नृत्य सबके जीवन में होता है पर कुछ लोग इसे समझ पाते हैं-बिरजू महाराज

By pnc Dec 21, 2016

सांस्कृतिक संस्था निनाद का तीन दिवसीय कार्यक्रम ‘तालीम’ 

कथक और ठुमरी के अंतर्संबंधों पर व्याख्यान सह प्रदर्शन की प्रस्तुति




ठुमरी गंगा जमुनी संस्कृति से पोषित है

लखनऊ घराने की खासियत नजाकत है

हर गाने बजाने वाले की मंजिल सम होती है.सम न मिले तो सब बेकार है

सांस्कृतिक संस्था निनाद की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम तालीम के दूसरे दिन का आयोजन दो चरणों में हुआ . प्रथम चरण में कथक कार्यशाला में प्रतिभागियों ने कथक की बारीकियों से अवगत हुए. जिसमें भाव गत आमद टुकड़े और परन की जानकारियाँ ग्रहण की.कार्यक्रम के दूसरे  चरण में कथक और ठुमरी के अंतर्संबंधों पर व्याख्यान सह प्रदर्शन की प्रस्तुति की गई. कार्यक्रम की शुरुआत प्रख्यात नृत्यांगना नीलम चौधरी के परिचयात्मक अभिभाषण से हुई जिसमे उन्होंने ठुमरी के इतिहास और वर्तमान सन्दर्भ में कत्थक और ठुमरी के अंतर्संबंधों का परिचय देते हुए कहा कि समाज में आज जरुरत है कि हम शास्त्रीयता को स्थान दें .उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम कुछ ग्रहण करने का कार्यक्रम है. उन्होंने कहा कि गुरुओं के गुरू पं बिरजू महाराज इस घराने की सातवीं पीढ़ी से आते हैं जो ठुमरी की विशेषज्ञों कालिका महाराज बिंदादीन महाराज का घराना है. ठुमरी गंगा जमुनी संस्कृति से पोषित है.ठुमरी में शुद्ध नृत्य के के अलावा अभिनय का अंग भी आता है. नृत्य के दो अंगो तांडव और लास्य में ठुमरी लास्य अंग का नृत्य है.लखनऊ घराने की खासियत नजाकत है और ठुमरी के साथ लखनऊ घराने के सुन्दर सम्बन्ध भी है. ठुमरी के गायन में स्वतंत्र रागों जैसे झिंझोटी,पीलू आदि का इस्तेमाल किया जाता है .इस सत्र के बाद गया घराने के कामेश्वर पाठक जो पूर्वी अंग की ठुमरी विशेष जानकार हैं उन्होंने’ कौने गली गए श्याम देख सखी’ ठुमरी और राग पहाड़ी में’ बैदा अनारी नदिया न जाने’ ठुमरी की प्रस्तुति कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया.गायन में उनका साथ दिया राजेन्द्र सिजवार और वादन में सारंगी उमेश मिश्र तबला-राजशेखर ने. उन्होंने ठुमरी की प्रस्तुति के साथ ठुमरी गायन के विभिन्न घरानों की प्रस्तुति के अंदाज की विविधता को प्रस्तुत किया जिसे लोगों ने सराहा. निनाद के निदेशक राजीव सिन्हा ने पं बिरजू महाराज और शास्वती सेन के आदेश पर ‘काहे बनाओ झूठी बतिया हमसे‘ ठुमरी की भावपूर्ण  प्रस्तुति दी .

इसके बाद शुरू हुआ पं बिरजू महाराज का कार्यक्रम .उनके मंच पर आते ही दर्शकों उन्हें  भरपूर सम्मान देते हुए जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया.इस मौके पर पं बिरजू महाराज ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि नृत्य सबके जीवन में होता है पर कुछ लोग इसे समझ पाते हैं.जीवन लय से चलता है. हृदय की धड़कन एक लय में चलती है कभी ठाह कभी दुगुन कभी चौगुन .जीवन का हर कार्यकलाप लय में ही चलता है.कई जीवंत उदाहरण देते हुए उन्होंने लय को बड़े ही सरलता से समझाया.उपस्थित दर्शक भी उनके बताए लय की प्रस्तुतियों में खोते दिखे.पं बिरजू महाराज ने चिड़ियों का दाना चुगना ,बचपन जवानी और बुढ़ापा को गिनती की तिहाइयों के माध्यम से दिखाया.उन्होंने कहा कि हर गाने बजाने वाले की मंजिल सम होती है.सम न मिले तो सब बेकार है.प्रख्यात कथक नृत्यांगना विदुषी शाश्वती सेन ने एकल नृत्य का प्रदर्शन की शुरुआत खुबसूरत तिहाइयों से की .डगर चलत देखो श्याम कर गईया ठुमरी की प्रस्तुति की.  उसके बाद दर्शकों के विशेष आग्रह पर पं बिरजू महाराज की रचना राधा रानी कृष्ण रूप धरे मंद मंद मुस्काई पर अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी .

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