EXCLUSIVE GROUND REPORT
ग्राउंड से लेकर NHAI तक की पड़ताल, प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताए तकनीकी कारण
आरा,2 जुलाई. कोईलवर से बक्सर तक करीब 92 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग-922 (एनएच-922) को बिहार के महत्वपूर्ण फोरलेन मार्गों में गिना जाता है. हर दिन हजारों छोटे-बड़े वाहन और भारी ट्रक इस सड़क से गुजरते हैं. लेकिन पिछले कुछ समय से इस फोरलेन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं. सड़क पर जगह-जगह दिखाई दे रहे क्रैक (दरार), पैचवर्क और कुछ स्थानों पर उखड़ती सतह के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. इन वीडियो के बाद यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

पटना नाउ ने इस पूरे मामले की पड़ताल के लिए सड़क का जायजा लिया और इसके बाद NHAI के रोड बनाने वाली कंपनी PNC के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार सिंह से विशेष बातचीत कर हर सवाल का जवाब जानने की कोशिश की हमारे सीनियर कंटेंट एडिटर ओ.पी.पाण्डेय ने, पेश है रिपोर्ट –
ग्राउंड पर क्या दिखा?
आरा से बक्सर के बीच कई स्थानों पर सड़क की सतह पर क्रैक और मरम्मत किए गए हिस्से दिखाई दिए। कई जगह पैचवर्क भी नजर आया। वाहन चालकों का कहना है कि कुछ हिस्सों से गुजरते समय झटके महसूस होते हैं, जिससे सफर पहले जैसी सहज नहीं रह गया है।

सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि डिवाइडर और सड़क किनारे किए गए पौधारोपण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई स्थानों पर हरियाली दिखाई देती है, जबकि कई जगह पौधे नहीं होने से डिवाइडर खाली नजर आते हैं।
NHAI ने क्या कहा?
NHAI के रोड बनाने वाली कंपनी PNC के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार सिंह ने पटना नाउ से बातचीत में कहा कि सड़क पर हो रही मरम्मत भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के तय मानकों के अनुसार की जा रही है. उनके मुताबिक कंक्रीट सड़क में इस प्रकार के क्रैक आना एक सामान्य तकनीकी प्रक्रिया है.

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे किसी मकान की छत की ढलाई के बाद समय के साथ बारीक दरारें दिखाई दे सकती हैं, उसी प्रकार कंक्रीट सड़क में भी कुछ स्थानों पर क्रैक विकसित हो सकते हैं. इसका मतलब यह नहीं कि पूरी सड़क खराब हो गई है.
92 किलोमीटर में केवल 7 किलोमीटर हिस्से में क्रैक
प्रोजेक्ट मैनेजर के अनुसार करीब 92 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन में लगभग 7 किलोमीटर हिस्से में ही क्रैक हैं। इन स्थानों की लगातार निगरानी की जा रही है और आवश्यकता के अनुसार मरम्मत कराई जा रही है।
कैसे होती है मरम्मत?
विवेक कुमार सिंह ने बताया कि सभी दरारों का इलाज एक जैसा नहीं होता। क्रैक की गहराई और चौड़ाई के आधार पर मरम्मत की जाती है.
- छोटे क्रैक की सीलिंग की जाती है.
- जहां जरूरत होती है, वहां स्टेपलिंग कर सरिया डालकर सड़क को मजबूत किया जाता है.
- अधिक क्षतिग्रस्त हिस्सों में पूरा कंक्रीट पैनल बदला जाता है.

उन्होंने कहा कि स्टेपलिंग स्थायी समाधान माना जाता है और NHAI इसी मानक के अनुरूप काम कर रहा है.
आखिर क्यों पड़ रहे हैं क्रैक?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है. इस पर प्रोजेक्ट मैनेजर ने कहा कि अधिकांश क्रैक उन स्थानों पर विकसित हुए हैं, जहां भारी वाहनों का दबाव लगातार बना रहता है.

उनके अनुसार कोईलवर से बक्सर तक बालू लदे ट्रकों का आवागमन काफी अधिक है. नो-एंट्री व्यवस्था के कारण कई बार भारी वाहन घंटों सड़क और पुल पर खड़े रहते हैं. ट्रकों से लगातार गिरने वाला पानी और लंबे समय तक एक ही स्थान पर पड़ने वाला भारी दबाव भी कंक्रीट सड़क को प्रभावित करता है. इसी वजह से कुछ स्थानों पर दरारें विकसित होती हैं.
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर भी दिया जवाब
वायरल वीडियो को लेकर उन्होंने कहा कि कई वीडियो ऐसे समय के हैं, जब सड़क पर मरम्मत का कार्य चल रहा था. कुछ लोगों ने केवल उन्हीं हिस्सों को ज़ूम करके सोशल मीडिया पर साझा किया. उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो देखने के बाद संबंधित लोगों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी ने सीधे एनएचएआई से संपर्क नहीं किया.
85 हजार पौधे लगाने का दावा
वृक्षारोपण को लेकर उठ रहे सवालों पर विवेक कुमार सिंह ने बताया कि आरा-बक्सर फोरलेन के एवेन्यू प्लांटेशन में करीब 25 हजार पेड़ लगाए गए हैं, जबकि सड़क के बीच बने मीडियन (डिवाइडर) में लगभग 60 हजार पौधे लगाए गए हैं.


उन्होंने स्वीकार किया कि भीषण गर्मी के कारण कुछ पौधे सूख गए हैं. वहीं कई स्थानों पर फलदार पौधों को ग्रामीण उखाड़ ले जाते हैं. इसके बावजूद लगातार नए पौधे लगाए जा रहे हैं और उनकी देखभाल की जा रही है.
दो महीने का दावा, अब निगाहें नतीजों पर
NHAI का कहना है कि सड़क पर जहां-जहां आवश्यकता है, वहां मरम्मत तेजी से चल रही है. प्रोजेक्ट मैनेजर ने कहा कि सड़क को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाए रखने के लिए नियमित रूप से क्रैक की मरम्मत, पैचवर्क, घास की कटाई, वृक्षों का रखरखाव और एंबुलेंस जैसी सेवाएं लगातार संचालित की जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि अगले दो महीनों के भीतर सभी जरूरी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे.



हालांकि, ग्राउंड पर सड़क के कई हिस्सों में अब भी दरारें और पैचवर्क दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि NHAI का दावा तय समय सीमा में कितना धरातल पर उतरता है. क्योंकि इस मार्ग से हर दिन हजारों लोग सफर करते हैं और उनके लिए सड़क की गुणवत्ता केवल तकनीकी बहस नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सुरक्षा और सुविधा का सवाल है.
