अखंड सौभाग्य की कामना के साथ सुहागिनों ने की वट सावित्री पूजा

फुलवारी शरीफ (अजीत ) ।। वट सावित्री पूजा के मौके पर गुरुवार को सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु होने की कामना के साथ पूरी निष्ठा के साथ वट सावित्री पूजा कर अखंड सौभाग्‍य की कामना की. सबसे पहले वट (बरगद) के पेड़ के नीचे के स्थान को अच्छे से साफ कर वहां सावित्री-सत्यवान की मूर्ति स्थापित की गई. इसके पश्चात बरगद के पेड़ पर जल चढ़ाने के बाद पुष्प, अक्षत, फूल, भीगा चना, गुड़ और मिठाई चढ़ाए गए. फिर वट वृक्ष के तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेट कर सात बार परिक्रमा की.हिन्दू धर्म में बरगद के पेड़ को पूजनीय माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार इस पेड़ में सभी देवी-देवताओं का वास होता है. इसलिए बरगद के पेड़ की आराधना करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण वापस लौटाने के लिए यमराज को विवश कर दिया था. इस व्रत वाले दिन वट वृक्ष का पूजन कर सावित्री-सत्यवान की कथा को याद किया जाता है. गुरुवार को सुबह से ही नवविवाहिता सहित महिलाएं नए-नए परिधानों में सजधज कर बांस की डलिया में मौसमी फल, पकवान प्रसाद के रुप में लेकर वट वृक्ष के पास पहुंचीं. वहीं घरों में भी व्रत का अनुष्‍ठान विधि विधान से पूरा किया गया. दुलहन की तरह सजी धजी महिलाओं ने प्रसाद चढ़ा कर वट वृक्ष की पूजा की, वट वृक्ष में कच्चा धागा बांधी और पंखा झेल कर पति के दीर्घायु होने और अखंड सौभाग्‍य की कामना की. व्रत करने

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26 मई के ग्रहण से जुड़ी वो बातें जो आपको जानना चाहिए

26 मई को होने वाले चंद्र ग्रहण को लेकर पूरी जानकारी के लिए आप नीचे दिए गए वीडियो को क्लिक कर देख सकते हैं. pncb

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परिवार से बड़ा कोई धन नहीं

भले आज की दुनिया “विश्व परिवार दिवस” मनाने का चलन शुरू किया हो, लेकिन हमारी परंपरा सदियों पुरानी है, जो आज भी चली आ रही है “वसुधैव कुटुंबकम”. आज ” वसुधैव कुटुंबकम को ही विश्व के देश विश्व परिवार दिवस के रूप में मना रहे हैं. यह हमारे पुरखों ने स्थापित किया था समूची पृथ्वी पर वास करने वाले जीवो को अपना कुटुम्ब मानते हैं. हम मानव, नदियों, तालाबों, झरनों, पहाड़ों, पेड़ ,पौधे ,पशु, पक्षी, मत्स्य, पानी ,आग, हवा ,मिट्टी ,आकाश ,सूर्य, चंद्र ,नक्षत्र, ग्रह ,तारे,यानी समस्त चराचर जीवोंं की पूजा करने वाली हमारी संस्कृति है. हमारी परंपरा रही है. भले आज परिवार का दायरा छोटा हो गया. धीरे-धीरे हम सिमटते हुए पति ,पत्नी, बच्चे तक आ गए, बहुत हुआ तो बूढ़े मां बाप तक सीमित हो गए. एक समय संयुक्त परिवार का चलन था दादा, परदादा तक सारे परिवार एक साथ जुड़कर रहते थे. अभी भी गांव के गांव गोतिया ,लैया ,भैयारी चलता है. आज भी अतिथि को हम पूजते हैं. “अतिथि देवो भव:” हमारा चारित्रिक, व्यवहारिक सूत्र वाक्य है. आगंतुकों का सत्कार कर हम खुश होते हैं. हम “सर्वे भवंतू सुखिनः,सर्वे संतु निरामया “को मानने वाले हैं. हमने दुनिया को राम के रूप में आदर्श स्थापित करने वाला महान राजा का संदेश दिया. हमने कृष्ण के रूप में दुनिया को प्यार का पाठ का संदेश देने वाला भगवान दिया. हमने बुद्ध एवं महावीर के रूप में सत्य, अहिंसा का पाठ दुनियाँ को पढ़ाया. हमने गांधी के रूप में शांति से क्रांति को सफल सिद्ध कर दिखाया. आज भी

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भगवान परशुराम की कहानी, पंडित जी की जुबानी

भगवान परशुराम के बारे में तो कई लोगों ने सुना है लेकिन क्या आप उनके बारे में पूरी जानकारी रखते हैंं. इस वर्ष परशुराम जयंती कब मनाई जाएगी और क्या है भगवान परशुराम का भगवान विष्णु संबंध. आइए जानते हैं पूरी कहानी और परशुराम जयंती के बारे में जानकारी इस महत्वपूर्ण वीडियो के माध्यम से. pncb

