष शिवरामाचार्य थे, जो इनसे पहले श्रीमठ के पीठाधीश्वर थे.

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देव-दीपावली के मौके पर जगमगाया गड़हनी

गड़हनी. भारतीय संस्कृति में कार्तिक पूर्णिमा स्नान का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है इस दिन कई धार्मिक आयोजन पवित्र नदी में स्नान पूजन और कर्म दिनचारी का विधान वर्ष के 12 मास में कार्तिक मास आध्यात्मिक एवं शारीरिक ऊर्जा संचय के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है जिले के गड़हनी प्रखंड के गड़हनी बनास नदी घाट का नजारा इस कार्तिक पूर्णिमा की शाम बिल्कुल ही अलग देखने को मिली गाँव के  युवाओं की टोली ने बनास नदी घाट पर हजारों दीप प्रज्वलित कर समाज को आइना दिखाने का काम किया है  कि अब अपना पंचायत गड़हनी ना सिर्फ खुले में शौच मुक्त होगा बल्कि इस घाट पर प्रत्येक पूर्णिमा को गड़हनी के उन सभी  घरों से लोग दिए जलाने का काम किये जो छठ पूजा किया करते हैं बता दें कि गड़हनी नया बाजार से पुरानी बाजार जाने के क्रम में पडने वाले बनास नदी के घाट  पर लोग खुले में शौच करके गंदगी फैलाने का काम करते थे जब गड़हनी के युवाओं सक्रिय हुए तो खुलकर आगे आए और सुबह शाम निगरानी करना शुरू किया। निगरानी ऐसी जहां कल तक लोग खुले में शौच करते थे अब वहां सुबह शाम बैडमिंटन अन्य प्रकार के खेल खेले जा रहे है। युवाओं के साथ साथ बुद्धजीवियों का भी काफी सहयोग रहा है युवाओं के समर्थन में स्थानीय पत्रकार ने बिजली की व्यवस्था कराई जिसे वहां प्रकाशय हुआ,सुबह शाम निगरानी सशक्त हुई। हजारों युवाओं की टोली अपने अपने घर से दिए लेकर बनास नदी घाट पर जलाएं जिस का नजारा बनारस के घाट

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कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा मे डुबकी क्यों?

आरा. कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर जिले भर के लोगों ने अलग-अलग घाटों पर गंगा में डुबकी लगा पूजा अर्चना की और सुख की कामना की. यह दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है. वैसे तो कार्तिक पूर्णिमा में गंगा मईया सहित सभी देवों के पूजा की जाती है, लेकिन भगवान विष्णु एवं शिव भगवान को विशेष तौर पर याद किया जाता है. शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर ने कार्तिक पूर्णिमा के ही त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध कर समाज को राक्षसी प्रवृत्ति से मुक्ति दिलाई थी, वही भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था और सब की रक्षा की थी. इतना ही नही सिखों के गुरु गुरुनानक देव का भी जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही हुआ था. गंगा में डुबकी क्यो? कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा के घाटों पर पैर रखने की जगह तक नही रहता है. सालों वीरान रहने वाला तट मेले में तब्दील हो जाता है. अब सवाल यह उठता है कि आखिर क्या होता है इस दिन को खास जो सभी गंगा स्नान के लिए दूर-दूर से जुटते हैं. ऐसा माना जाता है कि अति शुभ दिन होने के कारण गंगा में स्नान से पापों और दुःख से मुक्ति मिलती है. गंगा में स्नान करने से सुख समृद्धि और वैभव प्राप्त होता है. भोजपुर जिले के तमाम गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली. भक्ति भाव से स्नान के बाद गंगा मईया की पूजा अर्चना कर लोगों ने दीप भी दान किया. मां गंगा की पूजा अर्चना सिन्हा,केशवपुर घाट, एकौना घाट, महुली

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दरभंगा में मॉरीशस के कलाकार करेंगे रामायण का मंचन

