नियोजित शिक्षकों को झटका!

नियोजित शिक्षकों को समान काम समान वेतन मामले की बहुचर्चित सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है.  सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी साप्ताहिक केस लिस्ट में कोर्ट नंबर 11 में बिहार के नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मामले पर चल रही सुनवाई 11 सितंबर (मंगलवार) को सूचीबद्ध नहीं की गई है जबकि इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति द्वय अभय मनोहर सप्रे एवं उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई छह सितंबर को मौखिक व लिखित आदेश में सुनवाई की अगली तारीख 11 सितंबर को निर्धारित करते हुए निदेश दिया था कि अटॉर्नी जनरल अपनी बात पूरी करेंगे और शिक्षक संगठनों के शेष वकीलों को भी समय दिया जायेगा जिसके बाद ये सुनवाई समाप्त की जायेगी. लेकिन अगले सप्ताह (11, 12 व 13 सितंबर) में नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मामले की सुनवाई कोर्ट नंबर-11 में लिस्टेड नहीं है तथा सुनवाई कर रहे दोनों न्यायमूर्ति को अलग-अलग बेंचों में दूसरे न्यायधीशों के साथ बिठा दिया गया है. इसके बाद नियोजित शिक्षकों में आशंका गहरा गई है कि कहीं उनकी सुनवाई ठंडे बस्ते में ना चली जाए. सुनवाई जारी रखने की अपील बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्य न्यायधीश से पूर्ववत सुनवाई जारी रखने की अपील की है. बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी सह प्रवक्ता अभिषेक कुमार ने कहा कि राज्य के करीब चार लाख नियोजित शिक्षक और उनपर आश्रित 20 लाख लोग आस और टकटकी लगाए हुए थे कि अब सुनवाई का पटाक्षेप होगा और उनको न्याय मिलेगा. उन्होंने कहा

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बिहार के 3.5 लाख से ज्यादा शिक्षकों की उम्मीदें बरकरार

सुप्रीम कोर्ट में बिहार के 3.5 लाख से ज्यादा नियोजित शिक्षकों के मामले में सुनवाई जारी है. बुधवार को केन्द्र की ओर से अटर्नी जनरल के वेणुगोपाल ने फिर से कहा कि केन्द्र सरकार इतनी बड़ी राशि नहीं दे सकती. वे पहले भी ये बातें कोर्ट के सामने रख चुके हैं. कोर्ट ने अटर्नी जनरल से पांच सवाल किए हैं जिनके जवाब के लिए उन्होंने गुरुवार तक का समय लिया है. सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई की जानकारी देते हुए बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव व पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बताया कि जस्टिस यूयू ललित ने अटर्नी जनरल से ये पांच सवाल किये हैं : क्या कभी बिहार में प्राथमिक या माध्यमिक शिक्षकों के बीच की वेतन विषमता दूर हुई है कि नहीं? भारत के जिन राज्यों में सातवां वेतनमान लागू है या जिन राज्यों में इनके कैडर को मिला दिया गया है, उनमें वेतनमान की समानता दी गयी है कि नहीं? जिन राज्यों में वेतनमान की समानता है, क्या उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार से कोई सवाल किया है? बिहार के शिक्षकों के साथ राज्य या भारत सरकार कब तक यह विषमता कायम रखना चाहती है? समानता के अधिकार के लिए संविधान और RTE में जो नियम या अनुच्छेद हैं, उनको लागू करने में क्या कोई संकट हुआ, इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार ने क्या-क्या कदम उठाये हैं? बहस के दौरान के वेणुगोपाल ने ड्राइवरों से शिक्षकों की तुलना कर दी.  उन्होंने किशोर लाल मुखर्जी बनाम भारत सरकार तथा दिल्ली पुलिस बनाम भारत सरकार में सुप्रीम

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एक फरवरी से हड़ताल पर जाएंगे नियोजित शिक्षक

