कोरोना से बचाव का ये है सॉलिड उपाय !

कोरोना महामारी टीकाकरण से ही जाएगी- डॉ रणजीत आरा,24 जनवरी. कोरोना के टीकाकरण का सिलसिला जारी है और फ्रंट वारियर्स को ये लगातार दिया जा रहा है. इस बीच टीका को लेकर संसय और विरोधी ताकतों का विरोध भी जारी है. लेकिन अब तक के टीकाकरण के आँकड़े को देखा जाए तो यह सुरक्षित है और इसका साइड इफेक्ट भी न के बराबर देखने को मिला है. ये आँकड़े सबूत हैं कि भारत ने टीकाकरण के मामले में नया कीर्तिमान स्थापित किया है. यह न सिर्फ भारत के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक सुखद खबर है,लेकिन इस टीका को लेने वालों की प्रतिक्रियाएं ही बता सकती हैं कि यह कितना सहज और महत्वपूर्ण हैं. शनिवार को आरा में डीएम कोठी के समीप मस्तिष्क और नस रोग विशेषज्ञ डॉ रणजीत कुमार सिंह(MD, DM, Neurology) ने भी कोरोना टीका का पहला डोज लिया और 28 दिन के बाद वे दूसरे डोज के लिए भी तैयार हैं. टीका लेने के बाद उन्होंने बताया कि उन्हें किसी तरह की दिक्कत नही हुई, बल्कि आम टीके की तरह यह भी साधारण ही लगा. उन्होंने कहा कि आम जनों को किसी तरह की भ्रांतियों में नही उलझना चाहिए और बेहिचक इस टीके को जितनी जल्दी हो सबको लेना चाहिए ताकि वैश्विक स्तर पर इस बीमारी को खत्म किया जा सके. टीका लेने के बाद क्या कहा डॉ रणजीत ने ?बिल्कुल एक साल पहले चीन के प्रांत वुहान से शुरु हुई कोरोना महामारी की खबर पर चर्चा हमारे देश में शुरु हुई. एक साल में

Read more

शिशुओं का क्या हो आहार, जानें आप

भोजपुर जिला में 6 माह से ऊपर के शिशुओं का किया गया अन्नप्राशन• ऊपरी आहार है सुपोषण की कुंजी• सेविकाओं ने बताए ऊपरी आहार के महत्त्वआरा. कुपोषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाये जा रहे हैं| सभी को पोषित करने तथा पोषण का सन्देश घर घर पहुँचाने के लिए सितम्बर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जाता है| इसी क्रम में मंगलवार को जिले के आंगनवाडी केन्द्रों पर 6 माह से ऊपर के शिशुओं का अन्नप्राशन किया गया| जिले के क्रियाशील आंगनवाडी केन्द्रों पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया गया| पोषक क्षेत्र के शिशुओं को खीर खिलाकर इसकी शुरुआत की गयी तथा धात्री माताओं को भी पूरक पोषाहार के विषय में एवं साफ़- सफाई के बारे में जानकारी दी गयी| जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) रश्मि चौधरी ने बताया कि बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए 6 माह तक सिर्फ स्तनपान एवं इसके बाद स्तनपान के साथ पूरक पोषाहार बहुत जरूरी है| उन्होंने इस दौरान घर एवं माँ- शिशु की साफ़ सफाई की जरूरत पर जोर दिया| उन्होंने बताया कि अनुपूरक आहार शिशु के आने वाले जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है| 6 माह से 23 माह तक के बच्चों के लिए यह अति आवश्यक है| 6 से 8 माह के बच्चों को दिन भर में 2 से 3 बार एवं 9 से 11 माह के बच्चों को 3 से 4 बार पूरक आहार तथा 12 माह से 2 साल तक के बच्चों को घर में पकने वाला भोजन भी देना चाहिए| इस

