विष्णु स्तंभ की मांग जायज है : जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य

30,000 से अधिक मंदिरों को ध्वस्त कर वहां पर मस्जिद बनाया अपने अधिकार को मांगना असहिष्णुता नहीं ज्ञान व्यापी कुआं का जल पीने के बाद आदमी बन जाता है सर्वोच्च ज्ञानी जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य महाराज बीते समय में आक्रांताओं ने 30,000 से अधिक मंदिरों को ध्वस्त कर वहां पर मस्जिद और अन्य निर्माण किए. ज्ञानवापी कुआं का पौराणिक पुराणों में वर्णन है. जहां ताजमहल है वो भगवान शिव का प्रख्यात मंदिर रहा है. जिसे तेजोमहालय के नाम से जाना जाता था. अपने अधिकार को मांगना असहिष्णुता नहीं है. अपने अधिकार खोकर बैठे रहना महादुष्कर्म है’. राजधानी पटना के प्रतिष्ठित महावीर मंदिर में बुधवार को तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य श्री रामभद्राचार्य महाराज ने भगवान हनुमान की पूजा अर्चना की. इस दौरान उन्होंने अपनी नई रचना को हनुमान जी के सामने सुनाया. इसके बाद पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में रहना है तो राघव का गुणगान करना होगा बाबर का नहीं. इस मौके पर महावीर मंदिर के आचार्य किशोर कुणाल भी उपस्थित थे. भगवन हनुमान की पूजा अर्चना करने के बाद रामभद्राचार्य महाराज ने प्रेस वार्ता की. इस दौरान उन्होंने बनारस में काशी विश्वनाथ परिसर के पास स्थित ज्ञानवापी मस्जिद की चर्चा की. उन्होंने कहा कि मस्जिद में जो ज्ञान व्यापी कुआं है, उसका जल पीने के बाद आदमी सर्वोच्च ज्ञानी बन जाता है और उन्होंने भी उसके जल को पीया है. लाउडस्पीकर विवाद पर उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म सहअस्तित्व में विश्वास रखता है और मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरवाना बहुत उचित है. ज्ञानवापी मस्जिद का

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रामनवमी को लेकर पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर में भक्तों की अपार भीड़

राम भक्त हनुमान का दर्शन कीजिये भय प्रकट कृपाला दिन दयाला ,कौसल्या हितकारी सुरक्षा के व्यापक प्रतिबंध रामनवमी को लेकर पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर में भक्तों की अपार भीड़ उमड़ रही है. लोग रात से ही कतार में लगे हुए थे. मंदिर का मुख्य दरबाजा भी रात दो बजे के करीब खोल दिया गया है. रामनवमी को लेकर राजधानी पटना शनिवार की शाम से ही राममय हो गई हैं. महावीरी ध्वज, पताका, झंडे, इलेक्ट्रॉनिक तोरणद्वार और एलइडी लाइटिंग से मंदिर के साथ-साथ पूरे शहर को सजाया गया है. महावीर मंदिर में भगवान राम, जानकी और हनुमान जी के दर्शन के लिए शाम से ही कतार लगनी शुरू हो गयी. शनिवार की आधी रात को लगभग दो बजे महावीर मंदिर का पट दर्शन के लिए खोला गया. अयोध्या से पहुंचे पंडितों के दल ने भगवान की आरती व भव्य शृंगार किया. इसके बाद मंदिर में राम भक्तों का प्रवेश शुरू हो गया. पट खुलते ही भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी…, हनुमान चालीसा आदि का पाठ करते हुए राम भक्त दर्शन और पूजन के लिए उमड़ पड़े. महावीर मंदिर में प्रसाद चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं को उत्तरी द्वार से प्रवेश कराया जा रहा है. मंदिर के उत्तरी द्वार से जीपीओ गोलम्बर तक घेराबंदी कर छाया की व्यवस्था की गयी है. केवल दर्शन करने वाले भक्त सुबह 7 बजे से पूर्वी प्रवेश द्वार से परिसर में प्रवेश कर रहे हैं. मंदिर में सुरक्षा को लेकर 200 से अधिक पुलिस के जवानों के साथ दो दर्जन मजिस्ट्रेट को तैनात किया गया है. पूजा

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पूर्ण निष्ठा के साथ साधना हो तो होती है सभी सिद्धियों की प्राप्ति

भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया सिद्धिदात्री मां की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक, पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की होती है पूर्ति मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं. ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं. नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है. इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है. सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है. मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियाँ होती हैं. ब्रह्मवैवर्त पुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में यह संख्या अठारह बताई गई है. इनके नाम इस प्रकार हैं.मां सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं. देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था. इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था.भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया इसी कारण वे लोक में ‘अर्द्धनारीश्वर’ नाम से प्रसिद्ध हुए. मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं. इनका वाहन सिंह है. ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं. इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है. प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह मां सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरंतर प्रयत्न

