साबुन और मास्क बाँटा,DM से प्रशिक्षण शिविर की मांग

कोरोना से बचाव के लिए एक प्रशिक्षण शिविर की मांग प्राइवेट संस्थानों को भी शामिल करने की माँग की आरा. कोरोना को लेकर जहाँ सरकार ने देशवासियों के लिए कई निर्देश बचाव के लिए जारी किए हैं वैसे में लोकल स्तर पर सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संस्थानों द्वारा लोगों के बीच जागरूकता फैलाने का कार्य भी किया जा रहा है. जागरूकता के साथ-साथ मास्क और साबुन जैसे जरूरी वस्तुओं को लोगों के बीच बांटा भी जा रहा है ताकि लोग इसके प्रति संवेदनशील हो जिससे इसे फैलने न दिया जाय. कोरोना रोको जनसंकल्प अभियान के बतौर भाकपा-माले ने शुक्रवार को आरा में जवाहर टोला,शीतल टोला, और नवादा में महादलितों के बीच जागरूकता अभियान चलाया. कोरोना से बचाव के लिए साफ-सफाई में रहने सहित कई चीजों के बारे में लोगों को जागरुक किया गया. जागरूकता के बाद महादलितों के बीच साबुन का वितरण किया गया. इस अभियान में भाकपा-माले केन्द्रीय कमेटी सदस्य राजू यादव, नगर कमेटी सदस्य व वार्ड पार्षद सत्यदेव कुमार, अमीत बंटी,कवि आशुतोष कुमार पाण्डेय, इंनौस नेता कमलेश यादव,प्रमोद रजक, व मन्नु यादव शामिल थे. वही नेशनल साइंटिफिक रिसर्च एंड सोशल एनालिसिस ट्रस्ट,आरा के अध्यक्ष श्याम कुमार को गोपाली चौक के पास रिक्शा और ठेला वालों के बीच फ्री मास्क बाँटते देखा गया. बताते चलें कि पिछले रविवार को श्याम कुमार ने अपने ट्रस्ट कार्यालय में लगभग 200 लोगों को मास्क बांटा था. वे लगातार बिना किसी प्रचार के बीच अकेले ही लगातार 5 दिनों से मास्क को जरूरतमन्दों के बीच बांट रहे हैं. इतना ही नही पिछले दो

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मास्क और सेनेटाइजर के जमाखोरों पर सरकार की है कड़ी नजर

सरकार ने सर्जिकल एवं सुरक्षात्मक मास्क, हैंड सैनिटाइजर तथा दास्ताने की कीमतों के विनियमन और उनकी उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू किया सर्जिकल और सुरक्षात्मक मास्क, हैंड सैनिटाइजर तथा दस्ताने की गैर-उपलब्धता और कालाबाजारी संबंधी रिपोर्टों के संज्ञान में, कोविड-19 के प्रकोप की चुनौती को दूर करने के लिए तैयारियों के उपाय के रूप में, एनपीपीए ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से अनुरोध किया कि वे सर्जिकल और सुरक्षात्मक मास्क, हैंड सैनिटाइजर और दस्ताने की उपलब्धता सुनिश्चित करने और उनकी कीमतों को विनियमित करने के लिए एनपीपीए को सक्षम बनाने के लिए उपरोक्त प्रभाव वाली दवाओं को तत्काल प्रभाव से अधिसूचित करें. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा बताए गए निर्देशों के अनुपालन में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 10 की उप-धारा (2) के खंड (1) के तहत दिनांक 13 मार्च 2020 के आदेश को राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण को सर्जिकल और सुरक्षात्मक मास्क, हैंड सैनिटाइजर एवं दस्ताने की उपलब्धता और उनकी कीमतों को विनियमित करने के लिए अनिवार्य किया गया है. तदनुसार, 13 मार्च 2020 को एनपीपीए के आदेश में सभी राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को जनहित में, कोविड-19 से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए सर्जिकल एवं सुरक्षात्मक मास्क, हैंड सैनिटाइजर और दस्ताने की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और इनके पैकेट पर प्रिंटेड अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक कीमत को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये हैं. राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश सरकारों को भी विनिर्ताओं/आयातकों/स्टॉकिस्टों और खुदरा विक्रेताओं द्वारा उपर्युक्त वस्तुओं के उत्पादन और वितरण की निगरानी करने