Read more

कोरोना काल में अहम भूमिका निभाने वाली ये थी वो महिला योद्धा

एपिडेमियोलॉजिस्ट अपर्णा झा को लगा कोविड का टीका आरा,19 जनवरी. कोविड महामारी के दौरान जब ज्यादातर चिकित्सक तथा चिकित्सा कर्मचारी तक कोविड के विषय में ठीक ठीक नहीं जान पाए थे उस वक्त से फ्रंट लाइन पर खड़े रहकर कोविड मरीजों की पहचान तथा उनके आइसोलेशन से लेकर इलाज की व्यवस्था में अहम किरदार निभाने वाली भोजपुर जिले की एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ अपर्णा झा को कोविड वैक्सीन का टीका लगाया गया. तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बारह बजे के आस-पास उन्हें टीका लगाया गया. डाक्टर अपर्णा झा को ड्यूटी के दौरान कोविड संक्रमित पाया गया था. बिहार में उस वक्त स्थिति इतनी भयावह थी कि आइएएस तक को अस्पताल में जगह नहीं मिल रही थी. लाखों जिलेवासियों को कोविड संक्रमण से बचाने वाली अपर्णा झा को बेहद चिंताजनक स्थिति में काफी संघर्ष के बाद बीएचयू में एडमिट कराया जा सका था. कई दिनों तक उन्हें आईसीयू में वेंटीलेटर पर रहना पड़ा. पर अब जब उन्हें टीका लगने वाला है तो डॉक्टर झा काफी उत्साहित हैं। साथ ही उनके सहकर्मियों तथा शुभचिंतकों में प्रसन्नता है. आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट

Read more

क्या है AEFI मामला और इसका निदान?

टीकाकरण के उपरांत एइएफआई मामलों के लिए है समुचित प्रबंधन की व्यवस्था पटना – कोरोना टीकाकरण पूरे देश में 16 जनवरी से शुरू की गयी है। टीकाकरण के उपरांत संभावित अड्वर्स इवेंट्स फालोइंग इमुनाइजशन (एइएफआई) मामलों के लिए समुचित प्रबंधन की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार टीकाकरण के उपरांत किसी भी प्रकार की चिकित्सीय परेशानी अगर टीका लगवाने वाले को होती है तो उसके ससमय प्रबंधन को एइएफआई यानी “एडवर्स इवेंट्स फोलोइंग इम्यूनाइजेशन” की संज्ञा दी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की शोध के अनुसार एइएफआई की स्थिति कई कारणों से उत्पन्न हो सकती है और यह जरुरी नहीं है की टीकाकरण ही इसकी वजह हो। टीकाकरण को लेकर आशंका, मन में घबराहट का होना एवं टीकाकरण के समय गलत तकनीक का इस्तेमाल आदि इसके वजह हो सकते हैं। ज्यादातर एइएफआई के लक्षण जैसे जी मितलाना, घबराहट, टीके वाली जगह सूजन एवं सर में दर्द आदि का प्रबंधन आसानी से किया जा सकता है। गंभीर चिकित्सीय जटिलता टीकाकरण के उपरांत कम ही नजर आती है।दो दिनों के टीकाकरण के उपरांत देश में एइएफआई के मात्र 447 मामले सामने आये हैं जिनका त्वरित चिकित्सीय प्रबंधन किया गया। सिर्फ तीन लोगों को अस्पताल में भर्ती करने की जरुरत पड़ी और उनमे से दो लोगों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। एइएफआई के मामलों में सामान्यतः हलके लक्षण जैसे जी मचलाना एवं सर में दर्द आदि लक्षण देखने को मिले हैं। एइएफआई के मामलों के लिए है समुचित प्रबंधन की है व्यवस्था कोविड-19 टीकाकरण के उपरांत

