5,10 और 100 के पुराने नोटों पर ये है लेटेस्ट जानकारी

जबसे सोशल मीडिया में यह खबर वायरल हुई है कि भारत में ₹5, ₹10 और ₹100 के पुराने नोट बंद होने वाले हैं उसके बाद से ही आम लोगों में हड़कंप मचा हुआ है. दरअसल एक कार्यक्रम के दौरान आरबीआई के एक अधिकारी ने जो बयान दिया था उसे सोशल मीडिया पर डालने के बाद यह कंफ्यूजन पैदा हुआ. इसके बाद लोगों के दिमाग में आशंका घर कर गई है कि ₹5, ₹10 और ₹100 के पुराने नोट हैं उन्हें बंद कर दिया जाएगा और सिर्फ नए नोट ही प्रचलन में रहेंगे. पिछली नोटबंदी में भारी फजीहत झेल चुके लोगों के लिए यह खबर किसी बड़ी झटके से कम नहीं थी. सोशल मीडिया में इस खबर के वायरल होने के बाद प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो(P.I.B) ने ट्वीट करके अपने फैक्ट चेक के जरिए लोगों को जानकारी दी है यह ख़बर पूरी तरह फर्जी है इसमें कहीं कोई सच्चाई नहीं है. क्या है मामला! दरअसल एक कार्यक्रम के दौरान रिजर्व बैंक के एक अधिकारी ने मंच पर यह कहा था कि हम पुराने नोट जो उपयोग के लायक नहीं हैं, उन्हें वापस लेंगे. यह पूरी तरह सामान्य प्रक्रिया है जो सालों भर चलती रहती है. इसमें कुछ भी नया नहीं है. जो नोट कट जाते हैं या फट जाते हैं या उपयोग के लायक नहीं रहते उन्हें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में नए नोटों के बदले बदला जा सकता है और रिजर्व बैंक ऐसे फटे पुराने नोटों को नष्ट कर देता है. इसी खबर को कुछ इस तरह सोशल मीडिया पर पेश

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सास की हत्या कर बहू ने खुद को लगा ली आग

पटना ।। पटना के सकरैचा गांव में सुबह सुबह वीभत्स घटना घटी है. पारिवारिक कलह में बहू आरती देवी ने अपने 55 साल की सास धर्मशीला देवी का गला रेतकर हत्या कर दी. इतना ही नहीं बहु इतना गुस्से में थी की उसने सास की आंखें निकाल ली और खूंखान उखाड़ डाले. इसके बाद भी बहु ने सास के शरीर पर कई जगह चाकू से वार कर बुरी तरह घटना को अंजाम दिया. इसके बाद बहू ने खुद भी आग लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया. आग लगने से वह बुरी तरह झुलस गई. ग्रामीणों के अनुसार घटना के वक्त मृतका के पति माँझील साह गांव में ही घर से बाहर बैठे थे जिन्हें कुछ पता नही चल पाया और बड़ा बेटा पिंटू गांव में सकरैचा पंचायत सरकार भवन के उद्घाटन और गणतंत्र दिवस समारोह में गया हुआ था. जानकारी मिलने पर परिजनों में कोहराम मच गया. वही गांव में हत्या की वारदात के बाद आनन-फानन झंडोत्तोलन कार्यक्रम संपन्न कर सकरैचा पंचायत सरकार भवन का उद्घाटन भी किया गया. इसके बाद मुखिया संतोष कुमार सिंह मौके पर पहुंचे. परसा बाजार थाना पुलिस ने आग में झुलसी बहु को सकरैचा मुखिया के एम्बुलेंस से घायल बहु को पीएमसीएच भेजा. वही शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज मामले की तहकीकात शुरू कर दिया गया. अजीत

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7 दिन से लापता अधिकारी का शव बरामद

