जहां विघ्नहर्ता हरते हैं विघ्न

जहाँ सिर्फ फूलों से सजा है गणपति का मंदिर फूलों से पटा सिद्धिविनायक मंदिर, विघ्नहर्ता के द्वार पहुँचे लाखो लोग मुंबई, 2 सितंबर. देश मे आज से गणेश चतुर्थी की पूजा प्रारम्भ हो गयी है जिसे पूरे धूमधाम से मनाया जा रहा है. देवताओं में विघ्नहर्ता के नाम से जाने जाने वाले भगवान गणेश की पूजा सभी देवाताओं की पूजा से पहले की जाती है और इसकी भव्यता महाराष्ट्र में अलग ही दिखती है. हर घर मे भगवान गणपति की पूजा अर्चना की जाती है. लेकिन सिद्धिविनायक मंदिर में गणपति का दर्शन अलग ही महत्व रखता है. मुंबई के प्रभादेवी इलाके में स्थित इस मंदिर की स्थापना 1801 में हुई थी. इस मंदिर को एक मशहूर बिल्डर ने बनवाया था. इस मंदिर में ऐसी मान्यता है कि भक्तों की मनोकामना पूरी होती है. मंगलवार के दिन खास भीड़ होती है. लोग अपने घरों से खाली पैर मनोकामना पूर्ण होने के बाद यहाँ आते अक्सर दिखते हैं. गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर को बड़े ही भव्य रूप में सजाया गया है. सूर्यमुखी,डहेलिया,ट्यूलिप, गुलाब और गेंदा के फूलों से मंदिर का हर कोना अपने अनोखे रउआ से आनेवाले लोगों को आकर्षित कर रहा है. मंदिर के भीतरी मंडप का एरिया हो या पिलर या दिवाल सभी फूलों से सजकर तैयार हैं. दर्शन के लिए भले सुबह से भरी भीड़ सुबह की आरती के लिए इक्कठी दिखी. वैसे तो आम दिनों में भी यहाँ देश विदेश से श्रद्धालुओ का तांता लगा रहता है लेकिन गणेश चतुर्थी के वक्त दस दिनों तक भीड़

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अद्भुत जलमंदिर महोत्सव का दूसरा दिन…

जल मंदिर महोत्सव के दूसरे दिन निकली भव्य कलश यात्रा 108 महिलाओं ने उठाया दिव्य कलश आरा,24 अगस्त. त्रिदिवसीय भगवान महावीर स्वामी जल मंदिर जीणोद्धार महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को प्रातःकाल जिनेन्द्र देव की भक्तिभाव से पंचामृत अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा हुई जिसमें शांतिधारा करने का सौभाग्य सीमा-मनोज जैन एवं प्रभा-राकेन्द्र चन्द्र जैन को प्राप्त हुआ. विधान में जैन धर्म के सभी 24 तीर्थंकरों के माता-पिता, यक्ष-यक्षिणी, क्षेत्रपाल के गुणों का स्मरण करते हुये श्रीफल सहित अर्ध्य समर्पित किया गया. संगीतकार संतोष जैन के सु-मधुर संगीत एवं प्रतिष्ठाचार्य पं० नरेश कुमार जैन ‘शास्त्री’ के विशेष मंत्रोच्चार से इंद्र-इन्द्राणी झूम उठे तथा उन्होने भाव नृत्य किया. विधान के बाद मंत्रोच्चारित पवित्र जल को लेकर भव्य कलश यात्रा निकाली गई,जिसमे108 जैन महिलाओं ने भाग लिया. कलश यात्रा श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर, जेल रोड से निकलकर शिवगंज स्थित श्री 1008 भगवान महावीर स्वामी जल मंदिर पहुँची जहाँ महिलाओं ने जीणोद्धार द्वारा निर्मित नवीन वेदियों का शुद्धि, पवित्र जल एवं विशेष मन्त्रो द्वारा किया. साथ ही यक्ष-यक्षिणी की नवीन प्रतिमाओं का संस्कार आरोपण एवं क्षेत्रपाल जी का शुद्धिकरण हुआ. कार्यक्रम की समाप्ति पर साधर्मी वात्सल्य की व्यवस्था थी जिसे भक्तों ने प्रसाद स्वरूप ग्रहण किये. सायंकालीन कार्यक्रम में महाआरती, भजन, शास्त्र प्रवचन, प्रश्नमंच, एवं संस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित था. जिसमें महाआरती करने का सौभाग्य आकृति जैन एवं अखण्ड जैन को प्राप्त हुआ. कार्यक्रम में समिति के डॉ शशांक जैन, विजय जैन, अजय जैन, डॉ राकेन्द्र चन्द्र जैन, मीडिया प्रभारी निलेश कुमार जैन, धीरेन्द्र चन्द्र जैन, बिभु जैन, राजेश जैन, भावेश जैन, सर्वेश जैन,

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क्या आपने देखा है जल मंदिर महोत्सव ?

