पूर्व मध्य रेल ने की 8 स्पेशल ट्रेन के फेरों में वृद्धि

मुंबई सेंट्रल, उधना, राजकोट से विभिन्न स्टेशनों के लिए चलायी जा रही 8 स्पेशल ट्रेन के फेरों में वृद्धि पटना, 30 मई(ओ पी पांडेय). पूर्व मध्य रेलवे(ECR) ने यात्रियों की भीड़ को देखते हुए कोविड के इस संक्रमण काल में लोगों के लिए 31 मई से 8 ट्रेनों के फेरों को बढ़ाने का निर्णय लिया है. रेलवे ने यह फैसला यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए उनकी सुविधा हेतु किया है. जिन ट्रेनों के फेरों में वृद्धि की गई है वे मुंबई सेंट्रल, उधना, राजकोट से दानापुर, समस्तीपुर एवं भागलपुर के मध्य वर्तमान में चलाई जा रही 08 स्पेशल ट्रेनें है. सभी स्पेशल ट्रेनें पूर्णतया आरक्षित हैं एवं यात्रा के दौरान यात्रियों को कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य होगा. 09011 उधना-दानापुर स्पेशल ट्रेन का परिचालन 31.05.2021 को किया जाएगा. 09012 दानापुर-उधना स्पेशल ट्रेन का परिचालन 02.06.2021 को किया जाएगा. 09049 मुंबई सेंट्रल-समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन का परिचालन 01, 03, 05 एवं 07 जून को किया जाएगा. 09050 समस्तीपुर-मुंबई सेंट्रल स्पेशल ट्रेन का परिचालन 03, 05, 07 एवं 09 जून को किया जाएगा. 09117 मुंबई सेंट्रल-भागलपुर स्पेशल ट्रेन (वाया मुजफ्फरपुर, बेतिया) का परिचालन 04.06.2021 को किया जाएगा. 09118 भागलपुर-मुंबई सेंट्रल स्पेशल ट्रेन (वाया मुजफ्फरपुर, बेतिया) का परिचालन 07.06.2021 को किया जाएगा. 09521 राजकोट-समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन का परिचालन 02.06.2021 को किया जाएगा. 09522 समस्तीपुर-राजकोट स्पेशल ट्रेन का परिचालन 05.06.2021 को किया जाएगा. ECR के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि इन स्पेशल ट्रेनों का समय, ठहराव एवं कोच संयोजन पूर्ववत् ही रहेगा.

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माहवारी के प्रति जगरूकता फैलाता विनम्रता फाउंडेशन

वेबिनार के जरिये जुड़ीं कई महिला हस्तियाँमुहिम bleedfreefriend(ब्लीड फ्री फ्रेंड) के जरिये महावारी के प्रति महिलाओं एवं बच्चियों को जागरूक कर रहा है संस्थान आरा, 29 मई. देश मे हर महीने कुछ खास दिवस निर्धारित हैं जिन्हें मनाया जाता है. इन खास दिवसों की पहचान खास वजह से है और फिर इसे नई पीढ़ी को बताने के उद्देश्य से हर वर्ष जागरूकता के तौर पर मनाया जाता है लेकिन आज भी महिला माहवारी को लेकर जागरूकता बहुत कम ही देखने को मिलता है.28 मई को हर साल विश्व माहवारी दिवस मनाया जाता है. शुक्रवार को इस वर्ष भी मनाया गया लेकिन आम दिवसों की तरह यह सोशल मीडिया पर नही देखने को मिला जो यह साबित करता है कि आज भी इस विषय पर बात करने में आज भी लोगों में संकोच है. इतनी तरक्की के बावजूद आज भी महिला महावारी एक पर्दे के पीछे का विषय बना हुआ. समाज में इसको लेकर एक चुप्पी है अभी भी है, महिलाएं इससे जुड़ी बातें करने में असहज या शर्म महसूस करती है. जिसके कारण वह कई तरह के संक्रमण और बीमारी से ग्रसित हो जाती हैं. लेकिन आरा जैसे छोटे शहर में भी इस दिवस को एक निजी संस्था ने मनाया. “विनम्रता फाउंडेशन” नामक इस संस्था ने महिलाओं को जागरूक करने के लिए एक मुहिम शुरू की है जिसका नाम है #bleedfreefriend(ब्लीड फ्री फ्रेंड). इस मुहिम के माध्यम से वह माहवारी के प्रति महिलाओं एवं बच्चियों जागरूक करेंगी, उनकी समस्याओं पर डाक्टरी परामर्श, एवं Re-usable Pads अथवा सूती कपड़ों के बने

