पटना में आज 544 नये मरीज मिले

बिहार ने शनिवार को कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों के मामले में एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया. आज बिहार में कुल 2803 नए मरीज मिले हैं इनमें से 544 पटना से हैं. पटना में कुल पॉजिटिव मरीजों की संख्या 5894 हो गई है. अब तक 36 लोगों की मौत हुई है. पटना में कुल मरीजों में से 3693 लोग स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं. बिहार में कुल कोविड पेशेंट्स की संख्या बढ़कर 36314 हो गई है जिसमें से 24520 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं. इधर पटना एम्स में शनिवार को 2 कोरोना पॉजिटिव मरीजो की मौत हो गयी जबकि नए मरीजो में 25 मरीजोंं की जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव निकली है. वहीँ गया के चंदौती प्रखण्ड के सीओ दिलीप कुमार की भी मौत कोरोना से हो गयी है जिन्हें एम्स में लाने पर चिकित्सको ने पहले ही मृत घोषित कर दिया था.एम्स कोरोना नोडल आफिसर डॉ संजीव कुमार के मुताबिक पटना एम्स में अस्थमल गोला के 65 वर्षीय अरूण प्रसाद और भोजपुर के 57 वर्षीय शिवजी प्रसाद की कोरोना से मौत हो गयी है. गया के चंदौती प्रखण्ड के सीओ दिलीप कुमार काफी दिन से बीमार थे और बाद में इनकी जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी जिसके बाद इनका इलाज़ एएनएमसीएच गया में किया जा रहा था. हालत बिगड़ने के बाद दिलीप कुमार को कल पटना एम्स रेफर कर लाया गया था लेकिन उन्हें यहाँ भर्ती नही किया जा सका क्योंकि उनकी मौत हो चुकी थी. वहीं गुरूवार को एम्स के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती 25 नये मरीजो

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550 में से सिर्फ 59 पेशेंट्स में दिखे लक्षण

स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया विश्लेषण बिहार में अब तक 550 लोग कोरोनावायरस संक्रमित मिले हैं. इनमें से सबसे ज्यादा 102 लोग मुंगेर में हैं. 56 मरीज बक्सर में, 54 रोहतास में जबकि 47 कोरोना पॉजीटिव पेशेंट पटना में हैंं. स्वास्थ्य विभाग ने जो आंकड़े जारी किए हैं उसके मुताबिक अब तक 246 लोग स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं. पांच कोरोना संक्रमित लोगों की मौत हुई है. यानी अब कुल 299 एक्टिव केस बिहार में हैं. संक्रमित मरीजों में से 64 फ़ीसदी पुरुष और 36 फ़ीसदी महिलाएं हैं और इनमें सबसे ज्यादा जो आश्चर्यजनक बात सामने आई है वो ये कि 550 संक्रमित लोगों में से महज 59 लोगों में ही संक्रमण के लक्षण दिखे थे बाकी 445 लोगों में कोरोना का कोई लक्षण नहीं नजर आया.

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कोरोना से निपटने के लिए 2500 से ज्यादा डॉक्टर और 35000 चिकित्साकर्मियों की तैनाती करेगा ये संगठन

कोरोना से पूरे विश्व में अब तक 30 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. जबकि करीब 1.5 लाख लोगों की मौत हो चुकी है. अमेरिका और इटली समेत पूरा विश्व इस महामारी से निपटने में लगा है लेकिन इन बड़े देशों में भी चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी बाधक बन रही है जिसके कारण लोगों की जान जा रही है. दूसरे देशों के अनुभव से सीख लेते हुए भारत ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है. और इसमें बड़ा योगदान दे रहा है भारत का सबसे बड़ा संगठन रेलवे. कोविड-19 के खिलाफ संघर्ष जारी रखते हुए भारतीय रेलवे भारत सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य सेवा संबंधी प्रयासों में सहयोग प्रदान करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहा है. रेलवे के मौजूदा अस्‍पतालों को कोविड-19 संबंधी जरूरतें पूरी करने लायक बनाना, आपात स्थितियों से निपटने के लिए अस्‍पताल के बिस्‍तर निर्धारित करना और डॉक्‍टरों एवं अर्द्ध चिकित्‍सा कर्मि‍यों की भर्ती करना, पेसेंजर कोचों को आइसोलेशन कोच में परिवर्तित करना, चिकित्‍सा उपकरण उपलब्‍ध कराना, PPE और वेंटीलेटर्स आदि का आंतरिक स्‍तर पर निर्माण करना आदि शामिल हैं.  रेलवे का स्वास्थ्य विभाग कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में भारत सरकार के स्वास्थ्य संबंधी प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार और चाक-चौबंद हो रहा है. रेलवे के पास देश भर में 586 स्वास्थ्य इकाइयां, 45 सब डिविजनल अस्पताल, 56 डिविजनल अस्पताल, 8 उत्पादन इकाइयां अस्पताल और 16 ज़ोनल अस्पताल हैं. इन सुविधाओं का काफी बड़ा भाग अब से कोरोना वायरस से निपटने के लिए समर्पित रहेगा.   डॉक्टरों के कुल 2546

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