नहीं रहे तेनालीराम के बीरबल

अमित मिस्त्री ने सबको अलविदा कहा‌मुंबई।। मशहूर टीवी और फ़िल्म कलाकार अमित मिस्त्री का शुक्रवार की सुबह कार्डियक अटैक के कारण निधन हो गया. वे 47 वर्ष के थे. 1974 में जन्मे अमित एक बेहद ही ऊर्जावान और युवा कलाकार थे. उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत थियेटर से की थी. गुजराती थियेटर सर्किट में लोकप्रिय होने के साथ ही कई बॉलीवुड फिल्मों में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता था, जिनमें क्या कहना, एक चालिस की आखिरी लोकल, 99, शोर इन द सिटी, यमला पगला दीवाना और एक जेंटलमैन शामिल हैं. उन्होंने सोनी टीवी पर प्रसारित तेनालीराम में भी दमदार भुमिका अदा की थी. वेब सिरीज बंदिश बैंडिट में उन्हें काफी लोकप्रियता मिली थी.   अमित मिस्त्री की मौत ने फिल्म और टीवी जगत में उनके सहयोगियों को हैरान कर दिया है. सुमीत व्यास, स्वानंद किरकिरे, दिलीप जोशी और अन्य लोगों ने अमित के निधन पर शोक व्यक्त है. अमित अपने माता-पिता के साथ अंधेरी, मुंबई में रहते थे और निधन के वक्त वे अपने परिवार के साथ ही घर पर थे. उनकी असामयिक मृत्यु ने उनके सहयोगियों, दोस्तों और प्रशंसकों को हैरान कर दिया. इंडियन फिल्म टीवी प्रोड्यूसर्स काउंसिल ने ट्विटर पर उनकी मृत्यु पर शोक व्यक्त किया, “एक प्रतिभाशाली अभिनेता अमित मिस्त्री के निधन का चौंकाने वाला और गहरा दुःखद समाचार … परिवार और दोस्तों के प्रति हार्दिक संवेदना..प्रति संवेदना।” ‌जैकलीन फर्नांडीज ने भी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर उनकी एक तस्वीर साझा की और लिखा ‘रेस्ट इन पीस’. अभिनेता सुमीत व्यास और पूर्व वीजे साइरस साहूकर ने भी अपनी संवेदना

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रेमडेसिविर को अब बिहार सरकार ने भी नकारा

रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर मची हाय तौबा के बीच 21 अप्रैल को नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH)ने एक पत्र जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि कोरोना मरीजों के इलाज में इस इंजेक्शन से कोई फायदा नहीं होता. इसलिए कोई भी डॉक्टर इस इंजेक्शन को प्रिसक्राइब ना करे. नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक ने एक पत्र जारी किया है इसमें लिखा है कि डब्ल्यूएचओ ने भी इस दवा को नकार दिया है क्योंकि कोविड-19 के इलाज में इस दवा की कोई उपयोगिता नहीं है. इसलिए चिकित्सकों से अपील की जाती है कि वह कोविड-19 इलाज के दौरान मरीजों के परिजन से रेमडेशिविर इंजेक्शन लाने के लिए ना कहें. pncb

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नही रही भोजपुरी की इनसाइक्लोपीडिया रेखा तिवारी !

एक हफ्ते से थी सांस में तकलीफ, बुधवार को लिया अंतिम साँस पटना,21 अप्रैल(ओ पी पांडेय). भोजपुरी की इनसाइक्लोपीडिया के नाम से विख्यात 48 वर्षीय लोक गायिका रेखा तिवारी ने आज बोकारो में अंतिम सांस लिया. वे पिछले 14 अप्रैल से अस्पताल में इलाजरत थीं. कोरोना की वजह से साँस लेने में तकलीफ के कारण वे अस्पताल में ऑक्सीजन पर थीं. उनका स्वास्थ्य सुधर भी रहा था लेकिन मंगलवार से उनका बीपी लो होने लगा और लगातार ऑक्सीजन लेवल भी कम होने के कारण बुधवार की अहले सुबह लभगग 5.30 बजे उनका देहावसान हो गया. लोकसंगीत की बात हो और रेखा तिवारी का नाम न आये ये संभव नही है. शायद ही कोई भोजपुरी का लोकोत्सव हो या लोकपर्व जो उनसे अछूता रह गया हो. हमेशा चेहरे पर मुस्कान और आवाज में भोजपुरी की सोंधी खुश्बू के साथ जब उनकी टांस सुनने को जिसे मिकता वो उनका मुरीद हो जाता था. उनकी आवाज का जादू सबके सिर चढ़कर बोलता था. किसी बात की जब चर्चा होती उनके पास उसके लिए गीत मौजूद होता था. ऐसी त्वरित डिमांड पेश करने वाली बहुचर्चित लोकगायिका रेखा तिवारी का निधन बुधवार को कोरोना की वजह से हो गया. उनकी तबियत पिछले एक हफ्ते से खराब चल रही थी. उन्हें साँस लेने में तकलीफ थी. यह सांस की तकलीफ भोजपुरी के सुरों की सांस छीन लेगा ये कोई नही जानता था. रेखा तिवारी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव थीं. उन्होंने अभी हाल के चैत नवरात्रि का पूजन भी लोगों से शेयर किया था इसके पहले

