कुलदेवता / कुलदेवी की पूजा क्यों करनी चाहिये ?

हिन्दू पारिवारिक आराध्य व्यवस्था में कुलदेवता/कुलदेवी का स्थान सदैव से रहा है. प्रत्येक हिन्दू परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज हैं जिनसे उनके गोत्र का पता चलता है. बाद में कर्मानुसार इन का विभाजन वर्णों में हो गया. विभिन्न कर्म करने के लिए जो बाद में उन की विशिष्टता बन गया और जाति कहा जाने लगा. हर जाति वर्ग, किसी न किसी ऋषि की संतान है और उन मूल ऋषि से उत्पन्न संतान के लिए वे ऋषि या ऋषि पत्नी कुलदेव / कुलदेवी के रूप में पूज्य हैं.  पूर्व के हमारे कुलों अर्थात पूर्वजों के खानदान के वरिष्ठों ने अपने लिए उपयुक्त कुलदेवता अथवा कुलदेवी का चुनाव कर उन्हें पूजित करना शुरू किया था जिससे कि एक आध्यात्मिक और पारलौकिक शक्ति कुलों की रक्षा करती रहे, जिससे उनकी नकारात्मक शक्तियों/ऊर्जाओं और वायव्य बाधाओं से रक्षा होती रहे तथा वे निर्विघ्न अपने कर्म पथ पर अग्रसर रह उन्नति करते रहें. समय क्रम में परिवारों के एक दुसरे स्थानों पर स्थानांतरित होने, धर्म परिवर्तन करने, आक्रान्ताओं के भय से विस्थापित होने, जानकार व्यक्ति के असमय मृत होने, संस्कारों के क्षय होने, विजातीयता पनपने, इन के पीछे के कारण को न समझ पाने आदि के कारण बहुत से परिवार अपने कुल देवता/देवी को भूल गए अथवा उन्हें मालूम ही नहीं रहा की उन के कुल देवता/देवी कौन हैं या किस प्रकार उनकी पूजा की जाती है. इनमें पीढ़ियों से नगरों में रहने वाले परिवार अधिक हैं. कुछ स्वयंभू आधुनिक मानने वाले और हर बात में वैज्ञानिकता खोजने वालों ने भी अपने ज्ञान

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भाई-बहन का प्यारा पर्व 26 को; सीएम ने दी बधाई एवं शुभकामनायें

पटना (न्यूज़ डेस्क) | श्रावण मास की पूर्णिमा को अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिये हर बहन रक्षा बंधन के दिन का इंतजार करती है. इस पर्व को मनाने के पीछे कई कहानियां हैं. यदि इसकी शुरुआत के बारे में देखें तो यह भाई-बहन का त्यौहार नहीं बल्कि विजय प्राप्ति के किया गया रक्षा बंधन है. भविष्य पुराण के अनुसार जो कथा मिलती है वह इस प्रकार है. बहुत समय पहले की बाद है देवताओं और असुरों में युद्ध छिड़ा हुआ था लगातार 12 साल तक युद्ध चलता रहा और अंतत: असुरों ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर देवराज इंद्र के सिंहासन सहित तीनों लोकों को जीत लिया इसके बाद इंद्र देवताओं के गुरु, ग्रह बृहस्पति के पास के गये और सलाह मांगी बृहस्पति ने इन्हें मंत्रोच्चारण के साथ रक्षा विधान करने को कहा श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन गुरू बृहस्पति ने रक्षा विधान संस्कार आरंभ किया इस रक्षा विधान के दौरान मंत्रोच्चारण से रक्षा पोटली को मजबूत किया गया पूजा के बाद इस पोटली को देवराज इंद्र की पत्नी शचि जिन्हें इंद्राणी भी कहा जाता है, ने इस रक्षा पोटली के देवराज इंद्र के दाहिने हाथ पर बांधा. इसकी ताकत से ही देवराज इंद्र असुरों को हराने और अपना खोया राज्य वापस पाने में कामयाब हुए. वर्तमान में यह त्यौहार बहन-भाई के प्यार का पर्याय बन चुका है, कहा जा सकता है कि यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करने वाला पर्व है. एक ओर जहां भाई-बहन के प्रति अपने दायित्व निभाने का

