नहीं रहे जॉर्ज फर्नांडीज | बिहार में दो दिनों (29 एवं 30 जनवरी) की राजकीय शोक की घोषणा


नहीं रहे जॉर्ज फर्नांडीज | दिल्ली मे ली आखिरी सांस | कई दिनों से थे बीमार | अल्जाइमर बीमारी से ग्रसित थे

पटना (राजेश तिवारी की रिपोर्ट) | भारत के पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का मंगलवार तड़के दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में निधन हो गया. वे 88 वर्ष के थे. फर्नांडिस लंबे समय से बीमार चल रहे थे. वह अल्जाइमर से ग्रस्त थे, साथ ही उन्हें स्वाइन फ्लू भी था. वाजपेई सरकार में रक्षा मंत्री रहे जॉर्ज फर्नांडीज एक जुझारू नेता के रूप में जाने जाते थे. वे कई बार लोकसभा राज्यसभा का सांसद भी रहे थे. जॉर्ज फर्नांडिस सबसे पहले साल 1967 में लोकसभा सांसद चुने गए. उनके कार्यकाल के दौरान ही पोखरण में परमाणु टेस्टिंग और करगिल युद्ध हुआ था. 2004 में ताबूत घोटाला सामने आने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. बाद में दो अलग-अलग कमिशन ऑफ इन्क्वायरी में उन्हें निर्दोष करार दिया. आखिरी बार अगस्त 2009 से जुलाई 2010 तक राज्यसभा के सांसद थे लेकिन अल्जाइमर नामक बीमारी से ग्रस्त होने के बाद राजनीति से कट गए थे.

ऐसे बने फर्नांडिस एक बड़े नेता
1974 की रेल हड़ताल के बाद वह कद्दावर नेता के तौर पर उभरे और उन्होंने बेबाकी के साथ इमर्जेंसी लगाए जाने का विरोध किया. 1975 में इंदिरा गांधी की ओर से लगाए गए आपातकाल के दौरान उन्हें जेल में डाल दिया गया था. उन पर सरकारी प्रतिष्ठानों और रेलवे पटरियों को उड़ाने के लिए ‘बड़ौदा डायनामाइट षड्यंत्र’ रचने का आरोप लगाया गया था. इन सब के चलते जॉर्ज फर्नांडिस इमर्जेंसी के वक्त के हीरो के तौर पर उभरे. 1977 में उन्होंने जेल से चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड वोटों से जीते.
जब 1977 में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी तो उन्हें मंत्री बनाया गया. इस दौरान उनका सबसे बड़ा कदम था कि उन्होंने कोका कोला और आईबीएम को झुकने पर मजबूर कर दिया था. इन कंपनियों ने अपने भारतीय सहयोगियों में अपनी हिस्सेदारी कम करने से मना कर दिया था. कोक ने उस वक्त भारत छोड़ दिया था. उसके 20 साल बाद कंपनी ने वापस भारत में एंट्री की.
किंग जॉर्ज V की फैन थी मां, उन्हीं के नाम पर नाम रखा जॉर्ज
3 जून, 1930 को जन्मे जॉर्ज फर्नांडिस 10 भाषाओं के जानकार थे- हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, कन्नड़, उर्दू, मलयाली, तुलु, कोंकणी और लैटिन. उनकी मां किंग जॉर्ज पंचम की बड़ी प्रशंसक थीं. उन्हीं के नाम पर अपने छह बच्चों में से सबसे बड़े का नाम उन्होंने जॉर्ज रखा था.




मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हुए अत्यंत भावविह्वल, कहा अपना अभिभावक खो दिया
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली स्थित पंचशील पार्क में मंगलवार को स्व जॉर्ज फर्नांडिस के आवास पर जाकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया एवं उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी. उन्होंने स्व फर्नांडिस की धर्म पत्नी से मुलाकात कर अपनी शोक संवेदना व्यक्त की. भाव विह्वल होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि फर्नांडिस का निधन उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है. उनके निधन से उन्होंने अपना अभिभावक खो दिया है. पत्रकारों से बात करते हुए अपने शोक का उदगार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जॉर्ज साहब के निधन से आमजन सभी अत्यंत मर्माहत हैं. पिछले कुछ दिनों से वे बीमार चल रहे थे. जॉर्ज साहब का जो योगदान इस देश की राजनीति में रहा है और जो कुछ भी उन्होंने समाज के लिए किया है वह सदैव याद रखा जाएगा. सिद्धांत एवं समाजवादी विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव रही. उनकी इक्षा-शक्ति काफी मजबूत थी. अपनी युवावस्था से ही उन्होंने जिस ढंग से लोगों के हक की लड़ाई लड़ी उसे भुलाया नहीं जा सकता है.

नीतीश कुमार ने कहा कि संसद में उनका काफी योगदान रहा है. रक्षा मंत्री, रेल मंत्री एवं अन्य मंत्रालयों के मंत्री के तौर पर उनकी भूमिका भुलाई नहीं जा सकती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जॉर्ज साहब हमलोगों के न सिर्फ नेता थे बल्कि अभिभावक भी थे. 1994 में उन्हीं के नेतृत्व में नई पार्टी बनी. उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में जो कुछ भी सीखने का अवसर मिला और आज जो कुछ भी लोगों की सेवा करने की कोशिश करते हैं इसमें उनका ही योगदान रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि वे उनके अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। उनके पुत्र अमेरिका में हैं जो बुधवार तक आ पाएंगे. उनके आने के बाद ही अंतिम संस्कार होगा. उन्होंने आगे कहा कि वे जॉर्ज साहब के आदर्शों एवं उनके बताए रास्ते ओर हमेशा चलते रहेंगे.
इस अवसर पर बिहार सरकार के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, सांसद आर सी पी सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन, बिहार राज्य योजना पर्षद सदस्य संजय झा एवं अन्य लीग मौजूद थे.

दिवंगत नेता जॉर्ज फर्नांडिस के सम्मान में बिहार सरकार ने दो दिनों (29 एवं 30 जनवरी) की राजकीय शोक की घोषणा की है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री ने समाजवादी नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया और कहा कि “वे गरीबों एवं वंचितों के अधिकारों की सर्वाधिक प्रभावी आवाज़ थे. मोदी ने अपने शोक संदेश में कहा कि जॉर्ज साहब भारत के सर्वश्रेष्ठ राजनीतिक नेताओं में से एक थे. बेबाक एवं निर्भीक, बेलागलपेट एवं दूरदर्शी फर्नांडिस ने हमारे देश के लिए अमूल्य योगदान दिया. वे गरीबों एवं वंचितों के अधिकारों की सर्वाधिक प्रभावी आवाज़ों में से एक थे. उनके निधन से मैं बहुत दुखी हूं.”

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जताया शोक
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस के निधन पर शोक व्यक्त किया. गांधी ने ट्वीट कर कहा कि मुझे पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री जॉर्ज फर्नांडिसजी के निधन के बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ. दु:ख की इस घड़ी में उनके परिवार और मित्रों के प्रति मेरी संवेदनाएं.