कृतज्ञ ब्रह्मर्षि समाज ने दी अपने संस्थापक रामजी मिश्रा को भावभीनी श्रधांजलि

रामजी मिश्र के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई रामजी मिश्र जैसे पुरुषार्थी व्यक्तित्व रोज- रोज पैदा नहीं होते वासवी ऑडिटोरियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा ब्रह्मर्षि सेवा समाज हैदराबाद ने अपने संस्थापक अध्यक्ष दिवंगत रामजी मिश्र को श्रद्धापूर्वक याद किया। लकड़ी का पुल स्थित वासवी ऑडिटोरियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने मिश्रा जी के जीवन, कार्य और उनके सामाजिक योगदान को याद किया और उनकी स्मृतियों को स्थायी स्वरुप देने का संकल्प लिया.श्रद्धांजलि सभा के दौरान सबसे पहले स्मृतिशेष रामजी मिश्र के तैलचित्र पर पुष्पांजलि का दौर चला. फिर आर के सिंह सहित गायकों की मंडली ने भजन और निर्गुण की प्रस्तुति दी. स्मृति सभा का संचालन ब्रह्मर्षि समाज की अध्यक्ष इंदिरा राय ने किया. उन्होंने कहा कि बिहार के सीतामढ़ी जिले के छोटे से गांव जानीपुर से निकलकर रामजी मिश्र ने अपने परिश्रम और किस्मत से हैदराबाद में एक विशाल आर्थिक और सामाजिक साम्राज्य खड़ा किया. समाज के पूर्व अध्यक्ष श्रीकांत चौधरी ने कहा कि रामजी मिश्रा ने अपने लोगों को एकता के सूत्र में बांधने के लिए बिहार एसोसिएशन, मिथिला सामाजिक मंच, ब्रह्मर्षि सेवा समाज जैसे संगठनों के निर्माण, संचालन और विस्तार में अपना तन,मन, धन लगाया. रामगोपाल चौधरी ने कहा कि उनके जीवन और व्यापार को संवारने वाले हैदराबाद में रामजी मिश्र ही थे, उन्होंने परशुराम मंदिर सहित कई मठ-मंदिरों के निर्माण में सर्वाधिक धन लगाया. हैदराबाद में बिहारियों से जुड़े जितने भी संगठन सक्रिय हैं, उनको बनाने और चलाने में रामजी मिश्र का योगदान अभूतपूर्व रहा है. डॉ. सरज कुमार

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ओमीक्रोन बीए.2 वेरिएंट पटना में मचा रहा है तबाही

डेल्टा प्लस ,डेल्टा और अब नये वेरिएंट के शिकार मुंबई में मिला हई बीए.1 का वेरिएंट पटना में मिला है दक्षिणी अफ्रीकी वेरिएंट ओमीक्रोन बीए.2  सात गुना ज्यादा है इसका संक्रामक दर राजधानी पटना में दक्षिण अफ्रीकी ओमीक्रोन वेरिएंट का जेनेटिक पैटर्न बीए 2 मिला है. वहीं, मुंबई और महाराष्ट्र में बीए1 पैटर्न है. दोनों वेरिएंट संक्रामक हैं और तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका में इसके प्रसार के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों ने इसे डेल्टा वेरिएंट से सात गुना ज्यादा संक्रामक बताया है. हालांकि राहत की बात यह भी है कि विशेषज्ञों के मुताबिक डेल्टा के मुकाबले यह कम घातक है. आईजीआईएमएस माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष और राज्य में जीनोम सिक्वेंसिंग जांच टीम का नेतृत्व करनेवाली डॉ. नम्रता ने बताया कि ओमीक्रोन नि:संदेह अबतक डेल्टा के मुकाबले बेहद कम घातक है. डेल्टा से जितनी मौतें हो रही थीं, पूरे विश्व में ओमीक्रोन से वैसी मौत नहीं देखी गई हैं, लेकिन संक्रमण क्षमता सात से 10 गुना ज्यादा है. राजधानी में घनी आबादी के कारण इसका संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है. जिस तेजी से यह संक्रमण फैल रहा है वह एक दिन में संक्रमितों की संख्या मिलने का पिछला सारा रिकॉर्ड तोड़ सकता है. इस लिए जरूरी है कि बचाव के लिए कोरोना मानकों को अपने व्यवहार में शामिल करना होगा अभी फिलहाल यही सबसे अच्छा उपाय है. पीएमसीएच के वरीय श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके चौधरी ने बताया कि दूसरी लहर के दौरान डेल्टा से संक्रमित होकर अस्पताल

