उद्योग मंत्री ने किया GTRI 3.0 में शिरकत

एकाग्रता के हिसाब से बिहार को नही मिला उसका हक : उद्योग मंत्री




पोएट डिप्लोमेट अभय कुमार के “बिहारी लिटरेचर’ किताब का हुआ विमोचन

कई योजनाओं और नए आइडिया पर मंथन के साथ बाद हुआ कार्यक्रम का समापन

पटना, 26 फरवरी. दुनिया भर में अपने विजनेस और स्टार्ट अप से अपनी पहचान बनाने वाले बिहारियों को एक जगह पर इकठ्ठा करने वाला GTRI अपने तीसरे आयोजन के बाद दुनिया का सबसे बड़ा मंच बनकर उभरा जो बिहारियों पर प्रचलित कहावत एक बिहारी सब पर भारी जैसा प्रतीत होने लगा. मतलब GTRI अबतक के उन तमाम ऐसे आयोजनों पर भारी पड़ रहा है जो इस तरह के आयोजन से एक दूसरे से जुड़े रहते है. अब इस मंच पर आए लोगों से बिहार को बहुत उम्मीदें हैं. अब बिहार इन बिहारियों पर टकटकी लगाए अपनी बारी के इंतजार में है.

दुनिया भर से बिहारी शख्सियतों को एक मंच पर लाने वाले कार्यक्रम GTRI 3.0 के दूसरे दिन का शुभारंभ किताब के विमोचन से हुआ. कार्यक्रम के संचालक ने सबको सम्बोधित करते हुए कहा कि बातों का व्यापारी मैं शैलेश आप सभी का स्वगत करता हूँ और इसी सम्बोधन के साथ अतिथियों को मंच पर आमंत्रित किया. स्थानीय लेमन ट्री प्रीमियर होटल में मुख्य अतिथि के रुप मे आये माननीय उद्योग मंत्री बिहार सरकार समीर कुमार महासेठ ने किताब ‘बिहारी लिटरेचर’ का विमोचन कर किया.

मुख्य अतिथि को डालमिया कॉरपोरेट हेड राजेश कुमार ने पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया. किताब का लेखन अभय कुमार (DDG, ICCR, G20,Poet Diplomat) ने लिखी है और वे विमोचन के इस दौरान मुख्य अतिथि के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे.

एकाग्रता के हिसाब से बिहार को नही मिला उसका हक : उद्योग मंत्री

इस मौके पर बोलते हुए बिहार सरकार के उद्योग मंत्री ने कहा कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत कितनी विशाल है ये किताब इसका प्रमाण है. पुराने समय में जो बिहार, बंगाल और उड़ीसा का बनावट था उसे बांटने का काम जो हुआ वो ठीक नही हुआ. उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के मंदिरों से भी पुराना इतिहास है हमारे शिलालेखों का. यहाँ जब मंदिर बनेंगे तो वहां से ज्यादा भीड़ होगी यहाँ देखने के लिए. लेकिन हम बनावट में कमजोर हैं. हमारे साथ सौतेला बर्ताव होता आया है.

बिहार की एकाग्रता के हिसाब से यदि उसका हक मिलता तो आज ये हाल नही रहता. उन्होंने एक कहानी सुनाते हुए कहा कि एक राजा ने एक व्यक्ति को महल घूमने की आजादी इस शर्त पर दिया कि सिर पर तेल से भरा एक घड़ा बर्तन लेकर घूमना होगा और यदि तेल का एक बूंद भी उसके शरीर पर गिरा तो सिर कलम कर दिया जाएगा. वह व्यक्ति पूरा महल घूमने के बाद राजा के समक्ष पेश किया जाता है. राजा पूछते हैं कि बताओ कैसा लगा महल तो उस व्यक्ति ने कहा कि तेल छलकने पर सिर कलम करने का जो आपने आदेश दिया था इसकी वजह से पूरे समय महल घूमने के दौरान ध्यान तेल के बर्तन पर ही रहा, महल को घुमा तो लेकिन ध्यान से देख ही नही पाया. उन्होंने इस कहानी को बिहार और बिहारियों के संदर्भ में कहा. उन्होंने व्यापार पर चर्चा करते हुए कहा कि ब्रेक इवन पॉइंट से बाहर निकलने पर ही प्रॉफिट होगा. साथ ही उन्होंने कहा कि जबतक हमारे मिट्टी के लोग ये नही प्रण नही करेंगे कि उन्हें अपने मिट्टी के लिए कुछ करना है तो बिहार का विकास नही हो सकता.

