भोजपुर का 26 वर्षीय मृतक निकला कोरोना पॉजिटिव

आरा, 28 मई. मुम्बई से श्रमिक स्पेशल ट्रेन के जरिये अपने घर को पहुचने वाला 26 वर्षीय भोजपुर का एक श्रमिक अपने घर तो पहुँचा लेकिन पहुचंते ही इलाज के क्रम में दम छोड़ गया. बड़हरा प्रखंड का रहने वाला वह युवक 25 मई को आरा पहुँचा था. IGIMS पटना से आज जब रिपोर्ट मिला तो सब सन्न रह गए. रिपोर्ट के अनुसार बड़हरा प्रखंड के मुम्बई से लौटे 26 वर्षीय व्यक्ति के मृत्युपरांत लिए गए स्वाब नमूने का रिजल्ट Covid19 पॉजिटिव पाया गया. वह व्यक्ति दिनांक 25 मई 2020 को श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन से मुम्बई से आरा आया था. रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद उसकी तबियत खराब हो गई. इलाज़ हेतु जब सदर हॉस्पिटल, आरा लाया गया तो इलाज़ के क्रम में 25 मई को ही उसकी मृत्यु हो गयी. तत्पश्चात उनका स्वाब लिया गया और पार्थिव शरीर को ICMR के निदेशों के आलोक में अंतिम संस्कार करने के लिए सौप दिया गया. जब जाँच का रिजल्ट पॉजिटिव आया तो सभी को जैसे काठ मार गया. PNC

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जितौरा क्वारन्टीन सेंटर पर कुव्यवस्था को ले प्रवासी मजदूरों ने किया हंगामा, रोड जाम

आरा, 19 मई. कोरोना संक्रमण से बचने के लिए प्रवासी मजदूरों को जिले में आने के बाद उन्हें सरकार की ओर से क्वारन्टीन सेंटरों में रखा जा रहा है ताकि यह संक्रमण बाहर नही फैले. लेकिन अधिकांश जगहों पर मजदूरों को सुविधाएं नही मिल रही हैं जिससे उनका गुस्सा देखने को मिल रहा है. जितौरा के क्वारन्टीन सेंटर में कुव्यवस्था को लेकर प्रवासी मजदूरों ने सड़क जाम कर दिया है. ख़बरकी सूचना मिलते ही प्रसाशनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं. PNC

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प्रवासी मृतक के परिजन को मिला अनुदान, सड़क दुर्घटना मेंं हुई थी मौत

आरा. उत्तर प्रदेश के देवबंद में सड़क दिनांक 13 मई 2020 को हुई सड़क दुर्घटना में मारे गए गड़हनी भोजपुर के प्रवासी  श्रमिक गुड्डू कुमार के आश्रित दुर्गावती देवी (माता) को जिला पदाधिकारी भोजपुर द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए मृत श्रमिक के दाह संस्कार के 24 घंटे के अंदर एक लाख की सहायता राशि बिहार राज्य प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना 2008 के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई. उक्त राशि का चेक श्रम अधीक्षक भोजपुर द्वारा उनके आवास चाइयाचक गड़हनी में जाकर प्रदान किया गया. PNC

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सिविल कोर्ट कर्मियों के 46 दिनों के जज्बे को सलाम!

रियल लाइफ के नायक हैं ये सरकारी कर्मीगरीबों और जरूरतमन्दों को मुफ्त बाँटा डेढ़ महीने तक भोजन आरा,17 मई. आमतौर पर कोर्ट का नाम सुनते ही लोगों में खुशी से ज्यादा मायूसी छा जाती है. क्योंकि तारीख की हाजरी में सुख चुकी अधिकांश आँखे न्याय नही पाती हैं. बस इंसाफ की आशा लिए कोर्ट का चक्कर काटती हैं. ये एक आम तस्वीर है जिसे जनता मसहूस करती है लेकिन वैश्विक महामारी के दौरान आरा के सिविल कोर्ट कर्मियों ने मिलकर ऐसा काम किया जिसने न सिर्फ लोगों की अवधारणा बदल दी बल्कि वे लोगों के लिए रियल लाइफ के नायक बन गए. एक रिपोर्ट :- इंसान का बेसिक जरूरत है भोजन और वैश्विक महामारी चीनी वायरस कोरोना ने लोगों के भोजन पर ही आफत ला दिया. सबसे ज्यादा प्रभावित मेहनतकशों का वर्ग हुआ जो दिहाड़ी मजदूरी से दो वक्त का भोजन जुटाता था. लॉक डाउन के बाद सुनी सड़को पर न तो कोई दुकान खुला था और न ही कोई छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयां जहाँ मजदूर वर्ग काम कर अपने भोजन की जुगाड़ कर सके. जी हाँ, ऐसे कठिन और मुश्किल दौर में सिविल कोर्ट कर्मियों के हाथ जो मदद के लिए उठे, परोपकार के लिए डेढ़ महीने तक निःस्वार्थ भाव से डटे रहे. लगभग 300 लोगों को रोज फ्री भोजन कराते रहे. इस बीच सोशल डिस्टेंस का पालन भी होता रहा ताकि किसी को महामारी का खतरा न रहे. सप्ताह में 3 दिन दुकानों के खुलने की घोषणा के बाद भी परोपकार का यह सिलसिला चलता रहा. जब बाजारों में

