आमरण अनशन पर डटे सहायक प्राध्यापक अभ्यर्थी: बिगड़ सकती है स्थिति!

तीसरे दिन भी नहीं झुकी सरकार….

UGC नियम लागू करने, 55 वर्ष आयु सीमा और पीएचडी अनिवार्यता समेत कई मांगों को लेकर जारी है आंदोलन, सरकार से तत्काल वार्ता की मांग।

पटना,6 अगस्त. बिहार में सहायक प्राध्यापक बहाली की नई नियमावली के विरोध में अभ्यर्थियों का आमरण अनशन गुरुवार को तीसरे दिन भी जारी रहा. राजधानी पटना में चल रहे इस आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी न्यायोचित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक अनशन समाप्त नहीं होगा.




आंदोलन के संयोजक कुमुद पटेल के साथ अनशन पर बैठे अभिषेक मेहता और बिक्कु सिंह प्रधान ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नौकरी के लिए नहीं, बल्कि बिहार के हजारों शोधार्थियों, पीएचडी धारकों और उच्च शिक्षा के भविष्य को बचाने के लिए लड़ी जा रही है. उनका आरोप है कि नई बहाली नियमावली से योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हो रहा है.

अनशनकारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष ज्ञापन सौंपे,धरना-प्रदर्शन किए और शांतिपूर्ण वार्ता का भी प्रयास किया, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई. इसी वजह से उन्हें आमरण अनशन का रास्ता अपनाना पड़ा.

आंदोलन का समर्थन कर रहे राजा पासवान ने कहा कि अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में सहायक प्राध्यापक बहाली में UGC Regulations को लागू करना, अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करना, पीएचडी को अनिवार्य योग्यता बनाना, सभी विषयों में नियमित बहाली, डोमिसाइल नीति लागू करना तथा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता सुनिश्चित करना शामिल है.

तीसरे दिन भी अनशन जारी रहने के बीच आंदोलनकारियों ने सरकार से तत्काल वार्ता कर समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को पूरे बिहार में और व्यापक बनाया जाएगा.

इस दौरान राधेश्याम, राजा पासवान, चंदन तिवारी, माधवी, डॉ. रितु, देव आर्या, रत्नेश कुमार, विकास कुमार, आकाश कुमार, चंदन सिंह, राहुल कुमार झा, देवेंद्र यादव, नितेश पटेल, रवि प्रकाश सूरज समेत बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आंदोलन स्थल पर मौजूद रहे.

PNCB

Related Post