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रिकॉर्डतोड़ कोविड-19 संक्रमण के बीच क्या बोलेंगे पीएम मोदी!

लंबे समय के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक बार फिर देश के लोगों से रूबरू हो रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रात 8:45 पर कोविड-19 संक्रमण को लेकर देश को संबोधित करेंगे. Pm Modi Live on Covid19 Courtesy Rajyasabha Tv pncb

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कोर्ट ने दे दी जमानत, रिहा होंगे लालू

झारखंड हाईकोर्ट का फैसला, सशर्त मिली बेल रांची,17 अप्रैल. बहुचर्चित चारा घोटाले में सजा काट रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को झारखंड हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है. यह जमानत उन्हें दुमका कोषागार मामले में मिली है. शनिवार को सुनवाई के दौरान झारखण्ड कोर्ट ने यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने उन्हें एक लाख के निजी बॉन्ड और 10 लाख के जुर्माने की राशि पर यह जमानत मुकर्रर की है. निजी बांड भरने के बाद वे बाहर आ सकते हैं. ऐसे में ऐसी उम्मीद की जा रही है कि 2 से 3 दिनों के बाद दुमका कोषागार मामले में आधी सजा काट चुके लालू प्रसाद जेल से बाहर आ जाएंगे. कोर्ट ने यह जमानत उन्हें सशर्त दी है. इसके अनुसार वे न तो देश से बाहर जाएंगे और न ही अपना पुराना दिया हुआ पता और मोबाइल नम्बर ही बदलेंगे. इसके पूर्व उन्हें चाइबासा कोषागार मामले के निकासी में भी जमानत मिल चुकी है और डोरंडा कोषागार का मामला फिलहाल कोर्ट के विचाराधीन है लेकिन फ़िलहाल CBI कोर्ट ने कोविड की वजह सुनवाई टाल दिया है. बताते चलें कि लालू प्रसाद इस वर्ष जनवरी से अपने इलाज के लिए दिल्ली एम्स में भर्ती हैं. Pncb

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रंग छतिसा के संस्थापक का निधन

चला गया कलाकार छोड़ गया सवाल हमारे चेहरों पर : दीपक तिवारी स्मृति शेष वह विस्तर पर रोज मरता रहा और उसका परिवार भी रोज तिल-तिल मरता रहा, पटना. रंग छत्तीसा के संस्थापक व शानदार अभिनेता, गायक,और नर्तक दीपक तिवारी का शनिवार को निधन हो गया. उनसा रंगकर्मी सदियों में एक होता है. वे भारत लोक रंगकर्म के ईश्वरीय देन थे जिन्हें रंगधुनी हबीब तनवीर ने ढूँढा था. 19 अक्टूबर 1959 को जन्में दीपक ने सितारा बिलासपुर के मंगला गांव से अपनी रंग यात्रा की शुरुआत की और दुनिया में अपने रंग का चमक बिखेर राजनांदगांव से शनिवार को विदा हो गया. सबको अपने अभिनय से अविभूत करने वाले दीपक ने बेहद कष्ट, और अभाव में आखिरी साँसे ली. दीपक तिवारी को बेहद करीब से जानने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय में कार्यरत सहायक प्रोफेसर एम के पांडेय ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. दीपक तिवारी को आइये जानते है उनकी जुबानी…. Patna now special उस रोज 2017 का संगीत नाटक अकादमी अवार्ड कलाकारों को हमेशा की तरह राष्ट्रपति भवन में मिलना था. मैं जैनेंद्र के साथ भिखारी ठाकुर के संगी कलाकार रामचंद्र मांझी के लिए गया हुआ था. पुरस्कारों के बाद भोजन के समय व्हील चेयर पर बैठे दीपक तिवारी पत्नी और नया थियेटर की कमाल कलाकार पूनम तिवारी (बाई) और उनकी बेटी से मुलाकात हुई. फिर थोड़ी बतकुच्चन हुई पर अफसोस हुआ कि दीपक न ठीक से बोल पा रहे थे, न ही अधिक हिलडुल रहे थे. पूनम उनको संभाल-संभाल कर सामने वाले की बात बता रहीं