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कोरोना से डरें नहीं, सावधानी बरतें

कोरोना वायरस के संक्रमण का चेन बिहार में टूटता नहीं दिख रहा है. इसका फैलाव तेजी से हो रहा है. इस पर आईजीआईएमएस के इंंडोक्रोनोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर वेद प्रकाश का कहना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से डरने की नहीं बचने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि डरने पर कार्टिसोल नामक हार्मोन हमारे शरीर में स्त्रवित होता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है और कोरोना वायरस भी कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को हीं ज्यादा प्रभावित करता है. डॉक्टर वेद प्रकाश का कहना है कि कोरोना से डरने की नहीं सावधानी बरतें की जरूरत है और सावधानी ही इससे बचाव का एकमात्र उपाय है. डॉक्टर वेद प्रकाश ने कहा कि थोड़ी सी सावधानी हमें बड़ी बीमारी से बचा सकती है. उन्होंने कहा कि जरूरत के समय बाहर निकलें और मॉस्क पहन कर हीं निकलें. सार्वजनिक जगहों की रेलिंग छूने, कुर्सी पर बैठने, लिफ्ट का बटन दबाने, दरवाजे का हैंडल छूने के बाद सेनेटिइजर या साबुन से हाथ धोएं. उन्होंने कहा कि सर्दी जुकाम से पीड़ित लोगों से दूरी बनाए रखें और अपने चेहरे, आंख नाक को बार बार छूने से बचें. डॉक्टर वेद प्रकाश ने बताया कि बच्चे, बूढ़े और रोगियों का विशेष ध्यान रखें. उन्होंने कहा कि अनावश्यक चिंता नहीं करें और कोरोना से नहीं डरें. सावधानी रखें, यह समय भी गुजर जाएगा. क्या ही डीएम का नया आदेश https://bit.ly/2yWDVxI हीरेश

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मां के आंचल की छांव में सीखी सारी अदाकारी

मेरी प्यारी मां तू ही तो जन्नत है किसी ने बनाया कार्ड तो किसी ने लिख डाली कविता खबर पटना के फुलवारी शरीफ से जहां मदर्स डे को सेलिब्रेट करने के लिए किसी ने कविता लिख डाली तो किसी ने जन्नत कहा तो किसी ने बना डाला शानदार ग्रीटिंग्स कार्ड. प्रेमालोक मिशन स्कूल के बच्चों ने मदर्स डे सेलिब्रेट करने के लिए नन्हे हाथों से अपना हुनर दिखाया और मम्मा स्पेशल कार्ड बनाया. निदेशक प्रेमनाथ ने बताया की माँ का स्थान जगत में कोई नही ले सकता है. अपनी माँ को देने के लिये मर्मस्पर्शी ग्रीटिंग्स कार्ड बनाकर बच्चे बच्चियों ने विद्यालय के शैक्षणिक संस्कारों को दर्शाया है. अपनी अपनी माताओं को देने के लिए एक से बढ़कर एक कार्ड्स बनाएं हैैं. वहीं फुलवारी की वाल्मी कम्प्लेक्स में रहने वाली और आकाशवाणी में म्यूजिक की नवोदित कलाकार मोनिका ने अपनी माँ किरण देवी को दुनियां की सारी खुशियों से भरने वाली बताते हुए शानदार पंक्तियों से नवाजा है.ऐ मेरी मां! तू ही धरती पर जन्नत है. मां एक ऐसा खूबसूरत नाम है, जिसे सुनकर जन्नत की खुशियां भी फीकी पड़ जाए। मां एक ऐसी शक्ति है जिसकी बदौलत पत्थर को भी मोम बना देती है. मां आपकी आंचल में निकला बचपन, आपसे ही जुड़ी हर धड़कन मुझे याद है। कहने को तो मां सब कहते हैं पर मेरे लिए तो आप ही भगवान है. आज मैं अपनी मां के बदौलत ही म्यूजिक में आकाशवाणी, पटना एवं दूरदर्शन, पटना के नवोदित कलाकार बन पाई हूं.इस कोरोना वायरस महामारी से बचने के

