हाईकोर्ट से तेजस्वी को मिला स्टे

बिहार में बंगले को लेकर कई महीनों से चल रहा विवाद थमता नहीं दिख रहा है. एक ओर बिहार सरकार पूर्व मंत्रियों को बंगला खाली करने का दबाव बना रही है वहीं बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम इस मामले में हाईकोर्ट पहुंच गए हैं. और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी को वहां से राहत भी मिल गई है. पटना हाईकोर्ट ने बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को बड़ी राहत दी है. पटना हाईकोर्ट ने सरकार के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है जिसमें तेजस्वी यादव को 5, देशरत्न मार्ग का बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया गया था. दरअसल जुलाई 2017 में बिहार में सत्ता परिवर्तन के साथ ही सरकार ने पूर्व मंत्रियों को बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया था. इनमें से कई ने बंगला खाली कर दिया लेकिन अब भी तेजस्वी यादव अपने बंगले में टिके हैं. सरकार ने तेजस्वी यादव को नेता प्रतिपक्ष के नाते दूसरा बंगला आवंटित किया है लेकिन वे पहले की तरह डिप्टी सीएम के लिए आवंटित बंगले में ही रह रहे हैं.  जब लगातार नोटिस देने के बाद भी तेजस्‍वी यादव ने बंगला खाली नहीं किया तो पिछले महीने भवन निर्माण विभाग ने पटना जिला प्रशासन को पत्र लिखकर उनका बंगला बलपूर्वक खाली कराने का पत्र जारी किया.  शुक्रवार को जस्टिस डी के सिंह की एकल बेंच ने पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये अंतरिम आदेश जारी किया. साथ ही इस मामले को किसी अन्य जस्टिस की एकल बेंच में सुनवाई के लिए ट्रांसफर कर

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हाईकोर्ट ने 2 सप्ताह में मांगा जवाब

शौचालय घोटाले पर सोमवार को पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार और पटना नगर निगम को नोटिस जारी किया है. चीफ जस्टिस राजेन्द्र मेनन की पीठ ने वकील मणिभूषण सेंगर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने सरकार के साथ-साथ पटना नगर निगम को 2 सप्ताह के भीतर पूरक एफिडेविट के साथ शौचालय निर्माण की स्टेटस रिपोर्ट भी जमा करने को कहा है. याचिकाकर्ता मणिभूषण सेंगर ने याचिका दायर की थी कि राज्यभर में शौचालय निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए लेकिन असल में शौचालय कहीं बना ही नही. सरकार इस बारे में 4 बार कोर्ट को जवाब दे चुकी है. लेकिन कोर्ट सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं है.

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