Read more

बिहार में इन्हें लगा कोरोना का पहला टीका

राज्य में सीएम ने किया कोविड-19 टीकाकरण का शुभारंभ, 301 सत्र स्थल पर 18,122 कोरोना योद्धाओ को लगाया गया टीका •IGIMS में सफाईकर्मी रामबाबू को लगा पहला टीका •मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों को प्रमाण पत्र देकर किया सम्मानित पटना(ओ पी पांडेय). कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण के महाअभियान का शुभारंभ बिहार में शनिवार को किया गया. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के द्वारा इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना में टीकाकरण का शुभारंभ किया गया. प्रथम चरण में बिहार में लगभग 18122 लोगों को टीका दिया गया. पहले दिन राज्य में 301 टीकाकरण सत्र स्थल का संचालन किया गया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के सफाईकर्मी रामबाबू को कोविड-19 का पहला टीका लगाया गया. रामबाबू के बाद वहां के एंबुलेंस चालक अमित कुमार, लैब टेक्नीशियन सोनू पंडित, डॉ सनत कुमार एवं कर्मवीर सिंह राठौर को टीका लगाया गया. टीकाकरण के पश्चात 30 मिनट के और अवलोकन को पूरा कर सभी लाभार्थी पूर्ण रूप से स्वस्थ दिखे एवं अपने अपने कार्यों में लग गए. मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों को किया सम्मानित टीकाकरण के पश्चात पहला टीका लगवाने वाले सफाई कर्मी समेत अन्य लाभार्थियों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया. इस मौके पर मुख्यमंत्री के द्वारा पौधारोपण भी किया गया. इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आज से बिहार में टीकाकरण की शुरुआत हुई है. हम लोग इस अवसर पर यहां उपस्थित हुए हैं. पूरे देश की तरह बिहार में भी टीकाकरण के पूर्ण तैयारी की गई है. यह एक

Read more

जानिए भोजपुर जिले में पहले दिन कितने को लगा कोरोना का टीका ?

भोजपुर के सात केंद्रों पर शुरू हुआ कोविड-19 का टीकाकरण, पहले दिन 700 लोग हुए टीकाकृत टीकाकरण सत्र को सफल बनाने के लिए चयनित सत्र स्थलों पर पूरी व्यवस्था की गई हैपहले चरण के लिए चयनित समूह में स्वास्थ्य कर्मी एवं फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिलआरा. जिले को कोरोना से बचाने के लिए पहले चरण के तहत टीकाकरण का अभियान शुरू हो चुका है. जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में शनिवार को जिलाधिकारी रौशन कुशवाहा ने उद्घाटन फीता काट कर किया. मौके पर जिलाधिकारी ने कहा कोविड -19 की वैक्सीन लगवाना स्वैच्छिक है. लेकिन इस बीमारी से बचाव और यह बीमारी परिवार के सदस्यों, दोस्तों, रिश्तेदारों और सहकर्मियों सहित करीबी लोगों को न हो, इसके लिए यह टीका लगवाना चाहिए. फिलवक्त सिर्फ उन्हीं लोगों को टीकाकृत किया जाएगा, जिनका निबंधन पहले चरण के लिए को-विन पोर्टल पर हो चुका है. वैक्सीन की उपलब्धता के आधार पर प्राथमिकता वाले समूहों का चयन किया गया है. जिन लोगों को संक्रमण का सबसे अधिक खतरा है, अभी उन्हें ही टीका लगाया जा रहा है. पहले चरण के सम्पन्न होने के बाद दूसरे चरण के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू किया जाएगा. मौके पर सिविल सर्जन डॉ. ललितेश्वर प्रसाद झा, डीपीएम रवि रजन, यूनिसेफ के एसएमसी कुमुद रंजन मिश्रा, अस्पताल प्रबंधक कौशल दूबे व अन्य लोग मौजूद रहे. प्रत्येक केंद्र पर 100-100 लोगों को लगाया गया टीका : सिविल सर्जन डॉ. ललितेश्वर प्रसाद झा ने बताया सरकार के निर्देशानुसार पहले दिन हर सेंटर पर एक दिन में केवल 100 लोगों को ही टीका लगाया जा रहा है. टीकाकरण

Read more

…तो ऐसे है मुस्तैद बिहार!