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अभिनय की मजदूरी: “सत्यकाम” बने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता

10वें दादा साहब फाल्के फ़िल्म फेस्टिवल में आरा के लाल को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार पटना, 2 मई. बॉलीवुड एक्टर सत्यकाम आनन्द को 10वें दादा साहब फाल्के फ़िल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के रूप में पुरस्कृत किया गया है. यह पुरस्कार उन्हें फ़िल्म ‘Command & I shall obey’ के लिए मिला है. 01 यानि मई यानि मजदूर दिवस के मौके पर मिला यह पुरस्कार सत्यकाम के लिए विशेष यादगार बनाने वाला बन गया है. बताते चलें कि इस फ़िल्म की शूटिंग के बाद पोस्ट-प्रोडक्शन के लिए डबिंग के दौरान ही उन्होंने लोगो से शेयर किया था कि अबतक का उनका सबसे दमदार अभिनय इसमें देखने को मिलेगा लेकिन किसी को यह नही पता था कि इसके लिए वे पुरस्कार के लिए भी चयनित किये जायेंगे. उन्होंने मजदूर दिवस पर मिले इस पुरस्कार के बाद सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा भी है कि मुझे मेरी मजदूरी मिल गयी. उनकी सहजता इसी से समझी जा सकती है कि ग्लैमर की इस दुनिया मे रहने के बाद भी वे अपने आपको एक वर्कर ही मानते है. बताते चलें कि सत्यकाम भोजपुर के मुख्यालय आरा के रहने वाले हैं. गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसे फ़िल्म में अभिनय के बाद वर्ल्ड में सुर्खियां बटोरने वाले सत्यकाम आरा में रंगमंच से अपनी शुरुआत की थी. थियेटर से फिल्मों तक पहुँचे सत्यकाम के पास अभी आधे दर्जन से ऊपर फ़िल्म हैं जो निर्माणाधीन है. इसमें एक महेश भट्ट की फ़िल्म मार्कशीट भी है. बिहार के लाल सत्यकाम के इस उपलब्धि पर जिलावासी ही नही बिहारवासी प्रफ्फुलित हैं.

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वेल्लोर से भोजपुर आये छात्र को 40 दिन बाद निकला कोरोना पॉजिटिव

आरा,28 अप्रैल. भोजपुर जिले में सोमवार को कोरोना पॉजिटिव सात मरीज पाए जाने के बाद स्वास्थ्य महकमा से लेकर जिला प्रशासन में खलबली मच गई। हालांकि, सात जो नए मरीज मिले हैं उनमें चार संक्रमित मरीज बड़हरा के रामपुर निवासी पाजिटिव पाए गए युवक से जुड़े है। जबकि, एक पॉजिटिव पाया गया युवक आरा के भलुहीपुर निवासी छात्रा का ही भाई बताया जा रहा है। दो जो नए मरीज मिले हैं उसमें मौलाबाग, नाला रोड निवासी संवेदक का पुत्र और बिहिया राजा बाजार निवासी एक इलेक्ट्रॉनिक दुकानदार बताया जा रहा है। जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा एवं एसपी सुशील कुमार के आदेश पर टीम आरा एवं बिहियां में पाए गए नए मरीजों की ट्रैवल हिस्ट्री का पता लगा रही है। नए रिपोर्ट के साथ भोजपुर में कोरोना पॉजिटिव की संख्या बढ़कर नौ पहुंच गई है। इस बीच तमिलनाडु के वेल्लोर से भोजपुर आए बीआईटी के एक छात्र के कोरोना पॉजिटिव होने का मामला प्रकाश आते ही जिला मुख्यालय स्थित आरा शहर में खलबली मच गई। कोरोना पॉजिटिव छात्र शहर के मौलाबाग स्थित नाला रोड, निवासी एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालक का पुत्र बताया जाता है, जिसके हवाई यात्रा के दौरान संक्रमित होने की बात बताई जा रही है। छात्र के स्वजनों से मिली जानकारी के मुताबिक उक्त छात्र पहले होली के दिन 09 मार्च को वेल्लोर से अपने घर आया था। पुन: वह अपनी पढ़ाई के सिलसिले में वेल्लोर जाने के लिए 15 मार्च को चेन्नई पहुंचा था। पर, चेन्नई एयरपोर्ट पर पहुंचते ही उसे जानकारी मिली की उसका शैक्षणिक संस्थान बंद