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3 जनवरी से लगेगा किशोरों को टीका

पटना के 720 स्कूलों के 4.93 लाख बच्चों का वैक्सीनेशन3 जनवरी से बच्चों के वैक्सीनेशन की तैयारीराजधानी में 24 घंटे में तैयार होगा सेंटर720 हाई स्कूल के बच्चों को लेकर तैयारी एक जनवरी से बच्चों के वैक्सीनेशन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है. पटना से लेकर राज्य के अन्य जिलों में बच्चों के वैक्सीनेशन को लेकर कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन चल रहा है. इस बीच राज्य के सभी जिलों में बच्चों के वैक्सीनेशन को लेकर सेंटर की तैयारी युद्ध स्तर पर है. पटना में 720 हाई स्कूलों के 4 लाख 93 हजार बच्चों के वैक्सीनेशन की तैयारी चल रही है. पटना में 720 हाई स्कूल हैं, जिसमें 4 लाख 93 हजार बच्चे हैं. इसमें 425 सरकारी विद्यालय और 295 प्राइवेट स्कूल हैं. पटना में कुल 87 टीम का गठन किया गया है, जिसमें 53 ग्रामीण स्कूलों के लिए, 20 शहरी स्कूलों के लिए, 14 टीम मेडिकल कॉलेज के बनाई गई है. 24×7 केंद्र के लिए टीम गठित किया गया है. डीएम ने स्कूलों का तिथि वार रोस्टर बनाने, टीम को स्कूलों से संबद्ध कर समन्वय बनाने और सूचना देने का निर्देश दिया है.प्रशासन का आदेश है कि स्कूलों में रोस्टर बनाकर ड्यूटी लगाई जाएगी, जिससे वैक्सीनेशन का काम काफी आसान हो जाएगा. स्कूल प्रबंधक को पेरेंट-टीचर मीटिंग करने के भी निर्देश दिए गए हैं. पटना डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह का कहना है कि वैक्सीनेशन को लेकर क्या करें और क्या न करें, इसे लेकर फ्लैक्स तैयार करने का निर्देश दिया है. इसे बच्चों के वैक्सीनेशन सेंटर पर लगाया

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कोरोना को देखते हुए सभी पार्क बन्द

नए साल में पार्क और चिड़िया घर में नहीं मिलेगा प्रवेश मुख्यसचिव ने जारी किया आदेश ,तीन दिनों तक रहेंगे बन्द मुख्य सचिव त्रिपुरारी  शरण ने कोरोना  संक्रमण का खतरा के कारण 31 दिसम्बर से तीन दिनों तक बिहार के सभी पार्क रहेंगे पूरी तरह बंद करने का आदेश जारी किया है . इसकी सूचना आज जारी की गई.

