अंग्रेजी ओलंपिया का गोल्ड मेडल जीता बक्सर के स्वराज ओझा ने

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | स्वराज ओझा, जो बक्सर के छोटा सिंघनपुरा के रहने वाले हैं तथा संजीव कुमार और रितु ओझा के बेटे है, ने अंग्रेजी ओलंपियाड में गोल्ड मेल्डल जीता है. पहले भी जब वे पांचवीं क्लास में पढ़ रहे थे तब सायंस ओलंपियाड में ब्रांज मेडल जीता था. इसके अलावा इनकी स्टोरी को स्टोरी मिरर स्टोरी राइटिंग कंपीटिशन में शामिल किया है. स्वराज ओझा अभी दिल्ली के समरविले स्कूल की सातवीं क्लास में पढ़ते हैं. स्वराज ओझा के चाचा अभिषेक कुमार बापू स्मारक महिला उच्च विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं.

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DM के बाद अब OSD की संदेहास्पद मौत से सनसनी

बक्सर में तात्कालीन DM मुकेश कुमार पांडे की संदेहास्पद मौत को अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं इस बीच रविवार को DM के OSD तौकीर अकरम की भी संदेहास्पद मौत हो गई है. पुलिस ने आज सुबह बक्सर जिलाधिकारी के विशेष कार्य पदाधिकारी (OSD) तौकीर अकरम का शव उनके कमरे से बरामद किया.    पुलिस ने उनके कमरे से एक नोट भी बरामद किया है जिसमें रविवार सुबह 4.30 बजे का वक्त लिखा है. कुछ महीने के भीतर ही लगातार 2 ऐसी वारदातों से बक्सर समेत पूरे सूबे में सनसनी फैल गई है. सूचना मिलने पर पहुंचे बक्सर डीएम अरविन्द कुमार वर्मा भी मृतक के घर के बाहर कैंप कर रहे हैं. चर्चा है कि इन दोनों घटनाओं का किसी बड़े मामले से संबंध हो सकता है. इसे लेकर मृतक OSD के कमरे को सील कर दिया गया है. इस बीच बक्सर के प्रभारी एसपी अवकाश कुमार भी मौके पर पहुंच गए हैं और कमरे को खोलकर मामले की जांच कर रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना पर शोक जताया है और मामले की जांच के आदेश दिए हैं. बक्सर के डीएम की भी हुई थी संदेहास्पद मौत पढ़िये पूरी खबर- https://goo.gl/6dDojH बक्सर से ऋतुराज

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साहब को 3 करोड़ की चपत लगाकर फरार

जिसपर किया भरोसा, उसी ने लगा दी वाट दिवाली से पहले दिवालिया कर गया ब्रोकर इन दिनों बड़ी चर्चा है एक DSP साहब की. साहब बक्सर जिले में पोस्टेड हैं और जल्द ही रिटायर होने वाले हैं. दरअसल साहब का सबसे वफादार सहयोगी ही गद्दार निकला. उसने साहब को 3 करोड़ की चपत लगाई है. DSP परेशान हैं लेकिन क्या करें. अब उस ब्रोकर का कोई अता-पता नहीं चल रहा है. पिछले कुछ दिनों से यह बात बक्सर जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है. चर्चा है कि डीएसपी ने उसे ढूंढने की सभी जुगत लगा ली. लेकिन वो पकड़ में नहीं आ रहा है. उसका मोबाइल भी बंद है.  उसके अचानक गायब होने की खबर से पुलिस महकमे में भी जोरदार चर्चा है. लोग खूब मजे ले रहे हैं. DSP के बारे में बताया जा रहा है कि वे बक्सर ,पटना समेत भोजपुर व अन्य जिलों में विभिन्न पदों पर रहे हैं. करीब 15 साल पहले वे जिले में इंस्पेक्टर रह चुके हैं. चर्चा है कि ये ब्रोकर उस समय साहब का सारथी था. तब से अबतक दोनों का साथ चोली-दामन का हो गया था. DSP ने अपनी अवैध कमाई का माल खपाने के लिए उससे इतनी नजदीकी बना ली थी कि दोनों के बीच कुछ भी छुपा नहीं था. चर्चा पर यकीन करें तो DSP ने नोटबंदी के बाद एक साल में ब्रोकर व उसकी पत्नी के नाम से करीब 80 लाख की जमीन खरीदी है. हाल ही में उसी के नाम से अपने लिए एक लग्जरी कार

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बक्सर पहुंचा चोटीकटवा का आतंक

चोटी कटवा गिरोह ने बक्सर में किशोरी को बनाया शिकार नगर के दक्षिण टोला में एक छात्रा की चोटी कटने से दहशत देश के विभिन्न राज्यों में महिलाओं व बच्चियों की चोटी काटने के गिरोह ने बक्सर के डुमरांव में भी दस्तक दे दी है. अनुमंडल क्षेत्र में शनिवार की शाम दक्षिण टोला निवासी एक किशोरी ज्योति कुमारी (काल्पनिक नाम) के बाल की चोटी किसी ने काट ली. बताया जा रहा है कि बच्ची उस वक्त सोई हुई थी. सोये अवस्था चोटी कटने से परिजन दहशत में आ गए. यह बात मुहल्ले में आग की तरह फैल गई और लोग दहशत में आ गए. पीड़ित छात्रा आठवीं कक्षा में पढ़ती है. किसी ने नहीं देखा कि आखिर चोटी कैसे और किसने काटी है. मामले की सूचना पाकर पुलिस छानबीन में जुट गई है. यह जिले का पहला मामला है.   बक्सर से ऋतुराज

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सावन महीने में करें मिनी काशी की यात्रा

मिनी काशी के नाम से जाना जाता है बक्सर मिनी बाबाधाम के नाम से मशहूर है ब्रह्मपुर महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि और मिनी काशी के नाम से प्रसिद्ध बक्सर जिला का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है. बक्सर में श्री रामेश्वरनाथ मंदिर भी धार्मिक धरोहरो में एक है. यहां रामेश्वर नाथ महादेव के दर्शन और पूजन के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी भक्त आते हैं. अति प्राचीनतम इस मंदिर की व्याख्या धार्मिक ग्रंथों में भी पढ़ने और सुनने को मिलती है. मान्यता है कि भगवान राम ने इस मंदिर की स्थापना अपने हाथों से की. वहीं मिनी बाबाधाम के नाम से मशहूर ब्रह्मपुर नगरी में विराजित बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ महादेव की स्थापना सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने स्वयं के हाथों से की थी. ये दोनों मंदिर शिव के उपज्योतिर्लिंग में गिने जाते हैं. 13 लाख वर्ष पूर्व हुई शिवलिंग की स्थापना कहा जाता है कि वनवास के दौरान राम ने भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए रामेश्वरनाथ मन्दिर की स्थापना की. ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से पवित्र गंगा मे स्नान करने के बाद जो भक्त रामेश्वरनाथ यानि कि शंकर भगवान दर्शन करता है उस पर लगा ब्रह्म हत्या जैसा पाप भी मिट जाता है. ऐसे हुआ रामरेखा घाट का नामकरण जानकारों की मानें तो जब ऋषि महर्षियों की तपस्या में राक्षस विध्न डालने लगे. तब भगवान राम ने दानवों के गमन पर रोक लगाने के लिये एक रेखा खींची ताकि चारों दिशाओं सहित आकाश और पाताल के रास्ते भी यहां राक्षसों का प्रवेश नहीं

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