छठ और सूर्योपासना के मायने

▪️आज जिसकी पूजा का दिन है, वह उन ऋषियों का सूर्य नहीं जिसने उसे सप्ताश्व, मार्तंड और पूषण जैसे वेदोक्त पर्यायों से पुकारा था। यह उन वैज्ञानिकों का सूर्य भी नहीं जो पृथ्वी से उसकी दूरी उसकी किरणों के यात्रा-समय में मापते हैं और अपनी भौतिक जिज्ञासा से प्रेरित होकर यह जान पाने में सफल हो गए हैं कि सूर्य तरल आग और अणुओं-परमाणुओं के बेहद नियंत्रित टूट की प्राकृतिक प्रयोगशाला है! यह उन पंडितों का भी दिन नहीं जिन्हें हम उनके कर्म से अधिक उनके काण्ड से जानते हैं. ▪️यह उन मनुष्यों का दिन है जिन्होंने रात की जानलेवा सुरंग में अपनों और अपने जैसों को खोया था. जिनके लिए आसमान में उगा सोने का गोला एक चमत्कार था और उसका चाँदी जैसी धूप में बदल जाना आकाश का पृथ्वी से प्यार। यह उन पुरखों का दिन है जिनके पास देह को गर्म करने के लिए आग तक नहीं थी।जंगली जाड़े की बेहद ठंडी रातों में तन-मन से ठंडे पत्थरों की गुफा में जीने भर ऊष्मा के लिए दूसरी मानव देह के सिवा और क्या रहा होगा उनके पास ? और क्या रहा होगा सूर्य की ऊष्मा के सिवा जब छोटे दिनों की ठंडी हवाएँ उनके नंगे बदन को चींथकर रख देती होंगी. तब किसे मालूम था कि पेड़ के पत्ते सूर्य के प्रकाश में अपने और अपने इर्द गिर्द बसे जीवों के लिए खाना बनाते हैं; और यह भी किसे पता था कि ऋतु के चक्र का रिंग मास्टर सूर्य ही है और पृथ्वी का गर्भाधान बीज मात्र

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शारदीय नवरात्र की पूरी जानकारी

दुर्गा पूजा कब से है. नवरात्र में कलश स्थापना 2020 में किस दिन होगी. शारदीय नवरात्र में मां की आराधना कैसे करें. इन तमाम सवालों के जवाब जानने हैं तो क्लिक कीजिए और सुनिए कैसे होती है कलश स्थापना और किस विधि से होती है मां की आराधना. कोरोना महामारी को लेकर इस वर्ष पटना सहित अन्य जगहों पर भी पंडाल और मूर्तियों का निर्माण नहीं हो रहा है. ज्यादातर जगहों पर कलश स्थापना कर मां की पूजा होगी और इस महामारी से लोगों को बचाने की प्रार्थना की जाएगी. OP Pandey

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हरितालिका पूजन-विधि

सुयोग्य वर प्राप्ति और अखंड सौभाग्य की कामना से किया जानेवाला हरितालिका तीज का व्रत इस वर्ष 21 अगस्त, दिन-शुक्रवार को है.तो चलिए जानते हैं कि इस व्रत की विधि क्या है और इस व्रत करने का महत्त्व क्या हैसौभाग्यवती स्त्रियां अपने सुहाग को अखण्ड बनाए रखने और कुंवारी कन्याएं मनोवांछित वर के लिए लिए हरितालिका तीज का व्रत करती हैं.माना जाता है कि सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए इस कठिन व्रत को किया था.इसलिए इस दिन विशेष रूप से गौरी−शंकर का ही पूजन किया जाता है. हरितालिका पूजन-विधिव्रत के एक दिन पहले सात्विक भोजन करें.सुबह जल्दी उठ कर स्नान करें.दिन भर पूजा की तैयारी करेंपुनः शाम को स्नान करने के बाद नवीन वस्त्र धारण करेंऔर सोलह श्रृंगार करेंहरितालिका तीज का पूजन प्रदोषकाल में किया जाता है.यह दिन और रात के मिलन का समय होता है.पूजन के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू या काली मिट्टी की प्रतिमा अपने हाथों से बनाएं.पूजास्थल को फूलों से सजाकर एक चौकी रखें और उस चौकी पर केले के पत्ते रखकर भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें.स्वस्तिवाचन के बाद देश काल का उच्चारण कर ‘उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिकाव्रतमहं करिष्ये’ मंत्र से व्रत संकल्प करेंइसके बाद सर्वप्रथम भगवान गणेश का षोडशोपचार पूजन करेंऔर फिर माता-पार्वती और भगवान शिव की एक साथ विधि-विधानपूर्वक पूजा करें.सुहाग की पिटारी में सुहाग की सारी सामग्री सजा कर माता पार्वतीजी को अर्पित करेंभगवान शंकर को भी धोती और अंगोछा चढ़ाएं.इस व्रत के व्रती

