कोरोना के टीका के लिए ऐसे हो रहे हैं लोग जागरूक !

भोजपुर जिला मुख्यालय में तीन स्थानों पर हुई नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुतिलोगों को टीका लेने और सामान्य नियमों का पालन करने के लिए किया गया प्रेरित आरा. टीकाकरण के प्रति जिले के लोगों में संशय को दूर करने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ समिति के द्वारा सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के सहयोग से नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया. जिसके माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया. बुधवार को जिला मुख्यालय में तीन स्थानों पर नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया गया, जिसमें कलाकारों के द्वारा नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की गयी. नुक्कड़ नाटक की शुरुआत सदर प्रखंड परिसर से की गई, जहां पर नाटक के माध्यम से ओपीडी व इमरजेंसी में आए मरीजों और उनके परिजनों को कोरोना से बचाव, उपचार तथा कोविड-19 टीका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. वहीं, दूसरी नुक्कड़ प्रस्तुति कृषि भवन परिसर में की गयी. जहां काफी संख्या में सरकारी कर्मचारी व लोगों को कोविड-19 टीकाकरण के बारे में जागरूक किया गया. अंत में कलाकारों ने सदर अस्पताल परिसर में आए मरीजों और उनके परिजनों को टीके की अहमियत बताई. नुक्कड़ नाटक की टीम में निर्देशक डॉ अनिल सिंह, कलाकार अंबुज कुमार, भरत आर्य, कुमार नरेंद्र, सुमन कुमार, राम नाथ प्रसाद, भोला सिंह, राजीव रंजन त्रिपाठी, पल्लवी प्रियदर्शिनी और सारिका पाठक शामिल थे. इस दौरान सीफार के डिविजनल कोऑर्डिनेटर प्रोग्राम नवनीत सिन्हा व डिविजनल कोऑर्डिनेटर मीडिया अमित सिंह मौजूद रहे. टीकाकरण से घबराने और डरने की जरूरत नहींनुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने आम जनों को यह जानकारी

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कोरोना काल में अहम भूमिका निभाने वाली ये थी वो महिला योद्धा

एपिडेमियोलॉजिस्ट अपर्णा झा को लगा कोविड का टीका आरा,19 जनवरी. कोविड महामारी के दौरान जब ज्यादातर चिकित्सक तथा चिकित्सा कर्मचारी तक कोविड के विषय में ठीक ठीक नहीं जान पाए थे उस वक्त से फ्रंट लाइन पर खड़े रहकर कोविड मरीजों की पहचान तथा उनके आइसोलेशन से लेकर इलाज की व्यवस्था में अहम किरदार निभाने वाली भोजपुर जिले की एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ अपर्णा झा को कोविड वैक्सीन का टीका लगाया गया. तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बारह बजे के आस-पास उन्हें टीका लगाया गया. डाक्टर अपर्णा झा को ड्यूटी के दौरान कोविड संक्रमित पाया गया था. बिहार में उस वक्त स्थिति इतनी भयावह थी कि आइएएस तक को अस्पताल में जगह नहीं मिल रही थी. लाखों जिलेवासियों को कोविड संक्रमण से बचाने वाली अपर्णा झा को बेहद चिंताजनक स्थिति में काफी संघर्ष के बाद बीएचयू में एडमिट कराया जा सका था. कई दिनों तक उन्हें आईसीयू में वेंटीलेटर पर रहना पड़ा. पर अब जब उन्हें टीका लगने वाला है तो डॉक्टर झा काफी उत्साहित हैं। साथ ही उनके सहकर्मियों तथा शुभचिंतकों में प्रसन्नता है. आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट

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कैसे होगा परिवार नियोजन का लक्ष्य पूरा?

भोजपुर जिले में मिशन परिवार विकास अभियान के तहत परिवार नियोजन का लक्ष्य किया जाएगा पूरा आरा सदर अस्पताल में परिवार नियोजन मेला का हुआ आयोजन, विभिन्न साधनों की दी गई जानकारी वार्ड स्तर तक आयोजित किये जाएंगे विभिन्न कार्यक्रम, आशा कार्यकर्ताओं को मिली जिम्मेदारी राज्य मुख्यालय के अधिकारियों ने अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने का दिया निर्देश आरा, 18 जनवरी| परिवार नियोजन व इसके साधनों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सोमवार को परिवार नियोजन मेले का आयोजन हुआ। मौके पर अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. बिनोद कुमार ने कहा मिशन परिवार विकास के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य यह है कि इस अभियान में पुरुष और महिला दानों की सहभागिता होनी चाहिए। यह मेला लोगों को परामर्श के साथ निःशुल्क गर्भनिरोधक साधनों को उपलब्ध कराएगा। यहां नसबंदी के अलावा परिवर नियोजन के और भी विकल्प मौजूद हैं। लोग अपनी सहूलियत के हिसाब से किसी भी साधन का इस्तेमाल कर सकते हैं। मेले में कुल नौ स्टाल लगाये गये हैं। मेले में लगे सभी स्टाल में प्रशिक्षित नर्स लोगों का मागदर्शन करेंगी। मौके पर एसीएमओ डॉ. विनोद कुमार, केयर डीटीएल स्वरूप पटनायक , यूनिसेफ के एसएमसी कुमुद रंजन मिश्रा समेत अन्य लोग मौजूद रहे। 21 से 31 जनवरी तक परिवार नियोजन सेवा सप्ताह डॉ. विनोद कुमार ने बताया परिवार नियोजन सेवा सप्ताह का आयोजन 21 से 31 जनवरी तक होगा । दंपति संपर्क पखवाड़े के दौरान लोगों में जागरूकता लाने के लिए सही उम्र में शादी, शादी के बाद कम से कम

