कृषि बिल पर देशव्यापी उबाल, सड़क पर विपक्ष

कांग्रेस,राजद और वाम दल समेत पूरे विपक्ष का विरोध प्रदर्शन संसद में कृषि बिल पास होने के बाद विपक्ष लगातार इस बिल का विरोध कर रहा है. विपक्ष का आरोप है कि इससे खेती किसानी खत्म हो जाएगी और पूरा कृषि क्षेत्र कॉरपोरेट सेक्टर के हाथों में चला जाएगा. कांग्रेस और राजद समेत तमाम विपक्ष के नेता केंद्र सरकार पर हमला बोल रहे हैं. आज देशभर में विपक्ष के तमाम नेता और बड़ी संख्या में किसान भी प्रदर्शन कर रहे हैं. बिहार के मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने राज्य भर में सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन की घोषणा की है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी इस प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं. उनका आरोप है कि NDA सरकार लगातार गरीब और किसान विरोधी फैसले ले रही है. इनको संख्या बल का इतना गुमान है की बगैर किसानों, उनके संगठनों और राज्य सरकारों से राय-मशवरा किये कृषि क्षेत्र का भी निजीकरण,ठेका प्रथा और कॉर्पोरेटीकरण करने को आतुर हैं. लोकसभा में एकतरफ़ा 3 कृषि विधेयकों का पास कराना किसानों का हाथ काटना जैसा है. • सबसे बड़ा खतरा यह है कि इस बिल के पास हो जाने के बाद सरकार के हाथ में खाद्यान्न नियंत्रण नहीं रहेगा और मुनाफे के लिये जमाखोरी को बढ़ावा मिलेगा. • ये विधेयक एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) प्रणाली द्वारा किसानों को प्रदान किए गए सुरक्षा कवच को कमजोर कर देगा और बड़ी कंपनियों द्वारा किसानों के शोषण की स्थिति को जन्म देगा. • सरकार के इस फैसले से मंडी व्यवस्था ही खत्म हो जायेगी. इससे

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पद के बाद पार्टी को भी रघुवंश सिंह ने कह दिया अलविदा

राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. दिल्ली एम्स में कई दिनों से इलाज करा रहे रघुवंश प्रसाद सिंह पार्टी में रामा सिंह की एंट्री को लेकर नाराज चल रहे थे. इसी वजह से उन्होंने पहले पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद भी दिल्ली चले गए थे जहां दिल्ली एम्स में उनका इलाज चल रहा है. कोरोना संक्रमण की वजह से वे अब तक पूरी तरह ठीक नहीं हो पाए हैं. 2 दिन पहले उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा है और आज उनका यह पत्र लालू यादव को लिखा गया सामने आया है जिसमें यह कहा गया है कि अब इससे ज्यादा वे पार्टी में नहीं बने रह सकते. राजेश तिवारी

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आखिरकार दिल्ली से लौट आए तेजस्वी

सोमवार की रात घर पहुंचे तेजस्वी विपक्ष की भूमिका पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच आखिरकार पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पटना लौट आए हैं. लॉक डाउन की वजह से वे मार्च महीने से ही दिल्ली में फंसे हुए थे. लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने आज सुबह राबड़ी देवी के सरकारी आवास में तेजस्वी यादव से मुलाकात करने के बाद मीडिया को बताया है कि नेता प्रतिपक्ष विशेष अनुमति लेकर दिल्ली से पटना आए हैं. माना जा रहा है कि तेजस्वी 14 दिन के होम कोरेंटाइन में रहेंगे. राजेश तिवारी

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इमोशनल ब्लैकमेलिंग पर उतरा राजद – मोदी

