भोजपुरी का अपना होगा ओटीटी प्लेटफॉर्म : रत्नाकर कुमार

वर्ल्डवाइड रिकार्ड्स जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय पार्टनर के साथ मिलकर लांच करेगी ओटीटी प्लेटफार्म पटना : म्यूजिक इंडस्ट्री में तहलका मचाने वाली कंपनी वर्ल्डवाइड रिकार्ड्स जल्द ही एक नई शुरुआत करने वाली है, जिसके तहत इसी साल यह कंपनी हाल के दिनों में तेजी से लोकप्रिय हुए ओटीटी प्लेटफार्म की ओर रुख करने वाली है। यानी, वर्ल्ड वाइड रिकार्ड्स जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय पार्टनर के साथ मिलकर एक ओटीटी प्लेटफार्म लांच को करने जा रही है। हालांकि, इस ओटीटी प्लेटफार्म का नाम क्या होगा, इसका अभी खुलासा नहीं किया गया है। वर्ल्डवाइड रिकार्ड्स की क्षेत्रीय भाषाओं में अच्छी पकड़ है और कंपनी को चाहने वालों की भी संख्या करोड़ो में है। ऐसे में वर्ल्डवाइड रिकार्ड्स द्वारा ओटीटी प्लेटफार्म लांच होने की खबर के बाद लोगों में उत्साह गई, जबकि अभी नाम भी इसका रिवील नहीं किया गया है, लेकिन नाम जो भी हो इस ओटीटी प्लेटफार्म पर दर्शकों को मनोरंजन का भरपूर तड़का देखने को मिलने वाला है। इस बारे में वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स के प्रबंध निदेशक रत्नाकर कुमार ने बताया कि हम जल्द ही एक इंटरनेशनल कोलैबोरेशन करने जा रहे हैं,जिसके तहत हम एक ओटीटी प्लेटफार्म लांच करेंगे। इसमें हम क्षेत्रीय भाषा जैसे भोजपुरी, पंजाबी, हरियाणवी, मराठी और गुजराती की विशेष फिल्में, गाने और वेब श्रृंखला पेश करेंगे। कंपनी के पास अपनी खुद की फिल्म और गीतों की लाइब्रेरी है, जिसमें आपको मनोरंजन का हर पहलू देखने को मिलेगा। कंपनी फिल्मों व एल्बमों का निर्माण निरंतर करती रहती है। उन्होंने कहा कि आगे भी अच्छे कंटेंट की फ़िल्म व गीत-संगीत

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कोरोना के नए वेरिएंट C.1.2 का अब खतरा

नई दिल्ली : विश्व अभी कोरोना के तीसरे वेरिएंट डेल्टा पर ही काम कर रहा है वहीं कोरोना के नए वैरिएंट सी.1.2 ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की चिंता बढ़ा दी है। डेल्टा से भी ज्यादा संक्रामक इस वैरिएंट पर डब्लूएचओ की तकनीकि प्रमुख डॉ. मारिया वॉन ने ट्वीट करके कहा है कि सी.1.2 के बारे में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के शोधकर्ताओं को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने सबसे पहले सी.1.2 के बारे में स्वास्थ्य संगठन को जानकारी दी और अपनी शोध को भी साझा किया। अब तक सी .1.2 के 100 से ज्यादा मामले आए सामनेविश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में 21 मई को इस वैरिएंट का पहला मामला सामने आने के बाद दुनिया भर में अब तक इस वैरिएंट के 100 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की तकनीकि प्रमुख का कहना है कि हमें इस नए वैरिएंट के और भी सीक्वेंस के बारे में पता करने की आवश्यकता है। क्योंकि, अभी तक डेल्टा वैरिएंट ही सबसे ज्यादा संक्रामक प्रतीत हो रहा है। सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है नया वैरिएंटपूरी दुनिया डेल्टा वैरिएंट से खतरे को लेकर परेशान थी, इस बीच इस नए वैरिएंट ने खोज ने समस्याओं को और बढ़ा दिया है। वैज्ञानिकों ने कहा कि यह नया वैरिएंट शरीर में वैक्सीनेशन से बनी प्रतिरक्षा प्रणाली को आसानी से मात दे सकता है। ऐसे में एक बार फिर सभी लोगों के लिए कोरोना का खतरा बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। तेजी से

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देश में एंटी मोदी फ्रंट बनाने की कवायद तेज

