कोविड गाइड लाइन के साथ संस्था ने मनाया अपना स्थापना दिवस

वस्त्र प्रदर्शनी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी लोगों ने उठाया आनंद आरा. नेशनल साइंटिफ़िक रिसर्च ऐंड सोशल एनालिसिस ट्रस्ट आरा ने शुक्रवार को अपना ग्यारहवा स्थापना दिवस मनाया. जिसमें कोरोना गाइड लाइन के नियमों का पालन करते हुए वस्त्र प्रदर्शनी व सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया.कार्यक्रम का शुभारंभ चर्चित रंगकर्मी व वरिष्ठ पत्रकार शमशाद प्रेम,मशहूर चित्रकार संजीव सिन्हा, मधुर आवाज के धनी लोक गायक श्याम कुमार, सोनू जैन ,विभुति ,अनामिका, एनी बेसेंट व नेहा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. वस्त्र प्रदर्शनी में इस मौके पर जिले की चर्चित कशीदा हस्त शिल्पी विभुति ने स्लिम बैग,पिलो कवर सहित कई अन्य सामग्रियों का प्रदर्शन कर सबका मन मोह लिया. इस मौके पर प्रदर्शनी में आए लोगों ने अनामिका कुमारी की आर्टिफिसियल नेकलेस व इयरिंग को भी खूब पसंद किया. ट्रस्ट अध्यक्ष श्याम कुमार ने स्थापना दिवस पर सबको धन्यवाद दिया तथा उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ये संस्था विगत कई वर्षों से महिला सशक्तिकरण के निमित्त नि:शुल्क प्रशिक्षण का कार्यक्रम आयोजित करते रहा है और भविष्य में भी करता रहेगा. जिससे महिलायें विकास के मार्ग पर अपने हुनर को स्थापित कर स्वावलंबी बन सकें. प्रदर्शनी के साथ साथ संस्था ने इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जिसमें बृजेन्द्र महाराज ने स्वागत गान,एनी बेसेंट ने राष्ट्रगान व लालू कुमार ने भजन प्रस्तुत कर सबको झूमा दिया. इस मौके पर शहर के कई बुद्धिजीवियों व कला प्रेमियों को देखा गया. PNCB

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आरा के चित्रकार कौशलेश के निर्देशन में वाराणसी की सबसे विराट रंगोली ‘जीत की ज़िद’..

जिसने देखा तारीफ की ,बच्चों के हुनर को सबने सराहा जीत की ज़िद एक प्रयास है और साथ ही ज़िद है कुछ नया करने की। ये छोटी-छोटी ज़िद ही बडी जीत को अंजाम देते हैं। इसी को साकार किया केंद्रीय विद्यालय का. ही. वि. वि. परिसर, वाराणसी ने । विद्यालय के प्रांगण में डिजाइन इनोवेशन सेंटर, व्यवहारिक कला विभाग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी,अकत्व आर्ट फाउंडेशन, नई दिल्ली एवं विकास ड्राइंग इंपोरियम, वाराणसी के सहयोग से आरा निवासी, विद्यालय के कला शिक्षक चित्रकार कौशलेश कुमार के निर्देशन में “अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस” के पावन दिन, भारतीय स्वतंत्रता के गौरवशाली 75 वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित “आजादी का अमृत महोत्सव” को समर्पित “एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम” के अंतर्गत “जीत की जीद” 50×50 फिट (2,500 वर्गफीट ) विराट रंगोली विद्यालय में बनाया है जिसके द्वारा वीर सपूतों को नमन किया गया इस विराट रंगोली कार्यक्रम में केंद्रीय विद्यालय बी एच यू वाराणसी के 75 नवोदित कलाकारों ने अपनी कलात्मक उड़ान को रंगोली पर *महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव, महामना मदन मोहन मालवीय एवं लौह पुरुष सरदारवल्लभभाई पटेल के साथ देश भक्ति थीम एवं अनेक नारों को रंगोली के रंगों के माध्यम से रचना की।इस जिद्दी टीम ने स्वतंत्रता के अमर नायकों के व्यक्तित्व के साथ न्याय करते हुए नयी कलात्मकता को आकार दिया। आजादी के अमर नायकों की शौर्य गाथा को आपके रंग देकर और अधिक रंगीन बनाया।चित्रकार कौशलेश कुमार के नेतृत्व में दृश्य कला संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी , कला एवं शिल्प महाविद्यालय लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, ललित कला

