भोजपुरी को उच्च शिक्षा में सम्मान कब? छात्रों ने मंत्री और राज्यपाल के दरवाजे पर दी दस्तक

34 साल से नहीं हुई बहाली, कॉलेजों में भोजपुरी पढ़ाई शुरू करने की उठी मांग

पटना/आरा, 25 जून। भोजपुरी भाषा को उच्च शिक्षा में उचित स्थान दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के भोजपुरी छात्र संघ ने बुधवार को बिहार के उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर से मुलाकात कर भोजपुरी विषय के विस्तार, शिक्षकों की बहाली और नए बहाली परिनियम में संशोधन की मांग को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।



छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग में वर्ष 1992 के बाद से शिक्षकों और कर्मचारियों के नए पदों का सृजन एवं बहाली नहीं हुई है। वहीं विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेजों और नवस्थापित प्रखंड डिग्री कॉलेजों में भी भोजपुरी विषय के अध्ययन की कोई व्यवस्था नहीं है।

“भोजपुरी भाषी क्षेत्रों के छात्रों के साथ हो रहा अन्याय”
छात्र प्रतिनिधियों ने मांग की कि जिस प्रकार उर्दू और मैथिली के अध्ययन की व्यवस्था विभिन्न कॉलेजों में उपलब्ध है, उसी प्रकार भोजपुरी भाषी जिलों के कॉलेजों में भी स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर भोजपुरी विषय की पढ़ाई शुरू की जाए।






इसके साथ ही बिहार में प्रस्तावित असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली परिनियम-2026 में यूजीसी मानकों के अनुरूप संशोधन की मांग भी उठाई गई। छात्रों ने अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करने तथा लिखित परीक्षा एवं अकादमिक स्कोर से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की अपील की।

मंत्री ने दिया सकारात्मक संकेत
उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर ने छात्र प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुना और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। उनके निर्देश पर उच्च शिक्षा निदेशक ने भी छात्रों से चर्चा कर शीघ्र पहल का आश्वासन दिया।



मंत्री ने कहा कि भोजपुरी भाषा के उच्च अध्ययन को मजबूत बनाने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास करेगी और विभागीय विस्तार में संसाधनों की कमी नहीं आने दी जाएगी।

राज्यपाल को भी सौंपा गया ज्ञापन
मंत्री से मुलाकात के बाद भोजपुरी छात्र संघ का प्रतिनिधिमंडल लोकभवन पहुंचा और राज्यपाल सह कुलाधिपति ले. ज. सैयद अता हसनैन के सचिवालय में भी अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल में संजय कुमार, यशवंत कुमार सिंह, राजेश कुमार और रवि प्रकाश सूरज शामिल रहे।



बड़ा सवाल
भोजपुरी दुनिया की प्रमुख भाषाओं में गिनी जाती है और करोड़ों लोग इसे बोलते हैं। इसके बावजूद बिहार के अधिकांश कॉलेजों में उच्च शिक्षा स्तर पर भोजपुरी विषय की समुचित व्यवस्था नहीं होना भाषा प्रेमियों और छात्रों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। बता दें कि भोजपुरी की पढ़ाई बंद हुई तो भोजपुर जिला ने सरकार की चूल हिला दी थी। भोजपुरी के सम्मान में भोजपुरी भाषी देश के कई प्रांतों से चलकर आरा मुख्यालय आये थे और अंततः सरकार ने भोजपुरी भाषा की पढ़ाई को फिर से चालू किया। हर बार भोजपुरी को हाशिए पर रखने वाली सरकार अगर सजग नहीं होती है तो कभी भी बड़ा आंदोलन हो सकता है क्योंकि यह भोजपुरी के सम्मान की लड़ाई है।

PNCB

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