नीतीश को सब PM बनाने पर तुले, क्या चल रहा है अंदर खाने मेंPM पद के दावेदार नहीं लेकिन योग्यता है,के सी त्यागीउपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नीतीश हैं पीएम मैटेरियल पटना : नीतीश कुमार को पीएम मैटेरियल बताकर जदयू बीजेपी को क्या मैसेज देना चाहती है। वरिष्ठ राजनीतिज्ञों की माने तो नीतीश पर्दे के पीछे रहते हुए अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से एक तरह का संदेश देना चाहते हैं कि उन्हें हल्के में न लेने की भूल करें । हालांकि2024 के लोकसभा चुनाव में काफी समय है लेकिन प्रधानमंत्री पद की योग्यता और बहुमत जुटाने के दावे अभी से किए जाने लगे हैं। ये दावे बिहार में एनडीए की सहयोगी पार्टी जदयू के नेताओं की तरफ से किए जा रहे हैं। जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि नीतीश में प्रधानमंत्री पद की योग्यता है लेकिन वे इसके दावेदार नहीं हैं वहीं जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने एक बार फिर से नीतीश कुमार को पीएम मैटेरियल बताते हुए संख्या बल की समस्या तक की बात कह दी। ज्ञात हो कि 2024 के चुनाव को लेकर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने अभी से गोलबंद होना शुरू कर दिया है। ऐसे में क्या किसी योजना के तहत नीतीश कुमार को पीएम मैटेरियल बताया जा रहा है। जानकारों की माने तो भविष्य की राजनीति के को देखते हुए कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार में प्रधानमंत्री बनने के सारे गुण मौजूद हैं। क्या चल रहा है पर्दे के पीछेबिहार में जदयू तीसरी नम्बर की पार्टी

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अनलॉक-6 हुआ बिहार

अब कर सकते हैं देवी दर्शन ,खुल जाएंगे मंदिर सांस्कृतिक गतिविधियां भी अब हो सकती है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्वीट के माध्यम से बिहार के लोगों के लिए खुशखबरी दी। अनलॉक .6 में अब पहले की तरह बहुत छूट दी गई है लेकिन कोरोना गाइडलाइंस का पालन करने की सलाह भी दी है । कोविड की तीसरी लहर को देखते हुए किसी भी आयोजन में अपेक्षित सावधानियों का भी जिक्र मुख्यमंत्री ने किया. सिनेमाहॉल अभी भी 50 प्रतिशत तक झमता तक ही खुल सकेंगे. क्या बोले मुख्यमंत्री “कोविड की स्थिति की समीक्षा की गई. कोरोना संक्रमण की स्थिति में सुधार को देखते हुए सभी दुकानें, प्रतिष्ठान, शॉपिंग मॉल, पार्क, उद्यान एवं धार्मिक स्थल सामान्य रूप से खुल सकेंगे.जिला प्रशासन की अनुमति से सभी प्रकार के सामाजिक, राजनीतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन अपेक्षित सावधानियों के साथ आयोजित किए जा सकेंगे.सभी विश्वविद्यालय, कॉलेज, तकनीकी शिक्षण संस्थान तथा विद्यालय (पहली से बारहवीं कक्षा तक) के साथ-साथ कोचिंग संस्थान भी सामान्य रूप से खुलेंगे. राज्य के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, विद्यालयों द्वारा परीक्षा आयोजित की जा सकेंगी.50% क्षमता के साथ सिनेमा हॉल, क्लब, जिम, स्वीमिंग पूल, रेस्टोरेंट एवं खाने की दुकान (आगंतुकों के साथ) खुल सकेंगे.परन्तु तीसरी लहर की संभावना के मद्देनजर हम सभी बिहारवासियों को कोविड अनुकूल व्यवहार के साथ सावधानी बरतनी जरूरी है.” pncb

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जीवन के महाविनाश की गाथा ‘जंगल गाथा

यह कोई फिक्शन नहीं है, लेकिन पढ़ने में फिक्शन का मज़ा देता है ; जितेन्द्र कुमार जंगल गाथा:वन जीवन के महाविनाश की गाथा

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जातीय जनगणना जरूरी : नीतीश

अब निर्णय का इंतजार प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद नीतीश ने कहा कि जातिगत जनगणना बेहद जरूरी है। यह एक बार हो जाएगा सब की स्थिति स्‍पष्‍ट हो जाएगी। जिन वर्गों को सरकारी योजनाओं का उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है उनके बारे में  भी ठीक ढंग से योजनाएं बन पाएंगी। विकास के लिए ठीक से काम होगा। नीतीश कुमार दिल्ली में जातीय जनगणना को लेकर प्रधानमंत्री से अपनी मांग रखने के बाद पत्रकारों से बातें करते हुए कही। ये भी देखें रक्षाबंधन के अवसर पर पीपल के वृक्ष को रक्षा सूत्र बांधा एवं बिहार वृक्ष सुरक्षा दिवस के अवसर पर राजधानी वाटिका पटना में पाटलि वृक्ष का वृक्षारोपण किया।