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बैंक यूनियनों के हड़ताल को मिला माले का समर्थन

आरा,14 मार्च. बैंको के निजीकरण के खिलाफ आज बैंक यूनियनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल चालू किया है. इस हड़ताल के समर्थन में आरा में भाकपा माले भी उतर गया. पीएनबी रीजनल कार्यालय के नीचे भाकपा माले ने बैंक कर्मियों के द्वारा आयोजित हड़ताल धरना को संबोधित किया. बैंक यूनियन के हड़ताल के समर्थन में उतरे कर्मियों को भाकपा माले के नगर सचिव दिलराज प्रीतम, अमित कुमार गुप्ता उर्फ बंटी (अधिवक्ता, नेता प्रतिपक्ष आरा नगर निगम, भाकपा माले) व राजनाथ राम ने संबोधित किया. धरना को संबोधित अमित कुमार बंटी ने कहां कि भाकपा माले देश के अंदर तमाम तरह के निजीकरण की नीतियों के खिलाफ है और निजीकरण के खिलाफ हर आंदोलन में भाकपा माले कंधे से कंधा मिलाकर आपके साथ खड़ी है. माले ने कहा कि देश को अडानी,अंबानी सहित तमाम पूंजीपतियों, उद्योग-पतियों को हाथ से बेचने की साजिश नहीं चलेगी. बैंको के लिए इस काले कानून और बैंक का निजीकरण को रद्द करने की मांग की. PNC

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32 वर्षों में 3000 से ज्यादा उपवास वाले सन्त का धर्मनगरी में हुआ आगमन

जैन संत अंतर्मन आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज जी ससंघ का हुआ मंगल प्रवेश आरा,8मार्च. 32 वर्षों में 3000 से ज्यादा उपवास की कठिनतम साधना वाले संत का धर्मनगरी में रविवार को आगमन हुआ. मंदिरों की धर्मनगरी आरा में, जैन आचार्य अंतर्मन श्री प्रसन्न सागर महाराज ससंघ का जैन धर्मावलंबियों के द्वारा भव्य मंगल प्रवेश रविवार को बड़े ही भक्तिपूर्वक हुआ. प्रातः समय बामपाली स्थित ज्ञान ज्योति आवासीय विद्यालय में जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा संपन्न हुआ. आचार्य ससंघ का नगर आरा स्थित श्री 1008 अतिशयकारी चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर के लिए मंगल विहार हुआ. जैन समाज के लोगों ने आचार्य ससंघ का भव्य आगवानी किया. शहर के चंदवा मोड़ से लेकर जेल रोड स्थित जैन मंदिर तक भक्तों ने गाजा-बाजा के साथ भव्य जुलूस निकाला गया. जुलूस में भक्तों ने जैन ध्वज लहराते, गुरुदेव का जयकारा लगाते, पुष्पवृष्टि करते हुये जैन मंदिर पहुँचे. वहीं आचार्य ससंघ का पाद-प्रक्षालन, मंगल आरती एवं भजन एवं धर्मसभा का आयोजन हुआ. उन्होंने धर्मसभा में भक्तों से कहा कि आरा बहुत ही पवित्र भूमि है यहां भगवान पार्श्वनाथ एवं भगवान महावीर के साथ अनेकों आचार्य एवं गुरुओं की विश्राम स्थली है, उन्होंने कहा कि आप सभी बहुत ही सौभाग्यशाली है कि इतने पवित्र भूमि परते है. श्री दिगम्बर जैन मुनि संघ के सचिव अजय कुमार जैन ने बताया कि अंतर्मन आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज के संघ में मुनि पीयूष सागर महाराज एवं ऐलक पर्वसागर महाराज है. ये संघ भारतवर्ष के विभिन्न शहरों से होते हुये धर्मनगरी आरा पहुँचे है. ये संघ

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‘सरकार’ को होश में आने की छात्रों ने भरी हुंकार,कई जगह प्रदर्शन

