मानवाधिकार आयोग ने DGP, मुख्य सचिव और SP को भेजा नोटिस
पटना/आरा,23 जून: भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में अब बड़ा मोड़ आ गया है। बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग (BHRC) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है और बिहार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) तथा भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

क्या आत्मसमर्पण के बाद मारी गई गोली?
मानवाधिकार आयोग में दाखिल शिकायत में पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी 32 वर्षीय भरत भूषण तिवारी ने कथित मुठभेड़ से पहले पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उन पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौत हो गई।
यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह केवल एक कथित फर्जी एनकाउंटर नहीं, बल्कि कानून और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला बन सकता है।जिसके बाद एकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस और उससे संबंधित कठिन सजा हो सकती है। यही नहीं जांच में यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि किसके कहने पर यह एनकाउंटर किया गया।
रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच किसी अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की है। साथ ही कथित एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने, कानूनी कार्रवाई करने, पीड़ित परिवार को मुआवजा देने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई है।
मानवाधिकार आयोग का सख्त रुख
आयोग ने स्पष्ट कहा है कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया संज्ञान लेने योग्य हैं। आयोग यह जानना चाहता है कि कथित मुठभेड़ के दौरान निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
आयोग के इस कदम के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस मामले की दिशा तय कर सकती है। बताते चलें कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को परिवार की ओर से भारत भूषण तिवारी के फर्जी एनकाउंटर की जांच और दोषियों को कठोरतम सजा के लिए आवेदन भेजा गया था।
13 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
मानवाधिकार आयोग ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की है। आयोग के समक्ष आने वाली जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह वास्तविक मुठभेड़ थी या आत्मसमर्पण के बाद हुई एक कथित गैरकानूनी कार्रवाई? वैसे सोशल मीडिया पर वायरल विडियो से यह तो स्पष्ट दिख रहा है कि किस तरह से भरत तिवारी ने आत्म समर्पण किया और उसके बाद पुलिस ने उसे गोली मार कर हत्या कर दी। अब देखना यह होगा कि आने वाली जांच रिपोर्ट के बाद क्या सच को न्याय मिल पाता है या नहीं।
