17 जुलाई को जंतर-मंतर पर महाधरना का आह्वान

20 दिन बाद भी कार्रवाई से असंतुष्ट परिजनों ने देशभर के लोगों से की दिल्ली पहुंचने की अपील, सीबीआई जांच और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग




पटना नाउ स्पेशल रिपोर्ट

बिलौटी, भोजपुर, 7 जुलाई(ओ पी पाण्डेय). भोजपुर के बिलौटी गांव में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्याय की मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गई है. घटना के लगभग 20 दिन बाद भी परिजनों का आरोप है कि दोषियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है. इसी को लेकर 17 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया गया है. इस तारीख को घटना को एक माह पूरा हो जाएगा।

भरत तिवारी के परिजनों का कहना है कि हजारों लोगों के समर्थन, विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के आंदोलन तथा कई नेताओं के हस्तक्षेप के बावजूद न्याय की प्रक्रिया धीमी है. उनका आरोप है कि एक आरोपी को निलंबित किए जाने के बाद भी उसे दूसरे विभाग में पदस्थापित कर दिया गया, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।

देशवासियों से दिल्ली पहुंचने की अपील

भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने देशभर के लोगों से 17 जुलाई को दिल्ली पहुंचकर न्याय की इस लड़ाई में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल उनके बेटे की नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के न्याय और कानून के शासन की लड़ाई है।

भरत तिवारी की माता ने भी भावुक अपील करते हुए कहा कि न्याय में हो रही देरी से पूरा परिवार पीड़ित है। उन्होंने कहा कि उनकी आवाज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचे, ताकि उनके बेटे के दोषियों को सख्त सजा मिल सके।

सीबीआई और सिटिंग जज से जांच की मांग

भरत तिवारी के बड़े भाई बसंत तिवारी ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जांच किसी सिटिंग जज की निगरानी में हो तथा न्यायिक अधिकारियों की एक बेंच इसकी देखरेख करे। उनका कहना है कि यदि सीबीआई जांच हो तो उसमें भी तीन या पांच सदस्यीय समिति गठित की जाए, ताकि जांच निष्पक्ष रहे और किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े।

सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दर्ज केस वापस हों’
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि भरत तिवारी के समर्थन में आवाज उठाने वाले कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों के सदस्यों पर पुलिस ने मुकदमे दर्ज किए हैं. उन्होंने सरकार से इन मामलों को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि न्याय की मांग करना अपराध नहीं हो सकता.

सबूत साफ हैं, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?’

भरत तिवारी के चाचा अंजनीकांत तिवारी ने पटना नाउ से बात करते हुए सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि घटना से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्य आईने की तरह स्पष्ट हैं. इसके बावजूद दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होना न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. उन्होंने देशवासियों से जंतर-मंतर पहुंचकर इस आंदोलन को मजबूत करने की अपील की, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े.

परिवार का कहना है कि उनका संघर्ष केवल भरत तिवारी को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी है. इसी उद्देश्य से उन्होंने देशभर के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और युवाओं से 17 जुलाई को जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन को मजबूत बनाने की अपील की है.

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