कर्यक्रम के पहले सत्र में अभय कुमार (DDG, ICCR, G20,Poet Diplomat) और CIMP के डायरेक्टर डॉ राणा सिंह को आमंत्रित किया गया. किताब पर चर्चा करते हुए उन्होंने अभय कुमार से पूछा कि इतिहास और अतीत के पन्नो ने उन्हें क्या इंस्पायर किया. इतिहास और कल्चर किसने ज्यादा प्रेरित किया. इसपर जवाब देते हुए अभय कुमार ने कहा कि मैं मगही क्षेत्र से हूँ. मैं मगही किताब ढूंढता था तो नही मिलती थी तो मैंने कविता लिखी और वह जो प्रकशित हुई तब लोगों ने बताया कि मगही में बहुत सी रचनाये हैं. फिर मैंने मगही पर काम शुरू किया फिर उसके अलावां मैने बाकी भोजपुरी, अंगिका, बज्जिका, जैसे कई भाषाओं को एक साथ पिरोने का काम शुरू किया. फिर इस किताब की परिकल्पना की 2021 में. मेरी अज्ञानता ने मुझे इस किताब के लिए प्रेरित किया. रामधारी सिंह दिनकर जी की रश्मि रथी ने सबसे ज्यादा प्रेरित किया. विद्यापति के किताबों का अनुवाद किया.

तकनीक ही दे सकता अफोर्डेबल एजुकेशन

दूसरा सत्र में बतौर वक्ता विकास वैभव (IG पुलिस और अपराध अनुसंधान), डॉ राणा सिंह (डायरेक्टर-CIMP), रवि प्रकाश (डायरेक्टर, प्राइमरी एजुकेशन, GoB), और पंकज कुमार (कार्यकारी एडिटर,TV9 भारतवर्ष) रहे.

डॉ राणा सिंह ने विषय प्रवेश कराते हुए पैनल में शामिल लोगों से पूछा कि कैसे एजुकेशन को आसान बनाया जाए इसके लिए एजुकेशन काउंसिल,तकनीक और इंस्टिट्यूट को हमे आगे लाना होगा. ओपेन प्लेटफॉर्म लाना होंगा.

इसपर IPS विकास वैभव ने कहा कि तकनीक ही चेंज ला सकता है.अफोर्डेबल एजुकेशन तकनीक ही दे सकता है लेकिन बेहतर शिक्षक ही दे सकते हैं. कोविड के दौरान शुक्रगुजार हूँ कि तकनीक ने शिक्षा को जारी रखा. लेकिन ज्ञानी पुरुषों का रहना इसके लिए बहुत जरूरी है. बिहार वह भूमि है जहाँ ज्ञानियों की भरमार है. एजुकेशन के लिए शिक्षक कहीं के हों गांव या शहर ये मायने नही रखता बस बेहतर लोग चाहिए. उन्होंने कहा कि 4 साल पहले मैंने कुछ छात्रों से मिला तो जाना कि B.Tech की डबल डिग्री उनके पास हैं. ऐसे लोग ही एंटरप्रेन्योरशिप लेकर आ रहे हैं तो एजुकेशन का आना बेहतर है और इसमें थोड़ा समय लगेगा.

वही बिहार सरकार के प्राइमरी एजुकेशन के डायरेक्टर रवि प्रकाश ने अफोर्डेबल एजुकेशन पर बात करते हुए बताया कि हम इसके लिए प्रतिबद्ध हैं अफोर्डेबल और बेटर एजुकेशन के लिए. इस दिशा में सरकार काम कर रही है. लेकिन जब तकनीक की बात होती है तो BYJUS जैसे प्राइवेट कंपनी की बात होती है. हम ई एजुकेशन पर काम कर रहे हैं. डाटा, डिवाइस और कॉंटेन्ट पर काम करना जरूरी है ताकि तकनीक का एजुकेशन में बेहतरीन उपयोग हो सके. हमने पिछले साल तकनीक के साथ कोलैबोरेशन कर एक एक्जाम कंडक्ट किया 6-8 तक के छात्रों के लिए एक छत्रवृति योजना लाकर और यह जानकर खुशी हुई कि 6 क्लास का छात्र HC वर्मा जैसी शख्सियत से बात कर रहे हैं.

पंकज कुमार ने कहा कि देश में कई जगहों पर घूमने के दौरान एजुकेशन के कई पहलुओं को देखने को मिला. बिहार में बेहतर ब्रेन है लेकिन ये भी है कि एजुकेशन को लेकर जो कई दफा मजाक बनाया गया है वो भी याद रखना होगा. हमें ये देखना होगा कि एजुकेशन को बदलने के दौरान साइकिल,
पोशाक योजना और चरवाहा विद्यालय जैसे चेंज भी किये जा सकते हैं जिसको हमने देखा.