कोविन पोर्टल पर लगभग 4.62 लाख लाभार्थियों का हुआ पंजीकरण • राज्य के प्रत्येक टीकाकरण केन्द्रों पर जैव चिकित्सा अपशिष्टों के प्रबंधन की होगी व्यवस्था• राज्य में कोविड टीकाकरण की सभी रूपरेखा है तैयार• राज्य भर में कोविड-19 टीके के भण्डारण की पूरी है व्यवस्था पटना(ओ पी पांडेय): राज्य में होने वाले कोविड-19 टीकाकरण को लेकर राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार है. कोरोना टीकाकरण के प्रथम चरण में चिन्हित सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों के स्वास्थ्यकर्मियों का कोविन पोर्टल पर निबंधन का कार्य भी तेजी से हो रहा है. राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अभी तक बिहार में 462026 लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है. कोविड टीकाकरण के दौरान बायो वेस्ट मैनेजमेंट का रखा जायेगा ध्यान: सहायक निदेशक , राज्य स्वास्थ्य समिति, पीयूष कुमार चन्दन ने बताया सभी टीकाकरण केन्द्रों पर कोविड टीकाकरण के उपरान्त जनित जैव चिकित्सा अपशिष्टों के प्रबंधन(बायो वेस्ट मैनेजमेंट) हेतु कलर कोडेड बैग्स पर्याप्त मात्र में उपलब्ध रहेगी. इन सभी थैलियों को टीकाकरण केन्द्रों से निकटतम शीत श्रृंखला स्थल (कोल्ड चेन पॉइंट) तक लाया जायेगा. वहां से सम्बंधित जैव चिकित्सा अपशिष्ट उपचार केंद्र के माध्यम से उठाव कर उनका निष्पादन किया जायेगा. राज्य में सभी जिलों में कोल्ड चेन पॉइंट को किया जा रहा सशक्त: राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा बताया गया है राज्य के सभी जिलों में कोल्ड चेन पॉइंट को सशक्त किया जा रहा है ताकि कोविड टीकाकरण के दौरान टीकों के रख-रखाव एवं प्रबंधन में किसी भी प्रकार की समस्या न हो. सभी जिलों के जिलाधिकारी इसका

Read more

तो ये मास्क बढ़ाएंगी आपकी मुश्किलें !

‘मास्क’ फैशन ही नहीं सुरक्षा-कवच, वॉल्व वाले मास्क बढा सकते हैं मुश्किलें आरा, 28 दिसंबर(ओ. पी. पांडेय)- कोरोना को लेकर लोगों में मास्क लगाने की जागरूकता सिर्फ फाइन से बचने को लेकर है इसलिए वे फैशन में वैसे मास्क को यूज कर रहे हैं जो सुरक्षा की जगह उन्हें मुसीबत में डाल सकता है. इसे लेकर सिविल सर्जन, आरा ने लोगों को जागरूक करते हुए इसके प्रति लापरवाही को बरतने की सलाह दी. जिले में मास्क का इस्तेमाल करने को लेकर लोगों में जागरूकता तो दिख रही है लेकिन कुछ लोग अभी भी इसकी महत्ता नहीं समझ पा रहे है. लोग जानकारी के अभाव में यह भूल रहे हैं कि मास्क उनकी सुरक्षा के लिए है, फैशन के लिए नहीं. यह उनके लिए सुरक्षा कवच के समान है,जो उन्हें कोरोना वायरस से तो बचा ही रहा है, साथ ही धूल-मिट्टी और प्रदूषण से भी उनकी रक्षा कर रहा है. सिविल सर्जन डॉ ललितेश्वर प्रसाद झा ने इसे सहज पहनने की आदत बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो जुर्माना देने और पुलिसवालों के डर से मास्क पहनते हैं, लेकिन आगे जाकर मास्क दिखावे के लिए गले में लटका लेते हैं. यह खुद की और दूसरों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है. मास्क पहनना केवल समय की मांग ही नहीं है, बल्कि यह आपकी, आपके परिवार की सुरक्षा के लिए है. उन्होंने कहा कि मास्क को उत्साह, स्वाभिमान और साहस के साथ पहनिए और इसे आदत बनाइये.  मास्क को लेकर एक-दूसरे को करते रहे जागरूक