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फर्स्ट इनकाउंटर वेब सीरीज का मुहूर्त आरा में

भोजपुर के पहले एनकाउंटर की कहानी होगी फर्स्ट एनकाउंटर अल्ट्रा स्पेलबाइंडिंग प्रोडक्शन के बैनर तले बनने वाली वेब सीरिज “फर्स्ट एनकाउंटर” आरा, 22 अगस्त. रमना मैदान स्थित महावीर मंदिर प्रांगण में मेयर रूबी तिवारी ने पूर्णिमा के पावन अवसर पर नारियल फोड़ मंदिर में पूजा अर्चना की। मौका कुछ खास था क्योंकि इस पूजा में शामिल था एक वेब सीरिज के स्क्रिप्ट की पूजा। अल्ट्रा स्पेलबाइंडिंग प्रोडक्शन के बैनर तले बनने वाली वेब सीरिज “फर्स्ट एनकाउंटर” का कांसेप्ट व निर्देशन की कमान संभालेंगे शहर के चर्चित रंगकर्मी व निर्देशक ओ पी पाण्डेय। क्रिएटिव टीम में शामिल हैं वरिष्ठ रंगकर्मी और पत्रकार रविन्द्र भारती, मंगलेश तिवारी, व ओ पी कश्यप, इस वेब सीरीज के निर्माता है पुष्कर पाण्डेय, प्रोडक्शन मैनेजर रंगकर्मी मनोज श्रीवास्तव को बनाया गया है। स्क्रिप्ट की पूजा अर्चना के इस शुभ अवसर पर नारियल फोड़ शुभ मुहूर्त करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मेयर रूबी तिवारी ने कहा कि आरा में वेब सीरिज का निर्माण होना एक सुखद खबर है। इससे यहां के स्थानीय कलाकारों को जहां काम करने का मौका मिलेगा वही भोजपुर के इलाकों को रुपहले पर्दे पर देखने के बाद अन्य निर्माताओं को भी आने की इच्छा जगेगी। इससे पर्यटन उद्योग और फिल्म निर्माण उद्योग की दिशा में नई क्रांति आ सकती है। निर्देशक ओ पी पाण्डेय ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि फर्स्ट एनकाउंटर भोजपुर जिले के पहले एनकाउंटर की कहानी है। जल्द ही इसके लिए कलाकारों का चयन ऑडिशन के माध्यम से आरा,पटना और रांची में किया जाएगा। इस

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कहानी साहित्य की सबसे लोकप्रिय विद्या – मिथिलेश्वर

कथा लेखन के पांच दशक मेरे जानते कहानी साहित्य की सबसे लोकप्रिय विधा रही है।उसकी लोकप्रियता की शक्ति अपने समय और समाज के सच की अभिव्यक्ति तथा संवेदना के नये आख्यानों की रचना में ही निहित होती है।शायद यही वजह है कि अपने जीवन में पढ़ी अनेक कहानियों को हम कभी भूल नहीं पाते हैं।”उसने कहा था” के लहना सिंह तथा “शतरंज के खिलाड़ी” के मीर मिर्जा ही नहीं, ऐसे सैकड़ों चरित्र और उनके प्रसंग हमारी चेतना को प्रेरित और प्रभावित करते रहे हैं। इन्हीं विशेषताओं के चलते कहानी से मेरा लगाव प्रारंभ से ही रहा है।शायद इसीलिए जिस उम्र में रचनाकार कविता से शुरुआत करते हैं,मैंने कहानी से की।वह 1970 का वर्ष था जब मैं कथा लेखन की दुनिया में आया।वह हिन्दी में व्यापक पाठकीयता का समय था।”धर्मयुग”,”साप्ताहिक हिन्दुस्तान”,”सारिका” जैसी जिन पत्रिकाओं में मैं लिखता था, उनकी प्रसार संख्या लाखों में थी।उस समय पठकों की उत्साहजनक प्रतिक्रियाएं हमारे रचनाकार मन को आश्वस्त करती थीं।कहने की आवश्यकता नहीं कि तब लेखन हमें सामाजिक विकास के संघर्ष में रचनात्मक भागीदारी का एहसास कराता था।इस तरह पिछले पचास वर्षों के दौरान पत्रिकाओं में प्रकाशित कहानियों से जब-जब नए कहानी संग्रह प्रकाशित होते रहे ,हमें रचनात्मक सुख की अनुभूति कराते हुए निरंतर रचनारत रहने के लिए प्रेरित करते रहे।इसके मूल में हमारे समय की पाठकीयता की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।इस क्रम में मेरे 12 कहानी संग्रह प्रकाशित हुए — बाबूजी-1976, बंद रास्तों के बीच -1978, दूसरा महाभारत-1979, मेघना का निर्णय-1980, तिरिया जनम-1982, हरिहर काका-1983, एक में अनेक-1987, एक थे प्रो.बी.लाल-1993, भोर होने से