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नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन से साल में सिर्फ एक बार होने वाला प्रसारण देखें

आज श्रावण मॉस की शुक्ल पंचमी अर्थात नागपंचमी है. उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) पर ही दर्शनों के लिए खोला जाता है. ऐसी मान्यता है कि नागराज तक्षक स्वयं मंदिर में रहते हैं. नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक का देखें उज्जैन से नागचंद्रेश्वर का लाइव विडियो…. नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन से साल में सिर्फ एक बार यहाँ प्रसारण देखें      http://117.240.185.24/fb.html

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क्यों मन्नतें पूरी करते हैं नालंदा के लंगोट बाबा

बिहारशरीफ/पटना (ब्यूरो रिपोर्ट)। बिहारशरीफ शहर के अखाड़ा में महान संत बाबा मणिराम की समाधि है. यह देश का अकेला ऐसा स्थल है जहां लोग आकर लंगोट चढ़ाते हैं और पूजा कर मन्नतें माँगते है. सूफी संतों की धरती कही जाने वाली बिहारशरीफ की धरती और यहां के बाबा मणिराम की समाधि काफी प्रसिद्ध है. लंगोट अर्पण मेले की खासियत यह है कि मेले की शुरुआत सबसे पहले जिला प्रशासन द्वारा लंगोट अर्पण कर की जाती है. लंगोट अर्पण मेले के पीछे की कहानी 1248 ई. में बाबा मणिराम हरिद्वार से बिहारशरीफ आए और शहर के दक्षिणी छोर पर स्थित पिसत्ता घाट जिसे आज बाबा मणिराम अखाड़ा के नाम से जाना जाता है, पर डेरा डाला था. सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ उन्होंने स्वच्छ मन के लिए स्वच्छ तन जरूरी है का उपदेश दिया था. इसके लिए एक अखाड़ा बनवाया जो आज भी मौजूद है. लोग यहां मल्लयुद्ध करते थे. खुद बाबा भी बहुत बड़े मल्लयुद्ध योद्धा थे. सन 1300 ईस्वी में बाबा ने समाधि ली थी. बाद में इनके चार शिष्यों में से दो अयोध्या निवासी राजा प्रह्लाद सिंह और वीरभद्र सिंह तथा दो अन्य बिहारशरीफ के कल्लड़ मोदी और गूही खलीफा ने भी समाधि ली थी. यहां मां तारा मंदिर, सूर्य मंदिर तालाब और यज्ञशाला, शिवालय सहित प्राचीन मूर्तियां मौजूद है. यहां के शिवालय का महत्व इस कारण काफी है कि वहां एक ही मंदिर में एक साथ चार शिवलिंग स्थापित है. मांगलिक कार्यों लिए बाबा मणिराम अखाड़ा काफी प्रसिद्ध है. कब शुरू हुआ लंगोट चढ़ाने का प्रचालन

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बाबा ब्रह्मेश्वर का देखिये आज का यह रूप

ब्रह्मपुर के बाबा ब्रह्मेश्वर का आज का यह रूप जो आपको बना देगा भग्यशाली. कीजिये इनका दर्शन और मांगिये अपनी मन्नते सच्चे मन से. जय बाबा ब्रह्मेश्वर.. हर हर महादेव..आपका दिन शुभ हो

