जिस हथियार से हुई थी हत्या, उसी की बरामदगी में पुलिस से भिड़ा शूटर

हथियार बरामद कराने पहुंचा शूटर, पुलिस पर ही चला दी गोली; जवाबी फायरिंग में घायल. रामकुमार सिंह हत्याकांड में नया मोड़. सारंगपुर मोड़ पर पुलिस से भिड़ा पवन यादव.

14 कट्ठा जमीन के विवाद में रची गई थी हत्या की साजिश, फरार शूटरों की तलाश तेज




रामकुमार मर्डर केस में एनकाउंटर, जमीन विवाद की परतें खोल रही पुलिस

आरा, 6 नवंबर. जिस हथियार के सहारे एक शख्स की जिंदगी छीन ली गई थी, उसी हथियार तक पहुंचने की कोशिश में शुक्रवार की सुबह भोजपुर पुलिस का सामना हत्याकांड के एक कथित शूटर से हो गया. पुलिस उसे हथियार बरामद कराने के लिए लेकर निकली थी, लेकिन सारंगपुर मोड़ के पास घटनाक्रम अचानक बदल गया. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने मौका पाकर टीम पर गोली चला दी. जवाब में पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें उसके दाहिने पैर में गोली लगी.

घायल शूटर की पहचान पवन यादव के रूप में हुई है. उसे तत्काल आरा सदर अस्पताल पहुंचाया गया. घटना की सूचना मिलने पर भोजपुर एसपी अवधेश दीक्षित भी मौके पर पहुंचे. इस मुठभेड़ के बाद 15 अक्टूबर को हुए रिटायर्ड असिस्टेंट कस्टम कमिश्नर रामकुमार सिंह हत्याकांड की जांच एक बार फिर चर्चा में आ गई है.

एक गोली पुलिस की गाड़ी पर, दूसरी ने शूटर को किया घायल
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पवन यादव से पूछताछ में हत्या में इस्तेमाल हथियार के ठिकाने की जानकारी मिली थी. इसी सूचना के आधार पर नवादा थाना की टीम उसे लेकर बरामदगी के लिए निकली थी. सारंगपुर मोड़ के पास उसने पुलिस को निशाना बनाकर फायरिंग शुरू कर दी.

एसडीपीओ सदर-1 सुशील कुमार के अनुसार, आरोपी ने भागने की कोशिश भी की. उसकी चलाई एक गोली पुलिस वाहन के बोनट पर लगी. इसके बाद पुलिसकर्मियों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जो पवन के दाहिने पैर में लगी. पुलिस अब बरामदगी वाले स्थान, हथियार और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है.

हत्या के तीन शूटर, दो अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर
इस हत्याकांड की जांच में पुलिस को तीन शूटरों के शामिल होने की जानकारी मिली है. अधिकारियों के मुताबिक, पवन यादव भी इसी टीम का हिस्सा था. पुलिस का कहना है कि वह शुक्रवार को पटना की ओर निकलने की तैयारी में था, लेकिन उससे पहले उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

पवन से पूछताछ के आधार पर पुलिस अब उसके फरार साथियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि उससे मिली जानकारी के जरिए वारदात को अंजाम देने वाले पूरे समूह की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी.

14 कट्ठा जमीन की हिस्सेदारी ने बढ़ाया खूनी विवाद

रामकुमार सिंह की हत्या के पीछे पुलिस को जमीन का विवाद सबसे अहम वजह नजर आ रहा है. मामला सिंगही गांव की करीब 14 कट्ठा जमीन से जुड़ा है. एसपी के अनुसार, इस जमीन का थाना नंबर 245, खेसरा नंबर 69 और खाता नंबर 88 है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2006 में रामकुमार सिंह ने यह जमीन अपने बेटे के नाम पर ली थी. वर्ष 2020 में इसकी घेराबंदी भी कराई गई थी. इसके बाद वर्ष 2025 में दूसरे पक्ष की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर जमीन की अलग-अलग लोगों के नाम रजिस्ट्री कराई गई और म्यूटेशन भी हुआ. अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि पहले से जमीन पर कब्जे और दावेदारी की स्थिति के बावजूद रजिस्ट्री तथा म्यूटेशन कैसे हुआ. इसी विवाद ने आगे चलकर हिंसक रूप लिया या इसके पीछे कोई दूसरी वजह भी थी, इसकी पड़ताल जारी है.

पिंटू से लेकर चंदन तक, खुल रही है आपराधिक कड़ियां
एसपी अवधेश दीक्षित के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार पिंटू कुमार की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है. उसे कोईलवर इलाके से पकड़ा गया था. पुलिस ने उसे मुख्य आरोपी चंदन सिंह का करीबी बताया है. उसकी निशानदेही पर एक देसी कट्टा और दो कारतूस भी बरामद किए गए थे. पुलिस के मुताबिक, पिंटू के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और शराब से जुड़े मामलों समेत करीब दस आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि हत्या से पहले आरोपियों ने एक साथ बैठकर वारदात की योजना बनाई थी.

जमीन के साझेदारों तक पहुंची जांच, कई नाम पुलिस के रडार पर
इस मामले में जांच का दायरा अब केवल प्रत्यक्ष रूप से वारदात में शामिल लोगों तक सीमित नहीं है. एसपी ने बताया कि विवादित जमीन में हिस्सेदारी रखने वाले और सौदे से जुड़े सभी लोगों की पहचान की जा रही है. पुलिस ने करीब डेढ़ दर्जन लोगों की भूमिका की जांच की बात पहले भी कही है. अब तक मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की, चंदन सिंह, अभिषेक कुमार और टीपू समेत चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. पुलिस का दावा है कि जमीन के सौदे से जुड़े लोगों और हत्या की साजिश के बीच संबंधों की भी जांच की जा रही है.

15 अक्टूबर की सुबह गोलियों से गूंजा था कनकपुरी
गौरतलब है कि 15 अक्टूबर की सुबह करीब छह बजे आरा के कनकपुरी मोहल्ले में जैन कॉलेज के पूर्वी गेट के पास रिटायर्ड असिस्टेंट कस्टम कमिश्नर रामकुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वह सुबह की सैर के लिए निकले थे. इसी दौरान अपराधियों ने उन पर हमला कर दिया था.

मृतक की पत्नी के बयान पर नवादा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित की गई, जिसका नेतृत्व एसडीपीओ सदर-1 कर रहे हैं.अब इस हत्याकांड में जांच के तीन अहम मोर्चे हैं -फरार शूटरों की गिरफ्तारी, हत्या में इस्तेमाल हथियार का पूरा राज और जमीन के सौदे से जुड़े उन लोगों की भूमिका, जिनके नाम पुलिस की जांच में सामने आ रहे हैं.

PNCB

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