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AIIMS: बायोमेट्रिक अटेंडेंस पर रोक, 30 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार

कोरोना से किसी प्रकार की डरने की जरूरत नहीं-निदेशक AIIMS फुलवारीशरीफ, 14. कोरोना वायरस के संक्रमण को कम करने के लिए देश मे व्यापक पहल जारी है इसी बीच AIIMS पटना ने सावधानी के तौर पर बायोमेट्रिक अटेंडेंस पर रोक लगा दी है. AIIMS के निदेशक डॉ प्रभात कुमार सिंह ने बताया अगले आदेश तक पटना एम्स में किसी तरह की बायोमैट्रिक अटेंडेंस पर पूरी तरह रोक लगाई गई है. साथ ही कोरोना मरीजों के लिए एम्स पटना में 30 वेड का आइसोलेशन वार्ड पूरी तरह तैयार है. उन्होंने बताया कि अभी तक एक भी कोरोना का मरीज एम्स में नहीं पहुंचा हैं. निदेशक ने लोगों से अपील की है कि कोरोना से किसी प्रकार की डरने की जरूरत नहीं है. उन्होंने लोगों से कोरोना के प्रति एहतियात बरतने की सलाह दी है. साथ ही उन्होंने कहा कि किसी तरह की अफवाह पर ध्यान न दे. अगर किसी तरह का संदेह हो तो इसकी जांच फौरन विशेषज्ञ से कराएं. पटना नाउ ब्यूरो रिपोर्ट

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रंगनगरी आरा हुआ रंगमय, कलाकारों से पटा शहर

17 राज्यों के कलाकारों ने निकाला रँगजुलूस, रंग बिरंगी वेशभूषा और कलाओं ने सबको मोहा आरा, 5 मार्च. जैन स्कूल शताब्दी समारोह सह भोजपुर नाट्य महोत्सव 2020 चौथे दिन शहर में भारत के 17 राज्यों से आयी नाट्य दलों ने रंगयात्रा निकाला जो जैन स्कूल से होते हुए गोपाली चौक, जेल रोड, शिवगंज, बस पड़ाव भिखारी ठाकुर नुक्कड़ स्थल के पास पहुँचा. जहाँ देश के कोने कोने से आये कलाकारों ने भिखारी ठाकुर के के मूर्ति पर माल्यार्पण किया और वहाँ से पुनः शिवगंज आते हुए मठिया, महावीर टोला, शहीद भवन और V-मार्ट होते हुए जैन स्कूल आकर समाप्त हुआ. रँगजुलूस का नेतृत्व आरा रंगमंच के कलाकरों के साथ जैन स्कूल कमिटी और श्री आदिनाथ ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने भी किया. इस रँगजुलूस मे मुंबई से आई भोजपुरी अभिनेत्री व टेली कलाकार श्यामली श्रीवास्तव ने जब आगन्तुक कलाकारों के साथ पैदल मार्च कर उनके कदम से कदम मिलाया तो देखने वाले हैरान हो गए. बता दें श्यामली आरा की ही बेटी है और आरा के रंगमंच पर उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत की थी. जैन स्कूल शताब्दी समारोह सह भोजपुर नाट्य महोत्सव 2020 के चौथे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन रितेश कुमार सिंह प्रदेश सचिव युवा जदयू, मुख्य अतिथि अमित केसरी समाजसेवी, विशिष्ट अतिथि डॉ पी सिंह सर्जन, बचपन प्ले स्कूल डायरेक्टर अभिमन्यु सिंह, विशिष्ट अतिथि मनोज सिंह ( एन आर आई समाजसेवी भारतीय संघ दुबई के उपाध्यक्ष) व उदय सिंह (गन्ना आयुक्त बिहार) ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. अपने सम्बोधन में उद्घाटनकर्ता रितेश कुमार सिंह

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‘चांदी के जूते’ ने गुदगुदाया, ‘दुःख-दरिया’ ने भरा आंखों में सैलाब

