पैसे की तंगी है तो ये करें

आपको भी है पैसे की तंगी तोसिर्फ इतना करें और पैसे की कमी को पूरा करेंपटना; आभासी दुनिया में कई ऐसे एप्प हैं जो आपकी मदद करते है आप भी आसानी से कुछ एप्प का इस्तेमाल करते हुए आसानी से पैसे कमाएं।देश ही नहीं विदेश के लोग पैसे कमाने के लिए दिन रात मेहनत करते है शारीरिक श्रम ,बौद्धिक श्रम, सभी अपनी रोजमर्रा की जरुरतों को पूरा करने के लिए पैसा कमाने में लगे रहते हैं. इंटरनेट पर ऐसी अनेक वेबसाइट है जहां से आप घर बैठे पैसे कमा सकते है.इंटरनेट पर ऐसी अनेक वेबसाइट है जहां से आप घर बैठे पैसे कमा सकते है. मौजूदा वक्त में आज कल सबके हाथों में एक स्मार्टफोन है पर आपको मालूम नहीं होता है कि यह फ़ोन आपको हज़ारो रुपए कमाने में मदद कर सकता है. स्मार्टफोन में आप ऐसे बहुत से एप इनस्टॉल कर सकते है और और दैनिक जरूरतों को इन एप्प मदद से आप कुछ खर्च निकाल सकते हैं. आइए जानते है ऐसी ही कुछ एप के बारे में. SquadRunस्क्वाडरन एक ऐसा एप है जिससे आप अपनी ज़िन्दगी को थोड़ा रोमांच में बदल कर पैसे कमा सकते है। बना सकते है. इस एप में आपको रोज़ नए टास्क दिए जाएंगे जिसे पूरा करके आप पैसे कमा सकते है. आपके हर मिशन पूरा करने के बाद आपको नए टास्क दिए जाएंगे जो कि आपके इंटेलिजेंस पर आधारित होंगे. जैसे-जैसे आप कार्य पूरा करते रहेंगे आपको पॉइंट्स मिलते रहेंगे जिसे आप अपने Paytm में ट्रांसफर कर सकते हैं. पॉइंट्स जब 60

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सृष्टि चक्र में छेड़छाड़ का परिणाम मानव उठा रहा है -के एन गोविंदाचार्य

प्रकृति केंद्रित विकास ही विकास का सही माॅडल है यूरोपीय देशों से ब्लैक कार्बन हवा के जरिए हिमालय में पहुंच रहा है। ऐसे में हिमालय में कार्बन की काली परत जमने के कारण ग्लेशियर के पिघलने की आशंका बढ़ गई है। किरणों की ऊर्जा को कार्बन द्वारा शोषित करने के कारण ग्लेशियरों की सेहत खराब हो रही है। जिस कारण ग्लेशियर में दरार पड़ने की आशंका बढ़ी हैविकासनगर: उत्तराखंड : – पहले गंगा उसके बाद नर्मदा और अब यमुना यात्रा पर निकले गोंविदाचार्य ने देहरादून में कहा प्रकृति केंद्रित विकास ही विकास का सही माॅडल है ।28 अगस्त से यमुना दर्शन यात्रा एवं प्रकृति केंद्रित विकास पर संवाद करते हुए केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि कहा कि यूरोपीय देशों से ब्लैक कार्बन हवा के जरिए हिमालय में पहुंच रहा है। ऐसे में हिमालय में कार्बन की काली परत जमने के कारण ग्लेशियर के पिघलने की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने मानव केंद्रित विकास की बजाए प्रकृति केंद्रित विकास की अवधारणा को आगे बढ़़ाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि हम प्रकृति से छेड़छाड़ कर अपना ही समूल नष्ट करने पर तुले हैं। भारत की असली ताकत ही प्रकृति और पर्यावरण है। इनकी अनदेखी कर विकास किए जाने पर पर्यावरणीय चक्र असंतुलन और प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप बढ़ना स्वाभाविक है। आज के समय में प्रौद्योगिकी पर लोकपाल, लोकायुक्त जैसी नियंत्रणकारी व्यवस्था की ओर दुनिया को कदम बढ़ाना चाहिए। प्रकृति केंद्रित विकास की दिशा में कार्य करना वक्त की मांग है। प्रकृति केंद्रित विकास की अवधारणा पर संवाद यात्रा का सामाजिक आयाम

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जेलों में बंद 60 फीसदी लोग बेकसूर -पूर्व डीजीपी