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एक तरफ लक्ष्मण, एक तरफ सीता, बीच में जगत के पालनहारी…

साकार हुआ सपना, आज से मंदिर निर्माण शुरू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व के करोड़ों लोगों की आस्था को साकार रूप देने के लिए अयोध्या पहुंचे. पांच अगस्त को शुभ मुहूर्त में भूमि पूजन के साथ अयोध्या में राम मंदिर का वर्षों पुराना सपना साकार रूप लेने जा रहा है. सीधी तस्वीरें नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करके देख सकते हैं. Live from Ayodhya साभार कुछ ऐसा होगा अयोध्या में श्रीराम का मंदिर PNCB

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कैसे हुई रक्षाबंधन की शुरुआत और क्या है राखी का उपयुक्त समय!

ज्योतिष की नजर में राखी भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक बन चुका रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है. रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करने वाला पर्व है. एक ओर जहां भाई अपनी बहन के प्रति अपने दायित्व निभाने का वचन देता है, तो दूसरी ओर बहन भी भाई के सुख और समृद्धि के साथ-साथ लंबी उम्र की कामना करती है. इस दिन भाई की कलाई पर जो राखी बहन बांधती है वह सिर्फ रेशम की डोर या धागा मात्र नहीं होती बल्कि वह बहन-भाई के अटूट और पवित्र प्रेम का बंधन होता है.ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार सोमवार को रक्षाबंधन का संयोग अत्यंत ही शुभ माना गया है. इस बार रक्षाबंधन के दिन 8 बजकर 29 मिनट तक भद्रा है. इसलिए 8 बजकर 29 मिनट के बाद दिन भर रक्षाबंधन के लिए शुभ मुहूर्त्त है.इसमें भी विशेष रूप से सुबह 9 से 10.30 बजे तक शुभदोपहर 1.30 से 3 बजे तक चरदोपहर 3 से 4.30 बजे तक लाभशाम 4.30 से 6 बजे तक अमृतऔर शाम 6 से 7.30 बजे तक चर का चौघड़िया रहेगा.इस दिन जहां बहनें अपने भाइयों की कलाई में रक्षासूत्र बांधकर उनके सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं, वहीं पुरोहित तथा आचार्य भी सुबह-सुबह यजमानों के घर पहुँचकर उन्हें राखी बाँधते हैं और बदले में धन, वस्त्र और भोजन आदि प्राप्त करते हैं. यह पर्व भारतीय समाज में इतनी व्यापकता और गहराई से समाया हुआ है कि इसका सामाजिक महत्त्व तो है ही, धर्म, पुराण, इतिहास, साहित्य और

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देवघर से लाइव दर्शन बाबा बैद्यनाथ

देवघर से सीधा प्रसारण सोमवार के दिन अगर देवघर से बाबा बैद्यनाथ लाइव दर्शन हो जाए तो क्या कहने. आइए देखते हैं सोमवारी पर बाबा भोलेनाथ की पूजा का सीधा प्रसारण. साभार

