“दोपहर 2 बजे तक जवाब दें”: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और सीबीआई को फटकारा

नई दिल्ली (ब्यूरो रिपोर्ट) | सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिहार सरकार को राज्य में आश्रय गृहों की स्थिति की अधूरी जानकारी के लिए फटकार लगाई और मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले का ट्रायल दिल्ली के साकेत कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया. अदालत ने कहा कि मुकदमे को 6 महीने में पूरा किया जाना चाहिए और इसमें इतने से ज्यादा समय का विस्तार नहीं किया जाना चाहिए.“बस बहुत हो गया, हमें राज्य के 110 आश्रयगृहों का विवरण दें – कितने कैदी हैं? राज्य इन्हें कैसे सहायता दे रहा है और पुरुष और महिला कैदियों की संख्या क्या है, ”भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा.भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, “जिस तरह से आपने दुर्भाग्यपूर्ण बच्चों के साथ व्यवहार किया, आप इन चीजों को कैसे होने दे सकते. हमें जवाब चाहिए. दिल्ली से पटना तक केवल दो घंटे हैं. हम मुख्य सचिव को यहां ला सकते हैं. लेकिन दोपहर 2 बजे आपको जवाब देना होगा.”शीर्ष अदालत ने मामले में संयुक्त सीबीआई निदेशक और पर्यवेक्षक अधिकारी ए के शर्मा के स्थानांतरण के लिए भी सरकार की खिंचाई की.पिछले महीने, सीबीआई ने गया और भागलपुर में दो आश्रय घरों में बच्चों के कथित दुर्व्यवहार पर दो नई एफआईआर दर्ज की थीं. यह मुजफ्फरपुर आश्रय गृह में नाबालिग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न की चल रही जांच के अलावा है.सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के अध्ययन में 17 आश्रय गृहों में कैदियों के कथित शोषण की जांच करे.प्राथमिकी के अनुसार,

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सुनवाई पूरी, अब फैसले का इंतजार

आज जस्टिस अभय मनोहर सप्रे एवं यू यू ललित के स्पेशल बेंच में 2 बजे अपराह्न से समान काम समान वेतन मामले की सुनवाई हुई. सर्वप्रथम बिहार सरकार के अधिवक्ता श्याम दिवान अपना रिज्वाइन्डर पूरा किये. फिर, बिहार सरकार के तीसरे अधिवक्ता आर के द्विवेदी भी रिज्वाइन्डर पेश किये. सरकारी अधिवक्ताओं के द्वारा पेश किये गये रिज्वाइन्डर का शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता व कानूनविद कपिल सिब्बल तथा विजय हंसरिया जी के द्वारा जोरदार काउंटर किया गया. सिब्बल एवं हंसरिया आज सरकारी वकीलों के द्वारा दिये गये रिज्वाइन्डर को ध्वस्त करने के लिये विभिन्न साक्ष्य एवं आवश्यक सामग्रियां जुटाकर लाये थे. सरकारी वकीलों के द्वारा दिये गये रिज्वाइन्डर (1) संविधानपीठ का चर्चित जजमेंट (2) वेतन मद के अव्यवहृत राशि वापस नहीं करने संबंधी झूठ (3) विभिन्न राज्यों खासकर झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल राज्यों के शिक्षकों के वेतन से तुलना (4) 25 हजार रूपये वेतन लेकर भी नहीं पढाने की झूठी दलीलें इत्यादि विभिन्न सरकारी रिज्वाइन्डर को ब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल तथा विजय हंसरिया ने साक्ष्य सहित ख़ारिज कराया तथा शिक्षकों के पक्ष को जोरदार तरीके से रखकर सभी कोटि के नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकाध्यक्षों को समान काम समान वेतन लागू करवाने हेतु माननीय न्यायाधीशों से फैसला देने का अपील किया. सिब्बल ने स्पष्ट कहा कि, विद्वान अधिवक्ता श्याम दिवान द्वारा पेश जजमेंट प्रोन्नति से संबंधित है. इसका समान काम समान वेतन मामले से कोई संबंध नहीं है. विजय हंसरिया ने बिहार सरकार एवं प्रोजेक्ट एप्रूवल बोर्ड के विभिन्न रिपोर्टों एवं पत्रों को पेश किया तथा स्पष्ट किया कि