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आज का पंचांग

🚩श्री गणेशाय नम:🚩 📜 दैनिक पंचांग 📜 ☀ 12 – Jun – 2018 ☀ Patna, India ☀ पंचांग 🔅 तिथि : त्रयोदशी 07:36:16 चतुर्दशी 28:35:58 🔅 नक्षत्र कृत्तिका 19:07:44 🔅 करण : वणिज 07:36:16 विष्टि 18:09:19 🔅 पक्ष कृष्ण 🔅 योग सुकर्मा 12:48:27 🔅 वार मंगलवार ☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ 🔅 सूर्योदय 05:22:40 🔅 चन्द्रोदय 28:52:59 🔅 चन्द्र राशि वृषभ 🔅 सूर्यास्त 19:19:08 🔅 चन्द्रास्त 17:41:59 🔅 ऋतु ग्रीष्म ☀ हिन्दू मास एवं वर्ष 🔅 शक सम्वत 1940 विलम्बी 🔅 कलि सम्वत 5120 🔅 दिन काल 13:56:27 🔅 विक्रम सम्वत 2075 🔅 मास अमांत ज्येष्ठ (अधिक) 🔅 मास पूर्णिमांत ज्येष्ठ (अधिक) ☀ शुभ और अशुभ समय ☀ शुभ समय 🔅 अभिजित 11:53:01 – 12:48:47 ☀ अशुभ समय 🔅 दुष्टमुहूर्त 08:09:58 – 09:05:44 🔅 कंटक 06:18:26 – 07:14:12 🔅 यमघण्ट 10:01:30 – 10:57:15 🔅 राहु काल 15:50:01 – 17:34:34 🔅 कुलिक 13:44:33 – 14:40:19 🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 08:09:58 – 09:05:44 🔅 यमगण्ड 08:51:47 – 10:36:21 🔅 गुलिक काल 12:20:54 – 14:05:27 ☀ दिशा शूल 🔅 दिशा शूल उत्तर ☀ चन्द्रबल और ताराबल ☀ ताराबल 🔅 भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढा, उत्तराषाढा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, रेवती ☀ चन्द्रबल 🔅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन

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मंगलवार 5 जून, 2018 का दैनिक पंचांग और राशिफल

मंगलवार 5 जून, 2018 का दैनिक पंचांग तिथि: षष्ठी, 09:15 तक नक्षत्र: धनिष्ठा, 17:44 तक योग: वैधृति, 22:37 तक प्रथम करण: वणिजा, 09:15 तक द्वितिय करण: विष्टि, 22:17 तक वार: मंगलवार सूर्योदय: 05:56 सूर्यास्त: 18:40 चन्द्रोदय: 24:01 चन्द्रास्त: 11:12 शक सम्वत: 1940 विलम्बी अमान्ता महीना: वैशाख पूर्णिमांत: ज्येष्ठ सूर्य राशि: वृषभ चन्द्र राशि: कुम्भ पक्ष: कृष्ण शुभ मुहूर्त अभिजीत: 11:52 − 12:43 अमृत कालम्: 06:06 − 07:54 द्विपुष्कर योग: 09:16 से 17:58 रवि योग: 05:02 से 17:58 अशुभ मुहूर्त गुलिक काल: 12:18 − 13:53 यमगण्ड: 09:07 − 10:42 दूर मुहूर्तम्: 02:37 − 02:39 12:50 − 14:28 व्रज्याम काल: कोई नहीं राहू काल: 15:29 − 17:04 निवास और शूल होमाहुति: गुरु दिशा शूल: उत्तर राहु वास: पश्चिम अग्निवास: आकाश – 09:16 तक                   पाताल भद्रावास: मृत्यु से 09:16 से 22:20 चन्द्र वास: पश्चिम मंगलवार 5 जून, 2018 का दैनिक राशिफल मेष – आपके प्रियजनों के साथ आपके संबंधों का परिणाम आपके स्वयं के कार्यों से निर्धारित होगा। अगर रिश्तों में सुधार करने और बंधन को मजबूत करने के लिए एक चीज की जरूरत है, तो वह आप ही हैं। किसी और के आने के लिए इंतजार न करें कि वह आपके लिए कुछ करे। जानते हैं कि आपके लिए कौन मायने रखते हैं और प्रयास करें। भाग्यशाली रंग: रेड, वायलेट भाग्यशाली अंक: 27, 36 वृष – अतीत के बकाया पैसे आज मिल जाएंगे। यदि किसी से आपने बकाया लेने है तो उसके वापस आने की संभावना अधिक है। एक बुद्धिमान निवेश समय की आवश्यकता है। कोई भी कार्रवाई करने से पहले

