बड़े नेताओं के बीच इस युवा चेहरे ने खींचा सबका ध्यान
आरा, 16 मई (ओ पी पाण्डेय). बक्सर-भोजपुर विधान परिषद उपचुनाव में राजद प्रत्याशी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब एक युवा चेहरा राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का केंद्र बन गया है। यह चेहरा है राष्ट्रीय जनता दल के भोजपुर जिला प्रवक्ता का, जिन्होंने चुनाव के दौरान हर मोर्चे पर अपनी सक्रियता, रणनीति और मैनेजमेंट क्षमता से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.

भोजपुर की राजनीति में आमतौर पर बड़े और अनुभवी नेताओं का दबदबा माना जाता है, लेकिन इस चुनाव में आलोक रंजन ने जिस परिपक्वता और संयम के साथ अपनी भूमिका निभाई, उसने उन्हें युवाओं के बीच ही नहीं बल्कि वरिष्ठ नेताओं के बीच भी खास पहचान दिलाई. शांत स्वभाव, तथ्यों के साथ बात रखने की कला और संगठनात्मक पकड़ के कारण वे लगातार चर्चा में बने हुए हैं.
पूर्व में राजद छात्र प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके आलोक रंजन लंबे समय से संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय हैं। यही वजह रही कि विधान परिषद चुनाव में बूथ मैनेजमेंट से लेकर जनसंपर्क अभियान, सोशल मीडिया कैंपेन, कंटेंट निर्माण और नेताओं के बीच समन्वय तक, लगभग हर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में उनकी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

चुनाव के दौरान राजद के कई दिग्गज नेताओं- पूर्व विधान पार्षद लालदास राय, पूर्व विधायक विजयेंद्र यादव, रामविशुन सिंह उर्फ लोहिया, अरुण यादव, हाकिम प्रसाद, वीरबल यादव, मुकेश यादव, अदीब रिजवी, लालबिहारी सिंह सहित अन्य कई अनुभवी नेताओं के बीच आलोक रंजन की मौजूदगी लगातार महसूस की गई।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नव निर्वाचित MLC सोनू कुमार राय ने भी चुनाव के दौरान आलोक रंजन पर खास भरोसा जताया। सभाओं, बैठकों और जनसंपर्क अभियानों में वे अक्सर सोनू राय के साथ साये की तरह नजर आए। खास बात यह रही कि सोशल मीडिया मैनेजमेंट और डिजिटल कंटेंट की जिम्मेदारी भी मुख्य रूप से उन्हीं के कंधों पर थी.
सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक क्षेत्र में भी आलोक रंजन अपनी अलग पहचान रखते हैं. आलोक वर्तमान में रिसर्च स्कॉलर हैं और पीएचडी की पढ़ाई कर रहे हैं। यही अकादमिक दृष्टिकोण उनकी राजनीतिक सोच और कार्यशैली में भी साफ झलकता है।

वहीं युवा MLC की लोकप्रियता का बड़ा आधार युवाओं की मजबूत टीम को भी माना जा रहा है। उनके साथ रंजय यादव ‘लालू’, धनजीत यादव, पीयूष यादव, सुशील राव, अर्पित, पंकज, विनीत सहित कई युवा लगातार सक्रिय भूमिका में दिखे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि भोजपुर की राजनीति में उभरती नई युवा टीम और उसके मैनेजमेंट मॉडल की भी बड़ी झलक है। लेकिन राजनीति के बड़े चकाचौंध में जीत के बाद अक्सर ऐसे चेहरे जीत के चेहरों के पीछे दफन हो जाते हैं। प्रतिभा का भरपूर उपयोग ही नहीं दोहन भी हो जाता है इसलिए ऐसे मेहनती और क्रिएटिव युवाओं को जन तक पहुंचाना हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए ताकि कोई प्रतिभा राजनीति की भेंट न चढ़ जाए।