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बिहार के 3.5 लाख से ज्यादा शिक्षकों की उम्मीदें बरकरार

सुप्रीम कोर्ट में बिहार के 3.5 लाख से ज्यादा नियोजित शिक्षकों के मामले में सुनवाई जारी है. बुधवार को केन्द्र की ओर से अटर्नी जनरल के वेणुगोपाल ने फिर से कहा कि केन्द्र सरकार इतनी बड़ी राशि नहीं दे सकती. वे पहले भी ये बातें कोर्ट के सामने रख चुके हैं. कोर्ट ने अटर्नी जनरल से पांच सवाल किए हैं जिनके जवाब के लिए उन्होंने गुरुवार तक का समय लिया है. सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई की जानकारी देते हुए बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव व पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बताया कि जस्टिस यूयू ललित ने अटर्नी जनरल से ये पांच सवाल किये हैं : क्या कभी बिहार में प्राथमिक या माध्यमिक शिक्षकों के बीच की वेतन विषमता दूर हुई है कि नहीं? भारत के जिन राज्यों में सातवां वेतनमान लागू है या जिन राज्यों में इनके कैडर को मिला दिया गया है, उनमें वेतनमान की समानता दी गयी है कि नहीं? जिन राज्यों में वेतनमान की समानता है, क्या उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार से कोई सवाल किया है? बिहार के शिक्षकों के साथ राज्य या भारत सरकार कब तक यह विषमता कायम रखना चाहती है? समानता के अधिकार के लिए संविधान और RTE में जो नियम या अनुच्छेद हैं, उनको लागू करने में क्या कोई संकट हुआ, इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार ने क्या-क्या कदम उठाये हैं? बहस के दौरान के वेणुगोपाल ने ड्राइवरों से शिक्षकों की तुलना कर दी.  उन्होंने किशोर लाल मुखर्जी बनाम भारत सरकार तथा दिल्ली पुलिस बनाम भारत सरकार में सुप्रीम

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शिक्षकों को मिलनी चाहिए सबसे ज्यादा सैलरी, क्योंकि…

  समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे शिक्षकों को फिर एक नई तारीख मिल गई है. हालांकि उनकी उम्मीदों को हर दिन नए पंख लग रहे हैं. गुरुवार 2 अगस्त को लगातार तीसरे दिन इस मामले की पूरे दिन सुनवाई हुई. इस दौरान एक बार फिर सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने सुना. इस दौरान एक बार फिर सरकारी वकील वही पुराना राग अलापते नजर आए. इस पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की. सरकार का पक्ष रखते कहा कि एक ही बात को बार-बार कहने का क्या मतलब. मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी. जब पैसे नहीं तो बंद क्यों नहीं कर देते सरकारी स्कूल! समान काम के लिए समान वेतन के मामले में गुरुवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित ने बिहार सरकार के वकील से पूछा कि वर्तमान सिस्टम सुधारने और नियोजन को खत्म करने में आपको कितने दिन लगेंगे. कोर्ट ने वकील से पूछा कि आप IAS ऑफिसर को ज्यादा सैलरी देते हैं, इंजीनियर को ज्यादा सैलरी देते हैं, पर शिक्षक राष्ट्र निर्माता हैं. इन्हें सबसे ज्यादा सैलरी मिलनी चाहिए, जिससे शिक्षक निश्चिंत होकर बेहतर राष्ट्र का निर्माण कर सकें. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भी राज्य सरकार पर तल्ख टिप्पणी की थी. कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि वेतन निर्धारण और नियमावली का आदेश कौन देता है, सरकार या पंचायत. साथ ही कोर्ट ने कहा था कि अगर राज्य सरकार के पास पैसे नहीं हैं, तो स्कूल को बंद कर

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अब 31 मार्च हुई आधार लिंक कराने की डेडलाइन

आधार से सरकारी योजनाओं को लिंक कराने की डेडलाइन 31 मार्च तक बढ़ा दी गई है. सुप्रीम कोर्ट में 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने आज ये अंतरिम आदेश जारी किया है. यानि अब बैंक खातों को आधार से लिंक कराने समेत अन्य सभी केन्द्रीय और राज्यस्तर की योजनाओं में आधार लिंक कराने की डेडलाइन अब 31 मार्च होगी. हालांकि नए बैंक अकाउंट खुलवाने वालों को आधार नंबर देना अनिवार्य किया गया है.