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भोजपुरी आन्दोलन को दबाने के लिए गिरफ्तार किए गए 5 कलाकार, आज कोर्ट में पेशी

रँगजुलुस निकालने दौरान RPF ने कलाकरों को किया गिरफ्तार,स्टेशन पर घंटों हंगामा,3 घण्टे हिरासत में रखने के बाद पुलिस ने छोड़ा आरा, 26 जून. 24 दिन से भोजपुरी पेंटिंग की अस्मिता के लिए शांतिपूर्ण आन्दोलन कर रहे कलाकारों में से 5 कलाकारों को शुक्रवार को रेल प्रशासन ने गिरफ्तार कर लगभग 3 घण्टे तक अपने कस्टडी में रखा. बाद में कलाकारों को रेल प्रशासन ने छोड़ दिया. भोजपुरी संरक्षण मोर्चा ने शुक्रवार अपने निर्धारित समय से 25वें दिन गीत-गायन के जरिये अपना विरोध प्रदर्शन किया और फिर रेलवे प्लेटफार्म पर रँगजुलुस के रूप में प्रदर्शन करने लगे. प्लेटफार्म नम्बर एक से शूरु हुआ यह रंग जुलूस जैसे ही प्लेटफार्म नम्बर तीन पर पहुँचा कि रेलवे पुलिस फोर्स ने आन्दोलनकारी 5 कलाकारों को गिरफ्तार कर लिया. कलाकारों के गिरफ्तारी के बाद यह खबर जंगल मे आग की तरह सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गयी. सोशल मीडिया पर भोजपुरी भाषा से जुड़े देश विदेश में रहने वालों ने इस घटना को कायराना और बेहद शर्मनाक बताया. रेल प्रशासन द्वारा किये गए इस गिरफ्तारी से भोजपुरिया क्षेत्र के लोग आक्रोशित हो गए. कलाकारों के गिरफ्तारी के बाद ऐसा हो सकता है कि यह आंदोलन प्रदेश में भी शामिल हो जाये. लोगों में आक्रोश इस बात का ही कि उनके जायज मांग को भी सरकार नही सुन रही है. शांति तरीके से आन्दोलन के बाद भी गिरफ्तारी सरकार के तानाशाही रवैये का प्रमाण है. कलाकारों को पुलिस ने रँगजुलुस निकालने के दौरान ऐसे पकड़ा और धक्का-मुक्की किया जैसे वे किसी

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रिमझिम फुहारों में थिरक उठी भोजपुरी कलाकृतियाँ

12वें दिन आन्दोलन में शामिल हुए कई दिग्गज और सामाजिक चेहरे आगत अतिथियों ने कहा सरकार तक पहुँचेगी यह आवाज आरा,12 जून(ओ पी पांडेय). जून का दूसरा सप्ताह खत्म होने वाला है और बिहार ने मानसून की दस्तक भी दे दी है. पहले दिन की ही फुहार से मौसम सुकून भरा हो गया है. इस बीच पिछले 12 दिनों से आंदोलनरत भोजपुर के चित्रकारों ने छाते को भोजपुरी पेंटिंग से सजाना शुरू कर दिया है. शुक्रवार से ही छातों के ऊपर विंभिन्न कलाकृतियों को कलाकारों ने बनाने का सिलसिला चालू किया है. प्लेन छातों के ऊपर कलाकृतियों के बनने के बाद तो छाते ऐसे दिखने लगे जैसे उनमें जान आ गये हों. उनमें बनी आकृतियों को देखने के बाद ऐसा लगता था जैसे वे कह रही हों कि ऐ मेघ जल्दी बरस क्योंकि इस बार तो पूरे मॉनसून हम छातों पर चहकेंगे और अपनी खुशी मनाएंगे. वर्षो बाद इन कलाकारों के मेहनत ने मेरे सम्मान के लिए ये लड़ाई शुरू की है. मैं खुश हूँ कि पूरा माहौल अपने विरासत को बचाने में लगा है. छाते पर बनने वाली पेंटिंग कोहबर और पीड़िया शैली की है जो भोजपुर की अपनी थाती है. इनका सम्बंध मानव सभ्यता के विकास काल से ही रहा है. सभ्यता के विकास के साथ इसमें कुछ बदलाव जरूर आये लेकिन नही बदलीं तो वे इन चित्रों की रेखाएं और उनमें निहित कुछ खास चीजों का अंकन जो जीवन के मानवीय पहलुओं में नित विराजमान है. रंगों का संयोजन और उनका आपसी रिफ्लेक्शन उनके रूप में और

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