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हर घर तक पहुंचा भगवान महावीर का संदेश

कोरोना काल मे परिवार को किया एकजुट, श्रद्धा-भक्ति ने दी हर घर पर दस्तक आरा (भोजपुर),25 अप्रैल. कोविड संक्रमण के दौर में भी जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती आज जिले में बड़े ही धूमधाम से मनाई गयी. इस बार की जयंती अबतक के जयंतियों से काफी अलग और सही मायने में देखा जाय तो सबसे ज्यादा प्रभावशाली,भक्ति और हर जन को सम्मिलित किये हुए था. अब आप यह सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या था और अनोखा कैसे रहा आज का जयंती? दरअसल कोविड संक्रमण के इस दौर में बिहार में जहाँ 15 मई तक नाइट कर्फ्यू की वजह से मंदिर और सामुहिक जलसों में लोगों के मिलजुल पर रोक है. आमतौर पर कोई पर्व,त्योहार या जलसों में सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की भागीदारी और धूमधाम होती है. ऐसे जलसों में सबसे ज्यादा युवाओं की भागीदारी रहती है लेकिन बुजुर्ग अक्सर घरों में रहते हैं. कोरोना काल के कारण इस बार जैन समुदाय ने भगवान महावीर की जयंती सामूहिक न करके सभी लोगों को घर पर मनाने का फैसला लिया. इसका परिणाम यह हुआ कि सार्वजनिक स्थलों में जहां शहर के धर्मिक स्थलों पर भीड़ नही हुआ वही भगवान महावीर के प्रति श्रद्धा और उनके जयंती में हर घर के बुजुर्ग दम्पति भी शामिल हुए और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ अपने आराध्य की जयंती लोगों ने धूमधाम से मनायी. आपस मे परिवार वालों का एक साथ किसी अनुष्ठान में इतने व्यापक पैमाने पर बड़े दिनों बाद देखने को मिला. लोगों ने पूजा के बाद बड़ो का

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अनोखे अंदाज में आज मनेगी भगवान महावीर की जयंती

घर-घर गूंजेंगे भगवान महावीर के अमर सन्देश आरा (भोजपुर),25अप्रैल. कोविड महामारी को लेकर जहाँ सभी वर्क फ्रॉम होम और घर से बाहर लोग कम से कम निकल रहे हैं और जरूरी कामों को अंजाम दे रहे हैं ऐसे में कुछ लोग एंजाइटी के शिकार भी हो रहे हैं लेकिन क्रिएटिव और पॉजिटिव सोच रखने वाले ऐसी विपत्ति काल मे भी घरों में रहते हुए कैसे कोई पर्सनल या सामाजिक कार्य किया जाय इसको अंजाम देने में लगे हैं. ऐसे ही कार्यों में इन दिनों जैन समुदाय से जुड़े लोग लगे हुए हैं,जिनके लिए भगवान महावीर की जयंती मनाना एक चैलेंज के रूप में लिया है. इसबार वे कुछ अनोखे अंदाज में भगवान महावीर की जयंती कोविड नियमों के 100 प्रतिशत पालन के साथ बड़े ही रोचक तरीके से कर रहे हैं. जी हाँ आज रविवार है और भगवान महावीर की जयंती भी आज है. इसबार यह जयंती हर साल से ज्यादा व्यापक और भक्तिमय तरीके से मनाया जा रहा है. जी हाँ चौंकिए मत! बस यूं समझिए कि इस बार यह जयंती घर-घर मे मनाई जा रही है. न लोगों की भीड़ होगी, न सड़कों पर कोई भीड़ का आलम, लेकिन भगवान महावीर की जयंती पर भक्ति में लीन होंगे आज हर घरों में उनके अनुयायी! जी हाँ! कुछ इसी अंदाज में मनेगा आज जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती. जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्मकल्याणक महोत्सव बड़े ही भक्तिपूर्वक रविवार को मनाया जायेगा,लेकिन इस बार कोविड-19 महामारी के कारण गलियों में

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आज नहींं रिलीज होगा आरण्य चालीसा