निखिल नरेन ने बात करते हुए कहा कि पहले अफोर्डेबल एजुकेशन को कैसे बनाया जाए इसपर काम करना होगा. केवल मिड डे मील खाने आते हैं ऐसा नही है. PTR अच्छे होने चाहिए क़्वालिटी टीचर नियुक्त कर रहे हैं. इस पर आधरित समझ विकसित किया गया है. लर्निंग आउट कम पर फोकस हो हम एजुकेशन पर काम कर रहे हैं. क्लास 1-3 तक के छात्रों को 60 तक की गिनती पढ़ना नही आता है तो उसके लिए भी प्रोग्राम विकसित किया गया. निपुण पंचायत मिशन विकसित किया जा रहा है स्वच्छता मिशन की तरह ताकि बच्चे निपुण हो सके. ये अलग बात है परिणाम देर से आते हैं. ये अलग बात है कि कभी- कभी जल्दी परिणाम आते हैं.

कृषि, टेक्सटाइल और फ़ूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र है बिहार : के सिद्धार्थ

GTRI के मुख्य प्रेरणा स्त्रोत मुख्य सचिव बिहार सरकार, के. सिद्धार्थ विदेश में रहने की वजह से पहले दिन देर शाम को पहुँचे जिसकी वजह से पहले दिन उन्होंने मंच साझा नही किया. दूसरे दिन उन्होंने GTRI मंच पर अपने अविभाषण मे आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि GTRI एक अद्भुत मंच है.

मेहनत करने की क्षमता ही बिहार को अव्वल बनाता है. बिहार एक ऐसा जगह है जहाँ हर क्षेत्र में बेहतर करने की संभावनाएं भरी पड़ी हैं. जरूरत है सकरात्मक सोंच की. यहाँ जरूरत है वैसे सकरात्मक सोच वाले लोगों की जो अपनी मिट्टी के लिए निवेश की सोचते हों. यहां प्राइवेट सेक्टर के निवेश की जरूरत है. साथ ही जरूरत है बेहतर और उचित प्रशिक्षण की जिससे बेहतर कार्य प्रणाली को विकसित किया जा सके. बिहार कृषि , टेक्सटाइल और फ़ूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों की पॉलिसी में परिवर्तन कर सबके लिए आकर्षण का केंद्र बना है.

स्टार्ट अप के लिए ब्रांडिंग और कस्टमर इनसाइट

तृतीय सत्र में वक्ता के रूप में रवि रंजन, प्रेजेंटर ऑफ रॉयल फैमिली ऑफ दुबई, चैतन्य कुमार सुवनम, कंट्री हेड IDFC बैंक और शिवेश सिंह, कंट्री हेड(HR) बंधन बैंक मंच पर आसीन हुए.

शिवेश सिंह, कंट्री हेड (HR) बंधन बैंक ने बिहार में उद्यमिता विकास पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि बंधन बैंक ने युवाओं को फण्ड करने के लिए आकर्षक योजनाओं को चला रही है. उन्होंने कहा कि स्टार्ट अप का उद्देश्य समाज की समस्याओं पर काम करने का होना चाहिए, बंधन बैंक के पास कई प्रोडक्ट हैं जो बहुत सारे स्टार्ट अप फण्ड करती है.

आईडीफ़सी बैंक के कंट्री हेड, चैतन्य कुमार सुवनाम ने कहा कि स्टार्ट अप इकोसिस्टम को मजबूत करने पर काम कर रही है. रिस्क इवैल्यूएशन पैरामीटर्स को बैंक ने बदला है ताकि ज्यादा से ज्यादा फंड स्टार्ट अप को उनके बिज़नेस मॉडल को देख कर दिया जा सके.

वही रवि रंजन ने बताया कि कोई भी देश या राज्य उद्यमिता के बल पर ही आगे बढ़ सकती है. स्टार्ट अप के लिए ब्रांडिंग और कस्टमर इनसाइट की बहुत जरूरत है. इनोवेशन की जरूरत है एक सफल प्रोडक्ट बनाने की जरूरत है. अच्छे स्टार्ट फंडिंग के लिए आज बहुत सारे विकल्प खुले हैं. बैंकिंग प्रोडक्ट में भी कई इनोवेशन करने की जरूरत है.

कार्यक्रम का शानदार मंच संचालन शैलेश कुमार ने किया. आयोजन को आयोजित करने वालों में क्यूरेटर अदिति नन्दन, वैशाली श्वेता, प्रत्यूष गौरव, देवेन्द्र सिंह, संध्या नंदन, दिव्यम आर्यन,राहुल कुशवाहा, और निखिल कुमार की विशेष भूमिका रही. दूसरे दिन भी तीन सत्र में कई नामी चेहरे देखने को मिलेंगे. तीन सत्र के बाद कार्यक्रम का समापन होगा.

पटना से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट

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