भगवान राम और कृष्ण को भी लोगों ने जातीय आधार पर बांट लिया मन ही दूषित हो गया है बिहार में आदमी देखकर देश का कानून काम करता है अब सिस्टम आम लोगों के लिए नहीं रह गया है बिहार में औरंगाबाद: बिहार के डीजीपी रहे कथावाचक गुप्तेश्वर पांडेय औरंगाबाद के देवकुंड मठ में कई सामाजिक-वैचारिक और पारिवारिक मुद्दों पर लोगों से बातें की । उन्होंने कहा कि सिस्टम आमलोगों के लिए अब नहीं रह गया है। आदमी देखकर देश का कानून काम करता है। जेलों में 60 फीसदी से अधिक निर्दोष लोग बंद हैं उनके मुकदमें आज भी चल रहे हैं। पूर्व डीजीपी ने कहा कि एक थानाक्षेत्र में 10 ईमानदार सामाजिक कार्यकर्ता पूरी हुकूमत को झुका सकता है। यह देश ना तो हिंदुओं का है और ना मुसलमानों समेत अन्य पंथों का। भारत की सनातन संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की है। आश्चर्य है कि आज भगवान राम और कृष्ण को भी लोगों ने जातीय आधार पर बांट लिया है।अब कौन से देवता को कौन पूजेगा ये परम्परा जो शुरू हुई है उससे सामाजिक वैमनस्य पैदा हो रहा है और साथ ही लोगों में कटुता की भावना बढ़ गई है।उन्होंने कहा कि चेतना का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। बीमार मन का इलाज अध्यात्म में ही संभव है। कोरोना काल में तड़प कर जो मौतें हो रही थी या जिस लेबल पर भ्रटाचार की जड़ें गहरी हो गई है उससे क्या लगता है कि किसका दोष है सारा दोष सिस्टम और सरकार का है। मन ही बीमार है तो

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गुरु पूर्णिमा की पूरी जानकारी सिर्फ यहां

इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के मौके पर आप क्या कर सकते हैं और इस तरह और क्यों मनाई जाती है. यह पूरी जानकारी हम आपको उपलब्ध करा रहे हैं. आप नीचे दिए गए वीडियो को क्लिक करके गुरु पूर्णिमा के बारे में अपनी जानकारी बढ़ा सकते हैं. इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 24 जुलाई को मनाई जा रही है. आखिर कैसे शुरू हुआ गुरु पूर्णिमा मनाने का क्रम हम आपको यह भी इस वीडियो के जरिए बता रहे हैं. pncb

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जलभरी से प्रारम्भ हुआ प्राण-प्रतिष्ठा यज्ञ

कोइलवर के चंदा पंचायत में 11-16 जुलाई तक चलेगा यह यज्ञ कोईलवर,11 जुलाई. मंदिर जीर्णोद्धार को लेकर कोइलवर प्रखंड के छोटका चंदा गांव में पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा व यज्ञ का आयोजन किया गया है जो 11 से 16 जुलाई तक चलेगा. इस आयोजन को लेकर आज चंदा पँचायत के छोटका चंदा गांव में जलभरी यात्रा निकाली गई. इस यात्रा में 501 कलश लिए महिला पुरुष श्रद्धालुओ ने मंदिर परिसर से कलश लेकर गंगा नदी जलभरी के लिए निकले, जहाँ सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालुओं के साथ बैंड बाजे , हाथी घोड़े के शोभा यात्रा में शामिल हुए. आयोजन के पहले दिन शोभा यात्रा, दूसरे दिन पंचाग पूजा, अमाधिवास, पुष्पाधिवास, ग्राम परिभ्रमण का कार्यक्रम होगा. वही 15 जुलाई को प्राण प्रतिष्ठा के साथ अखंड कीतर्न का कार्यक्रम होगा. 16 जुलाई को इस प्राण-प्रतिष्ठा यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ पूजा सम्पन्न होगी. आषाढ़ का नवरात्रि का पहला दिन बड़ा ही शुभ माना जाता है,इसलिए भी यज्ञ के इस कर्यक्रम की शुरुआत आज से की गई है. देवी मंदिर जीर्णोद्धार को लेकर गांव का माहौल भक्तिमय हो गया है. लेकिन इतनी भारी संख्या में लोगों का बिना मास्क के चलना चिंताजनक है. क्योंकि कोरोना अभी गया नही है. अनंलॉक 4 अभी कल से लागू हो रहा जिसके तहत स्कूल और कॉलेज 50 प्रतिशत संख्या के साथ खुल रहे हैं. कोइलवर से आमोद कुमार की रिपोर्ट

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क्यों मनाते हैं गंगा दशहरा!

