क्या बिहार पुलिस कोर्ट से भी ऊपर है : हाईकोर्ट

बिहार पुलिस का कारनामा, परिणाम भुगत रहे डीजीपी

हाई कोर्ट ने आज कोर्ट में पेश होने को कहा




जज के चैम्बर में तान दिया था पिस्तौल

जज के साथ मारपीट का आरोप और कर दिया उन्ही पर एफआईआर

बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट औऱ हाईकोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ा रखी है. एक मामले की सुनवाई के दौरान बेलगाम पुलिस की कार्रवाई पर हाईकोर्ट की बेंच भी हैरान रह गयी. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बिहार पुलिस के खिलाफ बेहद सख्त टिप्पणियां करते हुए कहा कि बिहार के डीजीपी के साथ साथ संबंधित एसपी और आईओ को गुरूवार को कोर्ट में पेश किया जाये. नाराज कोर्ट ने कहा कि हम कल ही फैसला करेंगे कि उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाये या नहीं. आज ढ़ाई बजे कोर्ट ने डीजीपी के साथ साथ संबंधित एसपी और आईओ को भी पेश करें. आज उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.

एडीजे प्रथम अविनाश कुमार

झंझारपुर कोर्ट में जज के चेंबर में घुसकर पुलिस थानेदार औऱ एक और दरोगा ने एडीजे प्रथम अविनाश कुमार की पिटाई कर दी थी. मधुबनी जिले के झंझारपुर सिविल कोर्ट में घोघरडीहा थाने के थानेदार गोपाल कृष्ण और दरोगा अभिमन्यू कुमार शर्मा ने चेंबर में घुसकर जज के साथ मारपीट की थी. थानेदार ने जज पर पिस्तौल तान दिया था. कोर्ट परिसर में मौजूद वकीलों ने जज को किसी तरह बचाया था. इस वाकये के बाद बिहार पुलिस ने जो किया उस पर पटना हाईकोर्ट बुरी तरह नाराज है.

कोर्ट में जज और मारपीट करने वाले पुलिसकर्मी

कोर्ट को बताया गया कि बिहार पुलिस ने झंझारपुर के एडीजे अविनाश कुमार पर ही एफआईआर कर दिया है. जिन पुलिसकर्मियों पर जज की पिटाई का आरोप लगा था उनके बयान पर जज के खिलाफ ही एफआईआर कर दिया गया. पटना हाईकोर्ट इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहा है. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की बेंच में इस मामले की सुनवाई हो रही थी. कोर्ट ने सरकार के वकील से पूछा कि किस कानून के तहत जज के खिलाफ एफआईआर किया गया है. सरकारी वकील इस सवाल का जवाब नहीं दे पाये.

वकील मृगांक मौली ने बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट समेत देश के कई हाईकोर्ट स्पष्ट तौर पर ये आदेश दे चुके हैं कि किसी न्यायिक पदाधिकारी के खिलाफ तभी कोई एफआईआर दर्ज किया जा सकता है जब उसकी मंजूरी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दें. झंझारपुर मामले में बिहार सरकार या पुलिस ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कोई मंजूरी नहीं ली. बिहार पुलिस का पक्ष रख रहे वकील ने कहा कि एफआईआर करने के लिए चीफ जस्टिस को पत्र लिखा गया था. चीफ जस्टिस संजय करोल सरकारी वकील का जवाब सुनकर हैरान रह गये. उन्होंने कहा-मैंने कोई मंजूरी नहीं दी फिर केस कैसे दर्ज हो गया.

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