राज्यपाल ने छात्रों-शिक्षकों से सुनीं समस्याएं, शोधार्थियों ने सौंपा ज्ञापन

प्रवेश नहीं मिलने का आरोप लगाकर छात्र संगठनों ने किया प्रदर्शन, प्रशासनिक भवन में तोड़फोड़

आरा, 18 जुलाई (ओ पी पाण्डेय). वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय (वीकेएसयू, VKSU), आरा में शुक्रवार को आयोजित राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सय्यद अता हसनैन के “शिक्षकों एवं छात्रों के साथ संवाद” कार्यक्रम का समापन विश्वविद्यालय परिसर में अभूतपूर्व विरोध, हंगामे और तोड़फोड़ के बीच हुआ. एक ओर राज्यपाल ने छात्रों, शिक्षकों और शोधार्थियों से संवाद कर उच्च शिक्षा में सुधार का भरोसा दिया, वहीं दूसरी ओर कार्यक्रम से बाहर रखे जाने का आरोप लगाते हुए विभिन्न छात्र संगठनों ने पहले काला झंडा दिखाया और बाद में प्रशासनिक भवन में घुसकर प्रदर्शन किया.


यह वीकेएसयू में राज्यपाल के साथ आयोजित इस प्रकार का पहला संवाद कार्यक्रम था, लेकिन कार्यक्रम के समापन के साथ ही विश्वविद्यालय परिसर तनाव का केंद्र बन गय.
राज्यपाल बोले- छात्रों और शिक्षकों के सुझावों से ही होगा वास्तविक सुधार
राज्यपाल ने संवाद के दौरान कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, शोध, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन के केंद्र हैं. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में स्थायी सुधार तभी संभव है, जब नीति निर्माण में छात्रों और शिक्षकों के अनुभवों और सुझावों को महत्व दिया जाए.

उन्होंने छात्रों से पुस्तकालय, परीक्षा प्रणाली, डिजिटल संसाधन, शोध और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सुझाव लिए। शिक्षकों के साथ नई शिक्षा नीति, शोध संस्कृति और शैक्षणिक गुणवत्ता पर भी चर्चा की. राज्यपाल ने भरोसा दिलाया कि आने वाले चार से छह महीनों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव दिखाई देंगे.


कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बाबू वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, परिसर में पौधरोपण किया और छात्रों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स का अवलोकन कर उनकी सराहना भी की.
शोधार्थियों ने सीधे राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
संवाद कार्यक्रम के दौरान ऑल बिहार पीएच.डी. डिग्री होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा.

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कुमुद पटेल ने किया. उनके साथ अभिषेक मेहता, सुशील टाइगर, पियूष कुमार, ज्योति कुमार और रत्नेश कुमार मौजूद रहे. प्रतिनिधिमंडल ने शोधार्थियों, पीएचडी उपाधिधारकों, नेट और जेआरएफ अभ्यर्थियों से जुड़ी समस्याओं, शोध के लिए बेहतर सुविधाएं, लंबित मामलों के समाधान तथा उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग रखी.
राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा.
छात्र संगठनों का आरोप- संवाद में हमें ही नहीं बुलाया गया
इसी बीच विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि वे कई दिनों से कुलपति और कुलसचिव से मिलकर संवाद कार्यक्रम में शामिल होने तथा राज्यपाल को ज्ञापन देने की अनुमति मांग रहे थे, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया.

छात्रों का कहना था कि कार्यक्रम में आम छात्रों की आवाज़ शामिल नहीं की गई, जबकि संवाद का उद्देश्य ही छात्रों की समस्याएं सुनना था.
उनकी प्रमुख मांगों में शामिल थीं :
• 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता समाप्त करना.
• विश्वविद्यालय में आधुनिक पुस्तकालय की व्यवस्था.
• छात्रावास का निर्माण.
• सहायक प्राध्यापक बहाली में यूजीसी के अनुरूप अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करना.
• पीएचडी और अन्य पाठ्यक्रमों में बढ़ाई गई फीस वापस लेना.
राज्यपाल के काफिले को दिखाए काले झंडे
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब राज्यपाल पटना के लिए रवाना हो रहे थे, उसी दौरान विश्वविद्यालय के बाहर मौजूद छात्र संगठनों ने उन्हें काले झंडे दिखाए.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ देर के लिए सुरक्षा कर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी. हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के बीच राज्यपाल का काफिला वहां से निकल गया.

राज्यपाल के जाने के बाद भड़का आक्रोश
राज्यपाल के प्रस्थान के कुछ देर बाद प्रदर्शन और उग्र हो गया. आक्रोशित छात्र प्रशासनिक भवन पहुंचे, मुख्य गेट तोड़कर अंदर प्रवेश किया और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान परिसर में तोड़फोड़ भी हुई. प्रदर्शनकारी कुलपति कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए और काफी देर तक नारे लगाते रहे. छात्र संगठनों का आरोप था कि यदि “शिक्षा संवाद” में ही छात्रों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलेगा, तो ऐसे कार्यक्रम का कोई औचित्य नहीं रह जाता.




उग्रता देखकर अधिकारी चले गए
प्रदर्शनकारी छात्रों का दावा है कि हंगामा बढ़ता देख कुलपति सहित विश्वविद्यालय के कई अधिकारी मौके से चले गए. हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा.



हालांकि विश्वविद्यालय परिसर में काफी संख्या मे सुरक्षा बल पहले से ही तैनात दिखे जिससे यह प्रतीत हुआ कि विवि प्रशासन से हँगामें की उन्हे पहले से ही आशंका थी.
एक ही दिन की दो तस्वीरें
शुक्रवार का घटनाक्रम VKSU में उच्च शिक्षा व्यवस्था की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने लेकर आया. एक ओर राज्यपाल छात्रों, शिक्षकों और शोधार्थियों से संवाद कर शिक्षा व्यवस्था में सुधार का भरोसा दे रहे थे। शोधार्थियों का प्रतिनिधिमंडल अपनी बात सीधे राज्यपाल तक पहुंचाने में सफल रहा. दूसरी ओर कई छात्र संगठन स्वयं को संवाद प्रक्रिया से बाहर रखा गया महसूस कर रहे थे और इसी असंतोष ने विरोध प्रदर्शन का रूप ले लिया. हालांकि तोड़फोड़ के बाद AISA के प्रदेश प्रतिनिधि रोशन कुशवाहा ने पटना नाऊ से बातचीत में बताया कि VC के चैम्बर में छात्र – छात्राओं के कब्जे के बाद VC ने छात्रों से बात की और उनकी मांगो को लेकर राज्यपाल से मिलाने का आश्वासन अगले पांच दिन के भीतर दिया.



संवाद और विरोध, दोनों एक ही परिसर में, एक ही दिन दिखाई दिए. अब नजर इस बात पर रहेगी कि छात्र संगठनों की मांगों और शोधार्थियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन पर विश्वविद्यालय प्रशासन तथा राजभवन स्तर पर आगे क्या कार्रवाई होती है.