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देखिए नया रेल रूट: अयोध्या से जनकपुर वाया दरभंगा

राम जन्मभूमि अयोध्या को रेलमार्ग से माता सीता की प्राकट्य स्थली सीतामढ़ी और उनकी पालनभूमि नेपाल के जनकपुर से जोड़ने का काम पूरा हो गया है. अब आप अयोध्या से गोरखपुर, सीतामढ़ी, दरभंगा और जयनगर होते हुए ट्रेन से जनकपुर तक पहुंच सकते हैं. इस मार्ग पर पड़नेवाले भगवान राम, माता सीता, हनुमान और गौतम ऋषि-अहिल्या से जुड़े स्थलों को भी देख सकते हैंयह रेल रूट दरभंगा होते हुए जाता है. हालांकि दरभंगा स्टेशन गए बिना सीतामढ़ी से सीधे जयनगर तक जाने के लिए दरभंगा में एक बाइपास रेललाइन बन रही है. इस पर न्यू दरभंगा जंक्शन और बासुदेवपुर हॉल्ट का निर्माण कराया जा रहा है. दरभंगा रेल बाइपास के निर्माण की प्रगति कितनी हुई है, ये जानने के लिए देखिए ये ग्राउंड रिपोर्ट. अयोध्या से जनकपुर वाया दरभंगा रेलवे रूट की पूरी जानकारी के देखिए ये बेहद खास वीडियो – pncb and samvad mithila .

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वीणा वादन से बनी वेदों की ऋचाएं और उससे बना राग वसंत

वसंत पंचमी और पीले रंग का महत्व वसंत ऋतु में फसलें पकने लगती हैं फूलों का सौंदर्य पृथ्वी की सुंदरता बढ़ाता है सृष्टि रचते समय ब्रह्माजी ने अपने कमंडल से जल छिड़का तब शक्ति रूप में छ: भुजाओं वाली देवी प्रकट हुई. जिनके हाथों में पुस्तक, पुष्प, कमंडल, वीणा और माला थी. जैसे ही देवी ने वीणा बजाई, चारों ओर वेद मंत्र गूंज उठे. ऋषि-मुनी आनंदित हो उठे और वसंत पंचमी उत्सव शुरू हुआ. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन देवी मां सरस्वती प्रकट हुईं थी और तब देवताओं ने देवी स्तुति की. स्तुति से वेदों की ऋचाएं बनीं और उनसे वसंत राग बना. इसलिए इस दिन को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है. संगीत दामोदर ग्रंथ के मुताबिक श्री पंचमी यानी इस पर्व से वसंत राग के गायन की शुरुआत होती थी. इस कारण धीरे-धीरे ये तिथि वसंत पंचमी हो गई. हरिशयनी एकादशी तक गाया जाता है. जो कि जुलाई में आती है. वसंत पंचमी के एक महीने बाद आने वाली वसंत ऋतु में फसलें पकने लगती हैं, फूलों का सौंदर्य पृथ्वी की सुंदरता बढ़ाता है इसलिए ऊर्जा का रूप कहे जाने वाले पीले रंग की प्रधानता वसंत पंचमी पर्व से शुरू हो जाती है. पीला रंग सूर्य से निकला है इसलिए ये रंग ज्ञान, आध्यात्मिकता और विकासशीलता का प्रतिक है. धार्मिक अनुष्ठानों में पीले रंग का बहुत महत्त्व होता है. इस रंग में क्षमा, गंभीरता, उत्पादन, स्थिरता, वैभव, मजबूती, संजीदगी एवं भारीपन का गुण है. पीला रंग पसंद करने वाले लोग तेज बुद्धि और अच्छी यादाश्त

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अब 45 मीटर ऊंचाई से काशी धाम का दीदार करें