शताब्दी समारोह के दूसरे दिन ‘दुख दरिया’ और ‘चांदी के जूते’ ने दिया ब्यापक सन्देश आरा. जैन स्कूल शताब्दी समारोह सह भोजपुर नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन भी रंगारंग कार्यक्रम के साथ 4 नाटकों का मंचन सम्पन्न हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत “नमो नमो” गाने पर जैन स्कूल के बच्चो ने सामूहिक नृत्य के जरिये किया. संस्कृतिक सन्ध्या की दूसरी प्रस्तुति हर्षिता विक्रम ने ‘रंग सारी गुलाबी चुनरियां रे’ लोकगीत पर कर अपना जलवा बिखेर दिया. उसके बाद असम के कलाकारों के द्वारा लोक नृत्य बिहू की प्रस्तुति ने आयोजन स्थल पर उपस्थित सभी लोगों के अंदर सांस्कृतिक ऊर्जा भर दी. सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद नाटकों का दौर चला. दूसरे दिन की सन्ध्या 4 नाटकों का मंचन किया गया. DMC एक्टिंग अकादमी आरा के कलाकारों के द्वारा रंजीत कपूर लिखित नाटक ‘चांदी का जूता’ किया गया. यह नाटक देश के कोने कोने से आये कलाकारों के प्रदर्शन मात्र के लिए था. यह नाटक प्रतियोगिता में नही था. नाटक का निर्देशन ओपी कश्यप ने किया था,संगीत राजा बसंत बहार,हर्षिता विक्रम व उनके साथी कलाकार का था. प्रकाश परिकल्पना ओपी पांडेय व आलोक सिंह का था. नाटक की मुख्य भूमिका में ओपी कश्यप ने बेहतरीन अभिनय किया और अपने अभिनय से दर्शकों को लोट-पोट कर दिया. वही मुनीम और लड़की के बाप में रोल में अंकित ने शानदार अभिनय से खूब तालियां बटोरी. नाटक का सूत्रधार बना , बहु बनी अदिति राज, और माँ के रोल में स्मृति भारती ने दर्शकों के बीच अपनी बेहतरीन अदाकारी का परिचय दिया. अन्य कलाकारो में मुकेश,

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जैन स्कूल के शताब्दी समारोह का हुआ आगाज

कई शिक्षाविदों सहित देश के कई प्रदेश से आये कलाकारों ने दी प्रस्तुति पहले दिन 3 नाटकों का हुआ मंचन आरा. श्री आदिनाथ ट्रस्ट एवं हर प्रसाद दास जैन स्कूल शताब्दी समारोह का आगाज रविवार को धूमधाम से हुआ. भोजपुर नाट्य महोत्सव से हुआ या नाट्य महोत्सव 01-05 मार्च तक जैन स्कूल के प्रांगण में ही चलेगा. रविवार से प्रारंभ हुए इस महोत्सव का उद्घाटन VKSU के वाइस चांसलर प्रोफेसर देवी प्रसाद तिवारी एवं प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष आलोक चंद्र जैन ने किया. VC ने अपने संबोधन भाषण में का शिक्षण संस्थानों की दयनीय होती व्यस्था पर दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि माता पिता बच्चों को जन्म देते हैं तो उनका सबसे बड़ा कर्तव्य और धर्म अपने बच्चों को समुचित शिक्षा देना होता है. बच्चों की प्रारंभिक पाठशाला माता-पिता और उसका घर ही होता हैं जहां उनके चरित्र का निर्माण होता है. यदि प्रारंभ से ही बच्चों पर ध्यान दिया गया तभी नैतिकता का विकास होगा. वही आलोक चंद्र जैन ने कहा कि पुराने जमाने में भोजपुर में स्कूल नहीं होने के कारण कई लोग नहीं पढ़ पाते थे. उन्हें जिले के बाहर जाना पड़ता था. ऐसे मौके पर दानवीर हर प्रसाद दास जैन ने जैन स्कूल खोलने के लिए जमीन देकर जैन स्कूल जैसा शिक्षण संस्थान खुलवाया. यहां से पास हुए बच्चे आज देश-विदेश में जिले का नाम रौशन कर रहे हैं इस मौके पर VKSU के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ प्रो. रणविजय कुमार सिन्हा ने कहा कि देश में जो शाश्वत कर्म पंडित मदन मोहन मालवीय

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CAA के समर्थन में 300 फीट तिरंगे के साथ उमड़ा जनसैलाब

