सरकार को दी आर-पार की चेतावनी
आरा/पटना. बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक (काला बिल) के विरोध में फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार (FUTAB), फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी टीचर्स सर्विस एसोसिएशन ऑफ बिहार (FUSTAB) तथा बिहार राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के संयुक्त तत्वावधान में राज्यव्यापी आंदोलन आयोजित किया गया. इस आंदोलन में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों ने अभूतपूर्व एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए सरकार से विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग की.
संयुक्त आंदोलन का संचालन एवं अध्यक्षता FUTAB के महासचिव सह विधान परिषद सदस्य (MLC) डॉ. संजय कुमार सिंह ने की. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा हमला है. उन्होंने सभी शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों से इस संघर्ष को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया.
वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएशन (VAKUTA) की ओर से महासचिव डॉ. शशि भूषण राय, सहमल देव खैरा शिक्षक संघ के सचिव डॉ. संतोष कुमार तथा एस.बी. कॉलेज, आरा शिक्षक संघ के सचिव डॉ. अभिनव आनंद ने सक्रिय भागीदारी निभाई और शिक्षकों की एकजुटता का प्रदर्शन किया.

डॉ. शशि भूषण राय ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, शिक्षकों के अधिकारों और उच्च शिक्षा की गरिमा की रक्षा के लिए वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय शिक्षक संघ पूरी मजबूती के साथ महासंघ के साथ खड़ा है. उन्होंने कहा कि संयुक्त मोर्चा आंदोलन के संबंध में जो भी निर्णय लेगा, VAKUTA उसे पूरी निष्ठा, अनुशासन और एकजुटता के साथ लागू करेगा तथा आंदोलन के हर चरण में सक्रिय भूमिका निभाएगा.
आंदोलन में शामिल FUTAB, FUSTAB और बिहार राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन विधेयक विश्वविद्यालयों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली, लोकतांत्रिक व्यवस्था और शिक्षकों एवं कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने वाला है. उन्होंने इसे उच्च शिक्षा के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताया.
वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि बिहार की पूरी उच्च शिक्षा व्यवस्था, विश्वविद्यालयों की गरिमा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा का संघर्ष है. सभी शिक्षक एवं कर्मचारियों ने संकल्प लिया कि इस प्रस्तावित काला बिल का लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से हर स्तर पर विरोध जारी रहेगा.
संयुक्त मोर्चे ने बिहार सरकार से मांग की कि विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को तत्काल वापस लिया जाए तथा किसी भी नए कानून को लागू करने से पहले शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों, शिक्षाविदों और सभी संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए. उनका कहना था कि उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर एकतरफा निर्णय लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है.
PNCB