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‘निजी स्कूलों में भी बच्चों के टीकाकरण की यथाशीघ्र व्यवस्था करे सरकार’

पटना, 29 मई. प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमायल अहमद ने केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार से निजी विद्यालयों के बच्चों को जल्द से जल्द वैक्सिन लगाने की व्यवस्था मांग की है. उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के द्वारा विभिन्न प्रकार के टीकाकरण के लिए विद्यालयों का ही चयन किया गया है चाहे वह खसरा, रूबेला, पोलियो, मलेरिया आदि के टीके एवं टौनिक और विभिन्न प्रकार की दवाइयां ही क्यों ना हो. यह सभी टीकाकरण हमेशा से स्कूलों के प्रांगण में होते आए हैं और निजी स्कूलों ने भी हमेशा सरकार का बढ़-चढ़कर साथ दिया एवं उनके कार्य को सफल बनाया है. आज जब महामारी के इस दौर में कोरोना की तीसरी लहर का खतरा बच्चों के ऊपर मंडराने की आशंका है तो भला निजी विद्यालय पीछे कैसे हट सकता है. शमायल अहमद ने केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार से किसी अनहोनी के होने से पहले ही सचेत होते हुए विद्यालयों को खोलने एवं वहां स्कूल के बच्चों के टीकाकरण करने का आदेश देने की गुहार लगायी है. उन्होंने कहा यदि सभी विद्यालयों में टीकाकरण होता है तो बच्चों के टीकाकरण की एक पक्की एवं स्पष्ट सूची भी ज्ञात हो जाएगी साथ ही साथ एक भी बच्चा टीकाकरण से वंचित नहीं हो पायेगा. उन्होंने बच्चों के टीकाकरण को अत्यंत आवश्यक बताया क्योंकि यदि वह घर में भी है तो असुरक्षित है क्योंकि उनके माता-पिता एवं परिवार के सदस्य घर से बाहर अपने अपने कार्य के लिए निकलते हैं और

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उपमुख्यमंत्री ने 15 दिनों के भीतर मांगी 14 जर्जर सड़कों की सूची

सर्वेक्षण कर प्राथमिकता के आधार पर होगी सूची तैयार, फिर शुरू होगा निर्माण Impact of Patna Now आरा,29 मई. नगर निगम बनने के बाद भी आरा की जर्जर सड़कों को देखने के बाद ऐसा लगता है कि हम किसी गाँव मे भी नही हैं. शहर में रहने के बाद भी लगता है जैसे किसी नरक में ही निवास कर रहे हैं. “पटना नाउ” ने गोढना रोड के नरकीय स्थिति को नर्कलोक का प्रवेश द्वार से खबर प्रकाशित कर शहर के नारकीय स्थिति की वास्तविकता को सरकार और प्रशासन के सामने ला उनको, उनके विकास का आइना दिखाया था. “पटना नाउ” की खबर के बाद उसका असर देखने को मिला है. यह असर शुक्रवार को हुई उपमुख्यमंत्री के आवास पर हुई बैठक के बाद देखने को मिला है. भोजपुर मुख्यालय आरा की इस दुर्दशा पर संज्ञान लेते हुए उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने विभाग के सचिवों को फटकार लगाते हुए सर्वेक्षण कर जर्जर सड़कों की सूची के लिए 15 दिनों का समय मुक़र्रर किया है. नगर विकास सह उप मुख्यमंत्री ने भोजपुर मुख्यालय के 14 जर्जर पथों पर संज्ञान लेते हुए पथ निर्माण विभाग एवं नगर विकास विभाग के सचिव को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने आदेश जारी कर कहा दोनों विभागों के स्थानीय मुख्य अभियंता इन जर्जर पथों का सर्वेक्षण 15 दिनों के अंदर प्राथमिकता के आधार पर कर सूची तैयार करने को कहा है. बिहार के उप मुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री तारकेश्वर प्रसाद की अध्यक्षता में आरा नगर के जर्जर पथों की मरम्मत एवं निर्माण को लेकर

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नर्कलोक का मामला सुप्रीम कोर्ट में !