दुनिया का तीसरा सबसे खास शहर होगा बनारस45 मीटर की ऊंचाई पर चलेगा,4 किमी लंबा होगा जो करीब220 ट्रॉली होंगी जिनमें से हर एक में 10 लोग बैठ सकेंगेस्थानीय लोग बोले सांसद हो तो मोदी जैसा अब आपको आसमान से काशी दर्शन कर सकते हैं. ये प्रोजेक्ट पीएम मोदी का सपना था जिसे जल्द ही पूरा कर दिया जाएगा. पहले चरण में कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक रोपवे बनेगा. लापाज और मैक्सिको के बाद काशी दुनिया का तीसरा ऐसा शहर होगा जहां रोपवे को लोग रोज़ाना की आवाजाही के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे.दरअसल संकरी गलियां काशी की पहचान हैं लेकिन दिन प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या के कारण प्रशासन को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में प्रशासन जमीन की बजाय यातायात के आसमानी साधन के बारे में सोच रहा है. रोपवे शुरू होने के बाद काशी के आसमान से ही लोगों को गंगा दर्शन हो सकेंगे. इस सुविधा के शुरू होने के बाद पर्यटकों को घंटों जाम में फंसे नहीं रहना पड़ेगा बल्कि वे समय बचाकर आसानी से आसमान से बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकेंगे. गौरतलब है कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में उनके निर्देश पर कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक रोपवे बनेगा. जिससे बाबा के श्रद्धालु आसानी से बाबा के दरबार और गंगा घाट तक पहुंच सकेंगे. ये प्रोजेक्ट पीएम मोदी के सपने को काशी के मूल रूप को बरकरार रखते हुए क्योटो की तर्ज पर विकसित करने की योजना का हिस्सा है. कैंट से गोदौलिया तक कुल 4 स्टेशन

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12 सूर्य मंदिरों में से 11 मंदिर मिल गए, लेकिन एक मंदिर अब भी अज्ञात

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 11 नवम्बर ।। तमाम पाखंडों से दूर, प्रकृति से जुड़ने, सूर्य के साथ जीने, की हठ को ही छठ व्रत कहते है. यह व्रत लोगो को यह बताता है कि जो अस्त होता है उसका उदय भी होता है. इसलिए छठ पर्व में सबसे पहले अस्तगामी सूर्य को उसके बाद उदयगामी सूर्य को अर्ध (अरग) दिया जाता है. इसलिए तो कहा जाता है कि जो मरता है वो फिर से जन्म लेता है. छठ भी प्राकृतिक सिद्धांत का मूल है और भारतीय संस्कृति में इसी प्रकृति चक्र और जीवन चक्र को समझने का पर्व है. लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा सनातन सभ्यता के सबसे प्राचीन त्यौहारों में से एक है. इस पर्व का उल्लेख ऋग्वेद में भी है. लेकिन अब यह पर्व समय के साथ क्षेत्र विशेष में सिमट गया है. ऐसे भी देखा जाय तो कार्तिक महीना प्रकृति में वनस्पति, औषधि, कृषि और उसके उत्पाद के ज्ञान की धारा है. पटना के हर गली, मोहल्ला में स्वच्छता से यह महापर्व बहुत धूमधाम से मनाया गया. आस्था के महापर्व श्रद्धा-भाव से ओत-प्रोत, सद्भावना और सहभागिता, निराजली का कठिन पर्व है, जिसमें कोई पंडित-पुजारी नहीं होता है, देवता प्रत्यक्ष रूप से दिखते रहते है, अस्ताचल सूर्य को भी पूजते है, पर्व करने वाले व्रती किसी भी जाति समुदाय से परे रहते है और सिर्फ लोकगीत गाये जाते हैं, पकवान बनाने से लेकर, घाट पर भी कोई ऊंच-नीच, अमीर-गरीब का कोई भेदभाव नही रहता है और सभी श्रद्धा से स्वंय सहयोग करते हैं एवं परसादी ग्रहण करते

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छठ अर्घ @फुलवारीशरीफ

फुलवारी में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ देकर श्रद्धालुओं ने की सुख समृद्धि की कामना फुलवारी शरीफ, अजीत ।। फुलवारी शरीफ और संपतचक प्रखंड के विभिन्न इलाकों में आस्था के लोकपर्व छठ के तीसरे दिन विभिन्न नदी, तालाबों, नहरों पर बने घाटों पर जाकर तथा घर की छतों और आवासीय प्रांगण में बनाए गए कुंड में लाखों की संख्या में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध देने सैलाब उमड़ पड़ा. फूलवारी शरीफ शहर के प्रखंड शिव मंदिर तालाब बहादुरपुर घाट करौल चक गणेश सिंह का तालाब गोनपुरा शिव मंदिर तालाब पुनपुन नदी घाट सकरैचा धराए चक , अनीसाबाद मानिकचंद तालाब ,जगदेव पथ फुलवारी रोड बीएमपी तालाब खगौल लख सोन नहर घाट , सिपारा ,बेउर, परसा बाजार इतवारपुर कुरथौल , जानीपुर, राजघाट नवादा पुनपुन नदी घाट ,गौरीचक पुनपुन नदी घाट,संपतचक भोगीपुर राम कृष्णा नगर रॉकी मुखिया का तालाब जगनपुरा ब्रह्मपुर तालाब समेत आसपास के तमाम शहरी व ग्रामीण इलाकों में श्रद्धालुओं ने बुधवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ देकर परिवार व समाज की खुशहाली और सुख समृद्धि की कामना की. इस दौरान नदी तालाब पोखर पर और तालाबों पर अर्ध देने श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. वही अनेक जगहों पर लोगों ने अपने अपने घरों की छतों पर कृत्रिम तालाब बना कर भगवान भास्कर को अर्घ दिया. प्रधान शिव मंदिर तालाब फुलवारी शरीफ के पास नगर परिषद फुलवारी की तरफ से व्रतियों के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. वहीं करोड़ी चक गणेश सिंह का निजी तालाब पर गणेश सिंह के परिवार की तरफ से और व्रतीयों के लिए हर तरह की सुविधाओं को

