जानिए किस विधायक ने मांगे BPSc परीक्षार्थियों के अतिरिक्त मौके!

बक्सर विधायक मुन्ना तिवारी ने उम्र का नुकसान होने वाले BPSc परीक्षार्थियों के लिए सरकार से मांगे 4 अतिरिक्त मौके पटना,25 फरवरी. राजनीति में जनता के प्रतिनिधि दो तरह से जाने जाते हैं. एक जो जनता के अधिकारों के लिए लड़ते हैं और दुसरे वे जो खुद के अधिकारों के लिए जनता तक को भूल जाते हैं. जनता के अधिकारों के लिए लड़ने वाले को सदियाँ याद रखती हैं. ऐसे ही जनता के अधिकारों के लिए लड़ने वाले हैं बक्सर विधायक संजय तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी. देश मे जहां बेरोजगारी की बाढ़ है वहाँ छात्रों के लिए आगे बढ़कर उन्होंने बुधवार को सदन में आवाज उठाया और bpsc की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए 4 मौके माँगे. बिहार विधान सभा मे इन दिनों बिहार के विभिन्न जिलों से जीतकर आये नवनिर्वाचित विधायकों समेत कई बार से लगातार जीतने वाले जनप्रतिनिधियों की ख़ासतौर से उपस्थिति देखी जा रही है. वे सभी अपने-अपने क्षेत्रों के लिए जरूरी मांगो को सदन में रख रहे हैं जिससे उनका क्षेत्र और उस क्षेत्र के लोगों का जीवन बेहतर हो सके. बुधवार को बक्सर विधायक संजय तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी को जब बिहार विधानसभा के स्पीकर विजय कुमार सिन्हा ने आमंत्रित किया तो उन्होंने BPSC परीक्षार्थियों का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि BPSC की 48वी परीक्षा में 15 मौके की जगह अभ्यर्थियों को सिर्फ 4 मौके ही मिले. जिससे अभ्यर्थियों को 11 मौकों का नुकसान हुआ. उन्होंने वैसे अभ्यर्थियों के लिए जिन्हें BPSC परीक्षा के लिए उम्र का नुकसान हुआ उनके लिए 4 अतिरिक्त मौके

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बिहार में अब निजी अस्पताल के कर्मियों को भी मिलेगा ये बड़ा फायदा

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया है कि निजी अस्पतालोंं में कोविड 19 का इलाज करनेवाले डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को भारत सरकार के प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत 50 लाख का बीमा कवरेज दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों, नर्सों, पैरा मेडिकल स्टाफ एवं उन कर्मियों को मिलेगा, जिनकी असामयिक मृत्यु कोविड मरीजों के उपचार के दौरान होगी. इसका लाभ जिला प्रशासन द्वारा चिह्नित प्राइवेट अस्पतालों को ही मिलेगा. अभी जिला प्रशासन द्वारा सूबे में 120 प्राइवेट अस्पतालों को चिह्नित किया है. उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भारत सरकार की इस महत्वाकांक्षी बीमा योजना से प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत चिकित्साकर्मियों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और कोरोना के खिलाफ संघर्ष में उनका मनोबल ऊंचा होगा. स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कोविड विजेताओं द्वारा प्लाज्मा दान को ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहित करने के लिए प्रति प्लाज्मा दाता प्रोत्साहन राशि देने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसकी प्रक्रिया पूरी कर सरकार को भेजी जा रही है, जिसकी कैबिनेट स्तर पर शीघ्र स्वीकृति मिल जाने की उम्मीद है.प्लाज्मा दाता प्रोत्साहन राशि देने के बाद दाताओं में उत्सावर्द्धन होगा. उन्होंने बताया कि शीघ्र ही पटना के जयप्रभा अस्पताल और भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्लाज्मा लेने का काम शुरू हो जाएगा. इसके लिए दोनों संस्थानों में एपरहेसिस मशीन की स्थापना की जा रही है. PNCB

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CBI करेगी मामले की जांच

बिहार सरकार ने आखिरकार दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले की जांच की सिफारिश सीबीआई से कर दी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद इसकी पुष्टि की है. मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार लगातार इस मामले में बिहार पुलिस अधिकारियों के साथ भेदभाव कर रही थी. उनका रवैया कहीं से भी सही नहीं था. जब सुशांत सिंह के पिता ने सीबीआई जांच की मांग की तो हमने इसे सीबीआई के सुपुर्द करने का फैसला किया. राजेश तिवारी

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बिहार के इस अस्पताल में भी अब होगी कोरोना की जांच

