गंगा जैसी पवित्र हैं महामानव अटल जी की कवितायें : रवीन्द्र किशोर सिन्हा

मंदिरों मस्जिद की या किसी इमारत की माटी तो लगी उसमे भाई मेरे भारत की-सुरेन्द शर्मा




नीरज स्मृति न्यास ने अटल काव्यांजलि संध्या का आयोजन कर पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी जयंती पर दी श्रद्धांजलि

अटल बिहारी वाजपेयी को सम्बोधित करते पूर्व सांसद आर के सिन्हा व अन्य

आराधना प्रसाद की गजल पुस्तक ” चाक पर घूमती रही मिट्टी” का हुआ लोकार्पण

तुम्हे प्रस्ताव नैनो का अगर स्वीकार हो जाए,अंधेरे कोने में दिल के मेरे उजियार हो जाए

काव्यांजलि में डॉ. सुरेन्द्र शर्मा, डॉ. विष्णु सक्सेना, डॉ. बुद्धिनाथ मिश्रा, सुरेश अवस्थी, डॉ. गजेंद्र सोलंकी, बलराम श्रीवास्तव, राधाकांत पांडेय, शुभी सक्सेना, स्वेता सिंह,आराधना प्रसाद ने सुनाईं कविताएं

भाजपा के संस्थापक सदस्य ,पूर्व राज्यसभा सांसद और नीरज स्मृति न्यास के अध्यक्ष आर के सिन्हा( रवीन्द्र किशोर सिन्हा) ने कहा कि दुनिया अटल बिहारी वाजपयी को केवल एक राजनेता के रूप में नहीं बल्कि उनके विराट व्यक्तित्त्व और एक संवेदनशील कवि के रूप में भी हमेशा याद करती रहेगी. रवीन्द्र किशोर सिन्हा राजधानी के रबिन्द्र भवन में नीरज स्मृति न्यास के तत्वधान में आयोजित अटल काव्यांजलि का शुभारम्भ कर रहे थे.इस अवसर पर देश के विभिन्नं राज्यों से आए हिंदी जगत के प्रख्यात कवियों ने अपनी गीतों और कविताओं के माध्यम से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धासुमन अर्पित किए.

इस काव्यांजलि में आर के सिन्हा जी के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन, संगठन मंत्री भीखू भाई दलसनिया जी ने दीप प्रज्ज्वलित कर अटल काव्यांजली का शुभारम्भ किया. इस मौके पर आर के सिन्हा ने कहा अटल जी की कविताएं उतनी ही पवित्र हैं जितनी पवित्र गंगा हैं.काव्यांजली की अध्यक्षता रवीन्द्र किशोर सिन्हा ने की जबकि मंच संचालन प्रसिद्द कवि गजेन्द्र सोलंकी ने किया.कार्यक्रम की शुरुआत में आराधना प्रसाद की गजल संग्रह ” चाक पर घूमती रही मिट्टी” का लोकार्पण से किया गया.

काव्यांजलि की शुरुआत करते हुए आर के सिन्हा ने अटल जी के व्यक्तित्त्व को याद करते हुए कहा कि यह देश अटल बिहारी वाजपेयी को केवल एक प्रधानमंत्री के रूप में ही नहीं बल्कि एक संवेदनशील कवि और महामानव के रूप में भी याद करता रहेगा. हमें उनका साथ लगातार 52 वर्षों तक मिलता रहा. अटल जी जब भी पटना आते थे तो हमारे घर में ही रुकते थे. हम वर्ष 1966 से उनके साथ रहे. इस मौके पर उन्होंने हिंदी के प्रख्यात कवि गोपालदास नीरज को भी याद किया और कहा कि अटल जी और नीरज जी ने कई कवि सम्मेलनों में एक साथ कविता पाठ किया है. दोनों उम्र में भी सामान थे और दोनों की कविताओं की गहराई भी दोनों के व्यक्तित्त्व की तरह गहरी थी.

कवि पदमश्री  डॉ. सुरेन्द्र  शर्मा ने अपनी ओजपूर्ण आवाज में “मंदिरों मस्जिद की या किसी इमारत की माटी तो लगी उसमे भाई मेरे भारत की ‘ गाकर श्रोताओं को खूब झकझोरा. उन्होंने कहा कि विश्व विजेता जो बनता था, उसको झाड़ दिया हमने, साहस इतना कि अन्तरिक्ष का सीना फाड़ दिया हमने और विफल शास्त्र के हो जाने पर शस्त्र उठाना पड़ता है, गाकर श्रोताओं को देश की बढ़ती ताकत से रू-ब-रू कराया.इसके अलावा डा विष्णु सक्सेना ने जब यह कविता पढ़ी” याद तुम्हारी कर कर के , जब मेरे नयन सजल हो बैठे, मन हो गया भागीरथ जैसा, आंसू गंगाजल हो बैठे “. सुनकर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं. जब बुद्धिनाथ मिश्र ने अपनी कविता ” कवियों के कवि नेताओ के नेता ,तुम हो सदा अटल ,पावनता में तुम गंगाजल ,दृढ़ता में हो विंध्याचल” को सुनाकर अटल जी के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित की.

तुम्हे प्रस्ताव नैनो का अगर स्वीकार हो जाए,अंधेरे कोने में दिल के मेरे उजियार हो जाए,तुम्हारे ही कदम पर मैं चलूंगी साथ जीवन भर,हमारे प्रेम का दुश्मन भले संसार हो जाए. कविता पाठ स्वेता सिंह ने करके श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.कवि शुभी सक्सेना ने भोजपुरी में दुनिया में मेधा-प्रतिभा के जब-जब चर्चा आई जी, देशरत्न राजेन्द्र बाबू के नाम सभी दोहराई जी का सस्वर पाठ करके देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भी अपनी कविता के माध्यम से श्रद्धांजली अर्पित की.

तिरंगा और देशप्रेम की कविताओं से गजेंद्र सोलंकी जी ने हर सुनने वालों के सीने में देशभक्ति का अलख जगाने का काम किया. उनकी कविता ” जनगणमन के अमर स्वरों का गाना है तिरंगा, भारत के स्वर्णिम सपनो की शान है तिरंगा , बलिदानों पवनों के झोकों से जो लहराया ,भारत मां का गौरव और सम्मान तिरंगा. इस काव्यांजलि में प्रख्यात कवि डॉ. सुरेश अवस्थी, डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, डॉ. बलराम श्रीवास्तव, राधाकांत पाण्डे,आराधना प्रसाद के साथ सुरेश अवस्थी जी ने भी अपनी कविताओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया.

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