रिया शर्मा की चाहत मेरी आवाज़ बने गरीबों की आवाज




अभिनेत्री रिया शर्मा की कलम से …

बचपन से बहुत गरीबी देख कर बड़ी हुई हूं
मेरी मां ने मुझे एक और नई ज़िंदगी दी . एक बार जन्म दे कर और दूसरी बार मुझे मौत के मुंह से निकाल कर

भरोसा हैं खुद पर और कोशिश करूंगी की अपने सपनों को साकार कर पाऊं

जीवन में अगर कुछ बुरा होता है तो कुछ अच्छा और बेहतर होने के लिए इसलिए मुस्कुरा कर बस आगे बढ़ रही हूं.

पटना : यूं तो मैं बचपन से ही कला में रुचि रखती हूं.मैं बहुत छोटी थी तब मैं ज़िन्दगी और मौत से लड़ रही थी .तब मेरी मां ने मुझे एक और नई ज़िंदगी दी . एक बार जन्म दे कर और दूसरी बार मुझे मौत के मुंह से निकाल कर. मां ने बहुत मेहनत किया .बचपन से बहुत गरीबी देख कर बड़ी हुई. मां कड़ी धूप में जाती थी सर्वे का काम करने ताकि उनके बच्चे पढ़ सके.मां चाहती मेरी बिटिया सीबीएसई स्कूल में पढ़ाई करे लेकिन उतने पैसे नहीं थे होते थे मां के पास. तब मां ने सिलाई का काम शुरू किया.जीवन की गाड़ी चल रही थी .

अभिनेत्री रिया शर्मा

मैंने धीरे धीरे बहुत मुश्किल से पढ़ाई की.तब 2012 में मेरी कला की यात्रा शुरू हुई और मैं कला की ओर चल निकली . किलकारी बिहार बाल भवन में डांस सीखने के लिए एडमिशन लिया और करीब तीन साल तक डांस सीखती रही. इस क्रम में मेरी तबियत खराब हुई और डॉक्टर ने डांस करने से मना कर दिया। अब ऐसा लग रहा था कि मेरे कला जीवन की गाड़ी यहीं रुक गई.मैं रातों को सो नहीं पाती थी.क्या करूँ तब मैंने संगीत शुरू किया और कुछ महीने तक संगीत सीखा लेकिन पैसे की किल्लत होने से फीस नहीं दे पाती थी. तब संगीत की गाड़ी भी रुक गई .

2017 में तब मैं ग्यारहवी क्लास में थी .मैं पढ़ाई में थोड़ी कमजोर हो गई थी क्यूंकि मुझे संगीत और डांस का हिस्सा बनना था मैं जी जान से लगी थी सीखने में. संगीत नृत्य में पागलों सी रुचि ,इसलिए पढ़ाई भी करने का दिल नहीं करता था और रिजल्ट एक बार फेल भी हुई . दसवीं में मेरी दोनो बहनों की शादी हो गई थी 2017 और 2018 में तब मुझे काम की जरूरत थी तब मैंने पार्ट टाइम जॉब करना शुरू किया .अग्रवाल इंग्लिश इंस्टीट्यूट में काउंसलिंग का काम किया. फिर एक इंडस्ट्रियल कंपनी में कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया.2018 में दिसंबर में मेरी एक दोस्त ने कहा कि मैं थियेटर करूं और अपनी कला को आगे बढ़ने का मौका दूं .