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केदारनाथ में पीएम मोदी ने की पूजा अर्चना

21वीं शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक केदारनाथ में 400 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास ऋषिकेश और कर्णप्रयाग को रेल मार्ग से जोड़ा जा रहा है पीएम मोदी आज केदारनाथधाम में है. नरेन्द्र मोदी ने आज सुबह बाबा केदारनाथ धाम जाकर मंदिर में पूजा-अर्चना की. पूजा-अर्चना करने के बाद पीएम मोदी ने आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण भी किया। साथ ही पीएम मोदी ने आज बाबा केदारनाथ में 400 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया. केदार नाथ धाम में इस वक़्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूजा अर्चना को कैथल में कार्यक्रम को लाइव देखा जा रहा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 100 सालों में जितने यात्री यहां आए हैं, अगले 10 साल में उससे कई ज़्यादा लोग यहां आने वाले हैं. मेरे शब्द लिखकर रखिए 21वीं शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक है. चारों धाम हाईवे से जुड़ रहे हैं. भविष्य में श्रद्धालु केदारनाथ धाम में कार से आ सके इसकी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है. ऋषिकेश और कर्णप्रयाग को रेल मार्ग से जोड़ा जा रहा है। इससे उत्तराखंड में पर्यटन को लाभ मिलने वाला है. भगवान राम से जुड़े जितने भी तीर्थ स्थान है उनको जोड़कर पूरा सर्किट बनाने का काम चल रहा है. उत्तर प्रदेश में काशी का भी कायाकल्प हो रहा है. विश्वनाथ धाम का कार्य भी तेजी से हो रहा है. अयोध्या में भगवान राम का मंदिर पूरे गौरव के साथ बन रहा है. अयोध्या को उसका गौरव सदियों के बाद वापस

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दानापुर में दक्षिणेश्वरी मां काली बाड़ी मंदिर में भक्त जुटे

दानापुर पेठिया गली स्थित मां काली मंदिर में हुआ भंडारा भाजपा नेता सनोज यादव के साथ हजारों की संख्या में भक्तो ने प्रसाद ग्रहण किया दानापुर: दानापुर पेठिया बाजार स्थित बंगले के पास दक्षिणेश्वरी मां काली बाड़ी मंदिर के पुजारी शशांक मिश्रा एवं गोलू बाबा के नेतृत्व में आज मां काली मंदिर के परिसर में भव्य भंडारा का आयोजित किया गया था।बीजेपी नेता भाई सनोज यादव ने कहा कि माता काली के द्वारा पर आने वाले सभी भक्तजन खाली कभी नहीं जाते है जो यहां आने वाले सच्चे भक्त मन से मां काली से मुरादें मांगते है मां काली अपने भक्तगणों की मुरादें पूरी करती है। इसी वजह से देश के कोने कोने से भक्तों का मंदिर में आना जाना लगा रहता है और दानापुर में मां काली की आशिर्वाद लोगों को प्राप्त होती है।वहीं मंदिर परिसर में आयोजित भंडारा का प्रसाद ग्रहण करने आस पास से मां के भक्तगण हजारों हज़ारों की संख्या में पहुंचकर माता काली के दर्शन के बाद प्रसाद ग्रहण किया।इस अवसर पर पानापुर पंचायत के पूर्व पंचायत समिति सदस्य हरिद्वार राय, पूर्व जिला परिषद सदस्य ओमप्रकाश राय, सागर कुमार, रविशंकर प्रसाद मौजूद थे। गोलू बाबा के निमंत्रण पर मुख्य अतिथि के रूप में आज प्रदेश भाजपा नेता भाई सनोज यादव ने मंदिर परिसर में पहुंचकर माता काली की दर्शन के बाद पूजा अर्चना करने के बाद पुजारी बाबा से तिलक लगवाने के बाद चुड़ी देकर उन्होंने सम्मानित किए और देशवासियों एवं दानापुर के लिए ‌खुशहाली अमन और शांति के लिए दुआ मांगी।

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