गलियां-सड़क चकाचक पर ‘नल’ से नहीं टपक रहा ‘जल’

गड़हनी,22 अप्रैल. भोजपुर जिले का गड़हनी प्रखंड के लगभग 6 किलोमीटर पर स्थित बलिगांव पंचायत है.बलिगांव पंचायत की पहचान अंग्रेजों द्वारा स्थापित कोठी से जाना जाता हैं. बताया जाता है कि इस कोठी में अंग्रेजों ने इस क्षेत्र का अपना ऑफिस बनाया था. इस कोठी में छह रूम, कुआँ सहित कई चीजें हैं जो आज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं. जब-तब लोग इसे देखने जाते हैं या बाहर से आये लोगो को दिखाने ले जाते हैं. यह कोठी इस पंचायत की खास पहचान है. वही दूसरी पहचान बाबू कुँवर सिंह 1857 के लड़ाई में बलिगांव रुक कर पोखरा में स्नान ध्यान किए थे, जो आज उसी पोखरा के किनारे बाबा बलीश्वर नाथ का शिव मंदिर बनाया गया हैं. पोखरा के सौन्दर्यीकरण नही होने से छठ पूजा के दौरान छठव्रतियों की भी परेशानी होती हैं. पंचायत सरकार भवन पिछले साल 2020 में बन कर तैयार है लेकिन अभी तक पंचायत के मुखिया सुनील कुमार को हैंड ओवर नही हुआ हैं. पंचायत के सात निश्चय योजना, पंचम वित्त आयोग चौदहवीं एवं पन्द्रहवीं योजना के अंतर्गत लगभग ढाई करोड रूपये का काम किया गया गया है.
मुखिया ने बताया कि पंचायत में राशि भरपूर नही मिला हैं जिससे बलिगांव पंचायत का भरपूर विकास नही हुआ हैं, जिसका आरोप प्रशासनिक अधिकारी पर लगाया है. पंचायत में कुल गांव बलिगांव , श्रीनगर , अजनाप, रौशनटोला, ललित के बथान, खेलाड़ी टोला, लालगंज, छोटकी तेंदुनी, डिहरी, महथिनटोला, डीह पर , भगवान टोला शामिल हैं.

पांच वर्षो में पंचायत में काफी कम फंड मिलने के बावजूद भी संभवत सभी 16 वार्डो में विकास पहुंचाने का काम किया गया. चुनावी हलचलें काफी जोरो पर है एक दुसरे को अपने अपने पक्ष में गोलबंद करने का प्रयास किया जा रहा है. प्रत्याशी से मतदाता काफी जागरूक है सभी को नब्ज टटोल रह हैं आने वाले समय में जबाब देने को तैयार है.




सिचाई
सिचाई के लिए नहर तो हैं लेकिन समय से पानी नही आने पर किसान तीतर- बितर हो जाते हैं,सरकारी पंपसेट के बंद रहने से निजी पंप सेट सिंचाई का साधन हैं. बलिगांव पंचायत के लालगंज सहित पंचायत के अन्य गांवों में सरकारी बोरिंग के बंद पड़े रहने अथवा चालू नहीं रहने के कारण किसानों को अपने निजी पंप सेट बोरिंग के सहारे किया जाता है सिंचाई संसाधन. अगर सिंचाई के संसाधन सही समय पर मिले तो किसान भी अच्छे तरक्की कर सकते है.

पंचायत में नहीं चलता आरटीपीएस काउंटर
बलिगांव पंचायत में आरटीपीएस काउंटर पांच साल के कार्यकाल बीत चुका पर नहीं खुला. मुखिया का कहना है कि पंचायत के कामों को लेकर पंचायत की जानता को 6 किलोमीटर प्रखंड मुख्यालय गड़हनी जाना पडता है जिससे काफी परेशानी उठानी पडती है .

बलीगांव पंचायत एक नजर
प्रखंड – गड़हनी
पंचायत – बलिगांव
कुल आबादी:-21245
कुल मतदाता :-10630
पुरुष:-5876
महिला:-4754
कुल स्कूलों की संख्या:-11

उपलब्धियां
पंचायत के संभवत सभी वार्डो में नली गली रोड पीसीसी ढलाई एवं नल-जल का काम किया गया है. सरकारी फंड कम रहने के बावजूद भी सभी वार्डो में 80 प्रतिशत काम किया गया है. अधूरे पडे काम को भी मौका मिला तो पूरा किया जाएगा. बता दें कि आजादी के बाद से बलिगांव पंचायत के ग्राम श्रीनगर, रौशनटोला, डीह पर, ललित के बथान और भगवान टोला में किसी भी जनप्रतिनिधियों द्वारा इस गांव टोला का विकास नहीं किया गया था ,एक भी पैसा विधायक या संसद निधि से खर्च नही किया, पहले के मुखिया भी आज तक इन सभी गांवों में एक फूटी कौड़ी नही लगाई. मुखिया सुनील कुमार ने विकास योजनाओं का अलख जगाया है,इन सभी गांवों को मुख्य सड़क तक जोड़ने का काम किया.