उन दिनों मैंने एक यूट्यूब वीडीयो भी बनाया था जिसमें लोगों को मेरी एक्टिंग पसंद आई.सबने कहा मैं और मेहनत करूं. फिर पहला नाटक किया ‘जनतागिरी’ नुक्कड़ नाटक था .उसके बाद कुछ प्रोजेक्ट भी किए.2019 में 18 सितंबर को एक प्रोडक्शन हाउस की तरफ से मैंने सोलो एक्ट और मिमिक्री किया और फर्स्ट प्राइज जीती.तब मेरा कॉन्फिडेंस बढा.मिमिक्री मैंने कहीं से सीखी नहीं थी . टीवी में कार्टून्स और एक्टर की आवाज़ को कॉपी करने की आदत थी. कॉपी करते करते मिमिक्री सीखी. एंकरिंग करना शुरू किया.आज बहुत से इवेंट में एंकरिंग करती हूं अब कुछ अच्छा चल रहा था कि दवा के इंफेक्शन से मेरे चेहरे ज़ख्म भी हो गए थे . काफी लंबे समय तक मैं परेशान रही. कुछ लोगो ने मुझे काम देना बंद कर दिया ये कह कर कि पहले मैं पहले अपना चेहरा ठीक करूं . उन्हें गुड लुकिंग चाहिए.बस मेरे हाथों से अच्छे-अच्छे काम चले जाते थे. डेढ़ साल तक मैं बहुत डिप्रेशन में चली गईं . मैंने बहुत से डाक्टर से संपर्क किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी. कहते हैं ना जब समय खराब हो तो भगवान और पैसे साथ नहीं देते. बहुत मेहनत और इंतज़ार करने के बाद मेरा चेहरा ठीक हुआ तब मुझे और भी अच्छे काम मिले हाल ही में मेरी एक एलबम सॉन्ग आई थी ‘ज़िंदगी मेरी’.

नाटक राइडर्स टू द सी में रिया शर्मा

उसके बाद पहला नाटक राइडर्स टू द सी में नोरा के चरित्र में सबके सामने वापस आई. इस नाटक में मुझे किरदार निभाने का मौका राजेश राजा ने दिया और मैं एक नई रिया शर्मा बनकर आई .अभी मैं ग्रेजुएशन कर रही हूं और साथ ही मास कम्युनिकेशन भी कर रही हूं.मुझे भविष्य में एक अच्छी आर जे बनना है . रेडियो जॉकी बन कर लोगों तक अपनी आवाज पहुंचाऊं.सपना तो यही है कि मेरी आवाज गरीब लोगों की आवाज़ बनें . उनकी मदद करूंगी जो मेरी तरह स्ट्रगल कर रहें हैं उन्हें अच्छे अवसर दूँ।

अभिनेत्री रिया शर्मा

मैं अपना एक अनाथ आश्रम, एक एनजीओ और एक गेस्ट हाउस बनना चाहती हूं . भरोसा हैं खुद पर और कोशिश करूंगी की अपने सपनों को एक कारगर रूप दे सकूं. कहते हैं न इंसान को जब तक खुद पर भरोसा हैं जब तक खुद हार नहीं मानते तब तक उन्हें कोई हरा नहीं सकता. इसलिए खुद पर भरोसा रखना चाहिए और कुछ चीजों को इग्नोर करना चाहिए ताकि आप हर मुसीबत का सामना अकेले कर सके. जीवन में अगर कुछ बुरा होता है तो कुछ अच्छा और बेहतर होने के लिए इसलिए मुस्कुरा कर बस आगे बढ़ रही हूं. पिता सुशील शर्मा और मां रीता शर्मा का मेहनत औऱ प्यार के कारण ,बहनों के प्यार ने मेरी हिम्मत को हमेशा से बढ़ाया है.मां बुटीक चलती है पिता जी प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं.मुझे याद तो नहीं हैं पर मेरा बचपन वेस्ट बंगाल सिलीगुड़ी में बीता था. मेरे जन्म के बाद जब मैं तीन साल की थी तब सन 2002 से हम लोग पटना आ गए और यही के होकर रह गए हैं । नई जगहों पर घूमना अच्छा लगता है साथ में खूब काम करना ।कविताएं भी लिख लेती हूं । चाहत यही है कि अपने अभिनय से दुनिया में एक कामयाब अभिनेत्री बन पाऊं।

PNC Desk