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देवघर में इस वर्ष नहींं लगेगा श्रावणी मेला

तय समय सीमा में ही होगी पूजादेवघर, और दुमका सीमा में बाहर के किसी भी बसों पर पूर्ण रोक पटना,3 जुलाई. सावन के महीने में देश भर आने वाले शिवभक्त इस वर्ष बाबाधाम में बाबा को जल नही चढ़ा पाएँगे. कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए झारखंड सरकार ने इस साल श्रावणी मेले का आयोजन रदद् कर दिया है. वैसे तो सालोभर बाबा की नगरी देवघर गुलजार रहता है लेकिन श्रावणी मेले में इसकी छँटा देखने लायक होती है. जो इस बार देखने को नही मिलेगी. यहाँ तक कि शिवगंगा में स्नान तक करने पर सरकार ने रोक लगा दी है. सावन के महीने में लगने वाले श्रावणी मेले के आयोजन को लेकर झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने दुमका और देवघर उपायुक्त से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बात कर कई निदेश दिए हैं. मंदिर परिसर को पूरी तरह से हाई जेनिक करने के साथ रंग-रोगन कर देवघर व बासुकीनाथ मंदिर को और भव्य बनाने का निर्देश दिया है. सीएम ने निर्देश जारी कर कहा है कि बैरीकेडिंग कर शिवगंगा को अच्छी तरह से धेरा जाए ताकि कोई भी उसमें स्नान न कर सके. मुख्यमंत्री ने सूचना तंत्र को मजबूत करने को कहा है जिससे श्रद्धालु एक जगह जमा न हो सकें. पूरे सावन लगभग एक महीने तक इस अवधि में राज्य सरकार ने किसी भी राज्य से देवघर और दुमका की सीमा में बसों के आने तक पर पाबंदी लगा दी है. सरकार ने पदाधिकारियों से कहा है कि झारखण्ड की सीमा पर सूचना वे जगह-जगह सूचना

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ढाई महीने बाद खुल रहे हैं मंदिर के द्वार, अरण्य देवी मंदिर में कुछ ऐसी होगी व्यवस्था

8 जून से धार्मिक स्थल, होटल और शॉपिंग मॉल खुलेंगे केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार, सोमवार आठ जून से सभी धार्मिक स्थल, होटल, रेस्टोरेंट और शॉपिंग मॉल खुल जाएंगे. आरा स्थित माँ आरण्य देवी मंदिर के महंत मनोज बाबा ने बताया किदेवी का दरबार आठ जून से सभी भक्तों के लिए खोलने का निर्णय हो गया है. आम व खास सभी भक्तों को कुछ दिशा निर्देश का पालन करना होगा.जैसे-भक्त के मंदिर प्रवेश के समय मास्क पहनना अनिवार्य होगा.मन्दिर परिसर में सेनेटाइजर से अपने आप को सेनेटाइज करना होगा.घण्टी बजाना और आरती दिखाना वर्जित रहेगा.सभी भक्त सिर्फ दर्शन और प्रसाद चढ़ा पाएंगे.मन्दिर परिसर में सुरक्षा घेरा बना दिया गया है, जिसमे बारी बारी से भक्त माँ का दर्शन करते हुवे प्रसाद चढ़ाते हुवे भैरव जी के रास्ते बाहर निकल जाएंगे. ऐसे तो हमारे शास्त्र में मूर्ति स्पर्श वर्जित है लेकिन इस महामारी को ध्यान में रखते हुवे जब तक इस महामारी से छुटकारा नहींं मिल जाता किसी भी मूर्ति को स्पर्श करना वर्जित रहेगा.राज्य सरकार एवं स्थानीय प्रशासन के सहयोग से भक्तों के दर्शन की व्यवस्था की गई है.मन्दिर महन्त – मनोज बाबा, संजय बाबा OP Pandey

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सोशल डिस्टेंसिंग के साथ घरों में हुई वट सावित्री पूजा