ICMR ने बिहार के एक और अस्पताल को दी कोरोना जांच की अनुमति RMRI, IGIMS, PMCH और DMCH के बाद अब SKMCH मुजफ्फरपुर को भी ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) से कोरोना की जांच की अनुमति मिल गई है. जल्द ही वहां सैंपल जांच की प्रकिया शुरू हो जाएगी. बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने इसकी पुष्टि की है. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि बिहार में अब पांच जगहों पर जांच होगी जिससे कोरोना की जांच में तेजी आएगी. कोरोना वायरस से बचने के लिए सूबे में सोशल डिस्टेंसिंग का फार्मूला तेजी से काम कर रहा है. अभी तक 64 कोरोना पाॅजिटिव मरीजों में से 23 लोग कोरोना पर विजय प्राप्त कर पूरी तरह स्वस्थ हुए हैं. और ऐसे कई मरीज हैं जिनकी स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है. आज गया में भी एक मरीज ने कोरोना को मात दी है. मंगल पांडेय ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग का ही परिणाम है कि सबसे अधिक घनत्व वाले राज्य बिहार में पाॅजिटिव मरीजों की संख्या कम हैं. राष्ट्रीय स्तर पर भी जहां कोरोना के केस 4 दिनों में दोगुना होते थे, वहीं अब 6 दिनों में इतने मामले आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार साथ मिलकर कोरोना महामारी को जड़ से उखाड़ फेंकने की दिशा में हरसंभव प्रयास कर रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि शनिवार को जहां एनएमसीएच, पटना में चार मरीजों ने कोरोना को मात दी है, वहीं रविवार को एएनएमसीएच, गया के एक कोरोना पाॅजिटिव की रिपोर्ट निगेटिव आई है.

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बिना परीक्षा के ही पास हो गए ये बच्चे

बिहार के शिक्षा विभाग ने क्लास वन से लेकर क्लास 9 और क्लास 11 के सभी सरकारी स्कूलों के बच्चों को अगले कक्षा में सीधे प्रमोट कर दिया है. बिना परीक्षा के सभी सरकारी स्कूलों के इन बच्चों को प्रमोट कर दिया गया. इसकी वजह लॉक डाउन है जिसके कारण बिहार के सभी स्कूल 14 अप्रैल तक बंद है. हालांकि मैट्रिक परीक्षा का रिजल्ट अभी आना बाकी है.

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बिहार में कोरोना पॉजिटिव केस बढ़े

बिहार में मंगलवार को 6 और लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए सरकार की परिस्थितियों पर पैनी नजर, लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है:- मुख्यमंत्री राज्य में जरूरी सामानों की कोई कमी नहीं है, लोगों को खाद्य सामग्री एवं जरूरी चीजें उपलब्ध होती रहेंगी। लाॅकडाउन के कारण बिहार के बाहर फंसे लोगों की हर सुविधाओं का ख्याल रखा जा रहा है बिहार में आज कुल कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़कर 38 तक पहुंच गई है. 6 अप्रैल तक बिहार में कुल 32 कोरोना पॉजिटिव थे. स्वास्थ्य सचिव संजय कुमार ने बताया कि मंगलवार को सीवान से चार और दो लोग बेगूसराय में कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. हालांकि 38 में से अब तक 15 मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं. इन सबके बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को 1, अणे मार्ग में कोरोना संक्रमण से निपटने के लिये उठाये जा रहे कदमों की अद्यतन स्थिति की मुख्य सचिव एवं अन्य वरीय अधिकारियों के साथ गहन समीक्षा की. समीक्षा के क्रम में राज्य में दवाओं, मास्क और अन्य जरूरी इक्यूपमेंट्स की उपलब्धता के संबंध में जानकारी दी गयी. संक्रमित लोगों के इलाज के लिये जरूरी कदम उठाये गये हैं, उनकी उचित देखभाल की जा रही है. कोरोना संदिग्धों की अधिक से अधिक टेस्टिंग करायी जा रही है.संदिग्ध लोगों की स्क्रीनिंग तेजी से करायी जा रही है.समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देेेश देते हुये कहा कि दवाओं, मास्क और अन्य जरूरी इक्यूपमेंट्स की उपलब्धता सुनिष्चित करायी जाय और यह ध्यान रखा जाय कि इसकी कमी न हो.

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बिहार के मैप के साथ देखिए कोरोना अपडेट

कोरोना केसेज के मामले में बिहार अब तक भाग्यशाली रहा है. यहां 4 अप्रैल तक सिर्फ 32 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. पटना समेत कुछ जिलों में आइसोलेशन वार्ड में मरीजों की मौत को कोरोना से जोड़कर देखा जा रहा है. इसे लेकर बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा कि हर मौत को कोरोना से जोड़कर देखना उचित नहीं. उन्होंने बताया कि बिहार के मेडिकल कॉलेजों में अलग-अलग वजह से कई लोगों की मौत हुई है, इसलिए इन सभी को कोरोना से जोड़ना कहीं से भी सही नहीं है. आपको बता दें कि 4 अप्रैल 2020 तक बिहार में 32 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. इनमें से 3 लोग ठीक हो कर घर जा चुके हैं जबकि मुंगेर के एक मरीज की मौत हुई है.