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नौकरी की तलाश में हैं तो…

वाहन प्रदूषण जांच केंद्र खोले सरकार देगी प्रोत्साहन राशि134 प्रखंडों के लिए कर सकते हैं आवेदन3 लाख रुपए प्रोत्साहन राशि का अनुदानजिस प्रखंड में वाहन प्रदूषण जांच केंद्र नहीं है वहां जांच केंद्र खोलने के लिए सरकार प्रोत्साहन राशि देगी. वाहन प्रदूषण जांच केंद्र खोलने के लिए परिवहन विभाग ने आम लोगों से आवेदन मांगा है. 35 जिलों में 134 प्रखंडों के लिए आवेदन आमंत्रित किये गए हैं. इच्छुक व्यक्ति 15 जनवरी 2022 तक जिला परिवहन कार्यालय में इसे लेकर आवेदन कर सकते हैं. परिवहन मंत्री शीला कुमारी की माने तो नए प्रदूषण जांच केंद्र खुलने से लोगों को रोजगार का अवसर मिलेगा. वहीं लोगों को वाहन प्रदूषण जांच कराने में सहूलियत होगी. परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि प्रखंडों में वाहन प्रदूषण जांच केंद्र खोलने के लिए वाहन प्रदूषण जांच केंद्र प्रोत्साहन योजना लागू की गई है. इसके तहत प्रदूषण जांच केंद्र खोलने के लिए उपयोग में लाये जाने वाले उपकरणों (स्मोक मीटर, गैस एनालाइजर, डेस्कटॉप इंटरनेट के साथ, प्रिंटर एवं यूपीएस) की क्रय मूल्य का 50 प्रतिशत राशि या अधिकतम 3 लाख रुपए प्रोत्साहन राशि अनुदान स्वरूप दिया जाएगा. 24 जनवरी को प्रखंड वार सूची का प्रकाशन होगा. प्रखंडों में वाहन प्रदूषण जांच केंद्र खोलने के लिए इच्छुक आवेदक 15 जनवरी 2022 तक विहित प्रपत्र में आवेदन संबंधित जिला परिवहन कार्यालय में दे सकते हैं. योग्य लाभुकों का चयन 17 जनवरी 2022 तक किया जाएगा. जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा चयनित लाभार्थियों की प्रखंडवार सूची का प्रकाशन 24 जनवरी 2022 तक संबंधित प्रखंडों में किया जाएगा. इसके

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‘मास्ससाहब’ में भागती-दौड़ती जिंदगी के संवेदनशील दृश्य व समस्याओं का चित्रण

हर एक घटना एक कहानी का प्लॉटरणजीत बहादुर माथुर के कहानी संग्रह ‘मास्ससाहब’ का हुआ लोकार्पण नियोजित शिक्षकों की समस्या को लेखक ने बड़ी ही वेदना के साथ उकेरा यहां सुनें – पुस्तक मास्ससाहब में…. हर व्यक्ति के भागती – दौड़ती जिंदगी में दिखने वाली संवेदनशील दृश्य व समस्याओं को रणजीत बहादुर माथुर ने अपनी रचना मास्ससाहब में उकेरने की कोशिश की है. इनकी रचनाओं में हिंदी – उर्दू का स्वाद मिलता रहेगा. भाषा काफी सरल और सहज है जिससे सभी पाठक लेखक की रचना के साथ एक अच्छा सफर तय कर सकते है. मास्ससाहब इसलिए भी एक सार्थक रचना है क्योंकि लेखक ने अपनी बात में ये स्पष्ट कर दिया कि ये उनकी आप बीती घटनाओं पर आधारित है , सिर्फ लेखनी को संवारने के लिए थोड़ी बहुत कल्पनाओं का सहारा लिया गया है। इस रचना में एक अनुभव है जिसमें लेखक रेलवे प्लेटफॉर्म पर एक भिखारी की वेदनाओं को समझता है और फिर उसका शीर्षक “अब मैं यहीं रहूंगा देता है”. रेलवे प्लेटफॉर्म पर एक भिखारी जिसका एक पैर कटा हुआ है और वो अपनी जिंदगी रेलवे प्लेटफॉर्म पर ही गुजरता है. भिक्षाटन से वो काफी अच्छा पैसा कमाता है लेकिन माँ की ममता उसे भीख मांगने से किस तरह रोकती है. इस घटना का एक सचित्र चित्रण लेखक ने किया है. इसी तरह लेखक अपनी इस रचना में अगला शीर्षक ” कहानी का प्लॉट ” देता है जिसमें लेखक ने समाज में होने वाली हर एक घटनाओं पर एक कहानी कैसे लिखी जा सकती है . इस

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आ गया सतीश मुन्ना का हैप्पी न्यू इयर सांग

