छठ गीत ‘बबुआ गइले बिसराई’ ने झकझोरा दिल, बुजुर्गों की पीड़ा देख भावुक हुए दर्शक

राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने किया लोकार्पण, मनीषा श्रीवास्तव की आवाज की सराहना की. आपदा पर भी प्रेरणादायक गीत बनाने का दिया सुझाव

पटना. छठ महापर्व की आस्था, परंपरा और सामाजिक संवेदनाओं को संगीत के माध्यम से जीवंत करती लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव की विशेष प्रस्तुति ‘बबुआ गइले बिसराई’ का मंगलवार को बिहार म्यूजियम में भव्य लोकार्पण हुआ. बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने गीत का लोकार्पण किया. बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा और बदलते पारिवारिक मूल्यों पर आधारित इस गीत ने सभागार में मौजूद दर्शकों को भावुक कर दिया. गीत के फिल्मांकन, संगीत और कलाकारों के अभिनय ने ऐसा प्रभाव छोड़ा कि प्रस्तुति समाप्त होने के बाद भी दर्शक उसकी संवेदनाओं से जुड़े नजर आए.

कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम और राष्ट्रगान से हुआ. इसके बाद अतिथियों को भोजपुरी एवं मैथिली पेंटिंग से सुसज्जित अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया. वहीं, गीत में योगदान देने वाले कलाकारों और तकनीकी टीम के सदस्यों को स्मृति चिह्न प्रदान किए गए.

बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा पर करारा संदेश
‘बबुआ गइले बिसराई’ महज एक छठ गीत नहीं, बल्कि समाज में तेजी से बदलते पारिवारिक रिश्तों और बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा की पीड़ा को सामने लाने वाली संवेदनशील प्रस्तुति है. गीत के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि किस तरह नई पीढ़ी अपने माता-पिता और बुजुर्गों को भूलती जा रही है. छठ जैसे पारिवारिक जुड़ाव और लोकआस्था के महापर्व के साथ इस विषय को जोड़ना गीत को विशेष अर्थ देता है.





गीत को अपनी आवाज मनीषा श्रीवास्तव ने दी है, जबकि इसका संगीत प्रभाकर पांडे ने तैयार किया है. कहानी और प्रस्तुति में मनीषा श्रीवास्तव की भूमिका के साथ मुख्य पात्र के रूप में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अभिषेक सिंह ने प्रभावशाली अभिनय किया है. गीत की भावपूर्ण गायकी, संगीत का उत्कृष्ट संयोजन, फिल्मांकन और कलाकारों के अभिनय ने बिहार म्यूजियम के सभागार में मौजूद दर्शकों को भीतर तक झकझोर दिया.

राज्यपाल ने की मनीषा की आवाज की तारीफ, आपदा पर गीत बनाने का सुझाव

लोकार्पण के बाद राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने मनीषा श्रीवास्तव की आवाज की विशेष सराहना की. उन्होंने इस तरह के संवेदनशील विषय पर गीत और वीडियो तैयार करने के लिए पूरी टीम को बधाई दी. राज्यपाल ने कहा कि आजकल की युवा पीढ़ी बुजुर्गों का आदर करना भूलती जा रही है. ऐसे समय में छठ गीत के माध्यम से पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के सम्मान का संदेश देना बेहद सराहनीय है.

उन्होंने मनीषा श्रीवास्तव को भविष्य में आपदा जैसे गंभीर विषयों पर भी अपनी दमदार आवाज में प्रेरणादायक रचनाएं तैयार करने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि इस तरह के गीत युवाओं के लिए प्रेरणा और जागरूकता का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं. राज्यपाल ने ऐसी रचनात्मक पहल को आगे बढ़ाने के लिए पूरी टीम को प्रोत्साहित किया.

छठ की पुरानी परंपराओं को किया याद
राज्यपाल ने छठ से जुड़ी अपनी पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि पहले छठ के अवसर पर लोग बाहर से अपने गांव और शहर लौटते थे, ताकि भगवान भास्कर की आराधना के इस पावन पर्व को पूरे परिवार और सगे-संबंधियों के साथ मना सकें. लेकिन अब पर्व के अवसर पर भी कई लोग अपने घर नहीं पहुंचते हैं.

उन्होंने लोगों से छठ के साथ दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज जैसे त्योहारों को भी पूरी सतर्कता और सावधानी के साथ मनाने की अपील की, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना या दुर्घटना न हो और पर्व खुशियों के साथ संपन्न हों.

आलोक पांडे की प्रस्तुति ने भी मोहा मन
कार्यक्रम में आलोक पांडे ने अपनी लोकगीत प्रस्तुति ‘केहू कतनी दुलारी बाकी, माई ना होई’ से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम का समापन भी वंदे मातरम और राष्ट्रगान के साथ हुआ. अंत में मनीषा श्रीवास्तव ने आगत अतिथियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया.

इस अवसर पर बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह, उप महानिदेशक अशोक सिन्हा, बिहार विधान परिषद सदस्य डॉ. संजय मयुख सहित कला, संस्कृति और संगीत जगत से जुड़ी कई हस्तियां मौजूद रहीं.

ओ. पी. पाण्डेय | पटना नाउ

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