ट्रकों के अतिक्रमण को हटाने में पुलिस विफल,

हादसों का केंद्र बनता जा रहा है कोईलवर




कोईलवर,28 जून. बिहार का अभिशाप बन चुके सोन,बालू और उसकी ढुलाई के लिये सडकों पर अतिक्रमण कर के अवैध रूप से खडे भारी-भारी ट्रक और अन्य वाहन अब आम जनता के लिये अभिशाप बन चुके हैं. प्रदेश की सरकार और स्थानीय प्रशासन के लिये मानव जीवन का मूल्य समाप्त हो चुका है , इसकी जगह बालू की कमाई ले चुकि है और यही कारण है कि दुर्घटना दर दुर्घटना और मासूम जनता की मौत दर मौत से बिना विचलित हुये बालू की ओवर लोडिंग और सडकों का अवैध अतिक्रमण जारी है. बुधवार को इस अभिशाप ने हंसते खेलते परिवार को निगल लिया जब भोजपुर जिले के कोईलवर थाना क्षेत्र अंतर्गत आरा-पटना नेशनल हाईवे पर कोईलवर थाना मोड़ के पास एक कार सडक किनारे अतिक्रमण कर खडे ट्रकों की अराजकता के कारण अनियंत्रित हो कर सड़क किनारे खड़े ट्रक में घुस गई. हादसे में एक एनडीआरएफ जवान की मौत हो गई, जबकि पत्नी, पुत्र और पुत्री घायल हो गए.

हादसे का कारण अनियंत्रित परिचालन बताया जा रहा है जो शायद आड़े-तिरछे खड़े वाहनो और ओवरलोड ट्रकों से गिरे बालू के कारण हुआ हो. हादसा इतना भीषण था कि इसमें कार के अगले भाग के परखच्चे उड़ गए. ट्रक के नीचे फंसी कार को बाद में जेसीबी की मदद से निकाला गया. इस दौरान हाईवे पर भीड़ लगी रही.

मृतक 38 वर्षीय नंदन सिंह मूल रूप से आरा मुफस्सिल थाना क्षेत्र के घोड़ादेई गांव निवासी रिटायर्ड दारोगा शंकर सिंह के पुत्र थे. वे एनडीआरएफ में कॉन्‍स्‍टेबल के पद पर कार्यरत थे. वर्तमान में पटना के बिहटा में पदस्थापित थे, जिनका परिवार आरा टाउन थाना के शिवगंगा नगर, मझौवा बांध के पास रहता है. खबर लिखे जाने तक मृत जवान की 15 वर्षीय पुत्री श्रींजल सिंह की स्थिति चिंताजनक बनी हुई थी.

छुट्टी लेकर परिवार संग आ रहा था आरा एनडीआरएफ जवान

मृतक NDRF का जवान नन्दन सिंह (फ़ाइल फोटो)

एनडीआरएफ जवान परिवार के साथ छुट्टी लेकर पटना के दानापुर आवास से आरा अपने घर आ रहे थे कि आरा-पटना हाईवे पर कोईलवर थाना मोड़ के समीप कार संतुलन बिगड़ने से सड़क किनारे खड़े ट्रक में पीछे से घुस गई, जिसमें कार चला रहे एनडीपीएस जवान नंदन सिंह की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि पत्नी महिमा सिंह, पुत्र नमन सिंह और पुत्री श्रींजल सिंह घायल हो गई.

हादसे में घायल जवान की पुत्री श्रींजल सिंह (फ़ाइल फ़ोटो)

जनता में इस हादसे को लेकर आक्रोश भी दिखाई दिया जो यह पूछ रहे थे कि इतनी मौतों के बाद भी प्रशासन इन वाहनों को सडक पर सभी लेन घेर कर खडा करवाता है जिससे इन सड़को का जनता के लिए कोई औचित्य ही नही रह गया है. प्रशासन अपने वसूली में लगा हुआ है वर्ना ट्रकों की क्या मजाल जो सार्वजनिक रास्ते के एक हिस्से को पूरी तरह से अवरोध कर रखे.

कोईलवर से अमोद कुमार की रिपोर्ट

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