यहां तो बड़ी फौज है बीमार, फिर भी हो रहा इलाज

बिहार का सबसे बड़ा कोरोना अस्पताल पटना एम्स खुद बीमार  फुलवारी शरीफ ।। कोरोना मरीजों के इलाज के लिए सबसे पहले लोगो की पसंद और सही मायने में कोरोना इलाज में अहम भूमिका निभाने वाले बिहार के सबसे बड़ा कोरोना अस्प्ताल एम्स पटना खुद बीमार होता जा रहा है. उसके बावजूद एम्स पटना के करीब चार हजार कर्मी कोरोना महामारी में लोगोंं की जान बचाने में दिन रात जूटे हैं.वर्तमान समय में मानव की जिंदगी भय, बीमारी और इलाज के संसाधनों की कमी के बीच गुजर रहा है. कोरोना संक्रमण ने मानव जिंदगी को भयाक्रांत बना दिया है. एक तरफ कोरोना संक्रमण के कारण बड़ी संख्या में लोगों का संक्रमित होना, उसके बाद अस्पताल में बेड की कमी और ठीक से इलाज ना होना, उपर से ऑक्सीजन की कमी ने लोगों को मानसिक रोगी बनाकर रख दिया है. और तो और, अब धरती के भगवान का बड़ी संख्या में संक्रमित होना लोगों के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय बन गया है. बिहार के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच, एनएमसीएच के बाद अब पटना एम्स में भी बड़ी संख्या में डॉक्टर्स कोरोना संक्रमित हो गए है. पटना एम्स में दूर-दूर से लोग इलाज कराने आते है. इस अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ, मेडिकल स्टुडेंट्स, डॉक्टर्स के अलावा आउटसोर्सिंग को मिलाकर कुल 3800 की संख्या में हैंं जिसमेंं से डॉक्टर्स, मेडिकल स्टाफ मिलाकर कुल 384 लोग कोरोना पॉजिटिव हो गए हैंं. अब आप इसी बात से अंदाज़ा लगा सकते है कि स्थिति कितनी भयावह है. 1000 बेड की क्षमता वाले पटना एम्स में अभी वर्तमान

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एम्स में कोरोना से 2 लोगों की मौत

4 नए कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आये 6 लोगों ने कोरोना को हराया, मिली छुट्टी फुलवारी शरीफ ।। पटना एम्स में रविवार को 2 लोगों की मौत कोरोना से हो गयी जबकि नए मरीजो में 4 की जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव निकली है. एम्स कोरोना नोडल आफिसर डॉ संजीव कुमार के मुताबिक पटना एम्स में मुंगेर की 48 वर्षीय कुमारी मंजरी जबकि सारण के 62 वर्षीय शैलेन्द्र कुमार सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गयी. वहीं रविवार को एम्स के आइसोलेशन वार्ड में 4 नये मरीजो की जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई जिसमे दरभंगा, मुजफरपुर, मुगेर के मरीज शामिल हैं . इसके अलावा एम्स में 6 लोगों ने कोरोना को मात दे दिया जिन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया. Ajit

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पटना एम्स में कई डॉक्टरों ने लिया टीका

एम्स निदेशक सहित कई डॉक्टरों ने लगवाया टीका फुलवारी शरीफ ।। पटना एम्स निदेशक डॉ प्रभात कुमार सिंह सहित कई चिकित्सको ने पहले दिन कोरोना टिका का पहला डोज लिया. जानकारी देते हुए एम्स मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ सीएम सिंह ने बताया कि एम्स निदेशक डॉ प्रभात कुमार सिंह , डॉ सुदीप , डॉक्टर क्रांति भावना ने भी कोरोना वैक्सीन लिया है. इस मौके पर डीन उमेश भदानी,उप निदेशक परिमल सिन्हा ,कोरोना वैक्सीन टीकाकरण नोडल पदाधिकारी डॉ संजय पांडेय सहित अन्य उपस्थित थे. हॉस्पिटल अटेंडेंट अभिषेक कुमार को लगा एम्स में कोरोना का पहला टिका दूसरे सर्जरी विभाग के डॉ अभिषेक कुमार ने ली कोविड 19 वैक्सीन की पहली खुराक एम्स निदेशक ने कोरोना वैक्सीन टीकाकरण का किया शुभारंभ 50 से अधिक हेल्थ वर्करों को लगाया गया कोरोना वैक्सीन पटना एम्स में शनिवार को चिर प्रतिक्षित कोरोना टीकाकरण का शुभारंभ हो गया. इसका विधिवत उद्घाटन के निदेशक डॉ प्रभात कुमार सिंह ने किया. एम्स में फ्रंट लाइन पर कोविड-19 की लड़ाई में आगे रहे हेल्थ वर्करों में सबसे पहला टीका हॉस्पिटल अटेंडेंट सफाई कर्मी अभिषेक कुमार को लगाया गया वहीं दूसरा टिका सर्जरी विभाग के डॉक्टर अभिषेक कुमार को दिया गया. इस मौके पर निदेशक डॉ प्रभात कुमार सिंह ने कहा कि आज कोरोना की जंग जीतने जैसा अनुभव हो रहा है. पटना एम्स में कोविड 19 से मानव जगत की लड़ाई में सबसे आगे बढ़ चढ़कर हम लोगों ने मरीजों की सेवा की है. हर मुश्किल घड़ी में एम्स पटना में सबसे बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराकर लोगों का इलाज

