सेठ जी का स्वैग: जीत पर जलेबी से होगा स्वागत!
आरा, 14 मई(ओ पी पाण्डेय)। राजनीति भी बड़ी गजब चीज है साहेब! यहां कब अपना पराया हो जाए और पराया अपना… इसका हिसाब खुद चाणक्य भी नहीं लगा पाएंगे। आरा-बक्सर MLC उपचुनाव में इस बार राजनीति से ज्यादा चर्चा जलेबी की हो रही है। कारण हैं संदेश विधायक और पूर्व MLC राधाचरण साह उर्फ सेठ जी!
जदयू से बेटे कन्हैया प्रसाद को मैदान में उतारने के बाद विरोधियों ने सेठ जी पर तंज कसने का कोई मौका नहीं छोड़ा। किसी ने होटल वाला, बालू वाला, तो किसी ने जलेबी बेचने वाला कहकर राजनीतिक व्यंग्य का तड़का लगाया। मजेदार बात ये रही कि तंज कसने वालों में वही चेहरे शामिल थे जो कभी सेठ जी के साथ दाल-भात की तरह हर सुख-दुख में एक प्लेट पर बैठा करते थे।

लेकिन राजनीति का मौसम बदला…पार्टी बदली और रिश्तों की थाली भी उलट गई! जो कल तक साथ बैठकर रणनीति बनाते थे, आज वही विपक्ष में बैठकर बयान तल रहे हैं। कुछ अपनों ने भी वोट में सेंधमारी का पूरा इंतजाम कर दिया। लेकिन सेठ जी का अंदाज अलग निकला।
चुनाव खत्म होने के बाद जब हमने सेठ जी से पूछा कि पहले तो खुद की जीत पर लड्डू की तैयारी की थी, अब सब शांत है… कल के जीत का जश्न कैसा होगा?”
बस फिर क्या था…
सेठ जी मुस्कुराए और ऐसा जवाब दिया कि आसपास बैठे लोग भी हंस पड़े। उन्होंने कहा कि“बेटा चुनाव में खड़ा है और विरोधियों ने मुझे जलेबी बनाने वाला बताया है… तो जीत के जश्न में कल जलेबी ही बंटेगी!”

हमने भी तुरंत पूछ लिया कि“इतनी जलेबी आएगी कहां से?”
इस पर सेठ जी ने ठहाका लगाते हुए कहा कि
“अरे भाई! बेटे के जीत का जश्न है… और मैं खुद जलेबी बनाता हूं। मुझसे बढ़िया कौन बनाएगा? खुद छानूंगा और छनवाऊंगा… गर्मागर्म जलेबी खिलाऊंगा!”
यही नहीं…उन्होंने विरोधियों को भी खुले दिल से न्योता दे डाला। कहा कि“जीत का जश्न है… जो भी आएगा अपना ही होगा। विरोधी भी आएं, जलेबी खाएं। अतिथि देवो भवः हमारी संस्कृति है।”
अब भोजपुर की राजनीति में लोग सीटों से ज्यादा इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि“रिजल्ट के बाद सत्ता की मिठास ज्यादा होगी या सेठ जी की गर्मागर्म जलेबी!”