सड़क
प्रखंड मुख्यालय से बलिगांव पंचायत पहुंचना चने चबाने के बराबर हैं सड़क इतनी जर्जर थी कि कुछ नही कहा जा सकता वही पंचायत के अंदर की गालियां या सड़क का हालत बेहतर है लेकिन आज भी मुख्य सड़क पर महादलित बस्ती में जलजमाव है,कोई सुधार नही किया गया है. 60 प्रतिशत से अधिक जलजमाव की स्थिति में सुधार हुआ है,हालांकि स्थानीय जनप्रतिनिधि के द्वारा पीडब्लूडी के अधिकारियों पर दवाब बनाकर गड़हनी से बलीगांव पहुंचने का मुख्य सड़क का मरम्मत कराया गया.

नकामियां
1) नल-जल का काम सही ढंग से नहीं कराये जाने से कई वार्डो में आज भी पानी नही टपक रहा हैं.

2) गड़हनी-बलिगांव मुख्य सड़क पर अवस्थित महादलित बस्ती में जलजमाव होना
3) पंचायत सरकार भवन को मूलभूत सुबिधा से वंचित रखना।

नल – जल
नल – जल का पानी के लिए सरकार भले प्रयासरत है पर नल का पानी कुछ वार्डो में मिलता है अधिकांश वार्डो में चालू होने के बाद भी एक बूंद पानी नहीं टपका. नल-जल का काम पुरा है. लगभग सभी वार्डो में नल-जल योजना के तहत वार्ड 02,07,10 में नल का जल नही मिल रहा हैं. मुखिया का कहना है वार्ड सदस्यों से जल्द चालू कराने को कहा गया हैं.

अस्पताल

बलिगांव पंचायत में उपस्वास्थ्य केन्द्र है एनएम आती है बच्चों को पोलियो के खुराक,टीका, बीसीजी सहित कई स्वास्थ्य सेवा के लाभ पहुंचाने का काम करती है. आती है समय के पहले चली जाती है. परंतु डाक्टर तो कभी कभार भी नहीं आते या दिखाई देते है. जिसको लेकर लोगो में नाराजगी है, सुधार की मांग की है.

बिजली

बलिगांव पंचायत में बिजली व्यवस्था में फिलहाल सुधार है. समय पर बिजली मिलती है. पूरे पंचायत में 18 से 20 घंटे बिजली रहती है.
अभी गर्मी के मौसम में बिजली में थोड़ी बहुत फाल्ट होता रहता है.
पर बिजली विभाग के अधिकारी सुधार करने का प्रयास करते हैं परंतु कुछ देर पर सुधार हो जाती है. मिलाजुलाकर व्यवस्था फिलहाल ठीक-ठाक है.

रोजगार के अवसर का खुला द्वार

प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत पिछले लॉकडाउन में लगभग 800 मजदूरों को जॉब कार्ड बनाया गया जिससे मजदूरों को काम के लिए बाहर नही जाना पड़ा, वही मजदूरों को काम देने में भी मुखिया सुनील कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिसके चलते आज गड़हनी प्रखंड में बलिगांव पंचायत नम्बर 1 पर है जिसके चलते आज प्रवासी मजदूर अपना जीवन यापन अच्छा से कर पा रहे हैं,वही कुछ बाहर पलायन भी कर गए.

पंचायत भवन

बलिगांव पंचायत सरकार भवन बनने के वावजूद भी आजतक मूलभूत सुबिधा से दूर रखा गया हैं. इस सम्बंध में मुखिया से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पंचायत सरकार भवन बनने के पश्चात सरकार द्वारा पांच लाख रुपये की राशि सरकार भवन संचालन के लिए फर्नीचर संबंधित कराई जाती हैं लेकिन आज तक एक फूटी कौड़ी न मिला,जबकि मुखिया द्वारा बार-बार लिखित आवेदन प्रखंड प्रशासन को दिया लेकिन किसी ने एक न सुनी.

क्या कहते हैं मुखिया
बलिगांव पंचायत के मुखिया सुनील कुमार पाल ने बताया कि पंचायत में किये गये विकास कार्य बोल रहा है. युवा मुखिया होने के नाते पंचायत के विकास को ऊंचाई तक ले जाने का मन में जज्बा था,लेकिन सरकार के गलत नीतियों के कारण कुछ काम अधूरे पड़े हैं.पारदर्शिता के तहत सभी गांव के वार्ड में विकास हुआ है जो धरातल पर है. अगर जनता पुनः दुबारा मौका देती हैं तो प्रखंड का नंबर वन पंचायत बना दूंगा.

सुनील कुमार पाल
(मुखिया)

क्या कहते हैंं प्रतिद्वंद्वि

रामाशंकर साह

बालिगांव पंचायत के प्रतिद्वंदी रामाशंकर साह उर्फ सोकन ने कहा कि पूरे पंचायत में नल-जल का कार्य सही से नही हुआ हैं जांच का विषय हैं. वही वार्ड संख्या 02,07,14 में कही भी नलजल योजना के तहत पानी नही मिल रही है. पंचायत में विकास के नाम पर पंचायत प्रतिनिधि भंजा रहे हैंं.

गड़हनी से मुरली मनोहर जोशी की रिपोर्ट