सुप्रीम कोर्ट पहुँचा गोढना रोड के नरकीय स्थिति का मामला कैसे बन गया स्टेशन के समीप का गोढना रोड नर्क?आरा, 27 मई. आरा नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नम्बर 45 में स्थित गोढना रोड की नारकीय स्थिति से सारे शहरवासी परेशान है. यहाँ आते ही नर्कलोक में प्रवेश करने जैसा प्रतीत होता है. आरा रेलवे स्टेशन से महज कुछ ही दूरी पर होने के बावजूद इसकी यह दुर्दशा कैसे हुई इस बात को पटना नाउ ने समझने की कोशिश की. आखिर क्या बात हुई कि मुख्य रोड से लेकर हर गली में जल जमाव हो गया? जब इस तथ्य को हमारे रिपोर्टर ने खोजा तो पता चला कि गोढना रोड के आस-पास का इलाका नए तौर पर विकसित इलाका है. पिछले 10-15 वर्षों में इस इलाके में लोगों ने इस इलाके में घर बनाने शुरू किए. धीरे-धीरे यह इलाका एक सघन कॉलोनी के रूप में रिहायशी इलाके में तब्दील हो गया. मुख्यतः दक्षिण इलाके से नक्सलवाद से पलायन करने वाले लोगों ने स्टेशन से नजदीक होने के कारण इस इलाके को चुना. वार्ड 45 बड़ा होता गया और गली व सड़को का बनना भी शुरू हुआ. लेकिन नारकीय स्थिति तब से बनी जब मुख्यमंत्री के सात निश्चय वाले प्रोजेक्ट ने इस वार्ड का रुख किया. हर घर तक नल और हर गली के पक्कीकरण की योजना ने इस इलाके में लोगों के घर तक पानी तो नही पहुंचाया लेकिन यहाँ के निवासियों को पानी-पानी जरूर कर दिया. लोगों ने सरकार को टैक्स ये सोचकर भरा कि इस इलाके में विकास

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नर्क-लोक जाना है…. तो यहाँ आइये

गोढना रोड – नर्क का प्रवेश द्वार Patna Now Special आरा, 25 मई. आइये आपको नर्क की सैर कराते हैं. कहते हुए खराब तो लग रहा है लेकिन यकीन है कि आप खुद से देखने के बाद जरूर मान लेंगे कि हाँ सचमुच ये नर्क ही है. यह जगह कही और नही बल्कि आरा शहर के ही घनी आबादी वाले इलाके में हैं जो स्टेशन से महज कुछ कदमों की दूरी पर है जहाँ आप खुद से चलकर जा सकते हैं. हाँ गाड़ी या साइकिल के साथ कोशिश मत कीजियेगा क्योंकि यहाँ पैदल चलना खतरे से खाली नही है तो खुद समझ लीजिए साइकिल या मोटरगाड़ी आपको और आफत में डाल देगी. आरा नगर निगम क्षेत्र का एक वार्ड है वार्ड नम्बर 45. इस वार्ड में पड़ने वाले मुख्य रोड यानि गोढना रोड की वह दुर्दशा है कि बयान करना भी मुनासिब नही लगता. इसी वार्ड में रहते हैं पूर्व मेयर सुनील यादव और पूर्व मेयर प्रियम. अपने कार्यकाल के दौरान मेयर ने शहर में खूब काम किया लेकिन अपने ही वार्ड में अपनी वार्ड की नरकीय दशा को ठीक नही कर सके. हालत यह है कि आज भी गोढना रोड किसी नरक से कम नही है. गोढना रोड की सड़क का हाल यह है कि बरसात भी यहाँ आने से शर्माती है. सालोभर मुख्य सड़क पर ही जल जमाव लगा रहता है. सड़क पर इतने गड्ढे हैं कि गिन पाना सिर के बाल गिनने जैसा है. तीन दिन पहले ताउते तूफान के कारण पूरे देश भर में 2-3 दिनों