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जानिए भोजपुर जिले में पहले दिन कितने को लगा कोरोना का टीका ?

भोजपुर के सात केंद्रों पर शुरू हुआ कोविड-19 का टीकाकरण, पहले दिन 700 लोग हुए टीकाकृत टीकाकरण सत्र को सफल बनाने के लिए चयनित सत्र स्थलों पर पूरी व्यवस्था की गई हैपहले चरण के लिए चयनित समूह में स्वास्थ्य कर्मी एवं फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिलआरा. जिले को कोरोना से बचाने के लिए पहले चरण के तहत टीकाकरण का अभियान शुरू हो चुका है. जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में शनिवार को जिलाधिकारी रौशन कुशवाहा ने उद्घाटन फीता काट कर किया. मौके पर जिलाधिकारी ने कहा कोविड -19 की वैक्सीन लगवाना स्वैच्छिक है. लेकिन इस बीमारी से बचाव और यह बीमारी परिवार के सदस्यों, दोस्तों, रिश्तेदारों और सहकर्मियों सहित करीबी लोगों को न हो, इसके लिए यह टीका लगवाना चाहिए. फिलवक्त सिर्फ उन्हीं लोगों को टीकाकृत किया जाएगा, जिनका निबंधन पहले चरण के लिए को-विन पोर्टल पर हो चुका है. वैक्सीन की उपलब्धता के आधार पर प्राथमिकता वाले समूहों का चयन किया गया है. जिन लोगों को संक्रमण का सबसे अधिक खतरा है, अभी उन्हें ही टीका लगाया जा रहा है. पहले चरण के सम्पन्न होने के बाद दूसरे चरण के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू किया जाएगा. मौके पर सिविल सर्जन डॉ. ललितेश्वर प्रसाद झा, डीपीएम रवि रजन, यूनिसेफ के एसएमसी कुमुद रंजन मिश्रा, अस्पताल प्रबंधक कौशल दूबे व अन्य लोग मौजूद रहे. प्रत्येक केंद्र पर 100-100 लोगों को लगाया गया टीका : सिविल सर्जन डॉ. ललितेश्वर प्रसाद झा ने बताया सरकार के निर्देशानुसार पहले दिन हर सेंटर पर एक दिन में केवल 100 लोगों को ही टीका लगाया जा रहा है. टीकाकरण

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क्यों नहीं सुधर रहा आरा सदर अस्पताल

आरा, विकास कुमार एवं धन्नू कुमार नाम के ये दोनों युवक अपने गांव तेनुआ (भोजपुर)से गैस सिलिंडर लेने आ रहे थे रास्ते में धमार हाई स्कूल के पास बारिश और फिसलन के चलते उनका एक्सीडेंट हो गया और वे बुरी तरह से घायल हो गए. जल्दीबाज़ी में उन्हें आरा सदर अस्पताल के एमरजेंसी वार्ड में लाया गया जहाँ सिर में अंदरूनी चोट के कारण दोनों काफी देर तक बेहोश पड़े रहे. डॉक्टरों के द्वारा उन्हें बाहर से CT स्कैन करने की सलाह दी गई क्योंकि अस्पताल की CT स्कैन मशीन काफी दिनों से खराब पड़ी है. रोगी को लेकर उनके परिजन इधर उधर एक जांच घर से दूसरे जांच घर भटकते रहे. अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में बिस्तर-कम्बल तक की व्यवस्था नही है. अंतिम समाचार मिलने तक दोनों घायल युवकों की स्थिति काफी नाज़ुक बताई जा रही है. जहां एक तरफ बिहार सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों के बेहतरी की बात बताई जाती है वही धरातल पर सभी बातें जुमला साबित हो रही हैं. सदर अस्पताल में कोरोना को लेकर बिल्कुल भी किसी प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है जबकि जिले में कोरोना के मामलों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है. अस्पताल के डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी बिना पी पी ई किट के ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं. पटना नाउ ब्यूरो