क्या आप जानते हैं गंगा दशहरा का महत्व. क्यों मनाते हैं गंगा दशहरा. इस वर्ष ये बेहद महत्वपूर्ण पर्व 20 जून को मनाया जा रहा है. गंगा दशहरा से जुड़े आपके सारे सवालों के जवाब नीचे दिए गए वीडियो में आप देख सकते हैं. कोविड गाइडलाइंस के तहत इसबार कई पाबंदियां भी हैं. इसलिए गाइडलाइन का पालन करते हुए ही गंगा दशहरा मनायें. pncb

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अखंड सौभाग्य की कामना के साथ सुहागिनों ने की वट सावित्री पूजा

फुलवारी शरीफ (अजीत ) ।। वट सावित्री पूजा के मौके पर गुरुवार को सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु होने की कामना के साथ पूरी निष्ठा के साथ वट सावित्री पूजा कर अखंड सौभाग्‍य की कामना की. सबसे पहले वट (बरगद) के पेड़ के नीचे के स्थान को अच्छे से साफ कर वहां सावित्री-सत्यवान की मूर्ति स्थापित की गई. इसके पश्चात बरगद के पेड़ पर जल चढ़ाने के बाद पुष्प, अक्षत, फूल, भीगा चना, गुड़ और मिठाई चढ़ाए गए. फिर वट वृक्ष के तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेट कर सात बार परिक्रमा की.हिन्दू धर्म में बरगद के पेड़ को पूजनीय माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार इस पेड़ में सभी देवी-देवताओं का वास होता है. इसलिए बरगद के पेड़ की आराधना करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण वापस लौटाने के लिए यमराज को विवश कर दिया था. इस व्रत वाले दिन वट वृक्ष का पूजन कर सावित्री-सत्यवान की कथा को याद किया जाता है. गुरुवार को सुबह से ही नवविवाहिता सहित महिलाएं नए-नए परिधानों में सजधज कर बांस की डलिया में मौसमी फल, पकवान प्रसाद के रुप में लेकर वट वृक्ष के पास पहुंचीं. वहीं घरों में भी व्रत का अनुष्‍ठान विधि विधान से पूरा किया गया. दुलहन की तरह सजी धजी महिलाओं ने प्रसाद चढ़ा कर वट वृक्ष की पूजा की, वट वृक्ष में कच्चा धागा बांधी और पंखा झेल कर पति के दीर्घायु होने और अखंड सौभाग्‍य की कामना की. व्रत करने

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26 मई के ग्रहण से जुड़ी वो बातें जो आपको जानना चाहिए

26 मई को होने वाले चंद्र ग्रहण को लेकर पूरी जानकारी के लिए आप नीचे दिए गए वीडियो को क्लिक कर देख सकते हैं. pncb

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परिवार से बड़ा कोई धन नहीं

भले आज की दुनिया “विश्व परिवार दिवस” मनाने का चलन शुरू किया हो, लेकिन हमारी परंपरा सदियों पुरानी है, जो आज भी चली आ रही है “वसुधैव कुटुंबकम”. आज ” वसुधैव कुटुंबकम को ही विश्व के देश विश्व परिवार दिवस के रूप में मना रहे हैं. यह हमारे पुरखों ने स्थापित किया था समूची पृथ्वी पर वास करने वाले जीवो को अपना कुटुम्ब मानते हैं. हम मानव, नदियों, तालाबों, झरनों, पहाड़ों, पेड़ ,पौधे ,पशु, पक्षी, मत्स्य, पानी ,आग, हवा ,मिट्टी ,आकाश ,सूर्य, चंद्र ,नक्षत्र, ग्रह ,तारे,यानी समस्त चराचर जीवोंं की पूजा करने वाली हमारी संस्कृति है. हमारी परंपरा रही है. भले आज परिवार का दायरा छोटा हो गया. धीरे-धीरे हम सिमटते हुए पति ,पत्नी, बच्चे तक आ गए, बहुत हुआ तो बूढ़े मां बाप तक सीमित हो गए. एक समय संयुक्त परिवार का चलन था दादा, परदादा तक सारे परिवार एक साथ जुड़कर रहते थे. अभी भी गांव के गांव गोतिया ,लैया ,भैयारी चलता है. आज भी अतिथि को हम पूजते हैं. “अतिथि देवो भव:” हमारा चारित्रिक, व्यवहारिक सूत्र वाक्य है. आगंतुकों का सत्कार कर हम खुश होते हैं. हम “सर्वे भवंतू सुखिनः,सर्वे संतु निरामया “को मानने वाले हैं. हमने दुनिया को राम के रूप में आदर्श स्थापित करने वाला महान राजा का संदेश दिया. हमने कृष्ण के रूप में दुनिया को प्यार का पाठ का संदेश देने वाला भगवान दिया. हमने बुद्ध एवं महावीर के रूप में सत्य, अहिंसा का पाठ दुनियाँ को पढ़ाया. हमने गांधी के रूप में शांति से क्रांति को सफल सिद्ध कर दिखाया. आज भी

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भगवान परशुराम की कहानी, पंडित जी की जुबानी

भगवान परशुराम के बारे में तो कई लोगों ने सुना है लेकिन क्या आप उनके बारे में पूरी जानकारी रखते हैंं. इस वर्ष परशुराम जयंती कब मनाई जाएगी और क्या है भगवान परशुराम का भगवान विष्णु संबंध. आइए जानते हैं पूरी कहानी और परशुराम जयंती के बारे में जानकारी इस महत्वपूर्ण वीडियो के माध्यम से. pncb

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