Read more

बड़ा दिन को चित्रांश ने बनाया और बड़ा, 250 लोगों के दिलों में बनाई जगह

आरा(ओ पी पांडेय). 25 दिसम्बर यानि की बड़ा दिन यानि क्रिसमस. क्रिसमस को लेकर हम सब ने बचपन से तैयारियां देखी भी है और करते भी रहे हैं. 25 दिसम्बर और भी खास है क्योंकि भारत रत्न सह पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी वाजपेयी की जयन्ती भी इसी दिन है. बड़ा दिन पर जरूरतमन्दो को सांता क्लॉज उपहार देकर उनके मुरझाये चेहरे पर खुशी की लकीरें लाता है. ठंड से ठिठुरते लोगों को देखने के बाद इस पावन मौके पर चित्रांश समिति ने भी बड़ा दिन की तरह अपना बड़ा दिल दिखाया और अध्यक्ष डॉ ब्रजेश कुमार के नेतृत्व में 250 लोगों को कम्बल वितरण किया. कड़ाके की ठंड में से ठिठुरते लोगों के लिए मसीहा बन कर निकले चित्रांश समिति के लोग और उन्होंने आरा रेल्वे स्टेशन, रमना मैदान के पास दलित बस्ती में गरीबों को बीच में जाकर समिति की ओर से कम्बल बाँटा गया.चित्रांश समिति के जिला कार्यकारी अध्यक्ष कुमार निर्मल उर्फ सुधीर जी ने कहा कि प्रत्येक साल की तरह इस बार भी गरीबों के बीच कम्बल वितरण किया है. सभी समाज सेवक को चाहिए कि अपने-अपने दायित्व को निभाते हुए गरीबों की सेवा करें क्योंकि यही एक नेक काम संतुष्टि के साथ-साथ पुण्य भी आपकी झोली में डालता है. जिला संयोजक डा के एन सिन्हा, सचिव डा. सागर आनन्द, डा. बाला, डा राजीव, डा. ए बी सहाय , डा प्रतीक, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य व भोजपुर जिले के मीडिया प्रमुख डाक्टर रमेश कुमार सिन्हा उर्फ कर्ण जी, संतोष सहाय, समीर कुमार श्रीवास्तव, भीम लाल, तारकेशवर

Read more

मुश्किल वक्त में ओडिशा का KIIT मोर्चे पर सबसे आगे

कोरोना के विरुद्ध जंग में किट विश्वविद्यालय मोर्चे पर सबसे आगे प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न जन समुदाय की पीड़ा को दूर करने या उस पर काबू पाने के लिए कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, (केआईआईटी) भुवनेश्वर और उसकी सहयोगी संस्थान कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने अपने संस्थापक प्रोफेसर अच्युता सामंत के अथक प्रयास के बदौलत इस बार भी कोविड-19 महामारी के प्रकोप से बुरी तरह प्रभावित लोगों तक पहुंचने और सही उपचार का हर संभव प्रयास किया जा रहा है साथ ही उस पर अनवरत काम भी चल रहा है.यह जगजाहिर है कि किट डीम्ड विश्वविद्यालय एक प्रख्यात संस्थान है और यह भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त भी है. इसमें देश के कई राज्य साथ ही 50 के आसपास देशों से लगभग 30000 छात्र और छात्राएं यहां अध्ययन करते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि किट के ही भी सहयोगी संस्थान किश जो देश का पहला और एकलौता आदिवासी विश्वविद्यालय में तीस हजार के आसपास असहाय और विशेषकर आदिवासी बच्चे पढ़ते हैं. यह सारे बच्चे केवल ओडिशा के ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, झारखंड और नॉर्थ ईस्ट के बच्चे हैं. किश की खासियत या है कि यहां पर बच्चे निशुल्क पढ़ते हैं और यह आवासीय विश्वविद्यालय है. कोरोना के चलते जैसे ही संपूर्ण लॉक डाउन की भनक संस्थान की संस्थापक को लगी उन्होंने सभी बच्चों को सुरक्षित अपने-अपने घरों पर वापस भेज दिया था. पूरे लॉकडाउन के दौरान इन सारे बच्चों को किसी भी तरह का शैक्षणिक नुकसान का सामना नहीं करना पड़ा, क्योंकि किट देश का पहला

Read more