अभिनेता को भाषाओं पर पकड़ होनी चाहिए

बच्चों में अलग-अलग भाषाओं में भी नाटक करने की है क्षमता — मनोज श्रीवास्तव आरा। 20 दिवसीय कार्यशाला के छठवें दिन छात्रों को खुद से एक्ट प्रस्तुत करने का टास्क दिया गया। इस दौरान ए, बी, सी, डी और इ ग्रुप बना कर बच्चों को बराबर बराबर बांट दिया गया। उसके बाद सभी ग्रुप के बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दिया। इस दौरान अभिराम के दल के द्वारा प्रस्तुत की गई एक्ट पर बच्चों ने जमकर ताली बजाई। अभिराम की टीम ने रानी लक्ष्मीबाई का अभिनय बखूबी निभाया। इसके बाद वर्कशॉप के निदेशक ने भोजपुरी में किये जा रहे एक्ट को अंग्रेजी में करने को कहा। छात्रों ने अपने अभिनय को अंग्रेजी माध्यम में प्रस्तुत किया जिससे बच्चों की टूटी फूटी अंग्रेजी ने खूब हंसाया। छात्रा शीतल गुप्ता ने बताया कि मैंने पहले कभी एक्टिंग वर्कशॉप नहीं किया है। लेकिन योगा करती थी। वर्कशॉप में आकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मुझे यहां आने के बाद खुद में हुई गलतियों का पता चल पाया है। अगर मुझे अभिनय के लिए चुना जाता है तो मुझे अच्छा लगेगा। छात्रा रितु पांडेय ने बताया कि लगातार छह दिनों से मैं वर्कशॉप में आ रही हूं। मैंने कभी पहले वर्कशॉप नहीं किया है। उन्होंने बताया कि जब मैं स्टेज पर जाती हूँ तो थोड़ा डर बना रहता है लेकिन मैं यहां सीखने आई हूं और अच्छा करना चाहती हूं। 14 वर्षीय छात्रा मुस्कान पांडेय ने बताया कि स्टेज पर जाने से पहले डर लगता था, लेकिन अब डर नहीं लगता है। जब शुरू

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कला विश्वविद्यालय खोलने पर सरकार का ध्यान नहीं

नीतीश कैबिनेट में 21 एजेंडा पर लगी मुहर पटना:नीतीश कुमार की कैबिनेट ने आज कई सालों से लंबित कई एजेंडे को आज मुहर लगा दी है।जिसमें 3 नई यूनिवर्सिटी,इंजीनियरिंगमेडिकल और स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी खोले जाएंगे।हर विधानसभा में 1 – 1 पीएचसी और 5 स्वास्थ्य उपकेंद्र खोले जाएंगे।पंचायत समिति का कार्यपालक पदाधिकारी अब बीडीओ नही होंगे,जिला पंचायती राज पदाधिकारी को जिम्मेवारी दी गई हैजेल में सामान्य मामलों में सज़ावार कैदियो को रिहा करने का सरकार ने फैसला लिया है वहीं दिसंबर तक सजा से राहत मिलेेगी।

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देश के अन्नदाताओं को उनका वाजिब हक दिलाना है -नरेंद्र सिंह

यह बिल किसानों को गुलाम बनाने वाला है देश में कारपोरेट घराने को किसानों के हाथों बेचने की कोशिश पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह आज कल किसानों की मांग को लेकर जिलों में भ्रमण कर रहे हैं ।किसानों की दयनीय स्थिति पर केंद्र में मोदी सरकार और बिहार की नीतीश कुमार की सरकार पर मानवता के नाते भी अनदेखी करने का आरोप लगाया।आरा के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा मुख्य कार्य है देश के अन्नदाताओं को उनका वाजिब हक दिलाना। बिहार में शाहाबाद से संयुक्त किसान संघर्ष समन्वय समिति कृषि बिल के खिलाफ लोगों को एकजुट करने की कवायद शुरु करते हुए नरेंद्र सिंह ने कहा कि रोहतास जिले से 13 जुलाई को नोखा में चौपाल से आंदोलन का शुभारंभ हो चुका है किसानों का लागत का डेढ़ गुना पैसा मिले, खरीदारी सुनिश्चित हो प्राथमिकता यही होगी। यह बिल किसानों को गुलाम कर देगा है। अनाज भंडारण के लिए भी प्रावधान नहीं है । देश में कारपोरेट घराने को किसानों के हाथों बेचने की कोशिश की जा रही है। स्वामीनाथन कमिटी की सिफारिश को देश में लागू नहीं किया जा रहा है। इस यात्रा के दौरान संयुक्त किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक सह पत्रकार दिनेश सिंह, डॉ राजेंद्र प्रसाद, समाजसेवी डॉ जितेंद्र शुक्ला एवं अजीत सिंह समेत कई उपस्थित थे ।