दरभंगा सेंट्रल स्कूल में मॉरीशस के कलाकारों द्वारा संगीतमय रामायण का मंचन :- सीताराम की पुण्यभूमि मिथिला की धरती पर पहली बार मिथिला वासी मॉरीशस के सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू होंगे. खासकर बच्चे अभिभावक और नगरवासी इसके प्रति काफी उत्साहित हैं. वही विद्यालय के प्राचार्य ए॰ के॰ कश्यप ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की है. उन्होंने बताया कि मिथिला धाम में मॉरीशस के कलाकारों का अंतर्राष्ट्रीय प्रथम मंचन होगा. कार्यक्रम दरभंगा सेंट्रल स्कूल वासुदेवपुर एन एच 57 पर अवस्थित 12 नवंबर दिन मंगलवार को 10:00 बजे से 11:30 बजे तक विद्यालय प्रांगण में आयोजित होगा.इस कार्यक्रम के संयोजक सह विद्यालय के प्रबंध न्यासी डॉक्टर कुमार अरुणोदय भी इस अवसर पर बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहेंगे. भारत मॉरीशस संस्कृतिक यात्रा के तहत ह्यूमन सर्विस ट्रस्ट मॉरीशस के तत्वधान में संगीतमय रामायण का मंचन किया जाएगा.

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12 वर्ष में ही गृह-त्यागने वाले तपस्वी का 25वां दीक्षा दिवस

सौरभसागर महाराज का 25 वां रजत दीक्षा दिवस धूमधाम से मना आरा.23 सितंबर. जिन पूजन संघठन, आरा ने श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर में संस्कार प्रणेता मुनि श्री 108 सौरभसागर महाराज का 25 वां रजत दीक्षा दिवस बड़े ही भक्तिभाव से द्वारा मनाया. प्रातःकाल जिनेन्द्र देव का पंचामृत अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा हुई. गुरुदेव सौरभ सागर महाराज को स्मरण करते हुए अर्घ्य सहित श्रीफल समर्पण,महाआरती एवं भजन की गई. दीक्षा दिवस के अवसर पर डॉ राकेन्द्र चन्द्र जैन ने बताया कि संस्कार प्रणेता मुनि श्री 108 सौरभसागर महाराज पुष्पगिरी प्रेणता परम् पूज्य आचार्य श्री 108 पुष्पदन्तसागर महाराज से दीक्षित है और 12 वर्ष के अल्पायु में ही गृह त्यागकर ब्रह्मचर्य व्रत को अपनाया ऐसे त्यागी, तपस्वी मुनि का 25 वां दीक्षा दिवस मनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. दीक्षा महोत्सव में जिन पूजन संघठन के आकाश जैन, अजय जैन अज्जू, रवीश जैन, सोनू जैन, अरुण जैन, मीडिया प्रभारी निलेश कुमार जैन, प्रशांत जैन, प्रभा जैन, किरण जैन, रेशु जैन, इन्द्राणी जैन, सविता जैन, मंजुला जैन, दीप्ति जैन, मोनिका जैन, राजेश जैन, वार्ड पार्षद रेखा जैन उपस्थित थे. आरा से अपूर्वा की रिपोर्ट

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जहां विघ्नहर्ता हरते हैं विघ्न