त्रिदिवसीय भगवान महावीर स्वामी जल मन्दिर महोत्सव आज से शुरू आरा. 23 अगस्त. जल मंदिर का नाम सुनते ही उसकी सुंदरता की कल्पना दिमाग में घूमने लगती है और लगता है कि एक बार ऐसे रमणीय जगह पर घूमने जरूर जायें. लेकिन ऐसे मंदिरों पर जब महोत्सव हो तो इसकी खूबसूरती की कल्पना और लाज़मी हो जाती है. क्या आपने कभी ऐसे महोत्सव को देखा है? अगर नही तो इस बार जरूर देखिये भोजपुर जिला मुख्यालय में स्थित जल मंदिर महोत्सव को जिसमे भगवान महावीर कि मुर्ति स्थापित है. श्री 1008 दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर के अधीनस्थ श्री 1008 भगवान महावीर स्वामी जल मंदिर जीणोद्धार महोत्सव त्रिदिवसीय कार्यक्रम बहुत ही उत्साह के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ. शुक्रवार की सुबह देव, शास्त्र, गुरु की आज्ञा प्राप्त कर, ध्वजारोहण का कार्यक्रम पं० नरेश कुमार जैन ‘शास्त्री’ हस्तिनापुर के मंत्रोच्चारण बीच शशि-शैलेन्द्र कुमार जैन व नम्रता-शशांक जैन के परिवार द्वारा किया गया. ध्वजारोहण के पश्चात मण्डप शुद्धि सौधर्म इंद्र-इंद्राणी छवि-अंशु जैन, ईशान इंद्र-इंद्राणी सीमा-मनोज जैन, महेंद्र इंद्र-इंद्राणी शालिनी-सर्वेश जैन, यज्ञनायक इंद्र-इंद्राणी मंजुला-आदेश जैन के द्वारा बड़े ही श्रद्धा एवं भक्तिपूर्वक सम्पन्न किया गया. जिनेन्द्र देव का भव्य पंचामृत अभिषेक एवं वृहद शांतिधारा करने का सौभाग्य शील जैन, छवि जैन आरा एवं हेमलता जैन बैंगलोर निवासी को प्राप्त हुआ. आज के विधान में संगीतकार सन्तोष जैन एण्ड पार्टी भरतपुर के संगीतमय धुन के बीच विशेष मंत्रोच्चार के साथ भावपूर्वक अर्ध्य इंद्र-इंद्राणियों के द्वारा विधान मंडल पर चढ़ाये गये. विधान के पश्चात साधर्मी वात्सल्य (भोजन) की व्यवस्था राजेश्वरी जैन जी के परिवार द्वारा किया

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रक्षा बंधन पर वैदिक रक्षा सूत्र बांधे | जाने क्या है शुभ मुहूर्त | राशि अनुसार बांधे राखी

पटना (ब्यूरो) | श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं. वहीं भाई भी जीवन भर अपनी बहनों को रक्षा का वचन देते हैं. यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का अनुपम उदाहरण है. इस बार यह त्योहार 15 अगस्त को है.बहनों को इस पर्व का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार रहता है. वहीं भाई भी बहनों के घर आने की बाट जोहते हैं. जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है तो वे यह कामना करती हैं कि उसके भाई के जीवन में कभी कोई कष्ट न हो, वह उन्नति करें और उसका जीवन सुखमय हो. वहीं भाई भी इस रक्षा सूत्र को बंधवाकर गौरवांवित अनुभव करते हैं और जीवन भर अपनी बहन की रक्षा करने की कसम खाता है. यही स्नेह व प्यार इस त्योहार की गरिमा को और बढ़ा देता है. रक्षा बंधन के पर्व पर अपने भाई को वैदिक विधि – वैदिक रक्षा सूत्र बांधे . वैदिक रक्षा सूत्र वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि: – इसके लिए 5 वस्तुओं की आवश्यकता होती है(1) दूर्वा (घास)(2) अक्षत (चावल)(3) केसर(4) चन्दन(5) सरसों के दाने .इन 5 वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी . इन पांच वस्तुओं का महत्त्व –(1) दूर्वा – जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर

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निकली माता की अलौकिक 201वीं खप्पड़ डोली