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भोजपुर एसपी राकेश दुबे का तबादला

पटना पुलिस मुख्यालय भेजे गए औरंगाबाद के SP सुधीर कुमार पोरिका का भी तबादला आरा, बालू के अवैध उत्खनन के मामले में कार्रवाई करने पर भोजपुर के एसपी राकेश दुबे और औरंगाबाद के एसपी को हटा कर उन्हें पुलिस मुख्यालय में योगदान करने को कहा गया है। गृह विभाग ने आज ही सुधीर कुमार पोरिका और राकेश कुमार दुबे का स्थानांतरण कर दिया है । आपको बता दें कि राकेश दुबे ने भोजपुर में पद सम्भालते ही शराब माफिया और बालू माफिया पर कार्रवाई करते हुए बड़ा काम किया। हाल ही कई वार्ड पार्षदों को शराब की पार्टी में छापेमारी कर राकेश दुबे ने शराब माफियाओं और बालू माफियाओं की कमर तोड़ कर रख दी थी। उनके भोजपुर जिले में पदस्थापन के बाद से किसी भी मामले में त्वरित कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म था । 42वीं बैच के बिहार पुलिस सेवा के अधिकारी से आइपीएस अधिकारी बने राकेश दुबे भोजपुर के 99वें नए एसपी के रूप में जिले की बागडोर संभाल कर कई महत्वपूर्ण मामलों का निपटारा किया था । Pnc

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देश का सातवां एयरपोर्ट भी अडानी के जिम्मे

गुवाहटी, लखनऊ, अहमदाबाद, मंगलुरु, जयपुर और तिरुवंतपुरम एयरपोर्ट के बाद अब जुड़ा मुम्बई एयरपोर्ट हजारों लोगों को नौकरी देने का किया वादा देश के छह एयरपोर्ट का प्रबंधन सम्भालने वाले अडाणी समूह ने जीवीके ग्रुप से मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का प्रबंधन संभाल लिया है। इस मौके पर चेयरमैन गौतम अडाणी ने हजारों लोगों को नौकरियां देने का वादा किया है।इस सौदे के बाद मुंबई के छत्रपित शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे में अडाणी समूह की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। इसमें से 50.5 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण जीवीके समूह से और शेष 23.5 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण अल्पांश भागीदारों एयरपोर्ट्स कंपनी साउथ अफ्रीका (एसीएसए) और बिडवेस्ट ग्रुप से किया जाएगा। अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी ने ट्वीट किया कि विश्वस्तरीय मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का प्रबंधन लेकर हम काफी खुश हैं। मुंबई को हम पर गर्व होगा। अडाणी ग्रुप भविष्य के कारोबार के लिए हवाईअड्डा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगा। इसके लिए हम हजारों लोगों को जॉब देने का काम करेंगे । आपको बताते चले कि गौतम अडानी के पास पहले से छह एयरपोर्ट के संचालन का जिम्मा होगा ।अडानी ग्रुप के पास है इन हवाई अड्डों के संचालन का जिम्मामुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अलावा अडानी ग्रुप के पास गुवाहटी, लखनऊ, अहमदाबाद, मंगलुरु, जयपुर और तिरुवंतपुरम एयरपोर्ट के संचालन का जिम्मा है.

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नियमित फिजिकल कोर्ट शुरू करने के लिए हाईकोर्ट से गुहार, सुझाये उपाय भी