पटना ।। 6 दिनों से लापता मसौढ़ी के प्रखंड कृषि पदाधिकारी अजय कुमार का शव बरामद किया गया है. अपहृत कृषि पदाधिकारी अजय कुमार के शव को पटना पुलिस ने गौरीचक थाना क्षेत्र के साहेबनगर से जमीन में गड़ी हुई अवस्था में बरामद किया है. मसौढ़ी के प्रखंड कृषि पदाधिकारी अजय कुमार दिन पूर्व से गायब थे. परिजनों ने अपहरण की आशंका जताई थी. आज पुलिस ने उनके शव को बरामद किया. अपहृत कृषि पदाधिकारी अजय कुमार के शव मिलने की खबर से सनसनी फैल गई है. पटना पुलिस के वरीय अधिकारी मामले को खुद देख रहे हैं. पटना के कंकड़बाग में रहने वाले मसौढ़ी के प्रखंड कृषि पदाधिकारी अजय कुमार गत सोमवार को पटना से अपने कार्यालय जाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन न तो कार्यालय पहुंचे न हीं शाम तक लौट कर घर आए. सोमवार शाम से मंगलवार सुबह तक उनके परिजन मोबाइल में कॉल करते रहे. लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया. उसके बाद मंगलवार की सुबह 9:00 बजे के बाद उनका मोबाइल ऑफ भी हो गया. उनका अंतिम लोकेशन सरवां के पास पाया गया. परिवार ने कंकड़बाग थाना में इस संबंध में मामला दर्ज कराया. जानकारी के अनुसार, अजय कुमार मूलरूप से लखीसराय के बड़हिया के रहने वाले थे. वे मसौढ़ी में प्रखंड कृष पदाधिकारी के पद पर पोस्टेड थे. वे परिवार के साथ कंकड़बाग के बुद्ध नगर रोड नंबर दो दक्षिणी चांदमारी में रहते थे. पिछले दिनों अजय कुमार कोरोना पॉजिटिव हो गए थे. इसके बाद से वह घर पर ही रह

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एम्स में कोरोना से 2 लोगों की मौत

4 नए कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आये 6 लोगों ने कोरोना को हराया, मिली छुट्टी फुलवारी शरीफ ।। पटना एम्स में रविवार को 2 लोगों की मौत कोरोना से हो गयी जबकि नए मरीजो में 4 की जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव निकली है. एम्स कोरोना नोडल आफिसर डॉ संजीव कुमार के मुताबिक पटना एम्स में मुंगेर की 48 वर्षीय कुमारी मंजरी जबकि सारण के 62 वर्षीय शैलेन्द्र कुमार सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गयी. वहीं रविवार को एम्स के आइसोलेशन वार्ड में 4 नये मरीजो की जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई जिसमे दरभंगा, मुजफरपुर, मुगेर के मरीज शामिल हैं . इसके अलावा एम्स में 6 लोगों ने कोरोना को मात दे दिया जिन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया. Ajit

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कोरोना से बचाव का ये है सॉलिड उपाय !

कोरोना महामारी टीकाकरण से ही जाएगी- डॉ रणजीत आरा,24 जनवरी. कोरोना के टीकाकरण का सिलसिला जारी है और फ्रंट वारियर्स को ये लगातार दिया जा रहा है. इस बीच टीका को लेकर संसय और विरोधी ताकतों का विरोध भी जारी है. लेकिन अब तक के टीकाकरण के आँकड़े को देखा जाए तो यह सुरक्षित है और इसका साइड इफेक्ट भी न के बराबर देखने को मिला है. ये आँकड़े सबूत हैं कि भारत ने टीकाकरण के मामले में नया कीर्तिमान स्थापित किया है. यह न सिर्फ भारत के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक सुखद खबर है,लेकिन इस टीका को लेने वालों की प्रतिक्रियाएं ही बता सकती हैं कि यह कितना सहज और महत्वपूर्ण हैं. शनिवार को आरा में डीएम कोठी के समीप मस्तिष्क और नस रोग विशेषज्ञ डॉ रणजीत कुमार सिंह(MD, DM, Neurology) ने भी कोरोना टीका का पहला डोज लिया और 28 दिन के बाद वे दूसरे डोज के लिए भी तैयार हैं. टीका लेने के बाद उन्होंने बताया कि उन्हें किसी तरह की दिक्कत नही हुई, बल्कि आम टीके की तरह यह भी साधारण ही लगा. उन्होंने कहा कि आम जनों को किसी तरह की भ्रांतियों में नही उलझना चाहिए और बेहिचक इस टीके को जितनी जल्दी हो सबको लेना चाहिए ताकि वैश्विक स्तर पर इस बीमारी को खत्म किया जा सके. टीका लेने के बाद क्या कहा डॉ रणजीत ने ?बिल्कुल एक साल पहले चीन के प्रांत वुहान से शुरु हुई कोरोना महामारी की खबर पर चर्चा हमारे देश में शुरु हुई. एक साल में

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10वीं वर्षगाँठ पर संदेश देता एक्रेलिक वर्क