जहाँ सिर्फ फूलों से सजा है गणपति का मंदिर फूलों से पटा सिद्धिविनायक मंदिर, विघ्नहर्ता के द्वार पहुँचे लाखो लोग मुंबई, 2 सितंबर. देश मे आज से गणेश चतुर्थी की पूजा प्रारम्भ हो गयी है जिसे पूरे धूमधाम से मनाया जा रहा है. देवताओं में विघ्नहर्ता के नाम से जाने जाने वाले भगवान गणेश की पूजा सभी देवाताओं की पूजा से पहले की जाती है और इसकी भव्यता महाराष्ट्र में अलग ही दिखती है. हर घर मे भगवान गणपति की पूजा अर्चना की जाती है. लेकिन सिद्धिविनायक मंदिर में गणपति का दर्शन अलग ही महत्व रखता है. मुंबई के प्रभादेवी इलाके में स्थित इस मंदिर की स्थापना 1801 में हुई थी. इस मंदिर को एक मशहूर बिल्डर ने बनवाया था. इस मंदिर में ऐसी मान्यता है कि भक्तों की मनोकामना पूरी होती है. मंगलवार के दिन खास भीड़ होती है. लोग अपने घरों से खाली पैर मनोकामना पूर्ण होने के बाद यहाँ आते अक्सर दिखते हैं. गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर को बड़े ही भव्य रूप में सजाया गया है. सूर्यमुखी,डहेलिया,ट्यूलिप, गुलाब और गेंदा के फूलों से मंदिर का हर कोना अपने अनोखे रउआ से आनेवाले लोगों को आकर्षित कर रहा है. मंदिर के भीतरी मंडप का एरिया हो या पिलर या दिवाल सभी फूलों से सजकर तैयार हैं. दर्शन के लिए भले सुबह से भरी भीड़ सुबह की आरती के लिए इक्कठी दिखी. वैसे तो आम दिनों में भी यहाँ देश विदेश से श्रद्धालुओ का तांता लगा रहता है लेकिन गणेश चतुर्थी के वक्त दस दिनों तक भीड़

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अद्भुत जलमंदिर महोत्सव का दूसरा दिन…

जल मंदिर महोत्सव के दूसरे दिन निकली भव्य कलश यात्रा 108 महिलाओं ने उठाया दिव्य कलश आरा,24 अगस्त. त्रिदिवसीय भगवान महावीर स्वामी जल मंदिर जीणोद्धार महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को प्रातःकाल जिनेन्द्र देव की भक्तिभाव से पंचामृत अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा हुई जिसमें शांतिधारा करने का सौभाग्य सीमा-मनोज जैन एवं प्रभा-राकेन्द्र चन्द्र जैन को प्राप्त हुआ. विधान में जैन धर्म के सभी 24 तीर्थंकरों के माता-पिता, यक्ष-यक्षिणी, क्षेत्रपाल के गुणों का स्मरण करते हुये श्रीफल सहित अर्ध्य समर्पित किया गया. संगीतकार संतोष जैन के सु-मधुर संगीत एवं प्रतिष्ठाचार्य पं० नरेश कुमार जैन ‘शास्त्री’ के विशेष मंत्रोच्चार से इंद्र-इन्द्राणी झूम उठे तथा उन्होने भाव नृत्य किया. विधान के बाद मंत्रोच्चारित पवित्र जल को लेकर भव्य कलश यात्रा निकाली गई,जिसमे108 जैन महिलाओं ने भाग लिया. कलश यात्रा श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर, जेल रोड से निकलकर शिवगंज स्थित श्री 1008 भगवान महावीर स्वामी जल मंदिर पहुँची जहाँ महिलाओं ने जीणोद्धार द्वारा निर्मित नवीन वेदियों का शुद्धि, पवित्र जल एवं विशेष मन्त्रो द्वारा किया. साथ ही यक्ष-यक्षिणी की नवीन प्रतिमाओं का संस्कार आरोपण एवं क्षेत्रपाल जी का शुद्धिकरण हुआ. कार्यक्रम की समाप्ति पर साधर्मी वात्सल्य की व्यवस्था थी जिसे भक्तों ने प्रसाद स्वरूप ग्रहण किये. सायंकालीन कार्यक्रम में महाआरती, भजन, शास्त्र प्रवचन, प्रश्नमंच, एवं संस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित था. जिसमें महाआरती करने का सौभाग्य आकृति जैन एवं अखण्ड जैन को प्राप्त हुआ. कार्यक्रम में समिति के डॉ शशांक जैन, विजय जैन, अजय जैन, डॉ राकेन्द्र चन्द्र जैन, मीडिया प्रभारी निलेश कुमार जैन, धीरेन्द्र चन्द्र जैन, बिभु जैन, राजेश जैन, भावेश जैन, सर्वेश जैन,

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क्या आपने देखा है जल मंदिर महोत्सव ?