गड़हनी. देश मे CAA कानून के विरोध को लेकर जहाँ कई शहर शाहीन बाग बना हुआ है वही भोजपुर जिला के गड़हनी में CAA के समर्थन में हजारों लोगों के जनसैलाब ने सबको चौंका दिया है. यह जनसैलाब 300 फीट के तिरंगे को अपने हाथों में लेकर गड़हनी का भ्रमण किया. CAA,NRP व NPR के समर्थन में सोमवार को राष्ट्रवादी सेना के सौजन्य से गड़हनी शिवमंदिर के प्रांगण से हजारों की संख्या में हिन्दूओं ने 300 फीट लम्बे तिरंगे के साथ भब्य समर्थन जुलुस निकाला. जुलूस के पहले उपस्थित समर्थकों ने मंच पर सभा की. सभा को संबोधित करते हुए समर्थकों ने कहा कि नागरिकता कानून किसी का कानून छीनने व भगाने का कानून नही है. यह सब राजनीति के तहत भाजपा विरोधी पार्टियों ने यहाँ के मुस्लिम व दलित को भड़का रही है जबकि ऐसा कुछ नही है. एक बार नही दर्जनों बार प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित करते कहा कि देश मे रह रहे किसी भी हिंदुस्तानियों को इस कानून से कोई लेना देना नही है. लेकिन यहाँ के मुस्लिम इस कानून के आड़ में शाहीन बाग बनाकर ताकत का प्रदर्शन कर रहे है और देश की जनता को उथल-पुथल कर चुके है. वही ओबैसी के पार्टी का सांसद कहता है कि 100 करोड़ हिन्दुओ पर हम 15 करोड़ मुस्लिम काफी है,15 मिनट प्रशासन हटाकर देख लो. समर्थकों ने ऐसे बयान पर चेतावनी देते हुए कहा कि ओवैसी कान खोलकर सुन लो यहाँ की जनता तुम्हारे बहकावें में नही आने वाली है. देश की जनता को उकसाना

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रेलवे ने “भोजपुरी पेंटिंग” को नही दिया जगह तो क्या होगा आंदोलन ?

भोजपुरी पेंटिंग के साथ भोजपुर की पहचान अरण्य देवी, भगवान महावीर और कुंवर सिंह को प्रतीक के रूप में स्थापित करने की मांग आरा,3 फरवरी. रेलवे द्वारा भोजपुरी को भोजपुर के मुख्यालय में नजरअंदाज करने के कारनामे के बाद जिलावासी आंदोलन के मूड मे दिख रहे हैं. यह नजरअंदाज किसी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है. जंक्शन पर चल रहे सौंदर्यीकरण के दौरान भोजपुरी कला के बदले मिथिला पेंटिंग लगाए जाने की घोषणा का विरोध अब जोर पकड़ने लगा है. ट्वीटर और सोशल मीडिया पर इसके विरोध के बाद लगता है यह मामला तूल पकड़ने वाला है. भोजपुर में भोजपुरी पेंटिंग को रेलवे द्वारा जगह नही देकर मिथिला पेंटिंग की घोषणा कहीं जनांदोलन का माहौल न बना दे. क्योंकि पूर्व में भी भोजपुरी की जब पढ़ाई बन्द हुई तो ब्यापक जनांदोलन हुआ था जिसके बाद पुनः सरकार को भोजपुरी की पढ़ाई शुरू करनी पड़ी. एक बार फिर से जनता में इस बात को लेकर सुगबुगाहट है और हर तबके के लोग इसे भोजपुरी स्वाभिमान का हनन मान रहे हैं. सोशल मीडिया पर विरोध के बाद रविवार को एक निजी अस्पताल के उद्घाटन में आरा पहुँचे केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री और स्थानीय सांसद आर के सिंह को इस सम्बंध में एक ज्ञापन भोजपुरी को समर्पित संस्था आखर, सर्जना ट्रस्ट, अभिनव एंड एक्ट, जैन समिति भोजपुर के सदस्यों और अन्य भोजपुरी कलाकारों ने संयुक्त रूप से दिया. ज्ञापन के साथ आखर द्वारा जारी भोजपुरिया स्वाभिमान कैलेंडर, भोजपुरी भित्तिकला और लोकपरंपराओं पर आधारित पुस्तिकाओं और चित्रकार संजीव सिन्हा की बनाई पीड़िया की पेंटिंग

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श्रेष्ठ बना बिहार : 8 बिहारियों को सर्वोच्च सम्मान