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नियोजित शिक्षकों को करना होगा इंतजार, सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

बिहार के नियोजित शिक्षकों का इंतजार लंबा होता दिख रहा है. पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करने वाली है. गुरुवार को शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आर के महाजन ने कहा कि विभाग को हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी मिल गई है और अब इस मामले में सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी. महाजन ने कहा कि इस मामले में सरकार का रुख साफ है कि नियोजित शिक्षकों को नियमित शिक्षकों की तरह सुविधाएं नहीं दी सकतीं. बता दें कि पटना हाईकोर्ट ने  नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन देने का फैसला सुनाया है. इससे पहले शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने भी संकेत दिए थे कि नियोजित शिक्षकों की नियोजन प्रक्रिया पूरी तरह अलग है और इसलिए इन्हें सारी सुविधाएं नहीं दी जा सकती हैं. पूरी खबर  सिर्फ यहां- https://goo.gl/aFwUwd  

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इस बार बिन पटाखों के मनेगी यहां दिवाली

पिछले साल दिवाली के अनुभव को देखते हुए आज सु्प्रीम कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक बरकरार रखी है. यानि इस साल दिवाली में दिल्ली और इसके आसपास पटाखे नहीं मिलेंगे. इस बार यहां रहने वाले लोगों को केवल मिठाइयों और दीपों से ही काम चलाना पड़ेगा.  सुप्रीम कोर्ट ने ये रोक 31 अक्टूबर तक के लिए लगाई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, दिवाली के बाद, 1 नवंबर 2017 से पटाखों की बिक्री फिर से शुरू हो जाएगी. पिछले साल दिवाली के अगले दिन कुछ ऐसे थे दिल्ली में हालात इसके साथ ही सरकार ने पटाखा दुकानों के सारे स्थाई और अस्थाई लाइसेंस निलंबित कर दिये हैं. बता दें कि कोर्ट ने पिछले साल 11 नवंबर को एक आदेश में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के भीतर पटाखों की थोक और खुदरा बिक्री की अनुमति देने वाले सभी लाइसेंस निलंबित कर दिये थे. बाद में 12 सितंबर, 2017 को कोर्ट ने इस प्रतिबंध को अस्थाई रूप से हटा दिया और पटाखों की बिक्री को अनुमति दे दी. इसके बाद पुराने आदेश की पुन:बहाली के संबंध में सुनवाई के दौरान केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पीठ से कहा था कि वह इस आवेदन का समर्थन करता है. याचिका दायर करने वाले अर्जुन गोपाल की ओर से पेश हुए वकील गोपाल शंकर नारायणन ने अदालत के समक्ष कहा कि पटाखों पर प्रतिबंध फिर से लागू होना चाहिए क्योंकि पिछले वर्ष दीवाली के बाद एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ गया था. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने ये बड़ा फैसला

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खत्म होगा तीन तलाक का सिस्टम!

आज बड़े फैसले का दिन है. सुप्रीम कोर्ट आज तीन तलाक के मुद्दे पर आज फैसला सुनायेगा. बता दें कि इसी साल 11-18 मई तक लगातार 6 दिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. 18 मई को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षिता रख लिया था. राष्ट्रीय महिला आयोग ने तीन तलाक को खत्म करने की सिफारिश की है. इसके साथ ही केन्द्र सरकार ने भी तीन तलाक के सिस्टम को गलत और अन्यायपूर्ण मानते हुए इसे महिलाओं के लिए अपमानजनक माना है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे मजहबी मामला मानते हुए इसमें कोर्ट और सरकार के हस्तक्षेप का विरोध किया है. दरअसल सु्प्रीम कोर्ट ने इस मामले पर खुद नोटिस लेते हुए केन्द्र सरकार, महिला आयोग और मुस्लिम संगठनों समेत सभी पक्षकारों को अपना पक्ष रखने को कहा था और मई महीने में इसपर लगातार 6 दिन सुनवाई की थी.

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