अन्नी अमृता की पुस्तक ‘’मैं इंदिरा बनना चाहती हूं’’ का लोकार्पण




झारखंड की वरिष्ठ पत्रकार सह एक्टीविस्ट हैं लेखिका

कोविड काल में शहीद हुए पत्रकार पंकज की पत्नी मनीषा हुई सम्मानित

झारखंड की वरिष्ठ पत्रकार सह एक्टीविस्ट अन्नी अमृता की दूसरी पुस्तक ‘’मैं इंदिरा बनना चाहती हूं’’ का अनोखे अंदाज़ में विमोचन जमशेदपुर के जेके रेजीडेंसी में रविवार को हुआ. इस मौके पर अनेक पुस्तक प्रेमी, साहित्यसेवी और सियासतदान मौजूद रहे. समारोह के दौरान कोविड काल में शहीद हुए पत्रकार पंकज की पत्नी मनीषा को सम्मानित किया गया.

आम तौर पर पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में पुस्तक पर विस्तार से चर्चा नहीं होती है. औपचारिकताओं के बीच पुस्तक के कंटेंट कहीं खो-से जाते हैं. लेकिन वरिष्ठ पत्रकार अन्नी अमृता की दूसरी पुस्तक ‘’ मैं इंदिरा बनना चाहती हूं’’ का रविवार को टाटानगरी के जेके रेजीडेंसी में अनोखे अंदाज में विमोचन हुआ. समारोह में जहां पुस्तक पर ना सिर्फ चर्चा हुई बल्कि मेट्रो सिटी की तर्ज पर बुक रीडिंग भी हुई. शेरो शायरी के दौर के साथ पुस्तक के भीतर की कहानियों पर सवाल जवाब हुए. प्रश्नोतरी सेशन का शीर्षक था ’’ कुछ सवाल और कुछ उनका जवाब’’.

कार्यक्रम के अतिथियों पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी, युवा फिल्ममेकर सह प्रकाशक अजिताभा बोस, ग्रेजुएट कॉलेज के संस्कृत विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ रागिनी भूषण और जमशेदपुर वुमेन यूनिवर्सिटी में बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. त्रिपुरा झा शामिल रहे. आगत अतिथियों ने पत्रकार सह लेखिका अन्नी अमृता से ना सिर्फ सवाल किए बल्कि उनकी पुस्तक पर चर्चा भी की. अतिथिगण पहले से पूरी पुस्तक पढ़कर आए थे, इस वजह से वहां विस्तार से पुस्तक पर परिचर्चा हुई और उपस्थित लोगों ने खूब आनंद उठाया.

कुणाल षाडंगी भी कहानी में पात्र –

पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने पुस्तक के एक चैप्टर ‘’नेता बनना कोई मजाक है क्या” पर सवाल किया जो व्यंग्यात्मक तरीके से अन्नी द्वारा लिखा गया है. कुणाल ने पूछा कि क्या वाकई लोगों को ऐसा लगता है क्या कि नेता सुख-दुख में शामिल होकर जो हाव भाव प्रकट करता है, वह एक्टिंग होता है और इमोशन नहीं? इस पर अन्नी अमृता ने कहा कि नेता एक प्रकार का परफॉर्मर होता है. लेकिन वह भी एक इंसान होता है और भावनाओं से परे नहीं हो सकता. बल्कि नेता और आम इंसान सभी इसी दुनिया के हैं और सब अपनी-अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं. जो एक प्रकार का परफॉर्मेंस देना ही तो है. कुणाल ने पुस्तक में कोविड काल के दौरान की कुछ कहानियों का जिक्र किया, जिसमें जीवन मौत के बीच झूलती जिंदगियों को बचाने की कवायद के साथ-साथ मौत के बाद परिजनों की अनुपस्थिति में दाह संस्कार की व्यवस्था जैसे कार्य में जुटे स्वयंसेवको में कुणाल षाड़ंगी खुद एक पात्र के तौर पर नज़र आए हैं. कुणाल ने चर्चा करते समय बताया कि उस दौरान ऑपरेशन से गुजरने के बावजूद अन्नी अमृता ने ट्वीटर के माध्यम से लोगों की मदद का अभियान जारी रखा और उनके माध्यम से कई मामले संज्ञान में आए.