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यूथ फाॅर सेवा ने किया कोविड संक्रमितों के बीच होम केयर कीट का वितरण

युथ फाॅर सेवा महामारी में हर संभव सेवा के लिए संकल्पित आरा,24 मई. कोविड संक्रमण के इस दौर में जहाँ अधिकांश लोग आपदा को अवसर बना बना पीड़ितों को लूटने में लगे हैं वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इस काल में फरिश्ते बन पीड़ितों की सेवा के लिए हर तरह से खड़े हैं. ऐसे लोगों में कुछ हुए लोग हैं जो समाज में निरंतर बदलाव लाना चाहते हैं और कुछ वे लोग भी हैं जिसको भी काल में अपनों को खोने के बाद भी वे पीड़ितों के बीच मुस्तैदी से खड़े हैं ताकि उनका कोई अपना साथ में छोड़ दे. ऐसा ही एक यूथ ग्रुप है जो संक्रमितों के बीच होम केयर कीट बाँट लोगो को घर पर ही सुरक्षित रहने के लिए जागरूक कर रहा है. इस ग्रुप का नाप है-‘युथ फाॅर सेवा.’ महामारी में हर संभव सेवा के लिए संकल्पित युथ फाॅर सेवा बिहार द्वारा कोविड संक्रमित मरीजों को होम केयर कीट वितरण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. इसके पुर्व समाजसेवी व यूथ फाॅर सेवा की स्वयंसेवक दिवंगत संयुक्ता देवी को स्वयसेवकों ने श्रद्धांजलि अर्पित किया. इस अवसर पर स्वयंसेवक अधिवक्ता कृष्ण मोहन ठाकुर ने कहा कि दिवंगत संयुक्ता देवी हमेशा समाज हित में काम करती थीं. उन्होंने पिछले साल देशबंदी के समय सैकड़ों लोगों को राशन सहित सभी संभव मदद कर समाज में मिसाल कायम किया था. उनके इस सपने को हमलोग आगे भी पुरा करेंगे. इस अवसर पर यूथ फाॅर सेवा के प्रदेश संयोजक आनंद कुमार ने कहा कि यूथ फाॅर सेवा देश

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निगम को चुनौती: न लाइसेंस, न परमिट…खुले में कटता है मटन,मुर्गा व मछली

कहीं ये मटन,मुर्गा और मछली आपको आफत में न डाल दें !लॉक डाउन में भी उड़ रही है नियमों की धज्जियांमंदिर के 100 मीटर के अंदर है फुटपाथी दुकानेंलॉक डाउन में भी शाम में बिकता है सब कुछ आरा,21 मई. अगर आप सड़कों के किनारे लगे मांस मछलियों की दुकानों से मटन और मछली खाते हैं तो आप जान लें ये सुरक्षित नहीं हैं. कभी भी आप अंजान वायरस के चपेट में आ सकते हैं. यहाँ नियमों का पालन और लाइसेंस नहीं होता लिहाजा मक्खियों नालियों और गंदगी के साथ ये खतरनाक वायरस अपना स्थान सुरक्षित कर लेते हैं. जो न सिर्फ आपको बल्कि आपके परिवार की सेहत को संक्रमित कर आपके लिए एक मुसीबत खड़ी कर सकते हैं.पटना नाउ की स्पेशल रिपोर्ट… भोजपुर जिला इस वक्त लॉक डाउन है और 6 से 10 बजे तक सुबह जरूरत की दुकाने खुल रही हैं. राशन,सब्जी,दूध,और दवा की दुकानों के साथ मांस-मछली की भी दुकाने प्रशासन ने खोलने की अनुमति दी है लेकिन मांस,मछली और मटन की अवैध दुकाने हर रोज मनमाने तरीके से ग्राहकों को मांस बेच रहे हैं. मांस विक्रेता खुले में ऐसी गन्दी जगह  मटन,मुर्गा और मछली को काट रहे है जहां गंदगी का अंबार लगा हुआ है. इन जगहों पर वैक्टीरिया और वायरस मांस के साथ ग्राहकों के घर तक पहुंच पूरे परिवार को संक्रमित कर सकते हैं इसका अंदाजा किसी को भी नही है. शहर का शिवगंज मोड़, बस स्टैंड रोड, नवादा मस्जिद के सामने, धोबीघटवा सहित शहर ही नही ग्रामीण इलाकों में भी नाले के किनारे

