विस्थापितों की धरती अब कहलाएगी “शहीद भरत नगर जवइनियां”
आरा,24 जून। न्याय की लड़ाई में अपनी जान गंवाने वाले भरत तिवारी की स्मृति को चिरस्थायी बनाने की दिशा में युवा परिवर्तन फाउंडेशन, शाहपुर ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। जिस जवइनियां के विस्थापितों के हक और सम्मान की लड़ाई के लिए भरत तिवारी ने संघर्ष किया और जहां उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उस स्थल का नामकरण अब “शहीद भरत नगर जवइनियां” कर दिया गया है। इस अवसर पर वहां एक स्मृति बोर्ड भी स्थापित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भरत तिवारी का बलिदान केवल एक परिवार या गांव की पीड़ा नहीं, बल्कि न्याय, अधिकार और जनसंघर्ष की एक ऐसी कहानी है जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के लिए अपने संघर्षशील नायकों को याद रखना और उनके सपनों को आगे बढ़ाना सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होती है।

इस अवसर पर समाजसेवी सरोज त्रिपाठी, सामाजिक कार्यकर्ता रमेश कुमार सुदामा, युवा नेता सौरभ पाण्डेय, पंकज तिवारी, मुन्ना तिवारी, अभिषेक ओझा सहित युवा परिवर्तन फाउंडेशन के सदस्य मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि भरत तिवारी के सपनों और मांगों को पूरा कराने तक यह संघर्ष जारी रहेगा। वक्ताओं का कहना था कि जनता की एकजुटता ही संघर्ष को सफलता तक पहुंचाने की सबसे बड़ी ताकत है। कार्यक्रम का समापन भरत तिवारी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए हुआ। उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा और न्याय की आवाज को लगातार बुलंद किया जाएगा।
वक्ताओं ने क्षेत्रवासियों से आह्वान किया कि न्याय की इस लड़ाई को मजबूत बनाने के लिए आयोजित होने वाली महापंचायत में बड़ी संख्या में भाग लें। 24 जून को होने वाले महापंचायत में न सिर्फ राज्य बल्कि देश के कोने कोने से लोगों का जुटान होने वाला है। दिलचस्प बात यह है कि महापंचायत में जुटने वाले लोग ही तय करेंगे भारत तिवारी के न्याय की रणनीति। सामाजिक कार्यकर्ता भरत तिवारी के फर्जी एनकाउंटर में हत्या के बाद देश लोकतंत्र के हत्यारों को कठोर सजा दिलाने के लिए उबल रहा है।
आरा से ओ पी पाण्डेय की रिपोर्ट