आरा ।। अदालतों में एक सुरक्षात्मक तंत्र के माध्यम से अधिवक्ताओं के प्रवेश को सुनिश्चित और नियमित करते हुए न्यायालय कार्य शुरू करवाने के लिए बिहार युवा अधिवक्ता कल्याण समिति पटना के अधिवक्ता नितीश कुमार सिंह ने मननीय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा है. नीतिश कुमार सिंह सिवील कोर्ट,आरा सह शाहाबाद प्रमंडल के संगठन मंत्री भी हैं बिहार युवा अधिवक्ता कल्याण समिति के. उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि यह एक तथ्य है कि देश कोविड -19 के प्रसार के कारण बहुत भयावह दौर से गुजर रहा है. इन दिनों का अनुभव बहुत उत्साहजनक नहीं है, न्यायालय में अधिवक्ताओं के प्रवेश को रोक देने के बाद से, उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों में अधिसंख्य अधिवक्ताओं के बहुमत, जो कंप्यूटर के जानकार नहीं हैं जिसके कारण वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा का लाभ नहीं उठा सकते हैं, जिससे माननीय से संपर्क करने में विफल रहे हैं. अधिसंख्य हाइकोर्ट अपने यहाँ फिजिकल सुनवाई करने जा रही है. बिहार में कोरोना के केसेज बहुत ही कम आ रहे हैं इस कारण, कुछ व्यापक मापदंडों और पर्याप्त सुरक्षा उपायों को पेश किया जा सकता है, जो कि अदालतों में एक सुरक्षात्मक तंत्र के माध्यम से अधिवक्ताओं के प्रवेश को चालू और नियमित किया जा सकता है. उन्होंने न्यायालय से अपील किया है कि न्यूनतम संभव कार्य को सुचारू रूप से शुरु कराया जाय जिससे कोर्ट से सम्बंधित सभी लोगों का काम चल सके. इसमें कोई संदेह नहीं है, घर में बेकार बैठना एक मजबूरी है, लेकिन इससे भी अधिक, मुकदमों के

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पांच साल बाद नीतीश का जनता दरबार

300 से 400 फरियादियों की सुनी जा रही है फरियाद पटना:-मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज अपने जनता के दरबार कार्यक्रम मुख्यमंत्री सचिवालय,4 देशरत्न मार्ग,पटना में पाँच साल बाद जनता दरबार शुरू किया है। ज्ञात हो कि दो एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया था ।उसके बाद से मुख्यमंत्री सचिवालय में हलचल शुरू हो गई और पांच साल से बंद जनता दरबार को फिर से खोलना पड़ा। आज सुबह से ही दूर दराज के इलाके से फरियादी मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंचने लगे थे। फरियादियों के साथ मीडियाकर्मियों की भी भारी भीड़ जुटी थी लेकिन 3 न्यूज एजेंसी को छोड़कर किसी भी मीडिया संस्थान को प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। प्रवेश नहीं मिलने का कारण कोविड बताया गया ।

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कहाँ है लघुकथा नगर

लघुकथा के पितामह डॉ. सतीशराज पुष्करणा अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच” की स्थापना की पटना : “लघुकथा आंदोलन की शुरुआत करने वाले डॉ. सतीशराज पुष्करणा पटना में मेरे पड़ोसी हुआ करते थे। मैंने उनसे साहित्य के अनेक विधाओं के बारे में सीखा लेकिन लघुकथा नहीं लिख पाया। इसके पीछे की प्रेरणा भी सतीशराज पुष्करणा ही थे। वह हमेशा कहते थे जिस विधा में रुचि हो उस विधा में खुद को पारंगत करो।” उक्त बातें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अवधेश प्रीत ने लेख्य-मंजूषा एवं अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच के संयुक्त तत्वाधान आयोजित कार्यक्रम “शब्दांजली” में कहे। “शब्दांजली” कार्यक्रम पटना के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सतीशराज पुष्करणा जी को श्रद्दांजली सुमन अर्पित करने के लिए किया गया था। विगत 28 जून 2021 को सतीशराज पुष्करणा का निधन दिल्ली में उनके बेटी के आवास पर हुआ था।  पटना के आर ब्लॉक के इंजीनियर्स भवन में आयोजित इस कार्यक्रम लघुकथा के पितामह डॉ. सतीशराज पुष्करणा जी को याद करते हुए अवधेश प्रीत ने बताया कि पुष्करणा जी पटना में जहाँ रहते थे उस जगह का नाम ही उन्होंने “लघुकथा नगर” कर दिया था। उनके यहाँ आने वाली हर चिट्ठी पर यही पता अंकित रहता था।  अवधेश जी ने लघुकथा के क्षेत्र में कार्य करने वालों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आने वाले दिनों “लघुकथा का इतिहास पुष्करणा से पहले और पुष्करणा के बाद” का विमर्श होना चाहिए। कार्यक्रम की शुरुआत में हॉल में उपस्थित सभी लोगों ने पुष्करणा जी के तस्वीर पर पुष्प चढ़ाए और उन्हें अपनी श्रद्दांजली अर्पित की। इस मौके वरिष्ठ पत्रकार

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क्या आपने देखा “वॉल ऑफ वरियर्स”