फुलवारीशरीफ में निकली माता की अलौकिक 201वीं खप्पड़ डोलीमहामारी से लोगों की जान बचाने के लिए 201 साल से निकाली जा रही माता कीडोलीआगे आगे खप्पड़ में जलता हुआ आग लेकर दौड़े पुजारी और उनके पीछे दौड़ा 61 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का जन सैलाबतलवार, भाला त्रिशूल आदि पारंपरिक हथियार लिए लगाते रहे माता के जयकारेजय माता दी के नारों से गूंजती रही चारो दिशाएँआधे घंटे में पूरी की परिक्रमाफुलवारीशरीफ (अजीत कुमार की रिपोर्ट) | रविवार को पटना के फुलवारीशरीफ में एक अभूतपूर्व एवं अनुशासन से लवरेज रोमांचित कर देने वाला अलौकिक 201वां माता की खप्पड़ डोली निकली. इस दृश्य को देखकर शहरवासी गौरवान्वित हो रहे थे. इस वर्षो पुरानी पुरखो के जमाने से चली आ रही परम्परा को निभाने में मुस्लिम भाइयो ने हिन्दू समुदाय के साथ बढ़ चढ़ कर सहयोग दिया. संध्या के साढ़े सात बजते ही माता के मंदिर के पुजारी जीतमोहन पंडित सबसे आगे-आगे हाथ में जलता हुआ खप्पर लेकर निकले. पूजारी जी के दौड़ते ही उनके पीछे हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब हाथों में पारंपरिक हथियार, तलवार, भाला त्रिशूल लिए माता के जयकारे लगाते खप्पड़ दौड़ परिक्रमा शुरू कर देते हैं. जय माता दी के जयकारे से चारों दिशाएं गूंजने लगती हैं. करीब 61 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का सैलाब अपने शहर के दो सौ साल पुरानी आस्था और परम्परा को आज भी जिस उत्साह से निभा रहे थे. उसका स्वरूप देख लोग आश्चर्यचकित थे. आस्था की एक अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही थी. यह दृश्य किसी को भी एक बार रोमांचित करने के लिए

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नागपंचमी पर साल में एक बार, उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर महादेव का लाइव दर्शन करें

आज श्रावण मॉस की शुक्ल पंचमी अर्थात नागपंचमी है. उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) पर ही दर्शनों के लिए खोला जाता है. ऐसी मान्यता है कि नागराज तक्षक स्वयं मंदिर में रहते हैं. नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक का देखें उज्जैन से नागचंद्रेश्वर का लाइव विडियो….नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन से साल में सिर्फ एक बार यहाँ प्रसारण देखें – http://dic.mp.nic.in/ujjain/mahakal/fbng.html

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17 जुलाई को इस दौरान रहेगा आंशिक चन्द्रग्रहण

17 जुलाई को होने वाला आंशिक चन्द्रग्रहण भारत में देखा जा सकेगा. चन्द्रग्रहण भारतीय समयानुसार 1 बजकर 31 मिनट से शुरू होगा और 4 बजकर 30 मिनट पर खत्म हो जाएगा. इस अवधि में चन्द्रमा पर पृथ्वी की छाया धीरे-धीरे बढ़ती जाएगी और सबसे ज्यादा आंशिक चन्द्रग्रहण 3 बजकर 1 मिनट पर देखा जा सकेगा. इस दौरान चन्द्रमा का आधे से थोड़ा ज्यादा हिस्सा पृथ्वी की छाया से पूरी तरह ढंक जाएगा. केन्द्र सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश के सुदूर उत्तर-पूर्वी हिस्से को छोड़कर भारत के अन्य सभी स्थानों से पर आंशिक चन्द्रग्रहण देखा जा सकेगा. इसे ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका तथा दक्षिणी अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों, सुदूर उत्तरी स्केंडिनेविया को छोड़कर पूरे यूरोप तथा पूर्वोत्तर को छोड़कर समूचे एशिया में भी देखा जा सकेगा. आंशिक चन्द्रग्रहण 2 घंटा 59 मिनट तक रहेगा।

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हनुमान जन्मोत्सव पर करें ये उपाय

उज्जैन (पं अजय दूबे) | शास्त्र अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है जो इस बार 19 अप्रैल 2019 शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा. इस दिन हनुमान जी से जो भी कामना की जाए निश्चित रूप से पूर्ण होती है कुछ आसान और घरेलू उपाय जिसे हनुमान जन्मोत्सव के दिन करके कष्टों से मुक्ति पाई जा सकती है.यह दिन हनुमान जी की पूजा का सबसे बड़ा दिन माना जाता है. इस दिन अगर कोई भी व्‍यक्‍ति सच्‍चे मन से हुनमान जी की अराधना करे तो उसे काफी लाभ पहुंचता है. मान्‍यता है कि इस दिन किये गए खास उपाय व्‍यक्‍ति को विशेष फल प्रदान करते हैं. इस दिन अगर आप हनुमान जी के मंदिर में लाल रंग का चोला चढ़ाते हैं तो उसका भी खास लाभ होता है. श्री हनुमान को सिंदूर अत्यंत प्रिय है. उनकी पूजा से पहले आप उन्‍हें सिंदूरी का लेप लगा सकते हैं. इससे जीवन में सकारात्‍मकता आती है. हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाने से एवं मूर्ति का स्पर्श करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. आइये जानते हैं हनुमान जन्मोत्सव के दिन किन उपायों को करने से भक्‍त का जीवन बदल सकता है. 5 देसी घी के रोटी का भोग हनुमान जन्मोत्सव पर लगाने से दुश्मनों से मुक्ति मिलती है. कारोबार में वृद्धि के लिए हनुमान जन्मोत्सव पर सिंदूरी रंग का लंगोट हनुमानजी को पहनाइए. हनुमान जी के मंदिर जाएं, उन्हें केसरी रंग का चोला चढ़ाएं और बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं. सिर से 8 बार नारियल वारकर हनुमान