शहाबुद्दीन, राजबल्लभ के सताये लोगों के लिए राबड़ी ने चिट्ठी क्यों नहीं लिखी? – सुशील कुमार मोदीपटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि चार चरण के मतदान के बाद जब महामिलावटी गठबंधन की नाव डूबती नजर आ रही है, तब राबड़ी देवी मतदाताओं की इमोशनल ब्लैकमेलिंग के लिए चिट्ठी लिख रही हैं.उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन ने सिवान में पत्रकार राजदेव रंजन और व्यवसायी चंदा बाबू के तीन बेटों सहित जिन कई लोगों की हत्याएं करवाईं, उनके शोकसंतप्त परिजनों के लिए न कभी राबड़ी देवी की भावनाएं जगीं, न उन्होंने कोई चिट्ठी लिखी.मोदी ने सवाल किया कि राजद के ही पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव ने एक नाबालिग छात्रा से बलात्कार किया, लेकिन महिला होकर भी क्या राबड़ी देवी ने पीड़ित बच्ची के परिवार का दर्द बांटने के लिए कोई चिट्ठी लिखी? उन्होंने कहा कि जब उन्हें जनता के दुख-दर्द नहीं दिखे, तब अपने सजायाफ्ता-पति को पीड़ित की तरह दिखाने के लिए चुनाव के समय चिट्ठी लिख कर सहानुभूति क्यों पाना चाहती हैं? कोर्ट के फैसले पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए श्री मोदी ने कहा पुत्र मोह में संन्यास तोड़ कर लौटे जिस राजद नेता ने कभी लालू प्रसाद को चारा घोटाले का गुनहगार माना था, वही अब लालू चालीसा पढ़ कर अपनी भक्ति सिद्ध कर रहे हैं और न्यायपालिका को जातिवादी बताने की मुहिम चला रहे हैं.वे अनुकूल फैसलों के समय न्यायपालिका पर भरोसा करते हैं, जबकि जमानत नहीं मिलने पर जातिवादी राजनीति करने लगते हैं.उन्होंने कहा कि

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आरजेडी ने जारी किया घोषणा-पत्र | ताड़ी पर से हटेगा प्रतिबंध

पटना (राजेश तिवारी की रिपोर्ट)| आरजेडी ने आज लोकसभा  चुनाव से पहले अपना घोषणापत्र जारी किया. घोषणापत्र जारी करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि यह घोषणा-पत्र पार्टी का प्रतिबद्धता पत्र है. तेजस्वी यादव ने पटना स्थित आरजेडी कार्यालय में घोषणा-पत्र जारी किया. हर हाथ में रोटी और कलम – घोषणा-पत्र जारी करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि हमारी कोशिश होगी कि हर थाल में रोटी और हर हाथ में कलम हो .साथ ही उन्होने कहा कि हर घर में विकास पहुंचे यही हमारा लक्ष्य है. इस दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि हमारा देश किसी की बपौती नहीं है.सातवीं पास होंगे सिपाहीघोषणा-पत्र जारी करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि जब हमारी केंद्र और राज्य में सरकार बनेगी तो बिहार में सातवी पास भी सिपाही की बहाली में शामिल होगा. यहीं नहीं अभी तक जितनी भी रिक्तियां खाली है उसे जल्द से जल्द भरने का काम करेंगी. आबादी के हिसाब से आरक्षण – आरजेडी ने घोषणा-पत्र जारी करते हुए कहा कि हम देश में सवर्णों के खिलाफ न आबादी के हिसाब के आरक्षण होना चाहिए..साथ ही सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण का प्रस्ताव लाया जाएगा. सवर्ण आरक्षण पर भी बयान देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि स्वर्ण अमीरों को आरक्षण मिला है न कि स्वर्ण गरीबों के लिए आरक्षण दिया गया. मुख्य मुद्दा गरीबी है, जो गरीब हैं फिर चाहे वो सवर्ण हो या दलित उन्हें आरक्षण मिलना चाहिए. ताड़ी पर से हटेगा रोक – आरजेडी ने घोषणा-पत्र में कहा है कि अगर बिहार में आरजेडी

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मिथिलांचल में महागठबंधन : क्यों हाशिये पर हैं ब्राह्मण