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सोमवार 4 जून, 2018 का दैनिक पंचांग और राशिफल

सोमवार 4 जून, 2018 का दैनिक पंचांग तिथि: पंचमी, 06:52 तक नक्षत्र: श्र‌ावण, 14:54 तक योग: इंद्र, 21:51 तक प्रथम करण: तैतिल, 06:52 तक द्वितिय करण: गारा, 20:05 तक वार: सोमवार सूर्योदय: 05:02 सूर्यास्त:18:33 चन्द्रोदय: 23:04 चन्द्रास्त: 09:34 शक सम्वत: 1940 विलम्बी अमान्ता महीना: वैशाख पूर्णिमांत: ज्येष्ठ सूर्य राशि: वृषभ चन्द्र राशि: मकर पक्ष: कृष्ण शुभ मुहूर्त अभिजीत: 11:20 − 12:14 अमृत कालम्: कोई नहीं सर्वार्थ सिद्धि योग: 05:02 से 15:06 रवि योग: 15:06 से 29:02+ अशुभ मुहूर्त गुलिक काल: 13:29 − 15:10 यमगण्ड: 10:06 − 11:47 दूर मुहूर्तम्: 01:46 − 01:49 01:53 − 01:55 व्रज्याम काल: कोई नहीं राहू काल: 06:43 − 08:24 निवास और शूल होमाहुति: गुरु दिशा शूल: पूर्व राहु वास: उत्तर-पश्चिम अग्निवास: पृथ्वी चन्द्र वास: दक्षिण – 28:35+ तक पश्चिम से 28:35+ से पूर्ण रात्रि सोमवार 4 जून, 2018 का दैनिक राशिफल मेष – आपका वित्त का भाव वर्तमान में बहुत गतिविधियाँ हो रही है। उतार चढ़ाव बढ़ रहे हैं लेकिन चिंता का कोई कारण नहीं है। थोड़ी रुकावटों के बावजूद, थोड़े समय बाद आपकी मौद्रिक स्थिति स्थिर हो जाएगी। नियमित रूप से योग जीवन में सभी प्रकार की नकारात्मकताओं को हराने का सबसे अच्छा तरीका है। भाग्यशाली रंग: वाइन रेड, गोल्ड भाग्यशाली अंक: 26, 35 वृष – समूह और सामुदायिक गतिविधियों में आज आपकी रुचि हो सकती हैं। आप कुछ अच्छे विचारों से भरे हुए हैं और अन्य सर्वसम्मति से आपके विचारों का समर्थन करेंगे। असंख्य विषयों में आपकी दिलचस्पी नेतृत्व की स्थिति प्राप्त करने की आपकी संभावना में वृद्धि करेगी। यह आपके लिए एक

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रविवार 3 जून, 2018 का दैनिक पंचांग और राशिफल

