27 अक्टूबर को होगा शाहाबाद महोत्सव
संसद भवन के समीप मावलंकर भवन में जुटेंगी शाहाबाद की नामचीन हस्तियां, पहली बार राष्ट्रीय मंच पर दिखेगी क्षेत्र की लोककला और खान-पान की अनूठी झलक
आरा, 16 सितंबर. शाहाबाद प्रक्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सहेजने तथा क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान के तहत इस वर्ष शाहाबाद महोत्सव का आयोजन देश की राजधानी दिल्ली में किया जाएगा. आगामी 27 अक्टूबर को संसद भवन के समीप कांस्टीट्यूशन क्लब स्थित मावलंकर भवन में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में शाहाबाद की कला, संस्कृति, लोक परंपरा, खान-पान और ऐतिहासिक विरासत की झलक राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत की जाएगी.

महोत्सव की तैयारियों को लेकर मंगलवार को ब्लॉक रोड स्थित जदयू के वरिष्ठ नेता एवं जिला विश्वसूश्री कार्यान्वयन समिति के उपाध्यक्ष संजय सिंह के आवास पर आयोजन समिति के प्रमुख सदस्यों की बैठक हुई. बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष अखिलेश कुमार ने बताया कि शाहाबाद की गौरवशाली विरासत और परंपराओं को अक्षुण्ण रखते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समिति वर्ष 2019 से व्यापक अभियान चला रही है. इस अभियान के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर भी दिखाई देने लगे हैं. उन्होंने कहा कि इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है.
पहली बार दिल्ली में दिखेगी शाहाबाद की लोककला
अखिलेश कुमार ने कहा कि चकाचौंध और आधुनिकता के दौर में शाहाबाद की कई पारंपरिक कलाएं और लोक विधाएं विलुप्त होने के कगार पर हैं. इन्हें संरक्षित करना वर्तमान पीढ़ी की नैतिक जिम्मेदारी है. इसी उद्देश्य से दिल्ली में पहली बार शाहाबाद प्रक्षेत्र की प्रमुख लोककलाओं और लोक संगीत की प्रस्तुति की जाएगी.
महोत्सव में गोड़ नाच, कुड़ुक नृत्य, शिवनरायणी गीत तथा धोबिया-धोबिनिया नाच जैसी पारंपरिक लोक विधाओं की प्रस्तुति कलाकारों द्वारा की जाएगी. इसके माध्यम से देश की राजधानी में शाहाबाद की मिट्टी की खुशबू और लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश करने का प्रयास होगा.
शाहाबाद के पारंपरिक खान-पान की भी लगेगी प्रदर्शनी
महोत्सव में शाहाबाद के विशिष्ट और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की भी प्रदर्शनी लगाई जाएगी. इसमें चेनारी के गुड़ के लड्डू, बक्सर की पापड़ी, कोआथ का बेलग्रामी और बेतरी के चावल प्रमुख आकर्षण होंगे.
इसके साथ ही देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महापुरुषों तथा शाहाबाद के ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य स्थलों पर आधारित तैलचित्र प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी. आयोजन समिति का उद्देश्य लोगों को शाहाबाद की कला-संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य से परिचित कराना है.
राजनीतिक से लेकर कला और शिक्षा जगत की हस्तियां होंगी शामिल
अखिलेश कुमार ने बताया कि महोत्सव में राजनीतिक, प्रशासनिक, साहित्य, कला-संस्कृति, चिकित्सा और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे लोगों की भागीदारी होगी. दिल्ली में होने वाला यह आयोजन शाहाबाद की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक राष्ट्रीय मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास होगा.
इस अवसर पर संजय सिंह ने कहा कि अपनी सभ्यता, संस्कृति और गौरवशाली परंपरा को संजोकर रखना सभी का नैतिक दायित्व है. इसी उद्देश्य को केंद्र में रखकर शाहाबाद महोत्सव आयोजन समिति के बैनर तले वर्ष 2019 में शुरू किया गया अभियान अब एक व्यापक स्वरूप ले रहा है.
उन्होंने कहा कि कैमूर की वादियों से लेकर शाहाबाद के मैदानी क्षेत्रों, बक्सर, जगदीशपुर और आरा तक पर्यटन विकास की संभावनाओं को सामने लाने में शाहाबाद महोत्सव आयोजन समिति की निरंतर गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
संजय सिंह ने कहा कि जब पहली बार दिल्ली में शाहाबाद की कला, संस्कृति, धरोहर और पर्यटन की अपार संभावनाओं की झलक राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई जाएगी, तो यह क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण होगा. इससे शाहाबाद की समृद्ध विरासत और पर्यटन क्षमता का व्यापक संदेश देशभर में जाएगा.
बैठक में स्यंदन सुमन, आरुणिश पांडेय, सोहित सिन्हा, डॉ. रवि जी, संजीव सिन्हा सहित अन्य लोग मौजूद थे.
आरा से ओ पी पाण्डेय की रिपोर्ट