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कोरोना काल के संकट मोचन-2

एक दिन भूखे को भोजन देने का किया प्लान, लेकिन मिला दोस्तों के साथ तो महीने दिन का बना प्लान आरा,26 अप्रैल. कोरोना के संक्रमण के कारण देश दुनिया मे हाहाकार मचा हुआ है और लोग लॉकडाउन में अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं. इस लॉकडाउन में कोई किसी राज्य में तो कोई किसी दूसरे शहरों में फँस गया है. यहाँ तक कि कई विदेशों में फँसे हुए हैं. क्या देश, क्या विदेश, हर जगह की हालात बिगड़ रही है. ऐसे में मानव के अंदर परोपकार की बैठी भावना इस संकट काल में स्वाभाविक तौर पर बाहर आ गयी है. जिसको लेकर भोजपुर जिले में कई लोग व्यक्तिगत और सामुहिक तौर पर जरूरतमन्दों के लिए खड़े नजर आ रहे हैं. ये सभी संकट मोचन है कोरोना काल के. आज बात करेंगे वैसे ही संकट मोचन की. यह समूह है सिविल कोर्ट आरा के कर्मचारियों का. लॉकडाउन के बाद लोगों की समस्याओं का जब ध्यान आया तो युवा कर्मचारियों ने एक दिन भूखे लोगों को खाना खिलाने का प्लान किया. सिविल कोर्ट में कार्यरत उज्ज्वल नारायण और उनके साथियों ने इसे धारातल पर लाने के लिए ज्ञान कुमार पांडेय से चर्चा की जो लॉकडाउन से पहले सदर अस्पताल के सामने पास्ता का दुकान चलाता था. ज्ञान ने जब इस नेक काम के बारे में सुना तो उसने खाना बनाने का जिम्मा अपने दुकान के चंद कर्मचारियों के संग ले लिया और 3 अप्रैल को सदर अस्पताल के सामने ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए फ्री भोजन का वितरण किया. इस बात

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आरा में रेलवे कर रहा है तिरंगे का अपमान

Patna now Exclusiveआरा,27 अप्रैल. “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा” उक्त पंक्तियाँ तिरंगे के सम्मान में लिखी गयी हैं. तिरंगे को ऊंचाइयों पर रखने का यह संकल्प उसके लिए यह सम्मान को दर्शाता है और जब ऊंचाइयों पर यह लहराता है तो हवाएं भी अपने शान में इठलाती हैं. इसे देखकर हर देश वासी का मस्तक शान से भर जाता है. तिरंगे की इस शान के लिए देश का हर नागरिक अपने प्राणों की बाजी तक लगा देता है. देश के सीमाओं पर इसी तिरंगे की हिफाजत के लिए सैनिक अपने जान की बाजी तक लगा देते हैं. लेकिन दुःख इस बात का है कि देश की आन बान और शान, तिरंगे को आरा में रेलवे वारा अपमानित किया जा रहा है. 100 फीट की ऊंचाइयों पर स्टेशन परिसर में लहराता यह तिरंगा हवाओं के साथ जंग करता फट गया है लेकिन रेलवे अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक का ध्यान देश के इस शान पर नही गया है. कोरोना संक्रमण के मद्देनजर ट्रेनों के आवागमन पर रोक के बाद रेलवे परिसरों को सील कर दिया गया है जो लगभग एक महीने से बन्द है. लेकिन मालगाड़ियों का परिचालन और रेलवे की सुरक्षा को लेकर सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की ड्यूटी लगातार जारी है. सवाल यह उठता है क्या किसी भी कर्मचारी, अधिकारी, जीआरपी या आरपीएफ के जवानों को स्टेशन परिसर में लहराता तिरंगा नही दिखा? 2019 में रेलवे परिसर में लगाया गया था तिरंगाबताते चलें कि आरा स्टेशन पर 100 फीट की ऊंचाई पर फहरता यह तिरंगा 6

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