नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में अमोल पालेकर का सिनेमा पर बेबाक संवाद
सिनेमा की असली सफलता दर्शकों के दिल में होती है, बॉक्स ऑफिस में नहीं : अमोल पालेकर
नालंदा, 16 मार्च (ओ पी पाण्डेय)। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक विशेष सत्र में हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर केंद्र में रहे। इस अवसर पर उन्होंने सिनेमा, फिल्म आलोचना और अपने रचनात्मक अनुभवों पर खुलकर विचार साझा किए। सत्र में उनकी धर्मपत्नी और लेखिका संध्या गोखले तथा वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज भी उनके साथ संवाद में शामिल रहे।


बातचीत के दौरान अमोल पालेकर ने अपने लंबे फिल्मी अनुभव और अपनी लिखी पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी फिल्म की सफलता या असफलता का आकलन केवल उसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी फिल्म का वास्तविक मूल्य उसके विषय, संवेदनशीलता, सामाजिक प्रभाव और दर्शकों के मन पर पड़ने वाले स्थायी असर से तय होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि एक फिल्म समीक्षक की भूमिका सिर्फ यह बताने तक सीमित नहीं होनी चाहिए कि फिल्म हिट है या फ्लॉप। बल्कि उसका काम यह समझना और समझाना भी है कि कोई फिल्म अपने समय और समाज से किस तरह संवाद स्थापित करती है।
इस दौरान अमोल पालेकर ने अपनी फिल्मों और अभिनय यात्रा से जुड़े कई रोचक अनुभव भी साझा किए। उनकी सहज और आत्मीय बातचीत ने दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा और पूरे माहौल को जीवंत बना दिया।

कार्यक्रम के अंत में पटना कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित लाइव पेंटिंग सत्र में बनाई गई एक विशेष कलाकृति अमोल पालेकर को भेंट की गई। इसके साथ ही उन्हें पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और नालंदा की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती स्थानीय कलाकारों द्वारा मिट्टी से निर्मित एक प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया।
यह सत्र सिनेमा, कला और समाज के गहरे संबंधों को रेखांकित करते हुए नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल को और भी सार्थक बना गया।
