अब गांवों में भी गूंजेगा रामलीला का मंचन, नगर रामलीला समिति ट्रस्ट की पहल


राम के चरित्र से प्रगाढ़ होते हैं पिता-पुत्र, पति-पत्नी और भाई-भाई के रिश्ते : डॉ. अर्चना सिंह

कारीसाथ में रामलीला के चौथे दिन परशुराम-लक्ष्मण संवाद और श्रीराम-सीता विवाह का हुआ मंचन, रामभक्ति में डूबे दर्शक

आरा/उदवंतनगर। उदवंतनगर प्रखंड के कारीसाथ गांव स्थित शिव देवी हनुमत धाम में आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव के चौथे दिन मंगलवार को भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह तथा परशुराम-लक्ष्मण संवाद का भावपूर्ण मंचन किया गया. काशी (बनारस) से आए रामलीला मंडली के कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को भावविभोर कर दिया. इस दौरान कारीसाथ और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलीला देखने पहुंचे.

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभु श्रीराम की आरती के साथ हुआ. नगर रामलीला समिति ट्रस्ट, आरा की अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह, कोषाध्यक्ष कर्नल राणा प्रताप सिंह, उपाध्यक्ष सह श्रीरामनवमी शोभायात्रा महोत्सव के संयोजक शंभू प्रसाद चौरसिया, समाजसेवी सूरजभान सिंह, अवधेश कुमार पांडेय, डॉ. कृष्ण कुमार, सनातनी गंगा फाउंडेशन के कार्यकारिणी सदस्य राम अनुज सिंह और त्रेता सवालिया सिंह सहित अन्य अतिथियों ने आरती की.

राम के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने की जरूरत : डॉ. अर्चना सिंह
इस अवसर पर नगर रामलीला समिति ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चरित्र और आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता है. भगवान राम का जीवन पिता-पुत्र, पति-पत्नी और भाई-भाई के रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की प्रेरणा देता है. जन्म से लेकर जीवन के अंतिम पड़ाव तक भारतीय संस्कृति में राम नाम का विशेष महत्व है. राम का चरित्र हमें मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और पारिवारिक मूल्यों का संदेश देता है.

प्रभु श्रीराम के नाम मात्र से संभव है कल्याण : सूरजभान सिंह
समाजसेवी सूरजभान सिंह ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का नाम कभी भी लिया जा सकता है. राम नाम के स्मरण मात्र से व्यक्ति का कल्याण संभव है. उन्होंने उपस्थित दर्शकों से सीधा संवाद करते हुए उन्हें प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी.

नगर रामलीला समिति ट्रस्ट के उपाध्यक्ष सह श्रीरामनवमी शोभायात्रा महोत्सव के संयोजक शंभू प्रसाद चौरसिया ने कहा कि आज के दौर में लोग पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं. ऐसे समय में काशी से आई रामलीला मंडली अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों को सनातन संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है. युवाओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों का अनुसरण करते हुए अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए.

गांवों तक रामलीला पहुंचाएगा नगर रामलीला समिति ट्रस्ट : कर्नल राणा प्रताप सिंह
नगर रामलीला समिति ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष कर्नल राणा प्रताप सिंह ने कहा कि ट्रस्ट आने वाले समय में आरा शहर के आसपास के गांवों में भी रामलीला का मंचन कराएगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भगवान श्रीराम के चरित्र से प्रेरणा ले सकें और अपनी सनातन संस्कृति के प्रति समर्पित रहें.

ट्रस्ट के सदस्य अवधेश कुमार पांडेय ने कहा कि भगवान श्रीराम के प्रति लोगों की गहरी आस्था और श्रद्धा भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है. रामलीला में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आज भी लोगों के हृदय में प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा है.

रामलीला मंचन से पूर्व नगर रामलीला समिति ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह, समाजसेवी सूरजभान सिंह सहित अन्य अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया. इसके बाद कलाकारों ने परशुराम-लक्ष्मण संवाद और श्रीराम-सीता विवाह का मंचन किया. कार्यक्रम में कारीसाथ सहित आसपास के गांवों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.




आरा से ओ पी पाण्डेय की रिपोर्ट

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