त्रिदिवसीय भगवान महावीर स्वामी जल मन्दिर महोत्सव आज से शुरू आरा. 23 अगस्त. जल मंदिर का नाम सुनते ही उसकी सुंदरता की कल्पना दिमाग में घूमने लगती है और लगता है कि एक बार ऐसे रमणीय जगह पर घूमने जरूर जायें. लेकिन ऐसे मंदिरों पर जब महोत्सव हो तो इसकी खूबसूरती की कल्पना और लाज़मी हो जाती है. क्या आपने कभी ऐसे महोत्सव को देखा है? अगर नही तो इस बार जरूर देखिये भोजपुर जिला मुख्यालय में स्थित जल मंदिर महोत्सव को जिसमे भगवान महावीर कि मुर्ति स्थापित है. श्री 1008 दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर के अधीनस्थ श्री 1008 भगवान महावीर स्वामी जल मंदिर जीणोद्धार महोत्सव त्रिदिवसीय कार्यक्रम बहुत ही उत्साह के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ. शुक्रवार की सुबह देव, शास्त्र, गुरु की आज्ञा प्राप्त कर, ध्वजारोहण का कार्यक्रम पं० नरेश कुमार जैन ‘शास्त्री’ हस्तिनापुर के मंत्रोच्चारण बीच शशि-शैलेन्द्र कुमार जैन व नम्रता-शशांक जैन के परिवार द्वारा किया गया. ध्वजारोहण के पश्चात मण्डप शुद्धि सौधर्म इंद्र-इंद्राणी छवि-अंशु जैन, ईशान इंद्र-इंद्राणी सीमा-मनोज जैन, महेंद्र इंद्र-इंद्राणी शालिनी-सर्वेश जैन, यज्ञनायक इंद्र-इंद्राणी मंजुला-आदेश जैन के द्वारा बड़े ही श्रद्धा एवं भक्तिपूर्वक सम्पन्न किया गया. जिनेन्द्र देव का भव्य पंचामृत अभिषेक एवं वृहद शांतिधारा करने का सौभाग्य शील जैन, छवि जैन आरा एवं हेमलता जैन बैंगलोर निवासी को प्राप्त हुआ. आज के विधान में संगीतकार सन्तोष जैन एण्ड पार्टी भरतपुर के संगीतमय धुन के बीच विशेष मंत्रोच्चार के साथ भावपूर्वक अर्ध्य इंद्र-इंद्राणियों के द्वारा विधान मंडल पर चढ़ाये गये. विधान के पश्चात साधर्मी वात्सल्य (भोजन) की व्यवस्था राजेश्वरी जैन जी के परिवार द्वारा किया

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रक्षा बंधन पर वैदिक रक्षा सूत्र बांधे | जाने क्या है शुभ मुहूर्त | राशि अनुसार बांधे राखी

पटना (ब्यूरो) | श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं. वहीं भाई भी जीवन भर अपनी बहनों को रक्षा का वचन देते हैं. यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का अनुपम उदाहरण है. इस बार यह त्योहार 15 अगस्त को है.बहनों को इस पर्व का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार रहता है. वहीं भाई भी बहनों के घर आने की बाट जोहते हैं. जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है तो वे यह कामना करती हैं कि उसके भाई के जीवन में कभी कोई कष्ट न हो, वह उन्नति करें और उसका जीवन सुखमय हो. वहीं भाई भी इस रक्षा सूत्र को बंधवाकर गौरवांवित अनुभव करते हैं और जीवन भर अपनी बहन की रक्षा करने की कसम खाता है. यही स्नेह व प्यार इस त्योहार की गरिमा को और बढ़ा देता है. रक्षा बंधन के पर्व पर अपने भाई को वैदिक विधि – वैदिक रक्षा सूत्र बांधे . वैदिक रक्षा सूत्र वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि: – इसके लिए 5 वस्तुओं की आवश्यकता होती है(1) दूर्वा (घास)(2) अक्षत (चावल)(3) केसर(4) चन्दन(5) सरसों के दाने .इन 5 वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी . इन पांच वस्तुओं का महत्त्व –(1) दूर्वा – जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर

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