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क्या है राम का अर्थ जानिये आशुतोष राणा की जुबानी

पटना. 13 अप्रैल. रामनवमी पर बधाइयों का तांता देने का सिलसिला कल के ही जारी है जिसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सभी ने एक दूसरे के साथ शेयर किया है. सोशल मीडिया का हर कोने में श्रीराम की गूंज है और पारम्परिक पूजन के साथ शुरू होने वाले हिन्दू नव वर्ष को बड़े धूम धाम से मनाया जा रहा है. ऐसे में बॉलीवुड के दमदार अभिनेता आशुतोष राणा ने भी लोगो को रामनवमी की बधाई अपने अंदाज में दिया है जिसे लोगो ने काफी पसंद किया है. मजेदार बात तो यह है कि ज्ञानपरक बातें जहां इन्होंने शेयर किया है वही उन्होंने जय श्रीराम के नाम के पहले उन्होंने माता सीता का नाम जोड़कर भारतीय परंपरा को कायम रखा है जहां पहले मातृ-पूजा का रिवाज है. आमतौर पर अपने मैसेज में जय श्रीराम ही सबने लिख है ये एक दुसरे को को सम्बोधिक किया है लेकिन आशुतोष राणा की यह बात ही उन्हें अलग बनती है…पढ़िए क्या लिखा है उन्होंने.. ईश्वर जब रागयुक्त होते हैं तब वे मनुष्य कहलाते हैं, और मनुष्य जब रागमुक्त होता है तो वो ईश्वर हो जाता है। ईश्वर का आसक्तिमय होना मनुष्यत्व है, तो मनुष्य का अनासक्त होना ईश्वरत्व। ईश्वर का नीचे आना ( अवतरण ) उनके मनुष्य होने की व्यवस्था है, तो मनुष्य का ऊपर उठना ( आरोहण ) उसके ईश्वर होने की प्रक्रिया। विश्व के प्रत्येक अणु में प्रकाशित होने वाली चेतना को ही विष्णु कहा जाता है। आज रामनवमी है, आज के ही दिन वह परम चेतना निराकार से साकार की

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बुधवार 6 मार्च 2019 का पंचांग और आपका राशिफल

मेष – ये समय प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेने के लिए अच्छा है. आपको सफलता जरूर मिलेगी. अपना आत्मविश्वास बनाए रखें व इस परीक्षा में पूरे आत्म-विश्वास के साथ भाग लें. वृषभ – आज कुछ कीमती सामान खोने का डर है. आज अपनी चाबियों औऱ जरूरी सामान को संभाल कर रखें. अगर आप अपने सामान को यहां-वहां रख देंगे तो बाद में आपको ही परेशानी होगी इसलिए इसे नियत स्थान पर ही रखें. मिथुन – आज आपकी मानसिक ऊर्जा चरम सीमा पर रहेगी. आपको मुश्किलें भी अवसर के रूप में दिखेंगी और ये आज आपके लिए बहुत लाभदायक रहेगा. मुश्किलों से लड़ने का आपका ये स्वभाव आपको जिंदगी में बहुत आगे ले जाएगा. ये अपनी पहले से चली आ रही समस्याओं को हल करने का समय है. कर्क – उन परिस्थितियों में पड़ने से बचें जिनमें आप असुविधा महसूस करते हैं. अपनी सोच सकारात्मक बनाए रखें और बेकार की बातों में ना पड़ें. जो आप हैं ही नहीं वो बनने की कोशिश करने से क्या फायदा. उस जगह पर जाने से भी क्या फायदा जहां जाना आपको पसंद ही नहीं है. कभी-कभी अकेले रहना किसी अनचाहे साथ से अच्छा ही होता है. सिंह – आज आपको खूब पहचान मिलेगी. आज आप जिस मुकाम पर हैं वो आपकी स्पष्टता और अच्छी संप्रेषण कला की वजह से ही है. आप और अधिक सफलता पाने के अपने प्रयासों को जारी रखें और अपने अहम को अपने रास्ते में ना आने दें. इससे लोग आपका आदर करते रहेंगे. कन्या – आज आपका मन करेगा

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