दीवार पर अनोखी पेंटिंग, जिसमें सम्मानित है हर एक कोरोना से लड़ने वाले कोरोना काल की त्रासदी से जीतने वालों की याद दिलाता पेंटिंग आरा 11जुलाई. दुनिया मे कुछ दीवार ऐसे हैं जिसे देखने के लिए खास तरह से सैलानी वहाँ जाते हैं और उसकी खासियत लोगों को लुभाती भी है. इन दीवारों में वॉल ऑफ ट्रॉय,बर्लिन वॉल,वॉल ऑफ स्टोन और वॉल ऑफ चाइना जैसे कई नाम दुनिया मे प्रचलित है.ऐसे ही एक वॉल का निर्माण भोजपुर मुख्यालय आरा में भी हुआ है जिसका नाम है वॉल ऑफ “वरियर्स.” चौंकने की कोई जरूरत नही क्योंकि यह कोई कोरी खबर नही बल्कि सच्चाई है लेकिन इस वाल पर आप घूम नही सकते क्योंकि यह वाल तो जरूर है लेकिन यह अपने पर खूबसूरत पेंटिंग को संजोए बीते पल से सबको रुबरु करा रहा है. जिसका उद्घाटन शनिवार को किया गया. आइये जानते हैं कैसा बना है वॉल(दीवार) है. आरा में यह लोगो को आकर्षित करने वाला दीवार मंगलम दि वेन्यु,दक्षिणी रमना रोड आरा में स्थित है. जिसके ऑनर हैं भोजपुर के मशहूर चिकित्सक डॉ विजय गुप्ता एवं संगीता गुप्ता. कला के प्रति समर्पित डॉक्टर विजय की मुलाकात जब राष्ट्रीय स्तर के चित्रकार कौशलेश के युवा चित्रकारों की टीम से हुई तो उन्होंने मंगलम जिसे उन्होंने उत्सव प्लेस के रूप मे बनाया था,जहाँ कोविड काल आते ही उन्होंने उसे मरीजों के इलाज के लिए समर्पित कर दिया. कोविड का खतरा तलने के बाद डॉ विजय ने दीवार को यादगार बनाने के लिए पेंटिंग को चुना और चित्रकार कौशलेश से अपनी सोच को

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रेलवे के फ्यूचर प्लानिंग का हिस्सा बनी भोजपुरी पेंटिंग

भोजपुर के कलाकारों की छोटी मगर ऐतिहासिक जीत, भोजपुरी पेंटिंग को रेलवे ने दिया सम्मान भोजपुरी पेन्टिंग का चित्रांकन पूर्व मध्य रेलवे के अन्तर्गत आने वाली भोजपुरी भाषी रेलवे स्टेशनों एवं ट्रेनों पर भविष्य के लिए विचाराधीन 39वें दिन रेलवे ने दिया मोर्चा को दिया पेंटिंग कराने के लिए लिखित आश्वासन आरा,9 जुलाई. 39 दिनों से भोजपुरी पेंटिंग के सम्मान के लिए रेलवे परिसर में आंदोलकारी कलाकारों के लिए आज का ऐतिहासिक तो साबित हुआ लेकिन रेलवे द्वारा इस मांग को भविष्य के लिए विचारणार्थ लिखित आदेश किसी लॉलीपॉप से कम नही. लिखित आदेश जहाँ रेलवे पर विश्वास करने का आंदोलनकारियों के लिए एक मोहरा है वही रेलवे के लिए भी यह आंदोलन समाप्त करने की रणनीति जरूर है पर आश्वासन उसके गले की हड्डी बन सकती है. निर्धारित समय के अनुसार रोजाना की तरह गुरुवार को 39वें दिन भी सुबह से ही आरा रेलवे स्टेशन पर कलाकारों एवं संस्कृतिकर्मियों का भारी जमावड़ा आंदोलन को तीव्र धार देने के लिए जमा था. जहाँ आन्दोलनकारी कलाकारों ने रेलवे परिसर में 9.30 बजे से आन्दोलन अपने रंगारंग कार्यक्रम के साथ जारी रखा. लोकगीतों,जनगीतों और नुक्कड़ नाटक के जरिये रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वालों का,कलाकारों ने उनके ट्रेन आने तक उन्हें धरना-स्थल पर जरूर रोके रखा. दोपहर 12.30 बजे रेलवे अधिरकरियो का सबको बेसब्री से इंतजार था. वरीय मंडल अभियंता अमित गुप्ता को मोर्चा की ओर से पुनः भोजपुरी पेंटिंग को रेलवे स्टेशन पर अंकन के लिए एक लिखित आवेदन दिया गया जिसके बाद उसके प्रतिउत्तर में रेलवे ने एक पत्र मोर्चा के

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