पटना (निखिल के डी वर्मा की रिपोर्ट) | बात शुरू करता हूं जेपी आन्दोलन की. यह आन्दोलन देश में हावी हो रही कथित कानूनी अराजकता और संवैधानिक संकट के विरोध में हुआ था. नतीजा भी बेहतर रहा. केन्द्र से लेकर राज्यों तक सत्ता बदल गई. नई मानसिकता के साथ शासन की शुरुआत हुई. नब्बे के दशक के शुरुआती दिनों तक सब ठीक रहा. बाद के दिनों में राजनीतिक सोच जाति और धर्म के इर्द-गिर्द घूमने लगा. बिहार में लालू को सत्ता मिली. सामाजिक ताना बाना बदलने लगा. पिछड़ों को पहचान मिली लेकिन समाज में जातीय तनाव फन उठाना शुरू किया. नतीजे के तौर पर सूबे में कई नरसंहार हुए. जातियों को आधार बना कर वोटों का ध्रुवीकरण शुरू हुआ, बल्कि कुछ पार्टियां जाति विशेष के तौर पर पहचान बनाने में कामयाब रही. इन पार्टियों के नेता राज्यहित को दरकिनार करते हुए खुद के लिए जाति के नाम पर गोलबंदी किया. यह दौर भी लम्बा चला, कई अहित हुए, कई जातीय समीकरण बदले. लेकिन एक-दो जातियों के प्रति राजनीतिक पार्टियों का एप्रोच आज भी नहीं बदला है. यहां बात की जा रही है महागठबंधन में लीड रोल में शामिल राजद की. राजद के शुरुआती दौर में वरीय ब्राह्मण नेताओं के तौर पर शिवानंद तिवारी (जो खुद भी जाति के नेता के तौर पर अपनी पहचान नहीं मानते) और रघुनाथ झा का उल्लेख किया जा सकता है. रघुनाथ झा अब नहीं रहे और शिवानंद बाबा कभी भी जातीय हित की बात करना मुनासिब नहीं समझा. आज समय बदल गया है. लालू और

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राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद दे सकते हैं किसी पत्रकार को पहली बार तबज्जो

पटना / झंझारपुर (ब्यूरो रिपोर्ट) | 2019 के लोकसभा चुनाव का विगुल फूंका जा चुका है. सभी पार्टियां अपनी जीत का समीकरण बैठाने में लगी हैं. ऐसे में बिहार में लोकसभा चुनाव के लिए बिहार में एनडीए प्रत्याशियों का एलान कर दिया गया है. एक सीट को छोड़ 39 उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी गई है. महागठबंधन ने भी सीट शेयरिंग के तहत सीटों का ऐलान कर दिया है. आरजेडी को 20, कांग्रेस को नौ, मांझी की पार्टी को तीन, कुशवाहा की पार्टी को पांच और वीआईपी को तीन सीटें दी गई हैं. शरद यादव आरजेडी के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरेंगे. जहां एक तरफ एनडीए ने झंझारपुर लोकसभा सीट जेडीयू को दिया है वहीं महागठबंधन की ओर से यह सीट राजद के खाते में है. जदयू ने यहां से रामप्रीत मंडल को उम्मीदवार बनाया है.रामप्रीत मंडल पहले राजद में थे और अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष थे. सितम्बर 2017 में वे जदूय में शामिल हुए थे. अब देखना है कि जदयू इस फैसले को सही साबित करता है कि नहीं. अपनी छवि को सुधारने की कवायत के तहत राजद अच्छे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने में लगा है. इसी कड़ी में, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पहली बार किसी पत्रकार को तबज्जो देते हुए मिथिलांचल के प्रतिष्ठित मिश्रा परिवार में जन्मे तथा प्रसिद्ध पत्रकार राजीव मिश्र को झंझारपुर सीट से उम्मीदवार बना सकते हैं. ये वही राजीव मिश्र हैं जिनके परिवार का झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र से पुराना रिश्ता है. राजीव मिश्र के चाचा पूर्व केंद्रीय रेल

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‘बाबा’ ने कर दिया है ऐलान… कौन होगा ‘2019 का PM!’