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बाल-बाल बचा कब्रिस्तान !

आरा, 23 मई. आरा के बस स्टैंड रोड में स्थित कब्रिस्तान में अचानक आग लग गयी. कब्रिस्तान से उठते धुंवे को जब आसपास के लोगों ने देखा तो इलाके में खलबली मच गयी. फिर स्थानीय लोगों ने तुरंत पानी से आग को बुझाया. स्थानीय लोगों के सूझबूझ से बड़े कब्रिस्तान में आग फैलने से बच गयी और कब्रिस्तान बाल-बाल बाख गया वरना इसमें कई कब्रो के साथ अच्छी संख्या में पेड़ भी जल जाते. इतना ही नही अगर यह हादसा बढ़ता तो आसपास के इलाके में स्थित मकान भी इस आग की जद में आ जाते. हालांकि इस आग की सूचना फायर ब्रिगेड को भी लगी और वह भी कब्रिस्तान के पास पहुँचा लेकिन तबतक लोगों ने ही आग आपसी सहयोग से बुझा दिया था। फायर ब्रिगेड के आने तक थोड़ी आग सुलग रही थी, जिसका मुयायना दमकल कर्मियों ने किया और जब आग को पूर्ण रूप से बुझा पाया तब जाकर वापस गए. PNCB

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कोरोना को ताकतवर बना रहा है वैक्सीन !

वैक्सिनेशन ने बढ़ाया कोरोना के नए वैरियंट पटना.23 अप्रैल. “वैक्सीन वायरस को  रोकते नही बल्कि उसे और ताकतवर बनाते हैं.” सुनकर आप भी हैरान हो गए न! लेकिन यह बात हमने मजाक या खबर को सन सनसनीखेज बनाने के लिए नही कहा बल्कि ये बात कही है फ्रांस के नोबेलपुरस्कार विजेता प्रोफेसर ल्यूक मॉन्टैग्नियर (Luc Montagnier) ने. प्रोफेसर ल्यूक के इस दावे ने सबको हैरान कर दिया है. उनका यह दावा वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. प्रोफेसर ल्यूक के अनुसार कोरोना वैक्सीन, वायरस को रोकने के बजाए उसे और मजबूत कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि वैक्सीनेशन के कारण ही कोरोना के नए-नए वैरिएंट उत्पन्न हो रहे हैं. दुनिया में जहां एक ओर तेजी से वैक्सिनेशन के लिए जी तोड़ कोशिशें की जा रही हैं ताकि दुनिया के बड़े आबादी को बचाया जा सके वैसे में प्रोफेसर ल्यूक के इस दावे वाले वीडियो के बाद वैक्सिनेशन पर बहस और संकट छाने के आसार हैं. नेबोल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर ल्यूक ने एक इंटरव्यू में महामारी विज्ञानियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि महामारी विज्ञानियों को वैक्सीन से जुड़े तथ्यों के बारे में पता होने के बाद भी वे खामोश क्यों हैं. उनके अनुसार वैक्सिनेशन(टीकाकरण) के कारण  कोरोना के नए वैरिएंट, मूल वैरिएंट की तुलना में अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं. अब देखना होगा कि प्रोफेसर ल्यूक के इस दावे के बाद दुनियाभर के वैज्ञानिक और टीकाकरण के लिए इतनी तैयारियों के साथ खड़े देश क्या कहते हैं. PNCB

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