एसपी का खुलासा-हत्या से 20-25 दिन पहले रची गई थी साजिश, नए सिम और बैंक खातों के लेन-देन की जांच; जमीन में साझेदारी का एंगल भी आया सामने.

आरा. सेवानिवृत्त कस्टम अधिकारी रामकुमार सिंह की हत्या सिर्फ एक जमीन विवाद का नतीजा थी या इसके पीछे जमीन के कारोबार से जुड़ा कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? भोजपुर पुलिस की जांच में इस हत्याकांड से जुड़े कई अहम पहलू सामने आए हैं. पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी चंदन सिंह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जमीन विवादों में हस्तक्षेप करने वाले एक कथित सिंडिकेट से जुड़ा था, जिसमें 10 से 12 लोगों के शामिल होने की आशंका है. हत्या के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए चंदन और उसके सहयोगी लगातार ठिकाने बदलते रहे. पुलिस अब जमीन के दस्तावेजों, बैंक खातों और आरोपियों के आपसी संपर्कों की पड़ताल कर रही है.



भोजपुर पुलिस और बिहार एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में चंदन सिंह और अभिषेक कुमार को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया. वहीं, टीपू कुमार को आरा से पकड़ा गया. पुलिस की ओर से जारी जानकारी में इस हत्याकांड में कुल चार आरोपियों की गिरफ्तारी बताई गई है, हालांकि उपलब्ध नाम-पते की सूची में तीन आरोपियों का ही विवरण है.
जैन कॉलेज के पास सुबह-सुबह हुई थी हत्या


15 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब छह बजे आरा में जैन कॉलेज के पूर्वी गेट के समीप सेवानिवृत्त अधिकारी रामकुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. घटना के बाद नवादा थाना कांड संख्या 784/26 दर्ज कर जांच शुरू की गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित के निर्देश पर आरा सदर-01 के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया. इसमें भोजपुर पुलिस, बिहार एसटीएफ और जिला आसूचना इकाई (डीआईयू) की टीम शामिल रही.
जांच के दौरान पुलिस का ध्यान उस जमीन की ओर गया, जिसे लेकर रामकुमार सिंह का लंबे समय से विवाद चल रहा था. पुलिस के अनुसार, मौजा सिंघी स्थित थाना नंबर 245, खाता नंबर 88 और खेसरा नंबर 69 की जमीन पर रामकुमार सिंह का वर्ष 2006 से कब्जा था. वर्ष 2020 में उन्होंने इस जमीन पर पक्की बाउंड्रीवाल भी बनवाई थी.
पुलिस की जांच में सामने आया कि वर्ष 2025 में कथित तौर पर पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर इस जमीन की रजिस्ट्री दूसरे व्यक्तियों के पक्ष में कराई गई थी. पुलिस इसी विवाद को हत्या की प्रमुख वजह मानकर जांच कर रही है.
सिलीगुड़ी से गंगटोक और फिर कोलकाता तक भागते रहे आरोपी
हत्याकांड के बाद मुख्य आरोपी चंदन सिंह और उसका सहयोगी अभिषेक गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदलते रहे. पुलिस के अनुसार, दोनों सिलीगुड़ी और गंगटोक के होटलों में कथित तौर पर नाम बदलकर ठहरे थे. इसके बाद वे पश्चिम बंगाल पहुंचे, जहां पुलिस और एसटीएफ की टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें कोलकाता के दमदम एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपियों ने नए मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी खरीदे थे. इनकी खरीद पर करीब 12 हजार रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है. जांच टीम अब उनके मोबाइल संपर्कों, यात्रा के दौरान की गतिविधियों और आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है.
हत्या से 20-25 दिन पहले साजिश रचने का दावा
पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि रामकुमार सिंह की हत्या की साजिश वारदात से करीब 20 से 25 दिन पहले रची गई थी. पुलिस हत्या से तीन-चार दिन पहले बैंक खाते से पांच लाख रुपये निकाले जाने और पत्नी के खाते में भी रकम स्थानांतरित किए जाने से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है.
जांच में नए बैंक खाते खोले जाने और मोबाइल-सिम की खरीद से संबंधित तथ्य भी सामने आने की बात कही गई है. पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन लेन-देन का हत्याकांड से कोई संबंध था या नहीं और कथित तौर पर वारदात को अंजाम देने वालों तक पैसे किस माध्यम से पहुंचे. हालांकि, इन आर्थिक गतिविधियों और हत्या के बीच संबंध की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
10-12 लोगों के सिंडिकेट की आशंका, जमीन में साझेदारी की भी जांच
एसपी के अनुसार, जांच में जमीन के विवादों से जुड़े 10 से 12 लोगों के कथित नेटवर्क की आशंका सामने आई है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह समूह जमीन के दस्तावेजों में कथित हेरफेर, विवादित संपत्तियों की खरीद-बिक्री और जमीन पर कब्जे से जुड़े मामलों में सक्रिय था.


पुलिस के मुताबिक, पूर्व में गिरफ्तार मनोज सिंह उर्फ लक्की की भी विवादित जमीन में साझेदारी होने की बात सामने आई है. उसे चंदन सिंह का सहयोगी बताया गया है. जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जमीन के इस विवाद में किन लोगों के आर्थिक हित जुड़े थे और क्या कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों की हत्याकांड में कोई भूमिका थी.
फिलहाल, सिंडिकेट में शामिल बताए जा रहे लोगों की भूमिका और जमीन के कारोबार से जुड़े आरोपों की जांच जारी है. पुलिस की ओर से सामने रखे गए इन तथ्यों को जांच के निष्कर्ष के रूप में अंतिम रूप से स्थापित किया जाना अभी बाकी है.
चंदन सिंह पर पहले से पांच आपराधिक मामले
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बड़की सिंघी निवासी चंदन सिंह के खिलाफ आरा नगर और मुफस्सिल थानों में पहले से पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं.
आरा नगर थाना कांड संख्या 190/23: प्रिजनर एक्ट की धारा 42/52.
आरा नगर थाना कांड संख्या 131/24: भारतीय दंड विधान की धारा 341, 323, 307, 34 और आर्म्स एक्ट की धारा 27.
आरा नगर थाना कांड संख्या 363/24: भारतीय दंड विधान की धारा 341, 323, 379 और 504.
मुफस्सिल थाना कांड संख्या 234/22: भारतीय दंड विधान की धारा 467, 468, 471, 420 तथा मद्य निषेध अधिनियम की धारा 30(ए)/32(iii).
मुफस्सिल थाना कांड संख्या 240/26: भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223, 324(4) और 3(5).
ये मामले पुलिस द्वारा बताए गए पूर्व आपराधिक इतिहास का हिस्सा हैं. इनमें दर्ज आरोपों को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता है.
पिस्टल,कारतूस, मैगजीन और चारपहिया वाहन बरामद
भोजपुर पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान एक पिस्टल, दो जिंदा कारतूस, एक मैगजीन और एक चारपहिया वाहन बरामद किया गया है. पुलिस ने हत्याकांड के उद्भेदन में बिहार एसटीएफ की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है.
पुलिस अब कथित तौर पर वारदात को अंजाम देने वाले तीन शूटरों और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश कर रही है. बरामद पिस्टल का इस्तेमाल हत्या में हुआ था या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
फिलहाल इस हत्याकांड की जांच तीन प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित है- विवादित जमीन का वास्तविक लेन-देन, हत्या से पहले और बाद में हुए आर्थिक हस्तांतरण तथा आरोपियों के बीच संपर्कों का नेटवर्क. पुलिस को उम्मीद है कि इन कड़ियों की जांच से हत्या की साजिश और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी.
PNCB