विवि गंवाकर मेडिकल कॉलेज छात्रों को नामंजुर, कई जगह प्रदर्शन अनशनकारी छात्र का स्वास्थ्य गिरा, प्रशासन मौनआमरण अनशन के तीसरे दिन भी शासन-प्रशासन की चुप्पी आरा,6 मार्च(ओ पी पांडेय/रवि प्रकाश सूरज). वीर कुँवर सिह विश्वविद्यालय के नूतन परिसर की भूमि मेडिकल कॉलेज को दिए जाने के विरोध में लीडरशिप फ़ॉर एजुकेशन एंड डेमोक्रेसी (लीड) के सदस्य छात्र अनिरुद्ध सिंह का स्वास्थ्य शुक्रवार को आमरण अनशन के तीसरे दिन से गिरना शुरु हो गया. विवि के चिकित्सक ने स्वास्थ्य जाँच के बाद बताया कि उनका रक्तचाप अत्यंत निम्न स्तर पर चला गया है और तीन किलो वजन में गिरावट दर्ज हुई है. मगर शासन-प्रशासन की चुप्पी ने जनपद की जनता को आंदोलित करके रख दिया है. दूसरी तरफ तीसरे दिन भी अनशन स्थल पर छात्रों-शिक्षकों और समाजसेवियों का तांता लगा रहा. आज अनशनस्थल पर साथ देने वालों में बी एड कॉलेज के छात्र आगे रहे. भोजपुरी विभागाध्यक्ष प्रो दिवाकर पांडेय ने विवि की समस्या के प्रति सरकार की उदासीनता पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जिले के एक नौजवान का इस तरह आमरण अनशन पर बैठना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और शाहाबाद के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चाहिए. बिहार कांग्रेस के प्रतिनिधि डॉ एस पी राय और आरएसएस के विक्की सिंह ने भी सरकार द्वारा विवि की भूमि को जबरिया खंड-खंड करने को तानाशाही रवैया बताया. गणित विभाग के प्रो विजय सिंह और हिंदी विभाग के व्याख्याता प्रो निलाम्बुज सिंह ने कहा कि लगता है सरकार शिक्षा के प्रति गम्भीर नहीं है, ना ही वो ढंग का विश्वस्तरीय मेडिकल कॉलेज बनाना

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महामारी के बावजूद KIIT में रिकॉर्ड प्लेसमेंट

कोविड-19 महामारी ने देश और पूरे विश्व में गतिरोध पैदा कर दिया है. यहां तक कि छात्र समुदाय सबसे अधिक प्रभावित शैक्षणिक गतिविधियोंमें से एक है, अभी तक स्कूल और कॉलेज फिर से आरम्भ नहीं हुए हैं – के.आई.आई.टी. डीम्ड विश्वविद्यालय ‘न्यू नामल’ के अनुकूल होने वाला पहला संस्थान था. यह लॉकडाउन के आरम्भ से ही 50 देशों में अपने 30,000 छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं आरम्भ करने वाला देश का पहला विश्वविद्यालय है. ऑनलाइन अध्यापन-शिक्षण, जो सफलतापूर्वक और प्रभावी रूप से जारी है, ने विश्वविद्यालय को अपने शैक्षणिक कार्य्रकम को पूरी तरह से बनाए रखने में मदद की है. के.आई.आई.टी. ने अपनी अच्छी तकनीक और उच्च इंटरनेट बैंडविड्थ के कारण वर्चुअल मोड पर परीक्षाओं, दीक्षांत समारोहों, सेमिनारों, कार्यशालाओं आदि जैसी सभी अकादमिक प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से संचालित किया है. वर्ष 1992 में एक प्रतिष्ठित व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में के.आई.आई.टी. की स्थापना प्रख्यात शिक्षावादियों और सामाजिक कार्यकर्त्ता प्रो. अच्युत सामंत ने की थी. हालांकि, इसे 1997 में उच्च शिक्षा के केंद्र के रूप में खोला गया था, जिसे आधार वर्ष माना जाता है. वर्ष 2001 में डिग्री इंजीनियरिंग के छात्रों का पहला बैच पास आउट हुआ था. के.आई.आई.टी. अपनी स्थापना के बाद से कैम्पस प्लेसमेंट में बहुत सफल ट्रैक रिकॉड के लिए जाना जाता है. इस प्रवर्र्ती (ट्रेंड) को बनाए रखते हुए, इसने 2019-20 के स्नातक बैच के लिए उत्कृष्ट कैम्पस प्लेसमेंट हासिल किया है. प्रचलित महामारी के बावजूद भी विश्वविद्यालय अपने 2020-21 के पास आउट बैच के लिए रिकॉड कैम्पस प्लेसमेंट प्राप्त करने के लिए ट्रैक

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