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अधिकारियों की लापरवाही से कट गया आरा शहर

बीएसएनएल की बहुप्रचारित भारत फाइबर योजना जिसका दावा गाँव-गाँव तक ऑप्टिकल फाइबर के जरिये तेज़ गति ब्रॉडबैंड सेवा पहुंचाना था वह कर्मचारियों-अधिकारियों की लापरवाही से भोजपुर जिले में पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना निजी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के लिए लागू तो हो गई लेकिन निगम के स्टाफ इस योजना का देख-रेख कर पाने में पंगु हो चुके हैं। ज्ञात हो कि पिछले महीने की 17 तारीख को स्टेशन रोड पर भूमिगत फाइबर जल-नल योजना के काम के दौरान कट गया था। उसकी मरम्मत करने के बजाय 3 दिन के बाद बाजार समिति से पुराने एक्सचेंज तक आने वाले केबल को भाया कोइलवर-बबुरा होकर जोड़ा गया था। यह अस्थाई व्यवस्था टिक नहीं पाई और एक बार फिर से लगभग पूरे आरा के 2 महत्त्वपूर्ण एक्सचेंज पुरानी कचहरी और महाराजा हाता पूरी तरह से ठप्प पड़ा हुआ है। नतीज़ा यह है कि एस पी आवास, समाहरणालय, कृषि विभाग, सिविल कोर्ट जैसे कई महत्त्वपूर्ण संस्थानों की लैंडलाइन और इंटरनेट सेवा बन्द पड़ी हुई है। इसके पहले भी बाजार समिति से पुराने कचहरी एक्सचेंज तक आने के तीन रुट थे जो एक-एक करके ठप्प पड़ते गए और निगम किसी की मरम्मत नहीं करवा सका। अभी भाया कोइलवर-जमालपुर जो रुट चल रहा था वह भी कोइलवर और बबुरा एक्सचेंज में बैटरी की कमी के कारण बाधित होता रहा था और अब तो बिल्कुल भी बन्द हो गया है। इस सम्बन्ध में बात करने पर बीएसएनएल से जुड़े स्टाफ ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि भारत फाइबर सेवा

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राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी से दूर होगी परीक्षा आयोजन की समस्याएं :कुलपति

आरा, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के रीजनल आउटरीच ब्यूरो, पटना द्वारा आज “एक देश-एक भर्ती परीक्षा: राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी” विषय पर वेब गोष्ठी का आयोजन किया गया।  मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के कुलपति डॉक्टर देवी प्रसाद तिवारी ने कहा कि भिन्न-भिन्न परीक्षाओं के आयोजन में होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए ही राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी की व्यवस्था की गई है। इस नई व्यवस्था से जहां एक ओर गरीब उम्मीदवारों को भरपूर लाभ मिलेगा वहीं दूसरी ओर लड़कियों को बहुत दूर जाकर परीक्षा देने के तनाव से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि परीक्षा की नई व्यवस्था से देश में नई संकल्पना, नई चेतना एवं नई ऊर्जा का संचार होगा और देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यह एजेंसी वर्ष 2021 से काम करना शुरू करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है, जिसने अपने राज्य में एनआरए को लागू करने का फैसला लिया है। अतिथि वक्ता के तौर पर शामिल जाने-माने गणितज्ञ एवं सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार ने कहा कि एक देश-एक भर्ती परीक्षा भिन्न-भिन्न परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों विद्यार्थियों की समस्याओं, अलग-अलग परीक्षाओं के लिए बहुत सारी किताबों को पढ़ने की परेशानियों, तरह तरह के कोचिंग संस्थानों की झंझटों से मुक्ति का साधन बनेगा। यह नई व्यवस्था गांव व गरीब वर्ग के छात्रों को राहत देगा। अब देश के दूरदराज गांवों के गरीब के बच्चे अपनी मातृभाषा में और अपने जिले में परीक्षा दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय भर्ती

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छात्रावास आवंटन को लेकर डी एम से मिला प्रतिनिधिमंडल

आज दिनांक भोजपुर जिला के जिलाधिकारी रौशन कुशवाहा से एक प्रतिनिधिमंडल मिला। सदस्यों ने मिलकर पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा के छात्रों के लिए बने नवनिर्मित छात्रवास को तुरंत आवंटन कराने के सम्बन्ध में जिलाधिकारी को अवगत कराया। समस्या को सुनने के बाद उन्होंने तुरंत आवटन करने का आश्वासन दिया और कहा कि वे एक सप्ताह में इस सम्बंध में आवश्यक जानकारी जुटाकर सदस्यों को बताएंगे साथ ही यथाशीघ्र छात्रावास आवंटन की दिशा में उचित कार्रवाई करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश युवा जदयू महासचिव अभिषेक मेहता, देवेंद्र कुमार सिंह,महिला सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गावती कुमार ,अमित रंजन उर्फ सुनिल कुमार ,आकाश कुशवाहा शामिल थे। ज्ञात हो कि अभिषेक मेहता के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल इन मांगों को लेकर जिला कल्याण पदाधिकारी से भी मिल चुका है। पटना नाउ ब्यूरो