लोगों को पसंद आ रहा है गाना लता ताई के साथ गाना एक सपना सतीश मुन्ना को किसी एक कला के रूप नहीं जाने जाते है बल्कि वो जाने जाते है एक गायक ,गीतकार,निर्देशक,अभिनेता और समाज सेवा के सच्चे पुजारी के रूप में .मंदिरों में भजन गाना,पढ़ाई के दौरान अपने स्कूल और कॉलेज का नाम रौशन करने वाले सतीश मुन्ना ने अब तक कई फ़िल्में की हैं,देश के चर्चित हस्तियों के साथ गाना गया है. आज सतीश मुन्ना के गीत और भजन एप्पल,एंड्राइड और यू ट्यूब पर भी उपलब्ध है. आरा के तरी मुहल्ला में रहने वाले सतीश मुन्ना ने उदित नारायण समेत कई दिग्ज्जों के साथ कर प्रदेश का नाम रौशन किया है. भोजपुरी फिल्मों में ‘कब अइहें दूल्हा हमार’,’अखियां लड़िये गईल’,’मारे करेजवा में तीर’, एल्बम में ‘सती विहुला’, ‘घर आँगन’,’दिल लागल देवर से,’ प्रमुख है अभी इनकी एक सीरियल मास्टरनी जी स्टोरी लिखा है, क्राइम स्टेशन, शाहाबाद अंदर प्रोडक्शन फ़िल्में हैं सतीश मुन्ना कहते है कि उन्होंने देवो के देव महादेव फेम अनिरुद्ध पाठक,रवीन्द्र भारती और गुरु  स्व.विश्वनाथ बोस के साथ बक्सर जेल में कैदियों के साथ रह कर पचास दिनों तक संगीत की शिक्षा दी है। अभिनेता किशोर कुणाल के साथ काम किया। अब तक हजारों मंच पर अपनी प्रतिभा का जादू विखेर चुके सतीश मुन्ना किया हमार टी वी चैनल में रियलिटी शो में निर्णायक के रूप में भी भाग लिया हैं. नाटकों में विजय नय्यर, सुधेंदु किशोर पाण्डेय,सिरिल मैथयू, रजनीश त्रिपाठी और निदेशक रवींद्र भारती के अलावे कई निदेशकों के अभिनय और नाटकों में संगीत

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आठवीं अनुसूची में भोजपुरी शामिल हो, भिखारी ठाकुर को मिलेगी सच्ची श्रद्धांजलि

भिखारी ठाकुर भक्ति की परम्परा के भक्त कवि –पवन श्रीवास्तव भिखारी ठाकुर की 134वीं जयंती मनी लोक कलाकार भिखारी ठाकुर जी की 134 वीं जयंती के अवसर पर दिल्ली के राजेन्द्र भवन में भिखारी ठाकुर स्मृति न्यास एवं बिहार एसोसिएशन द्वारा भिखारी उत्सव का आयोजन किया गया.इस अवसर पर साहित्य अकादमी के सदस्य अजीत दुबे जी ने पदमश्री रामचन्द्र मांझी जी एवं शारदा सिन्हा जी के हवाले से कहा कि मातृभाषा भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करना भिखारी ठाकुर जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.इस अवसर पर सुप्रसिद्ध कथाकार एवं भिखारी साहित्य के विद्वान संजीव जी ने भिखारी ठाकुर को लोक मन का महान रंग कर्मी बताया। राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संयोजक पवन श्रीवास्तव ने भिखारी ठाकुर को भक्ति की परम्परा की भक्त कवि बताया. युवा राजनेता नीरज तिवारी ने युवाओं को भिखारी ठाकुर के सामाजिक सुधार एवं महिला सशक्तिकरण के लिए प्रेरणा लेने का आह्वान किया.सुप्रसिद्ध शिक्षाविद रविन्द्र आर्या जी एवं संजय कुमार झा जी ने आगन्तुक अतिथियों का स्वागत किया. राष्ट्रीय कवि विनय विनम्र ने अपनी कविताओं से सबको जोड़ा. इस अवसर पर भोजपुरी लोकगायक गजाधर ठाकुर एवं गजानन तिवारी ने भिखारी संगीत से मन मोह लिया.,कवि विनय विनम्र ने काव्य पाठ किया और गजाधर ठाकुर, गजानन्द तिवारी एवं नवोदित कलाकारों द्वारा भिखारी संगीत भी प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम का संचालन कवि के. डी. पाठक ने किया.