क्या बोले प्रकाशक अजिताभा बोस-

मशहूर अंग्रेजी लेखक सह फिल्ममेकर और किताब के प्रकाशक अजिताभा बोस ने उपस्थित लोगों को बताया कि कैसे अन्नी दी के इस दूसरी पुस्तक के प्रकाशन की योजना बनी. कैसे इसके शीर्षक में कुछ बदलाव किए गए. अन्नी अमृता ने उपस्थित लोगों को बताया कि अजिताभा बोस अपने पब्लिकेशन हाउस अजिताभा पब्लिकेशन हाउस के माध्यम से नए लेखकों को प्लेटफॉर्म देने का काम कर रहे हैं, जो प्रशंसनीय हैं.

कार्यक्रम में शोरो- शायरी के रंग-

कार्यक्रम में चार चांद तब लगा जब सवाल करने डॉ रागिनी भूषण और डॉ त्रिपुरा झा पहुंची. ’न लगा सकेगा ये ज़माना इश्क पर इल्ज़ाम, हम छुप छुपकर जो वफा करते हैं’’. डॉ त्रिपुरा झा ने पुस्तक की एक कहानी—‘अनकहा ब्रेकअप’ में लिखी इस शायरी को पढ़कर सुनाया तो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. फिर पढ़ा- ‘’खुदा तेरी मुहब्बत भी कमाल है, एक दिल मेरा बनाया बार-बार टूटने के लिए’. डॉ त्रिपुरा के शब्द निकलते हीं हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. तब जाकर कईयों को पता चला कि किताब में बहुत कुछ है.

डॉ रागिनी भूषण ने लोगों को बताया कि छात्र जीवन से ही अन्नी अमृता मुखर और ओजस्वी रही हैं. पुस्तक के भीतर के हिस्सों पर ज्यादा खुलासा न करते हुए डॉ रागिनी भूषण ने व्यंग्यात्मक तरीके से लिखे ‘अफवाह’ की चर्चा करते हुए जब उसके हिस्से को पढ़ना शुरू किया, तो लोग हंसते हंसते लोटपोट हो गए.

लेखिका अन्नी अमृता के शब्द-

अन्नी अमृता ने बताया कि उनकी दूसरी पुस्तक 18 कहानियों का संग्रह हैं, जिनमें कोरोना काल की कहानियां, काल्पनिक कहानियां, यथार्थ से प्रेरित कहानियां, अनुभव और व्यंग्य शामिल है. कुछ डिजिटल पोर्टल में छपे आलेख भी शामिल हैं. अन्नी के मुताबिक ये किताब एक भाव और अनुभव है, जो बहुत कुछ समेटे हैं. ये किताब खासकर कोविड काल में शहीद हो गए दिवंगत पत्रकार साथियों और उनके परिजनों को समर्पित हैं. पुस्तक का प्रकाशन दिल्ली के अजिताभा बोस पब्लिकेशन ने किया है, जो ई-कॉमर्स प्लेटफार्म अमेजन पर उपलब्ध है.

दिवंगत पत्रकार की पत्नी का सम्मान-

कार्यक्रम में खास तौर पर कोरोना से दिवंगत हुए पत्रकार पंकज की पत्नी मनीषा को आमंत्रित किया गया था, जिन्हें शॉल और प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया. पुस्तक में एक बहुत मार्मिक कहानी पंकज की मौत पर भी है, जिसे पढ़कर लोग भावुक हुए बिना न रह सके. मानवाधिकार कार्यकर्ता जवाहरलाल शर्मा भी विशेष आमंत्रित अतिथि के तौर पर शामिल हुए. कार्यक्रम में अन्नी अमृता के माता पिता और अन्य परिजन भी शामिल हुए.

कार्यक्रम का संचालन अनिता शर्मा ने किया. पूरे समारोह की रूपरेखा अजिताभा बोस और अंतरा बोस की थी. अनिता शर्मा ने नए तरीके के इस विमोचन कार्यक्रम के संचालन को सुखद अनुभव बताया. उन्होंने कहा कि मेट्रो सिटीज़ में आजकल पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम ऐसे ही होते हैं. अब ये प्रचलन जमशेदपुर में भी आ रहा है, जिसका स्वागत होना चाहिए. अंतरा बोस ने कहा कि आज के समय में जब नई पीढ़ी किताबें कम पढ़ रही है,  उन्हें किताबों के प्रति रुचि जगाने और ऐसे समारोह को रोचक बनाने की जरुरत पड़ी ताकि नई पीढ़ी खुद को कनेक्ट कर सके.

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By pnc

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