राइडिंग फॉर पोएट्री अभियान में साइकिल से जाएंगे संजय शेफर्ड 

एक माह का होगा राइडिंग फॉर पोएट्री अभियान

ट्रेडिशनल मेडिसिन, डार्क टूरिज्म, ब्लैक टूरिज्म, ग्रेव टूरिज्म और सेक्स टूरिज्म जैसी अकल्पनीय चीजों की करूंगा खोज 




13 नवोदय विद्यालयों में जाकर बच्चों से भी मिलेंगे 

मेरे एटीएम, डेविट कार्ड, क्रेडिट कार्ड सब छीन लिए जायेंगे

जेएनवी के 6 लाख स्टूडेंट सुपोर्ट करेंगे

अधिकारी भी नहीं कर सकते हैं मदद 

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साहित्यकर्मी जब किसी सृजन की तलाश में निकलते हैं तो उनके साथ कई काम भी होते है. मसलन समाज में हो रही गतिविधियों को देखना समझना और ख़ास कर जब पहाड़ी वादियों में  हो तो सफ़र और रोमांचक हो जाता है. अपनी कविता और साहित्य प्रेम से लोगों के दिलों में एक ख़ास जगह बना चुके संजय शेफर्ड कई कामों को साथ लेकर अपने जीवन के यादगार सफ़र पर निकल रहे हैं. उत्तराखंड के कई जिलों में कई पड़ताल भी वे करना चाहते हैं. उनके सफ़र को लेकर सभी उत्साहित है.किताबनामा और हिंदी स्टूडियो के संस्थापक संजय शेफर्ड से ही जानते हैं उनकी यात्रा और तैयारी के बारे में.

कब से शुरू हो रही है आपकी यात्रा और क्यों ख़ास होगी यह यात्रा?

नवम्बर महीने से एक माह की यह यात्रा शुरू होगी.साइकिल से इस साहित्य यात्रा पर निकल रहा हूं. इस दौरान उत्तराखण्ड के सभी 13 जिलों में साहित्य, संस्कृति और समाज को जानने- समझने का प्रयास करूंगा. हालांकि उत्तराखंड का मैं 2-3 बार स्टेट- कोऑर्डिनेटर रह चुका हूं, वहां के जन- जीवन और संस्कृति से भलीभांति वाक़िब हूं. बावजूद इसके वहां अभी भी समझने के लिए बहुत कुछ बाकि रह गया था जिसे अब पूरा करने जा रहा हूं. मैं वहां के कला एवं साहित्य जगत से जुड़े लोगों से मिलूंगा, उनके जन्मस्थान पर जाकर कुछ समय व्यतीत करूंगा. ट्रेडिशनल मेडिसिन, डार्क टूरिज्म, ब्लैक टूरिज्म, ग्रेव टूरिज्म और सेक्स टूरिज्म जैसी अकल्पनीय चीजों की खोज करूंगा. विभिन्न (13 ) नवोदय विद्यालयों में जाकर अपने छोटे भाई बहनों से मिलूंगा. उनकी हिन्दी को अपनी नई वाली हिन्दी की मुलाक़ात करवाऊंगा. उन्हें दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे महिला हिंसा, तेजाब हमलों से अवगत कराऊंगा और आलोक भाई, आशीष बाबा, लक्ष्मी के कैम्पेन स्टॉप एसिड अटैक के बारे में बताऊंगा. असीम भाई उस समय यूरोप के किसी देश में होंगे पर बातचीत होती रहेगी.

मेरे पास से इस दौरान मेरे एटीएम, डेविट कार्ड, क्रेडिट कार्ड सब छीन लिए जायेंगे. कुछ कैश होगा जो एक हजार से भी कम होगा. मिलना दुर्लभ होता है पर मैंने वाइल्ड फ्रूट और वेजिटेबल की सारी जानकारी रख ली है. कुछ कांटेक्ट भी निकाल लिए हैं. सारे लोग मेरे संपर्क में सोशल मीडिया पर बने रहेंगे. मुझे दिन में यात्रा करनी होगी. रातें किसी गांव- देहात या घाटी में खुले आसमान के नीचे टेंट में बितानी होगी. बैकअप के लिए प्रदेश के सभी जिला पर्यटन अधिकारी और सरकारी टूरिस्ट सेंटर मेरे सहयोगी होंगे. वह मुझसे मुलाकात के आलावा और कोई मदद नहीं कर सकेंगे. मेरा बैगपैक 12 किलोग्राम का होगा. जिसमें तीन जोड़ी कपडे, एक कैमरा, एक सटेलाइट फोन, एक लैपटॉप, टेंट, स्लीपिंग बैग, टार्च, रस्सी, हुक्कस, पानी की बोतल, कुछ जरुरी मेडिसिनस, हाई- बर्ड की तीन साइकल्स, और ढेर सारी दोस्तों की दुआएं होंगी.

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मेरी इस यात्रा को जेएनवी के 6 लाख स्टूडेंट सुपोर्ट करेंगे. वर्ल्ड की सबसे बड़ी स्टूडेंट एलुमनी All India JNV Alumni Association का सहयोग होगा. महेन्द्र, पुष्पेंद्र और सुरेश राठी जो मेरे बड़े भाई के समान हैं उनका मार्गदर्शन बीच- बीच में मिलता रहेगा. आप लोग भी अपना सहयोग बनाए रखें. खासकर उत्तराखंड के लोग मुझे होस्ट कर सकते हैं. मुझसे मिलकर कविताएं सुन सकते हैं. साहित्यिक चर्चा कर सकते हैं. किसी साहित्कार से मिलने के लिए सजेस्ट कर सकते हैं. इतने सारे काम एक माह में पूरा करना है. कविताएं लिखनी है. कुछ आर्टिकल लिखने हैं और दुनिया के लोगों के साथ अपडेट भी रहना है. तस्वीर,कविता और कहानी के साथ.

रवीन्द्र भारती