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आटा गूंथने के बाद उंगलियों के निशान क्यों छोड़ देती हैं गृहणियां

यह एक ऐसा सवाल है जिसकी जबाब आपको ढूंढने के लिए बहुत सर्च करना पड़ेगा ,खैर चलिए हम आपको बता देते हैं . आटा गूंथने के बाद गृहणियां उस पर उँगलियों से निशान क्यूँ बनाती हैं? एक लोई पूर्वजों के लिए, दूसरी गाय के लिए, तीसरी कुत्ते के लिए निकालती थी अगर आप आता गूँथ रहे है तो उसे गोलाकर आकार में नहीं रख कर छोड़ना चाहिए उसमें अपनी उँगलियों के छापे लगाना जरूरी होती है. अगर ऐसा नहीं किया जाए,तो वह पिंड का रूप ले लेता है।जो कि अशुभ होता है,इसलिए आटे को गूंथने के बाद उंगलियों से निशान बनाए जाते है,ताकि वह पिंड न रहे। यह भारतीय सनातन_संस्कृति है, जो आदि काल से चली आ रही है. इसका आशय होता है कि यह गूंथा हुआ आटा पूर्वजों के लिए है। मान्यता है कि इस तरह का आटा देखकर पूर्वज किसी भी रूप में आते हैं और उसे ग्रहण करते हैं.यही कारण है कि जब मनुष्यों के ग्रहण करने के लिए आटा गूंथा जाता है तो उसमें उंगलियों के निशान बना दिए जाते हैं. यह निशान इस बात का प्रतीक होते हैं कि रखा हुआ आटा, लोई या पिंड पूर्वजों के लिए नहीं बल्कि इंसानों के लिए है। प्राचीन काल में महिलाएं प्रतिदिन एक लोई पूर्वजों के लिए, दूसरी गाय के लिए, तीसरी कुत्ते के लिए निकालती थी, घर में अनेक महिलाएं होती थी उंगलियों का निशान लगाने से पता चल जाता था कि इंसानों के लिए तैयार किया गया आटा कौन सा है, आलोक कुमार #uniquenews ये भी

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सीएम नीतीश ने दिया स्वास्थ्य के क्षेत्र में तोहफा

1919.95 करोड़ रूपये की 772 विभिन्न परियोजनाओं का किया शिलान्यास एवं उद्घाटनबच्चों के लिए बनेंगे मल्टीस्पेश्लिस्ट सुपर हॉस्पिटलकॉफी टेबल बुक मीमांशा – 2021 का लोकार्पण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान के परिसर में टेलीमेडिसिन स्टूडियो (ई-संजीवनी) का शुभारंभ किया.मुख्यमंत्री ने टेलीमेडिसिन स्टूडियो (ई-संजीवनी) का निरीक्षण किया. इसके पश्चात् मुख्यमंत्री परिसर में निर्माणाधीन स्वास्थ्य भवन का भी निरीक्षण किया.इसके पश्चात् राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान के सभागार में मुख्यमंत्री ने 1919 करोड़ 95 लाख रुपए की लागत से 772 विभिन्न योजनाओं का रिमोट के माध्यम से शिलान्यास कार्यारम्भ, उद्घाटन एवं लोकार्पण किया. मुख्यमंत्री ने जमुई में लगभग 500 करोड़ रुपए की लागत से बननेवाले मेडिकल कॉलेज और हॉस्पीटल का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिलान्यास किया . इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस कार्यक्रम में यहां उपस्थित लोगों तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े सभी लोगों का मैं अभिनंदन करता हूं. मुझे खुशी है कि आज कई योजनाओं का शिलान्यास, कार्यारम्भ, उद्घाटन एवं लोकार्पण किया गया है. इसके संबंध में विस्तृत जानकारी आपलोगों को दी गई है. उन्होंने कहा कि जब से हमलोगों को काम करने का मौका मिला है, तब से सभी क्षेत्रों में विकास का काम किया जा रहा है. शुरुआत में हमने समाचार माध्यमों से कहा था कि स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी चीजों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा तो लोगों में इसके प्रति जागरुता आएगी. उस समय आज की तरह आधुनिक तकनीक नहीं थी लेकिन उस समय समाचार पत्रों

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