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बिहार के 4 लाख से अधिक करदाताओं को मिली बड़ी राहत

पटना / गोवा (ब्यूरो रिपोर्ट) | जीएसटी कौंसिल की गोवा में हुई 37 वीं बैठक में 2 करोड़ से कम वार्षिक टर्नओवर वाले करदाताओं को वार्षिक विवरणी दाखिल करने से दो वर्षों (2017-18 और 18-19) के लिए छूट दिए जाने के निर्णय से बिहार के इस दायरे में आने वाले 4 लाख 17 हजार कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है. यह जानकारी बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने दी. उन्होंने बताया कि बिहार की पहल पर जीएसटी के अन्तर्गत बिहार के 82 प्रतिशत करदाता विगत दो वर्षों के वार्षिक विवरणी दाखिल करने से मुक्त हो जायेंगे. उन्होंने आगे बताया कि इसके साथ ही 2 करोड़ से अधिक वार्षिक टर्नओवर वाले करदाताओं के वार्षिक विवरणी फाॅर्म के सरलीकरण के लिए एक कमिटी का गठन किया गया है. फाॅर्म सरल होने के बाद वार्षिक विवरणी दाखिल करने में करदाताओं के सहूलियत होगी. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने (01 जुलाई, 2017) के प्रारंभिक दिनों में वार्षिक विवरणी दाखिल करने को लेकर छोटे करदाताओं को काफी परेशानी हुई थी, जिसे अब काफी हद तक दूर कर दिया गया है. बिहार की ओर से उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने बैठक में उपस्थित 15 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन के सिंह से जीएसटी लागू होने के बाद के 5 साल तक राजस्व वृद्धि 14 प्रतिशत से कम होने पर केन्द्र सरकार द्वारा क्षतिपूर्ति के प्रावधान को 2022 की जगह 3 साल और बढ़ा कर 2025 तक करने की मांग की. उन्होंने कहा कि अभी बिहार का राजस्व वृद्धि गैप 20 प्रतिशत है, ऐसे

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स्नातक फर्स्ट ईयर में एडमिशन अब इस तारीख से

बिहार में इस साल इंटर परीक्षा पास करने के बाद ग्रैजुएशन फर्स्ट ईयर में एडमिशन के इंतजार में बैठे स्टूडेंट्स का इंतजार खत्म होने वाला है.  बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने आखिरकार मेरिट लिस्ट जारी करने और एडमिशन शुरू करने की डेट आनाउंस कर दी है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर ने  बताया कि Online Facilitation System for Students (OFSS) सॉफ्टवेयर के माध्यम से राज्य के 10 विश्वविद्यालयों-  ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा, पूणियाँ विश्वविद्यालय, पूर्णियाँ, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यायल, मधेपुरा, वीर कुँअर सिंह विश्वविद्यालय, आरा, बाबा साहब भीमराव अम्बेदकर विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, मगध विश्वविद्यालय, गया, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा, मुँगेर विश्वविद्यालय, मुँगेर, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना, तिलका मांझी विश्वविद्यालय, भागलपुर में स्नातक कक्षा में नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन के आधार पर अलग-अलग संकायवार एवं विषयवार अलग-अलग मेरिट सूची  रविवार दिनांक 15.07.2018 को जारी की जायेगी. इसके बाद राज्य के इन 10 विश्वविद्यालयों के सभी अंगीभूत डिग्री महाविद्यालयों एवं सम्बद्धता प्राप्त डिग्री महाविद्यालयों में मेरिट सूची के आधार पर नामांकन की प्रक्रिया सोमवार दिनांक 16.07.2018 से प्रारंभ हो जायेगी.  विश्वविद्यालयों में नामांकन की प्रक्रिया 16 जुलाई, 2018 से प्रारंभ होकर दिनांक 24 जुलाई, 2018 तक चलेगी. बता दें कि राज्य के इन 10 विश्वविद्यालयों में नामांकन के लिए 4 लाख 11 हजार 826 विद्यार्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया है.   राजेश तिवारी

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शराबबंदी कानून में संशोधन के लिए बनाई गई कमिटी

बिहार के बहुचर्चित शराबबंदी कानून में संशोधन होगा. इसके लिए सीएम नीतीश कुमार ने हां कर दी है. सोमवार को एक अणे मार्ग में लोकसंवाद कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात करते हुए सीएम ने कहा कि यह भी देखा जाएगा कि शराबबंदी कानून के किस प्रावधान के सबसे ज्यादा दुरुपयोग हो रहा है. मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कमिटी बनाई है. संशोधन की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को भी दी गई है. सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि कानून के विभिन्न प्रावधानों और इसके प्रभावों की समीक्षा कर कमिटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट देगी. इसके बाद कमिटी की रिपोर्ट पर महाधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील से परामर्श लिया जाएगा. इसके बाद ही जरूरी संशोधन किए जाएंगे. बता दें कि बिहार में एक अप्रैल 2016 से देसी शराब को बैन किया गया था. इसके तुरंत बाद 5.04.2016 से राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी. वहीं 2 अक्टूबर 2016 से बिहार में नया शराबबंदी कानून लागू हुआ था.

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