आरा के लाल अंजनी कुमार ने राष्ट्रीय एकता दिवस पर किया परेड का नेतृत्व
CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों की संभाली कमान
शौर्य चक्र विजेता उप कमांडेंट अंजनी कुमार के नेतृत्व में निकली भव्य परेड,
नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में दिखा चुके हैं अदम्य साहस, 8 नक्सलियों को किया था ढेर
आरा/केवड़िया, 1 नवंबर(ओ पी पाण्डेय). भोजपुर की धरती के लाल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के उप कमांडेंट अंजनी कुमार ने राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में 31 अक्टूबर को अपने नेतृत्व और सैन्य अनुशासन का परिचय दिया. उन्होंने CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों की पासिंग परेड का नेतृत्व किया. उनके नेतृत्व में कदमताल करते जवानों ने अनुशासन, एकजुटता और राष्ट्रसेवा के संकल्प का शानदार प्रदर्शन किया. देश की सुरक्षा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अंजनी कुमार के लिए यह एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है. खास बात यह है कि इसी वर्ष उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित किया गया है.

नक्सलियों के गढ़ में घुसकर दिखाया था अदम्य साहस
अंजनी कुमार और उनके सहकर्मी सिपाही दीपक साह को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया. दोनों ने 21 अप्रैल 2025 को झारखंड के बोकारो जिले के लुगबुरु जंगल में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान अद्भुत वीरता का परिचय दिया था.


दुश्मन की भारी गोलीबारी, दुर्गम जंगल और विपरीत परिस्थितियों के बीच अंजनी कुमार ने ऑपरेशन का नेतृत्व किया. उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना नक्सलियों के ठिकाने तक पहुंचकर मोर्चा संभाला. इस अभियान में सुरक्षा बलों ने आठ नक्सलियों को मार गिराया और भारी मात्रा में हथियार एवं गोला-बारूद बरामद किए. मारे गए नक्सलियों में बिहार और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में लंबे समय से सक्रिय प्रयाग मांझी उर्फ विवेक, अरविंद सिंह और साहब राम मांझी जैसे बड़े नाम शामिल थे. इनमें प्रयाग मांझी एक करोड़ रुपये का इनामी और सेंट्रल कमेटी का सदस्य बताया गया था. इस अभियान को झारखंड में नक्सल विरोधी कार्रवाई की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना गया.
आरा के हाटपोखर गांव से देश की सुरक्षा तक का सफर
उप कमांडेंट अंजनी कुमार मूल रूप से भोजपुर जिले के हाटपोखर गांव के निवासी हैं. उनके पिता जगदीश चौबे पेशे से शिक्षक हैं. अंजनी कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गृह जिले में प्राप्त की. इसके बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वर्ष 2008 में सहायक कमांडेंट के रूप में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में नियुक्त हुए.
छह साल तक छत्तीसगढ़ में संभाला नक्सल विरोधी मोर्चा
सेवा के शुरुआती छह वर्षों तक उन्होंने छत्तीसगढ़ में 204 कोबरा बटालियन के साथ काम किया. इस दौरान कई नक्सल विरोधी अभियानों में हिस्सा लिया और अपनी वीरता का परिचय दिया. उनके साहसिक कार्यों के लिए उन्हें दो बार राष्ट्रपति के वीरता पदक से सम्मानित किया जा चुका है.


इसके बाद उन्होंने देश की विशिष्ट सुरक्षा इकाई स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) में भी सेवाएं दीं. यहां प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने के दौरान उन्हें SPG महानिदेशक की ओर से कई बार प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए.
कोबरा कमांडो बनने का जुनून, लगातार जारी है देशसेवा
जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाने वाली देश की विशिष्ट कमांडो इकाई 209 कोबरा बटालियन में काम करना अंजनी कुमार की शुरुआती इच्छा रही है. झारखंड के खूंटी जिले में 209 कोबरा बटालियन के साथ लगभग छह वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने कई नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया. उनकी बहादुरी और कार्य-कुशलता के लिए CRPF के महानिदेशक की ओर से भी कई बार प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है. उनकी वीरता से जुड़े दो अन्य मामले भी प्रक्रियाधीन बताए गए हैं.


राष्ट्रीय एकता दिवस पर CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों की पासिंग परेड का नेतृत्व करना उनके लंबे सैन्य अनुभव, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण को रेखांकित करता है.
एक ओर नक्सलियों के गढ़ में घुसकर आठ माओवादियों को ढेर करने वाले अभियान में नेतृत्व और शौर्य चक्र से सम्मानित होने की उपलब्धि, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय एकता दिवस पर सुरक्षा बलों की परेड की कमान. आरा के हाटपोखर गांव से निकलकर देश की सुरक्षा के महत्वपूर्ण दायित्वों तक पहुंचे अंजनी कुमार की यह यात्रा न सिर्फ उनके लिए बल्कि पूरे भोजपुर के लिए गौरव का विषय है.