आरण्य चालीसा पर कोरोना का कहर! चैत नवमी को रिलीज होने वाली आरण्य चालीसा स्थगित आरा की अधिष्ठात्री आरण्य देवी की आरती और चालीसा की हुई थी शूटिंग आरा,21 अप्रैल. कोरोना ने आम जन जीवन मेंं इस कदर तबाही ला दी है कि लोग अपनी दिनचर्या तक भी ठीक नहींं कर पा रहे हैं. मनुष्य का सामाजिक से धार्मिक परिवेश बदल चुका है. यहाँ तक कि अब देवी-देवताओं से जुड़े कार्यों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं. मंदिर में भगवान तो पहले ही कैद हो चुके हैं. अब इनके भजन,चालीसा और आरती पर भी संकट के मेघ उमड़ रहे हैं. जी हाँ सुनने में आश्चर्य जरूर लग रहा होगा लेकिन यह यथार्थ है. शाहाबाद जनपद की अधिष्ठात्री,आरण्य देवी का चालीसा और आरती पिछले दिनों शूट किया गया था जिसका वीडियो नवमी को रिलीज होना तय हुआ था. लेकिन कोरोना की वजह से अब यह चालीसा और आरती अधर में लटक गया है. चैत नवमी को शक्ति की देवी का दिन माना जाता है और हिन्दू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है. इसी पावन दिवस को ध्यान में रखकर निर्माता ने यह आरती माँ को समर्पित करने का प्लान किया था लेकिन वह फिलहाल कोरोना के कहर से स्थगित हो गया है. कोरोना से जबतक स्थिति सामान्य नहींं होती रिलीज की अगली डेट का अनुमान निर्माता नही बता पा रहे हैं. बता दें कि माँ आरण्य क्रिएशन के बैनर तले आरा की अधिष्ठात्री देवी माँ आरण्य का चालीसा और आरती के ऑडियो का निर्माण पिछले वर्ष ही जारी

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वासंतीय नवरात्र की पूरी जानकारी

13 अप्रैल से मां दुर्गा की आराधना का पर्व वासंती नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है. मां भवानी इस बार कई खास योग और संयोग के साथ अपने भक्तों का कल्याण करने आई हैं. इस बार के वासंतीय नवरात्र की पूरी जानकारी आप वीडियो को देखकर प्राप्त कर सकते हैं. pncb

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32 वर्षों में 3000 से ज्यादा उपवास वाले सन्त का धर्मनगरी में हुआ आगमन

जैन संत अंतर्मन आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज जी ससंघ का हुआ मंगल प्रवेश आरा,8मार्च. 32 वर्षों में 3000 से ज्यादा उपवास की कठिनतम साधना वाले संत का धर्मनगरी में रविवार को आगमन हुआ. मंदिरों की धर्मनगरी आरा में, जैन आचार्य अंतर्मन श्री प्रसन्न सागर महाराज ससंघ का जैन धर्मावलंबियों के द्वारा भव्य मंगल प्रवेश रविवार को बड़े ही भक्तिपूर्वक हुआ. प्रातः समय बामपाली स्थित ज्ञान ज्योति आवासीय विद्यालय में जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा संपन्न हुआ. आचार्य ससंघ का नगर आरा स्थित श्री 1008 अतिशयकारी चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर के लिए मंगल विहार हुआ. जैन समाज के लोगों ने आचार्य ससंघ का भव्य आगवानी किया. शहर के चंदवा मोड़ से लेकर जेल रोड स्थित जैन मंदिर तक भक्तों ने गाजा-बाजा के साथ भव्य जुलूस निकाला गया. जुलूस में भक्तों ने जैन ध्वज लहराते, गुरुदेव का जयकारा लगाते, पुष्पवृष्टि करते हुये जैन मंदिर पहुँचे. वहीं आचार्य ससंघ का पाद-प्रक्षालन, मंगल आरती एवं भजन एवं धर्मसभा का आयोजन हुआ. उन्होंने धर्मसभा में भक्तों से कहा कि आरा बहुत ही पवित्र भूमि है यहां भगवान पार्श्वनाथ एवं भगवान महावीर के साथ अनेकों आचार्य एवं गुरुओं की विश्राम स्थली है, उन्होंने कहा कि आप सभी बहुत ही सौभाग्यशाली है कि इतने पवित्र भूमि परते है. श्री दिगम्बर जैन मुनि संघ के सचिव अजय कुमार जैन ने बताया कि अंतर्मन आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज के संघ में मुनि पीयूष सागर महाराज एवं ऐलक पर्वसागर महाराज है. ये संघ भारतवर्ष के विभिन्न शहरों से होते हुये धर्मनगरी आरा पहुँचे है. ये संघ

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14 या 15 जनवरी- आप कब मना रहे हैं मकर संक्रांति!

हर साल की तरह इस साल भी लोगों के मन में भ्रम है कि आखिर मकर संक्रांति किस दिन मनाएंं. इस वर्ष 14 जनवरी या 15 जनवरी को है मकर संक्रांति. तो ये पूरी जानकारी हम लेकर आए हैं आपके पास इस वीडियो के जरिए, जिसमें आपको मकर संक्रांति का महत्व और इस वर्ष किस दिन मकर संक्रांति मनाना चाहिए; यह पूरी जानकारी आपके लिए उपलब्ध कराई गई है नीचे दिए गए वीडियो में. pncb

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