रविवार 3 जून, 2018 का दैनिक पंचांग तिथि: पंचमी, 30:52 तक नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा, 11:49 तक योग: ब्रह्मा, 20:50 तक प्रथम करण: कौवाला, 17:35 तक द्वितिय करण: तैतिल, 30:52 तक वार: रविवार सूर्योदय: 05:02 सूर्यास्त: 18:33 चन्द्रोदय: 22:24 चन्द्रास्त: 08:43 शक सम्वत: 1940 विलम्बी अमान्ता महीना: वैशाख पूर्णिमांत: ज्येष्ठ सूर्य राशि: वृषभ चन्द्र राशि: मकर पक्ष: कृष्ण अशुभ मुहूर्त गुलिक काल: 15:10 − 16:51 यमगण्ड: 11:47 − 13:28 दूर मुहूर्तम्: 00:58 − 01:00 व्रज्याम काल: 16:31 से 18:19 राहू काल: 16:51 − 18:33 शुभ मुहूर्त अभिजीत: 11:20 − 12:14 अमृत कालम्: 27:21+ से 29:10+ सर्वार्थ सिद्धि योग: 05:02 से 12:00 निवास और शूल होमाहुति: मंगल – 12:00 तक गुरु दिशा शूल: पश्चिम राहु वास: उत्तर अग्निवास: पाताल चन्द्र वास: दक्षिण रविवार 3 जून, 2018 का दैनिक राशिफल मेष – आपका वित्त का भाव वर्तमान में बहुत गतिविधियाँ हो रही है। उतार चढ़ाव बढ़ रहे हैं लेकिन चिंता का कोई कारण नहीं है। थोड़ी रुकावटों के बावजूद, थोड़े समय बाद आपकी मौद्रिक स्थिति स्थिर हो जाएगी। नियमित रूप से योग जीवन में सभी प्रकार की नकारात्मकताओं को हराने का सबसे अच्छा तरीका है। भाग्यशाली रंग: वाइन रेड, गोल्ड भाग्यशाली अंक: 26, 35 वृष – समूह और सामुदायिक गतिविधियों में आज आपकी रुचि हो सकती हैं। आप कुछ अच्छे विचारों से भरे हुए हैं और अन्य सर्वसम्मति से आपके विचारों का समर्थन करेंगे। असंख्य विषयों में आपकी दिलचस्पी नेतृत्व की स्थिति प्राप्त करने की आपकी संभावना में वृद्धि करेगी। यह आपके लिए एक शानदार चरण है। जागें और दिनचर्या में जुट जायें! भाग्यशाली

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शनिवार 2 जून, 2018 का दैनिक पंचांग और राशिफल

शनिवार 2 जून, 2018 का दैनिक पंचांग तिथि: चतुर्थी, 28:17 तक नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा, 08:42 तक योग: शुक्ला, 19:45 तक प्रथम करण: बावा, 15:01 तक द्वितिय करण: बालवा, 28:17 तक वार: शनिवार सूर्योदय: 05:02 सूर्यास्त: 18:32 चन्द्रोदय: 21:41 चन्द्रास्त: 07:52 शक सम्वत: 1940 विलम्बी अमान्ता महीना: वैशाख पूर्णिमांत: ज्येष्ठ सूर्य राशि: वृषभ चन्द्र राशि: धनु पक्ष: कृष्ण अशुभ मुहूर्त गुलिक काल: 05:02 − 06:43 यमगण्ड: 13:28 − 15:10 दूर मुहूर्तम्: 23:28 − 21:55 21:55 − 20:21 व्रज्याम काल: कोई नहीं राहू काल: 08:24 − 10:06 शुभ मुहूर्त अभिजीत: 11:20 − 12:14 अमृत कालम्: 28:46+ से 30.34+ निवास और शूल होमाहुति: मंगल दिशा शूल: पूर्व राहु वास: पूर्व अग्निवास: पृथ्वी चन्द्र वास: पूर्व – 15:38 तक दक्षिण से 15:38 से पूर्ण रात्रि शनिवार 2 जून, 2018 का दैनिक राशिफल मेष – आप काम और सामाजिक दायित्वों में बहुत व्यस्त हैं। आपने बहुत समय से ब्रेक नहीं लिया है और खुद के लिए कुछ नहीं किया है। आपको स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। आपका जीवन बेहतर होने के लिए ताजा बदलाव ले सकता है आप या तो एक अजनबी या आपके करीबी से मिल सकते हैं, आपको मार्गदर्शन की जरूरत है। इसके लिए खुले रहें, खासकर अगर यह करीबी दोस्त से आता है क्योंकि यह आपके लाभ के लिए ही होगा। भाग्यशाली रंग: सामन पिंक, जेट भाग्यशाली अंक: 12, 21 वृष – आपके साथी के साथ आपकी राय में अंतर हो सकता है। इसका कारण कुछ पारिवारिक मुद्दों का उठना है। अच्छे मौद्रिक लाभ के लिए भाग्य आज आप

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