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मुश्किल वक्त में ओडिशा का KIIT मोर्चे पर सबसे आगे

कोरोना के विरुद्ध जंग में किट विश्वविद्यालय मोर्चे पर सबसे आगे प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न जन समुदाय की पीड़ा को दूर करने या उस पर काबू पाने के लिए कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, (केआईआईटी) भुवनेश्वर और उसकी सहयोगी संस्थान कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने अपने संस्थापक प्रोफेसर अच्युता सामंत के अथक प्रयास के बदौलत इस बार भी कोविड-19 महामारी के प्रकोप से बुरी तरह प्रभावित लोगों तक पहुंचने और सही उपचार का हर संभव प्रयास किया जा रहा है साथ ही उस पर अनवरत काम भी चल रहा है.यह जगजाहिर है कि किट डीम्ड विश्वविद्यालय एक प्रख्यात संस्थान है और यह भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त भी है. इसमें देश के कई राज्य साथ ही 50 के आसपास देशों से लगभग 30000 छात्र और छात्राएं यहां अध्ययन करते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि किट के ही भी सहयोगी संस्थान किश जो देश का पहला और एकलौता आदिवासी विश्वविद्यालय में तीस हजार के आसपास असहाय और विशेषकर आदिवासी बच्चे पढ़ते हैं. यह सारे बच्चे केवल ओडिशा के ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, झारखंड और नॉर्थ ईस्ट के बच्चे हैं. किश की खासियत या है कि यहां पर बच्चे निशुल्क पढ़ते हैं और यह आवासीय विश्वविद्यालय है. कोरोना के चलते जैसे ही संपूर्ण लॉक डाउन की भनक संस्थान की संस्थापक को लगी उन्होंने सभी बच्चों को सुरक्षित अपने-अपने घरों पर वापस भेज दिया था. पूरे लॉकडाउन के दौरान इन सारे बच्चों को किसी भी तरह का शैक्षणिक नुकसान का सामना नहीं करना पड़ा, क्योंकि किट देश का पहला

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एम्स में कंकड़बाग के 2 सहित 4 की कोरोना से मौत

एम्स में कोरोना से 4 लोगोंं की मौत19 नए कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आये ,भागलपुर की कमिश्नर वंदना किनी समेत 16 लोगों ने कोरोना को हराया, मिली छुट्टी बिहार में कोरोना मरीजों की संख्या एक 109875 तक पहुंच गई है. इनमें से 80740 लोग ठीक हो चुके हैं जबकि 558 कोरोना संक्रमितों की मौत हो चुकी है. पटना एम्स में मंगलवार को 4 लोगों की मौत कोरोना से हो गयी जबकि नए मरीजोंं में 19 मरीजो की जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव निकली है. इसके आलावा भागलपुर की कमिश्नर वंदना किनी समेत एम्स में 16 लोगों ने कोरोना को मात दे दिया जिन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया. एम्स कोरोना नोडल आफिसर डॉ संजीव कुमार के मुताबिक पटना एम्स में  कंकड़बाग के 77 वर्षीय डॉ यू के श्रीवास्तव, गड़ीखाना के 53 वर्षीय राजेन्द्र प्रसाद, कंकड़बाग के 78  वर्षीय के पी मेहता और बोरिग रोड के 72 वर्षीय दयानंद सिंह की मौत हो गई. वहीं मंगलवार को एम्स के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती 19 नये मरीजोंं की जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई जिसमे पटना के 8, औरंगाबाद, बलिया, सासाराम, के मरीज शामिल हैं . अजीत

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पटना में आज 544 नये मरीज मिले