आरा, 13 जनवरी | आरा में एक अजूबे बाबा का अवतरण हुआ है ये बाबा राजनीति के बाबा हैं. बाबा अब कोई भी बयान बिना कथा कहे नही देते हैं. बाबा की खुद की कई कहानियां प्रचलित रही हैं. इसके पहले भी बाबा बयानों से विवादों में बने रहे हैं. हम बात कर रहे हैं भोजपुर जिले के संदेश के राजद विधायक अरुण यादव की. जी हाँ चौंकिए मत हमारे बाबा कहने का मतलब तब साफ होगा जब आप इनके दिए बयान वाले इस वीडियो को देखिएगा. 2019 के PM को लेकर चल रहे अभी से घमासान के बीच जब अरुण यादव से पत्रकारों ने यह पूछा कि देश का आगामी प्रधानमंत्री कौन होगा तो उन्होंने इसका साफ-साफ जवाब देने से पहले एक कथा का वाचन किया जिसमें यह कहा कि एक साधु थे जो जमीन देखते थे. उन्होंने एक जमीन मालिक को मकान बनाने से पहले बताया कि उसके जमीन के लगभग 20 फीट अंदर हड्डी है. इसपर जमीन मालिक ने कहा कि ठीक है उसको निकलवा लिया जाएगा और उस संत के लिए एक कटोरी में दही खाने के लिए लेकर आया. साधु ने दही खाया और कहा कि बाबू दही खट्टा है थोड़ा चीनी लेकर आओ. इसपर जमीन मालिक भड़का और कहा कि आपके कटोरे के गहराई में चीनी है वह नही दिखा और जमीन की गहराई में हड्डी दिख गया. फिर क्या था डंडा लिए उस साधु को पीटने के लिए जमीन मालिक के साथ कई लोग दौड़ पड़े और साधु अपनी जान हथेली पर ले

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‘बंद गली के आखिरी मकान जैसी हो गई राजद-कांग्रेस की हालत’

बिहार में एनडीए एकजुट था है और रहेगा : नन्दकिशोर विकास की चकाचौंध के आगे टिमटिमा रही है ‘‘लालटेन’’ की लौ केन्द्र और बिहार में एनडीए की डबल इंजन की सरकार से तेज हो रहा है बिहार का विकास बिहार के पथ निर्माण मंत्री नन्दकिशोर यादव ने कहा है कि बिहार में राष्ट्रीय जनतात्रिक गठबंधन (एनडीए) एकजुट था, है और रहेगा। पिछले सप्ताह से अंधेरे में विखण्डन का सगूफा उड़ाने वाले राजनीतिज्ञों की आँखें खुल जानी चाहिए क्योंकि उनकी दाल नहीं गली. मंत्री ने कहा कि केन्द्र में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और बिहार में मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार मजबूती से गरीबों, दलितों और पिछड़ों के विकास का काम मुस्तैदी से कर रही है और इसमें शामिल तमाल घटक दल चट्टानी एकता के साथ डटे हैं. राजद और काँग्रेस की हालत बंद गली के आखिरी मकान जैसी हो गई है जिनके आगे कोई रास्ता ही नहीं है. परिवारवाद और वंशवाद वाली इन दोनों पार्टियों की स्थिति आगे नाथ न पीछे पगहा वाली हो गई है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के चार साल के कार्यो की अप्रतिम उपलब्धियों से विरोधियों में इतनी खलबली मची है कि वे एनडीए में टूट की हवा उड़ा रहे हैं जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है. नंदकिशोर यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री उज्जवला योजना व सौभाग्य योजना के तहत बिहार के घर-घर बिजली पहुँचने और महिलाओं को निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन दिए जाने से ‘‘लालटेन युग’’ समाप्ति की ओर है. विकास की चकाचौंध में लालटेन की अब जरूरत ही क्या है? गाँव का

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‘बिहार में भी सबसे बड़े दल को मिले सरकार बनाने का मौका’

बिहार में राजभवन में शुक्रवार को विपक्षी एकता एक बार फिर देखने को मिली जब राजद, कांग्रेस, हम और सीपीआई एमएल ने मिलकर राज्यपाल सत्यपाल मलिक को ज्ञापन सौंपा. राजद नेता तेजस्वी यादव के मुताबिक महागठबंधन के 111 विधायकों के समर्थन का पत्र राज्यपाल को सौंपा गया है. ज्ञापन में कर्नाटक में राज्यपाल के फैसले के आधार पर बिहार में भी सबसे बड़े दल होने के कारण राजद को सरकार बनाने का मौका दिए जाने की मांग की गई है. राजद ने वर्तमान सरकार को बर्खास्त करने की मांग करते हुए राज्यपाल से राजद को सरकार बनाने का न्योता देने का अनुरोध किया है. राजद की इस मांग का समर्थन कांग्रेस, हम और वाम दल ने किया है. राज्यपाल से मिलने के बाद बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि जब कर्नाटक में सबसे बड़े दल को बहुमत नहीं होने के बावजूद सरकार बनाने का मौका मिल सकता है तो बिहार में क्यों नहीं.   पटना से राजेश तिवारी

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