गांधी मैदान नहीं गुरू की नगरी है साहब

बिहार की राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान ‘गुरु की नगरी’ में तब्दील हो गया है जहाँ कभी पार्टियों के नारे और चुनावी भाषण होते थे वहां आज सिखों के दसवें गुरु गुरुगोविंद सिंह की छोटी नगरी के रूप में नजर आ रहा है.

देशभर के 250 कारीगरों ने दिन-रात मेहनत कर गांधी मैदान में अस्थायी गुरुद्वारा बनाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है .गांधी मैदान में सुरक्षा के भी व्यापक प्रबंध किये गए हैं .गेट से प्रवेश करते ही आपको अपने जूते चप्पल निकाल देने होंगे और नंगे पाँव ही आप गांधी मैदान में 350वें प्रकाशोत्सव को लेकर अस्थायी गुरुद्वारा तक पहुंच सकते हैं.जहाँ लोग प्रार्थना करते और सेल्फी लेते आपको दिख जायेंगे . गुरु गोविन्द सिंह जी के प्रतीक चिन्ह की प्रतिकृति भी आप यहाँ देख सकेंगे.एक पल के लिए तो आपको यह अहसास भी नहीं होगा की आप गांधी मैदान में हैं .आधुनिक प्रकाश व्यवस्था आपके मन को मोह लेगी और आपके मुंह से अनायास ही निकल जाएगा वाहे गुरु जी की खालसा वाहे गुरु जी फतह.




प्रकाशोत्सव को लेकर आने वाले श्रद्धालु सिखों के दसवें गुरु गुरुगोविंद सिंह की जन्मस्थली तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब में मत्था टेकना प्रथम उद्देश्य होता है, लेकिन देश दुनिया से आने वाले श्रद्धालु गांधी मैदान में स्थित अस्थायी गुरुद्वारा देखने जरूर आ रहे हैं क्योंकि जो भव्यता उन्हें यहाँ देखने को मिल रही है वो गुरुद्वारे में नहीं .कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वहां जा कर पूजा कर रहे हैं और यहाँ आकर थोड़ी देर बैठ कर शान्ति से पटना की स्मृतियों को संजो रहे हैं. लोगों के मन मस्तिष्क में पटना में किये गए अभूतपूर्व आयोजन को लेकर बहुत ख़ुशी है जिसके लिए उन्होंने यहाँ की सरकार और जिलाप्रशासन को लख लख बधाई देना भी नहीं भूल रहे हैं.गांधी मैदान में आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए बने टेंट सिटी के बीच बने इस अस्थायी गुरुद्वारा के सामने खड़े होकर सेल्फी लेना नहीं भूल रहे है वे कहते है कि 350वें जन्मदिवस की यादें सदा के लिए हमारे साथ होंगी.

गांधी मैदान के अस्थायी गुरुद्वारे में तीन दीवान हॉल बनाए गए हैं. एक हॉल 40 मीटर तो दूसरा 30 और तीसरा 30 मीटर लंबा है. दीवान हॉल में गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश पर्व होगा. प्रकाश पर्व की दायीं तरफ कीर्तन का आयोजन किया, जाएगा जबकि दूसरी तरफ गणमान्य अतिथियों के बैठने की व्यवस्था होगी.इसके अलावा हजारों श्रद्धालु गुरु की वाणी सुनेंगे. दीवान हॉल में करीब 25 से 30 हजार श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की गई है.रात में दीवान हॉल का प्रवेश द्वार रोशनी से जगमग रहे इसके लिए कोलकाता से 450 एलईडी शार्पिग लाइट लगाई गई है.’जर्मन हैंगर’ की मदद से दीवान हॉल बनाया गया है जो अपने आप में देखने लायक बन है.

गांधी मैदान में अस्थायी गुरुद्वारा, तीन लंगर, श्रद्धालुओं के रहने के लिए टेंट सिटी, जोड़ा घर और सामान घर के साथ गतका कार्यक्रम के लिए एक छोटा स्टेडियम बनाया गया है.बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी इस अस्थायी गुरुद्वारा को देखकर रोमांचित हो रहे हैं. पंजाब से अपने पूरे परिवार के साथ प्रकाश पर्व में भाग लेने आए सिख श्रद्धालु अमरदीप सिंह कहते हैं कि बिहार सरकार ने बहुत अच्छा इंतजाम किया है.गांधी मैदान को आकर्षक ढंग से सजाया गया है. आने वाले श्रद्धालु निहाल हो जा रहे हैं. गांधी मैदान में तो गुरु की नगरी ही बस गई है.

तीन जनवरी मार्शल आर्ट, गतका पार्टी अपना जौहर दिखाएंगे, जबकि चार जनवरी को गांधी मैदान से भव्य नगर कीर्तन निकलेगा. प्रकाश उत्सव का मुख्य आयोजन पांच जनवरी को होना है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भाग लेंगे. इस दिन गांधी मैदान में मुख्य दीवान सजेगा.