बिहार ने शनिवार को कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों के मामले में एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया. आज बिहार में कुल 2803 नए मरीज मिले हैं इनमें से 544 पटना से हैं. पटना में कुल पॉजिटिव मरीजों की संख्या 5894 हो गई है. अब तक 36 लोगों की मौत हुई है. पटना में कुल मरीजों में से 3693 लोग स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं. बिहार में कुल कोविड पेशेंट्स की संख्या बढ़कर 36314 हो गई है जिसमें से 24520 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं. इधर पटना एम्स में शनिवार को 2 कोरोना पॉजिटिव मरीजो की मौत हो गयी जबकि नए मरीजो में 25 मरीजोंं की जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव निकली है. वहीँ गया के चंदौती प्रखण्ड के सीओ दिलीप कुमार की भी मौत कोरोना से हो गयी है जिन्हें एम्स में लाने पर चिकित्सको ने पहले ही मृत घोषित कर दिया था.एम्स कोरोना नोडल आफिसर डॉ संजीव कुमार के मुताबिक पटना एम्स में अस्थमल गोला के 65 वर्षीय अरूण प्रसाद और भोजपुर के 57 वर्षीय शिवजी प्रसाद की कोरोना से मौत हो गयी है. गया के चंदौती प्रखण्ड के सीओ दिलीप कुमार काफी दिन से बीमार थे और बाद में इनकी जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी जिसके बाद इनका इलाज़ एएनएमसीएच गया में किया जा रहा था. हालत बिगड़ने के बाद दिलीप कुमार को कल पटना एम्स रेफर कर लाया गया था लेकिन उन्हें यहाँ भर्ती नही किया जा सका क्योंकि उनकी मौत हो चुकी थी. वहीं गुरूवार को एम्स के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती 25 नये मरीजो

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550 में से सिर्फ 59 पेशेंट्स में दिखे लक्षण

स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया विश्लेषण बिहार में अब तक 550 लोग कोरोनावायरस संक्रमित मिले हैं. इनमें से सबसे ज्यादा 102 लोग मुंगेर में हैं. 56 मरीज बक्सर में, 54 रोहतास में जबकि 47 कोरोना पॉजीटिव पेशेंट पटना में हैंं. स्वास्थ्य विभाग ने जो आंकड़े जारी किए हैं उसके मुताबिक अब तक 246 लोग स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं. पांच कोरोना संक्रमित लोगों की मौत हुई है. यानी अब कुल 299 एक्टिव केस बिहार में हैं. संक्रमित मरीजों में से 64 फ़ीसदी पुरुष और 36 फ़ीसदी महिलाएं हैं और इनमें सबसे ज्यादा जो आश्चर्यजनक बात सामने आई है वो ये कि 550 संक्रमित लोगों में से महज 59 लोगों में ही संक्रमण के लक्षण दिखे थे बाकी 445 लोगों में कोरोना का कोई लक्षण नहीं नजर आया.

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कोरोना से निपटने के लिए 2500 से ज्यादा डॉक्टर और 35000 चिकित्साकर्मियों की तैनाती करेगा ये संगठन

कोरोना से पूरे विश्व में अब तक 30 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. जबकि करीब 1.5 लाख लोगों की मौत हो चुकी है. अमेरिका और इटली समेत पूरा विश्व इस महामारी से निपटने में लगा है लेकिन इन बड़े देशों में भी चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी बाधक बन रही है जिसके कारण लोगों की जान जा रही है. दूसरे देशों के अनुभव से सीख लेते हुए भारत ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है. और इसमें बड़ा योगदान दे रहा है भारत का सबसे बड़ा संगठन रेलवे. कोविड-19 के खिलाफ संघर्ष जारी रखते हुए भारतीय रेलवे भारत सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य सेवा संबंधी प्रयासों में सहयोग प्रदान करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहा है. रेलवे के मौजूदा अस्‍पतालों को कोविड-19 संबंधी जरूरतें पूरी करने लायक बनाना, आपात स्थितियों से निपटने के लिए अस्‍पताल के बिस्‍तर निर्धारित करना और डॉक्‍टरों एवं अर्द्ध चिकित्‍सा कर्मि‍यों की भर्ती करना, पेसेंजर कोचों को आइसोलेशन कोच में परिवर्तित करना, चिकित्‍सा उपकरण उपलब्‍ध कराना, PPE और वेंटीलेटर्स आदि का आंतरिक स्‍तर पर निर्माण करना आदि शामिल हैं.  रेलवे का स्वास्थ्य विभाग कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में भारत सरकार के स्वास्थ्य संबंधी प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार और चाक-चौबंद हो रहा है. रेलवे के पास देश भर में 586 स्वास्थ्य इकाइयां, 45 सब डिविजनल अस्पताल, 56 डिविजनल अस्पताल, 8 उत्पादन इकाइयां अस्पताल और 16 ज़ोनल अस्पताल हैं. इन सुविधाओं का काफी बड़ा भाग अब से कोरोना वायरस से निपटने के लिए समर्पित रहेगा.   डॉक्टरों के कुल 2546

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