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छात्रावास 9 वर्ष से तैयार लेकिन आवंटन नहीं होने से आक्रोश

आरा, वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय नूतन परिसर और कर्पूरी ठाकुर छात्रावास, धनुपरा के निर्माण होने के बाद भी आवंटन नहीं होने को लेकर पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग के छात्रों में आक्रोश है। प्रदेश युवा जदयू सचिव अभिषेक मेहता इस मुद्दे पर कई महीनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं और अपनी माँगों को लेकर आज उन्होंने जिला कल्याण पदाधिकारी अनिल कुमार सिन्हा से मिलकर मामले के अतिशीघ्र निपटारे को लेकर आवेदन भी सौंपा। उन्होंने बताया कि वीकेएसयू नूतन परिसर स्थित छात्रावास जो 39 कमरों का है वह 10 वर्षों से बना है पर आजतक उसका आवंटन नहीं हुआ है क्योंकि भवन निर्माण विभाग ने भवन को समाज कल्याण विभाग को अभी तक ट्रांसफर नहीं किया है। उन्होंने बताया कि इस बाबत सूचना उन्होंने आरटीआई से माँगी थी जिससे पता चला कि उक्त भवन की लागत 1.9 करोड़ है और बाद में जीर्णोद्धार के लिए 69 लाख के लगभग रुपये स्वीकृत हुए लेकिन भवन निर्माण विभाग उदासीन बना हुआ है। ठीक इसी तरह धनुपरा में भी ओबीसी छात्रों के लिए कर्पूरी ठाकुर छात्रावास लगभग 3 सालों से बनकर तैयार है लेकिन उसका भी आवंटन अबतक नहीं हो सका है। अभिषेक मेहता ने बताया कि वर्त्तमान लॉकडाउन में गरीब और मेधावी छात्र बाहर किराए पर रहने को विवश हैं इससे उनमें आक्रोश व्याप्त है और आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जिला कल्याण पदाधिकारी ने आश्वासन दिया कि एक हफ्ते में वे सम्बंधित मामले को देखेंगे। युवा जदयू नेता के साथ आवेदन देते वक्त सामाजिक कार्यकर्ता रवि प्रकाश सूरज और

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युवा अधिवक्ताओं ने लगाई कानून मंत्री से सहायता की गुहार

आरा, सिविल कोर्ट, आरा के युवा अधिवक्ता और आल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फ़ॉर जस्टिस के प्रतिनिधि अमित कुमार बंटी ने एक पत्र लिखकर केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद से कोरोना महामारी के मद्देनजर अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए मदद की गुहार लगाई है। पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि कोरोना महामारी ने कानूनी बिरादरी को बुरी तरह प्रभावित किया है तथा कई न्यायकर्मी आर्थिक संकट से गुज़र रहे हैं यहाँ तक कि कई वकील सब्ज़ी और फल की रेहड़ी लगा रहे हैं। ट्रायल कोर्ट, ट्रिब्यूनल और जिला तथा अनुमंडलीय कोर्ट में कार्य करने वाले युवा सहायक अधिवक्ता सबसे ज्यादा संकट में हैं क्यूँकि वे बिना किसी नियमित आय के सेवाएं देते हैं। प्रवासी वकील तो सबसे गहरे संकट में हैं क्यूँकि उनके लिए मकान का किराया तक नहीं जुट पा रहा है। उन्होंने आगे लिखा है कि इनमें से किसी वकील को यदि कोरोना संक्रमण हो जाता है तो उनके लिए इलाज़ का खर्च भी निकालना नामुमकिन है। अधिवक्ता अमित कुमार बंटी ने पत्र में इन समस्याओं से निबटने के लिए जिन 6 माँगों का उल्लेख किया है उनमें हैं महामारी तक हर वकील और कानूनी क्लर्क को 30000 रु की मासिक वित्तीय सहायता, 3 लाख तक का बिना ब्याज का लोन जो किस्तों में 3 साल के भीतर देय हो, कोविड संक्रमित कानूनी पेशेवर का मुफ्त इलाज तथा 10000 रु का अनुदान, न्याय मिलने की गति में सुधार के लिए कोविड प्रोटोकॉल का तहत न्यायालय को शीघ्र खोलने, जरूरतमंद वकीलों को मुफ्त ईंटरनेट तथा अन्य सुविधाएं, एवं

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