नेशनल साईंटिफिक रिसर्च एवम सोशल एनालिसिस ट्रस्ट की 10वीं वार्षगाँठ आरा, 21 जनवरी. महिलाओं के लिए कार्य करने वाले नेशनल साईंटिफिक रिसर्च एवम सोशल एनालिसिस ट्रस्ट ने आज अपनी 10वीं वार्षगाँठ मठिया स्थित उसके कार्यालय में मनाई. पिछले 10 सालों में ब्यूटीशियन, कसीदाकारी,पेंटिंग,सिलाई और आर्ट आइटमों के निर्माण का प्रशिक्षण ले महिलाएं अपने बूते अपना परिवार चला रही हैं. 10वीं वार्षगाँठ कोरोनाकाल की वजह से बड़े ही सादगी और सरल तरीके से मनाया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर उपमेयर पुष्पा सिंह कुशवाहा, और राजेश कुमार(पार्षद वार्ड 38) ने किया. अपने उद्बोधन में उपमेयर ने संस्था के 10 वर्षों से किये गए कार्यों की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए ये आश्वासन दिया कि वे इस संस्था के लिए हमेशा उपस्थित रहेंगी. उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि महिलाओं को स्वावलंबी बनाने वाली इस संस्थान के लिए आप सभी को भी आगे आना चाहिए जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके. इस मौके पर रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गए जिसमें श्री हनुमत संगीतालय के प्राचार्य पण्डित ब्रजेन्द्र मिश्र ने शास्त्रीय गायन से समा बाँध दिया. उन्होंने भैरवी का खयाल और भैरवी राग का तराना प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं को स्तब्ध कर दिया. शास्त्रीय आलाप से कार्यक्रम स्थल पर पिन ड्रॉप साइलेंट छा गया. शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति के बाद Dance is life ( Art & study center) की बच्चियों द्वारा लोकनृत्य की प्रस्तुति की गयी. सोहर और डोमकच पर अपने नृत्य के जादू से वामिका कौशल( group leader),अद्रिका कौशल,ऋषिका,शिवानी सिंह,शिखा सिंह, ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया. नृत्य की कोरोयोग्राफी आशुतोष

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शिशुओं का क्या हो आहार, जानें आप

भोजपुर जिला में 6 माह से ऊपर के शिशुओं का किया गया अन्नप्राशन• ऊपरी आहार है सुपोषण की कुंजी• सेविकाओं ने बताए ऊपरी आहार के महत्त्वआरा. कुपोषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाये जा रहे हैं| सभी को पोषित करने तथा पोषण का सन्देश घर घर पहुँचाने के लिए सितम्बर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जाता है| इसी क्रम में मंगलवार को जिले के आंगनवाडी केन्द्रों पर 6 माह से ऊपर के शिशुओं का अन्नप्राशन किया गया| जिले के क्रियाशील आंगनवाडी केन्द्रों पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया गया| पोषक क्षेत्र के शिशुओं को खीर खिलाकर इसकी शुरुआत की गयी तथा धात्री माताओं को भी पूरक पोषाहार के विषय में एवं साफ़- सफाई के बारे में जानकारी दी गयी| जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) रश्मि चौधरी ने बताया कि बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए 6 माह तक सिर्फ स्तनपान एवं इसके बाद स्तनपान के साथ पूरक पोषाहार बहुत जरूरी है| उन्होंने इस दौरान घर एवं माँ- शिशु की साफ़ सफाई की जरूरत पर जोर दिया| उन्होंने बताया कि अनुपूरक आहार शिशु के आने वाले जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है| 6 माह से 23 माह तक के बच्चों के लिए यह अति आवश्यक है| 6 से 8 माह के बच्चों को दिन भर में 2 से 3 बार एवं 9 से 11 माह के बच्चों को 3 से 4 बार पूरक आहार तथा 12 माह से 2 साल तक के बच्चों को घर में पकने वाला भोजन भी देना चाहिए| इस

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कोरोना काल में अहम भूमिका निभाने वाली ये थी वो महिला योद्धा

एपिडेमियोलॉजिस्ट अपर्णा झा को लगा कोविड का टीका आरा,19 जनवरी. कोविड महामारी के दौरान जब ज्यादातर चिकित्सक तथा चिकित्सा कर्मचारी तक कोविड के विषय में ठीक ठीक नहीं जान पाए थे उस वक्त से फ्रंट लाइन पर खड़े रहकर कोविड मरीजों की पहचान तथा उनके आइसोलेशन से लेकर इलाज की व्यवस्था में अहम किरदार निभाने वाली भोजपुर जिले की एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ अपर्णा झा को कोविड वैक्सीन का टीका लगाया गया. तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बारह बजे के आस-पास उन्हें टीका लगाया गया. डाक्टर अपर्णा झा को ड्यूटी के दौरान कोविड संक्रमित पाया गया था. बिहार में उस वक्त स्थिति इतनी भयावह थी कि आइएएस तक को अस्पताल में जगह नहीं मिल रही थी. लाखों जिलेवासियों को कोविड संक्रमण से बचाने वाली अपर्णा झा को बेहद चिंताजनक स्थिति में काफी संघर्ष के बाद बीएचयू में एडमिट कराया जा सका था. कई दिनों तक उन्हें आईसीयू में वेंटीलेटर पर रहना पड़ा. पर अब जब उन्हें टीका लगने वाला है तो डॉक्टर झा काफी उत्साहित हैं। साथ ही उनके सहकर्मियों तथा शुभचिंतकों में प्रसन्नता है. आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट

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क्या है AEFI मामला और इसका निदान?

