बिहार की छवि बिगाड़ने के बाद डैमेज कंट्रोल की कोशिश-सीमा

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी की राष्ट्रीय सचिव सीमा सक्सेना ने राजद राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य की ज़मानत रद्द कराने के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय में दाखिल की गई महागठबंधन सरकार की याचिका मज़बूरी में लिया गया फैसला है. उन्होंने कहा कि ये मामला वैसे भी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच ही चुका था क्योंकि पीड़ित पक्ष की ओर से भी याचिका दाखिल कर दी गई है. उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में महागठबंधन सरकार की भूमिका रही है, उससे देश में बिहार की छवि ख़राब हुई है. अखबार, न्यूज़ चैनलों और सोशल मीडिया पर लगातार बिहार में अपराधियों को सत्ता के संरक्षण के आरोप लगाए गए और हर जगह ये संदेश गया है कि बिहार में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज अब नहीं रह गई है.

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रालोसपा सचिव ने कहा कि सरकार से जनता को ये अपेक्षा रहती है कि वो दलीय और निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर जनहित में कदम उठाए. बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद से इस भावना का गला घोंट दिया गया. विपक्ष ने बार-बार सरकार को आगाह किया कि वो इस तरह के कदम न उठाए, जिससे जनता त्रस्त हो, लेकिन विपक्ष पर दुष्प्रचार करने का आरोप लगाकर सत्तापक्ष निरंकुश रवैया अपनाए रहा. अब सरकार को खुद सोचना चाहिए कि उससे कहां चूक हो गई, जो इस तरह की स्थिति बनी.

रालोसपा सचिव ने कहा कि सुशासन और कानूनराज बयान देने और दावा करने से नहीं कायम हो सकता है. इसके लिए सरकार के पास अपराध नियंत्रण की ठोस नीति होनी चाहिए और सख्ती के साथ अपराध को कुचलने की इच्छाशक्ति होनी ज़रूरी है और दुख के साथ कहना पड़ता है कि बिहार सरकार के पास ये नहीं है.