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हम तुम्हें यूं भुला ना पाएंगे…

समाज के अंतिम व्यक्ति के समुचित विकास के प्रति मनोज श्रीवास्तव की प्रतिबद्धता बेमिसाल: प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी पटना 19 अगस्त 2021: आज पटना के होटल मौर्या में इक्विटी फाउंडेशन एवं श्रीवास्तव परिवार के द्वारा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी स्वर्गीय मनोज श्रीवास्तव की याद में “प्रथम मनोज श्रीवास्तव मेमोरियल लेक्चर 2021” का आयोजन किया गया. उनके बड़े पुत्र आई.आर.एस सागर श्रीवास्तव ने सभी अथिथियों का स्वागत करते हुए इस पहल के बारे में विस्तार से बताया.कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफ़ेसर अभिजीत विनायक बनर्जी वीडियो कॉल के ज़रिए यूरोप से शामिल हुए. उन्होंने अपने जेएनयू के सहपाठी से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि वे दोनों इकठ्ठा बैठकर विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर बातचीत किया करते थे और इस दौरान काफ़ी कुछ सीखने को मिलता था. उनमें हर चीज़ की तह में जाकर उसके बारे में जानने की ज़बरदस्त भूख थी. बौद्धिक रुप से सक्षम होने के साथ-साथ उनमें समाज को बदलने की अदम्य इच्छा थी जो जीवनपर्यंत उनके साथ बनी रही. अंतिम व्यक्ति के समुचित विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अनूठी थी. इसी कड़ी में उन्होंने कोविड महामारी की वजह से विकासशील देशों में शिक्षा व्यवस्था को हुए अपार नुकसान की चर्चा की. 2011-2016 के दौरान हुए असर सर्वे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पांचवीं कक्षा के 50 फीसदी छात्र दूसरी क्लास की पाठ्य-पुस्तकें पढ़ने में अक्षम पाए गए. इसके लिए ज़रूरी है कि बच्चों को उनकी ज़रूरत के मुताबिक़ शिक्षा उपलब्ध कराई जाए. हमारे द्वारा बिहार सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में स्कूली शिक्षा

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गौरैया की कलाकृति कर रही है इंतजार

पटना:कंकड़बाग टेम्पो स्टैंड गोलंबर में कबाड़ से तैयार कर बनाई गई कलाकृति ‘गौरैया’ को बचाने का दे सन्देश देती है । स्थानीय लोग इस गौरैया को बनाने वाले पटना आर्ट कॉलेज और नगर निगम की अच्छी पहल बताते हैं लेकिन इस बात पर लोगों में नाराजगी है कि राजकीय पक्षी की आकृति को कबाड़ से बनाकर उसे रंग रोगन किये बगैर ऐसे ही छोड़ दिया है। अब धीरे-धीरे वो बेरंग दिखने लगा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि निगम को इसे पेंट करा देने मात्र से ही इसकी खूबसूरती बढ़ जाएगी । गोलंबर के पार्क भी बदहाल अवस्था में है। जबकि इस कलाकृति को नगरनिगम के अधिकारी रोज देखते हैं लेकिन किसी का ध्यान इस ओर नहीं जाता। पटना आर्ट कॉलेज के 3 पूर्ववर्ती छात्रों ने 2 हफ्ते में इस कलाकृति को बेकार टंकी, पाइप, डस्टबिन के इस्तेमाल से बनाया था। सौंदर्यीकरण और वेस्ट मैनेजमेंट के लिए ऐसे स्थानों का चयन नगर निगम ने किया था लेकिन उसकी देख रेख नहीं होने से अब इस कलाकृति पर संकट आ गए हैं ।

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