अखंड सौभाग्‍य की कामना के साथ विवाहित महिलाओं ने की वट सावित्री पूजा विभिन्न परंपराओं विविधताओं जाति धर्मों के रस्मो रिवाज वाले देश मे एक तरफ रहमतों बरकतों वाली माह रमजानुल मुबारक का अलविदा जुमा नमाज की तैयारी हो रही है ,इस बार लॉक डाउन में लोग घरों में ही नमाज अदा करेंगे वहीं ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए व्रत रखकर वट सावित्री पूजा कर सदैव सुहागन का वरदान मांग रही हैं. पटना में लॉक डाउन में कई इलाके में सुहागन महिलाएं समूह में बरगद के पेड़ के पास जाकर पूजा नही कर पाई तो घरों में ही वट वृक्ष की डाल और पत्तोंं को प्रतीक मानकर पूजा की. मान्यता है कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु व डालियों व पत्तियों में भगवान शिव का निवास स्थान होता है. व्रत रखने वालों को मां सावित्री और सत्यवान की इस पवित्र कथा को सुनना जरूरी माना गया है. वट सावित्री पूजा के मौके पर सोमवार को सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु होने की कामना के साथ पूरी निष्ठा के साथ वट सावित्री पूजा कर अखंड सौभाग्‍य की कामना की. सुबह से ही नवविवाहिता सहित महिलाएं नए-नए परिधानों में सजधज कर बांस की डलिया में मौसमी फल, पकवान प्रसाद के रुप में लेकर वट वृक्ष के पास पहुंचीं. वहीं घरों में भी व्रत का अनुष्‍ठान विधि विधान से पूरा किया गया. दुलहन की तरह सजी धजी महिलाओं ने प्रसाद चढ़ा कर वट वृक्ष की पूजा की, वट

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सिविल कोर्ट कर्मियों के 46 दिनों के जज्बे को सलाम!

रियल लाइफ के नायक हैं ये सरकारी कर्मीगरीबों और जरूरतमन्दों को मुफ्त बाँटा डेढ़ महीने तक भोजन आरा,17 मई. आमतौर पर कोर्ट का नाम सुनते ही लोगों में खुशी से ज्यादा मायूसी छा जाती है. क्योंकि तारीख की हाजरी में सुख चुकी अधिकांश आँखे न्याय नही पाती हैं. बस इंसाफ की आशा लिए कोर्ट का चक्कर काटती हैं. ये एक आम तस्वीर है जिसे जनता मसहूस करती है लेकिन वैश्विक महामारी के दौरान आरा के सिविल कोर्ट कर्मियों ने मिलकर ऐसा काम किया जिसने न सिर्फ लोगों की अवधारणा बदल दी बल्कि वे लोगों के लिए रियल लाइफ के नायक बन गए. एक रिपोर्ट :- इंसान का बेसिक जरूरत है भोजन और वैश्विक महामारी चीनी वायरस कोरोना ने लोगों के भोजन पर ही आफत ला दिया. सबसे ज्यादा प्रभावित मेहनतकशों का वर्ग हुआ जो दिहाड़ी मजदूरी से दो वक्त का भोजन जुटाता था. लॉक डाउन के बाद सुनी सड़को पर न तो कोई दुकान खुला था और न ही कोई छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयां जहाँ मजदूर वर्ग काम कर अपने भोजन की जुगाड़ कर सके. जी हाँ, ऐसे कठिन और मुश्किल दौर में सिविल कोर्ट कर्मियों के हाथ जो मदद के लिए उठे, परोपकार के लिए डेढ़ महीने तक निःस्वार्थ भाव से डटे रहे. लगभग 300 लोगों को रोज फ्री भोजन कराते रहे. इस बीच सोशल डिस्टेंस का पालन भी होता रहा ताकि किसी को महामारी का खतरा न रहे. सप्ताह में 3 दिन दुकानों के खुलने की घोषणा के बाद भी परोपकार का यह सिलसिला चलता रहा. जब बाजारों में

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