आख़िरकार यशवंत सिन्हा ने बीजेपी से नाता तोड़ ही लिया

By Nikhil Apr 21, 2018

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) । जैसा की लग रहा था, पार्टी से नाराज यशवंत सिन्हा ने आज शनिवार को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में आयोजित एक कार्यक्रम में बीजेपी का साथ छोड़ने का ऐलान कर ही डाला. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब वे किसी राजनीतिक पार्टी के माध्यम से पॉलिटिक्स नहीं करेंगे बल्कि पार्टी पॉलिटिक्स से वे सन्यास ले रहे हैं. मतलब उन्होंने अपने एक्टिव राजनीतिक कैरियर के संन्यास की भी घोषणा कर दी.
एडीए सरकार के खिलाफ विभिन्न दलों को एक मंच पर लाने की कवायत में पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में “राष्ट्र मंच” की ओर से यह आयोजन किया गया. बताते चले कि सिन्हा ने इसी साल 30 जनवरी को “राष्ट्र मंच” के नाम से एक नए संगठन की स्थापना की थी. सिन्हा के मुताबिक यह संगठन गैर-राजनीतिक होगा और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करेगा. शनिवार को कई विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मीटिंग के बाद यशवंत सिन्हा ने यह फैसला लिया. मालूम हो कि यशवंत सिन्हा मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार से नाराज चल रहे थे. कई मौकों पर वे खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर भी कर चुके थे. जबकि उनके बेटे जयंत सिन्हा पीएम मोदी के कैबिनेट के वर्तमान सदस्य हैं. शनिवार को सिन्हा ने कहा कि एनडीए शासन के तहत लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर कर दिया गया है.
पिछले दिनों एक अंग्रेजी दैनिक में लिखे एक खुला खत ‘Dear Friend, speak up’ में सिन्हा ने बीजेपी सांसदों के नाम मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील करते हुए मोदी के नीतियों की आलोचना की. इस ख़त में सिन्हा ने नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार की अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, महिलाओं की सुरक्षा और पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र सहित विभिन्न मुद्दों पर जमकर प्रहार किया था. उन्होंने लिखा कि 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की अभूतपूर्व जीत ने उन्हें आशा और विश्वास दिया था कि यह “एक शानदार नए अध्याय की शुरुआत” होगी, परन्तु पार्टी अब “मतदाताओं के विश्वास” को खो चुकी है. सरकार के लंबे दावों, कि हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था हैं, के विपरीत यहाँ की आर्थिक स्थिति गंभीर है. उनके अनुसार तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था अपने बैंकों में गैर-निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) को जमा नहीं करती है, जैसा कि हमने पिछले चार वर्षों में किया है. तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में किसान संकट में नहीं होते हैं, युवा बेरोजगार नहीं होते हैं, छोटे व्यवसाय नष्ट नहीं होते हैं और बचत और निवेश पिछले चार वर्षों में काफी हद तक नहीं गिरते हैं. सबसे बदतर है, भ्रष्टाचार ने फिर से अपना बदसूरत सिर उठाया है और बैंकिंग घोटाले एक के बाद एक सामने आते जा रहे हैं. घोटालेबाज देश से दूर बाहर भाग रहे हैं और सरकार असहाय रूप से उन्हें देख रही है. आज पहले की तुलना में महिलाएं अधिक असुरक्षित हैं. विदेश नीति के बारे में सिन्हा ने लिखा था कि “प्रधान मंत्री द्वारा लगातार विदेशी यात्राओं और विदेशी गणमान्य व्यक्तियों को गले लगाते हुए, चाहे वे इसे पसंद करते हों या नहीं,” में कोई महत्वपूर्ण बात नहीं है जिससे देश को ज्यादा लाभ पहुंचे. सिन्हा ने लिखा कि सबसे अधिक बड़ी बात “लोकतंत्र के लिए खतरा” है. उनके अनुसार, “पार्टी मुख्यालय एक कॉर्पोरेट कार्यालय बन गया है जहां सीईओ से मिलना असंभव है”.
इस बैठक में असंतुष्ट बीजेपी सांसद सतरुग्न सिन्हा, राजद नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी और आप नेता ने संजय सिंह और आशुतोष में भाग लिया.




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