भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा फैसला, परिवार के एक सदस्य को मिलेगी सरकारी नौकरी

पटना,13 अगस्त। बिहार में कई केसों में CBI जांच के बाद भी न्याय नहीं मिलने से जनता में भरत तिवारी एनकाउंटर केस में भी न्याय की उम्मीद न के बराबर ही थी। जिस तरह से घटना चक्र बदला और समर्थकों के बीच ही विवाद बढ़ गया तो एक बार फिर जनता के बीच चर्चा यह थी कि सब राजनीतिक खिलाड़ियों ने ऐसी परिस्थितियां पैदा कर मामले को रफा दफा कर देंगे लेकिन इस बीच न्यायिक बेंच ने सभी बिंदुओं पर अपनी पकड़ मजबूत बनाई और सभी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए अपनी रिपोर्ट को सरकार तक भेजा और जांच के जिस तरह सभी नाम सामने आए न्याय की उम्मीद बिहार की जनता में एक बार फिर से जग गई है और इस जांच रिपोर्ट के आधार पर अब बिहार सरकार ने भी भरत तिवारी के परिवार के लिए फैसला लिया है।




भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और परिजनों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया X और फेसबुक पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया गया है।

गौरतलब है कि 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस ने आत्मसमर्पण के बाद भरत तिवारी की गोली मार दी थी जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी। परिजनों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए आरोप लगाया था कि सरेंडर करने के बावजूद भरत तिवारी को गोली मारी गई।

मामले में तत्कालीन एसडीपीओ, थानेदार समेत कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले की जांच के लिए पटना हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित किया गया था।

आयोग ने भरत तिवारी के परिजनों, प्रत्यक्षदर्शियों, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से पूछताछ के साथ घटना से जुड़े साक्ष्यों की जांच की है। आयोग ने अब अपनी अंतरिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है, जिसके आधार पर सरकार ने परिवार को नौकरी और आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

बता दें कि भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा सिविल कोर्ट ने मामले में नामजद 11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर 12 अगस्त को हाजिर होने का निर्देश दिया था, जिसमें तत्कालीन SDM, SDPO, SHO समेत पुलिस और STF के अधिकारी-कर्मी शामिल हैं। कोर्ट ने सभी आरोपियों को अब 24 अगस्त 2026 तक न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही भोजपुर एसपी को भी निर्धारित तिथि पर कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले तिथि को सभी आरोपियों की पेशी होती है कि नहीं और कोर्ट का अंतिम फैसला क्या होता है।

PNCB

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