7 बिहारियों को पद्मश्री और एक को पद्म-विभूषण समेत देश मे कुल 141 शख्सियतों को सम्मान सर्वोच्च पुरस्कारों ने मनवाया बिहार की प्रतिभा का लोहा बिहार के मेहनत का परिचायक है 8 बिहारियों को मिला सर्वोच्च सम्मान पटना/आरा,27 जनवरी. देश के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों की घोषणा 71वें गणतंत्र दिवस पर कर दी गई है. इस बार कुल 141 हस्तियों को इसके लिए चुना गया है,जिसमें 7 पद्म- विभूषण, 16 पद्म-भूषण और देश-विदेश की 118 हस्तियों को पद्मश्री से नवाजा गया है. पद्म पुरस्कारों में इस बार सबसे ज्यादा चुने हुए व्यक्ति बिहार के हैं. राज्य की कुल 8 हस्तियों को पद्म-सम्मान के लिए चुना गया है. इनमें देश के पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज (मरणोपरांत), साइंटिस्ट वशिष्ठ नारायण सिंह (मरणोपरांत), शांति जैन (आर्ट), शांति राय (मेडिसिन) जैसे कई नामचीन लोग शामिल हैं. जार्ज फर्नांडीज, सुषमा स्वराज और अरूण जेटली को मरणोपरांत पद्मविभूषण और वशिष्ठ नारायण सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री मिलने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी खुशी जाहिर की है. उन्होंने सभी विजेताओं को बधाई और शुभकामनाएं दीं. मुख्यमंत्री ने बिहार के सुजोय कुमार गुहा, विमल कुमार जैन, डॉ शांति राय, शांति जैन, श्याम सुंदर शर्मा एवं रामजी सिंह को पद्मश्री मिलने पर खुशी जताई. सर्वोच्च सम्मान क्यों? भारत सरकार ने पद्म पुरस्‍कारो की शुरुआत 1954 से की. तब से इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर की जाती है. इसके तहत पद्म-विभूषण, पद्म- भूषण और पद्मश्री पुरस्कारों को विभिन्न क्षेत्रों में सर्वोच्च काम करने के लिए दिया जाता है. यही कारण है कि इसे देश

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इसी मिट्टी ने किया था बिहार का निर्माण

आरा के चौंगाई के थे बिहार निर्माता डॉ सिन्हा मिट्टी के लाल बिहार निर्माता डॉ सच्चिदानंद सिन्हा Patna now Special आरा, 25 जनवरी. क्या आप जानते हैं कि बिहार के जनक शाहाबाद के ही थे. हैरत में पड़ने की जरूरत नही है यह सच है. पुरातन काल से इस मिट्टी ने एक से एक नामों को अपनी गोद मे पाला-पोसा है और उसे समय की मांग पर दुनिया के सामने लाया है. उनमे से एक है बिहार निर्माता डॉ सच्चिदानंद सिन्हा. आरा की मिट्टी में जन्मे डॉ सच्चिदानंद सिन्हा ने आरा का मान-सम्मान और गुमान साहित्यिक, सामाजिक और राजनैतिक पहलुओं से काफी बढ़ाया है. इतना ही नहीं इनकी अहम् भूमिका भारत के संविधान निर्माण में भी रही है. इनके व्यक्तित्व से आरा,बिहार और पूरा देश अपना सीना चौड़ा कर ये स्वीकारता है कि डॉ सिन्हा महान शख़्सियत में से एक थे. डॉ सिन्हा भारत के प्रसिद्ध सांसद,शिक्षाविद,अधिवक्ता तथा एक सफल पत्रकार थे. इनका योगदान बिहार को बंगाल से पृथक कर बिहार को एक अलग राज्य स्थापित करने में प्रमुख है. डॉ. सिन्हा प्रथम भारतीय थे जिन्हें एक प्रान्त का राज्यपाल और हॉउस लॉर्ड्स का सदस्य बनने का श्रेय प्राप्त है. बंगाल से बिहार को पृथक कर बिहार को एक नया राज्य बनाने वाले व संविधान गठन सभा के प्रथम अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा का जन्म 10 नवंबर 1871 को आरा में हुआ था. इनका परिवार शाहाबाद जिले के चौंगाई प्रखण्ड के मुरार गाँव में एक इज़्ज़तदार कायस्थ परिवार से संबंध रखता है. इनके पिता बक्सी शिव प्रसाद सिन्हा एक वरिष्ठ

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