टीकाकरण के उपरांत एइएफआई मामलों के लिए है समुचित प्रबंधन की व्यवस्था पटना – कोरोना टीकाकरण पूरे देश में 16 जनवरी से शुरू की गयी है। टीकाकरण के उपरांत संभावित अड्वर्स इवेंट्स फालोइंग इमुनाइजशन (एइएफआई) मामलों के लिए समुचित प्रबंधन की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार टीकाकरण के उपरांत किसी भी प्रकार की चिकित्सीय परेशानी अगर टीका लगवाने वाले को होती है तो उसके ससमय प्रबंधन को एइएफआई यानी “एडवर्स इवेंट्स फोलोइंग इम्यूनाइजेशन” की संज्ञा दी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की शोध के अनुसार एइएफआई की स्थिति कई कारणों से उत्पन्न हो सकती है और यह जरुरी नहीं है की टीकाकरण ही इसकी वजह हो। टीकाकरण को लेकर आशंका, मन में घबराहट का होना एवं टीकाकरण के समय गलत तकनीक का इस्तेमाल आदि इसके वजह हो सकते हैं। ज्यादातर एइएफआई के लक्षण जैसे जी मितलाना, घबराहट, टीके वाली जगह सूजन एवं सर में दर्द आदि का प्रबंधन आसानी से किया जा सकता है। गंभीर चिकित्सीय जटिलता टीकाकरण के उपरांत कम ही नजर आती है।दो दिनों के टीकाकरण के उपरांत देश में एइएफआई के मात्र 447 मामले सामने आये हैं जिनका त्वरित चिकित्सीय प्रबंधन किया गया। सिर्फ तीन लोगों को अस्पताल में भर्ती करने की जरुरत पड़ी और उनमे से दो लोगों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। एइएफआई के मामलों में सामान्यतः हलके लक्षण जैसे जी मचलाना एवं सर में दर्द आदि लक्षण देखने को मिले हैं। एइएफआई के मामलों के लिए है समुचित प्रबंधन की है व्यवस्था कोविड-19 टीकाकरण के उपरांत

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कैसे होगा परिवार नियोजन का लक्ष्य पूरा?

भोजपुर जिले में मिशन परिवार विकास अभियान के तहत परिवार नियोजन का लक्ष्य किया जाएगा पूरा आरा सदर अस्पताल में परिवार नियोजन मेला का हुआ आयोजन, विभिन्न साधनों की दी गई जानकारी वार्ड स्तर तक आयोजित किये जाएंगे विभिन्न कार्यक्रम, आशा कार्यकर्ताओं को मिली जिम्मेदारी राज्य मुख्यालय के अधिकारियों ने अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने का दिया निर्देश आरा, 18 जनवरी| परिवार नियोजन व इसके साधनों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सोमवार को परिवार नियोजन मेले का आयोजन हुआ। मौके पर अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. बिनोद कुमार ने कहा मिशन परिवार विकास के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य यह है कि इस अभियान में पुरुष और महिला दानों की सहभागिता होनी चाहिए। यह मेला लोगों को परामर्श के साथ निःशुल्क गर्भनिरोधक साधनों को उपलब्ध कराएगा। यहां नसबंदी के अलावा परिवर नियोजन के और भी विकल्प मौजूद हैं। लोग अपनी सहूलियत के हिसाब से किसी भी साधन का इस्तेमाल कर सकते हैं। मेले में कुल नौ स्टाल लगाये गये हैं। मेले में लगे सभी स्टाल में प्रशिक्षित नर्स लोगों का मागदर्शन करेंगी। मौके पर एसीएमओ डॉ. विनोद कुमार, केयर डीटीएल स्वरूप पटनायक , यूनिसेफ के एसएमसी कुमुद रंजन मिश्रा समेत अन्य लोग मौजूद रहे। 21 से 31 जनवरी तक परिवार नियोजन सेवा सप्ताह डॉ. विनोद कुमार ने बताया परिवार नियोजन सेवा सप्ताह का आयोजन 21 से 31 जनवरी तक होगा । दंपति संपर्क पखवाड़े के दौरान लोगों में जागरूकता लाने के लिए सही उम्र में शादी, शादी के बाद कम से कम

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