बिहार के करीब 4 लाख नियोजित शिक्षक हड़ताल पर जाएंगे. पटना में आज शिक्षकों ने एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद इसकी घोषणा की. नियोजित शिक्षकों की ये घोषणा सरकार के लिए बड़ी मुसीबत का सबब बन सकती है. हालांकि नियोजित शिक्षकों ने इसके लिए सरकार को खासा वक्त दिया है. शिक्षक संघों का कहना है कि अगर बिहार सरकार 31 जनवरी तक समान काम के लिए समान वेतन लागू नहीं करती है तो वे 1 फरवरी से हड़ताल पर चले जाएंगे.  फरवरी में बिहार में मैट्रिक और इंटर की परीक्षाएं होने वाली हैं. नियोजित शिक्षकों ने इन दोनों परीक्षाओं का बहिष्कार करने की भी घोषणा कर दी है. पटना में रविवार को माध्यमिक शिक्षक संघ, बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ, आदर्श अध्यापक शिक्षक संघ, बिहार माध्यमिक शिक्षक संघर्ष समिति, बिहार नगर पंचायत शिक्षक संघ, टेट-एसटेट उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ और परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक महासंघ समेत 23 संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई. बैठक में फैसला हुआ कि सरकार अगर पटना हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन नहीं देती है तो वे हड़ताल करेंगे. बैठक में शामिल आदर्श अध्यापक शिक्षक संघ के राज्य कार्यकारिणी सदस्य आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि यदि सरकार हमारी मांग समान काम समान वेतन को लागू नहीं करती है तो 1 फ़रवरी से बिहार के 4 लाख नियोजित शिक्षक हड़ताल पर चले जाएंगे. साथ ही मैट्रिक और इन्टर परीक्षा का बहिष्कार भी करेंगे. आलोक ने बताया कि SWSP पर आगामी रणनीति और साझा कार्यक्रम के लिए 22 नवंबर को पुनः सर्वसंघीय बैठक बुलाई

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नियोजित शिक्षकों को करना होगा इंतजार, सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

बिहार के नियोजित शिक्षकों का इंतजार लंबा होता दिख रहा है. पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करने वाली है. गुरुवार को शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आर के महाजन ने कहा कि विभाग को हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी मिल गई है और अब इस मामले में सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी. महाजन ने कहा कि इस मामले में सरकार का रुख साफ है कि नियोजित शिक्षकों को नियमित शिक्षकों की तरह सुविधाएं नहीं दी सकतीं. बता दें कि पटना हाईकोर्ट ने  नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन देने का फैसला सुनाया है. इससे पहले शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने भी संकेत दिए थे कि नियोजित शिक्षकों की नियोजन प्रक्रिया पूरी तरह अलग है और इसलिए इन्हें सारी सुविधाएं नहीं दी जा सकती हैं. पूरी खबर  सिर्फ यहां- https://goo.gl/aFwUwd  

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नियोजित शिक्षकों को मिलेगा समान वेतन!

समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे बिहार के करीब साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों की उम्मीद बढ़ गई है. विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक सोमवार को पटना हाईकोर्ट में नियोजित शिक्षकों के समान काम समान वेतन केस की सुनवाई में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच लगभग दो घंटे तक बहस हुई. इस दौरान शिक्षकों के वकील पीके शाही और मृत्युंजय कुमार के मजबूत तर्कों के सामने सरकार के वकील ललित किशोर घुटने टेकते नजर आये. बता दें कि नियोजित शिक्षक पिछले कई सालों से समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे हैं. लेकिन बिहार सरकार विभिन्न कारणों का हवाला देकर उनकी मांग को अनसुना कर दे रही है. लेकिन सोमवार की सुनवाई के बाद जज ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. इससे पहले शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि नियोजित शिक्षकों का वेतन चपरासी से भी कम क्यों है. सोमवार की सुनवाई के दौरान जज सरकारी वकील के तर्कों से खासे असंतुष्ट नजर आए. पूरी खबर यहां पढ़ें- https://goo.gl/BkG34Q

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इसी महीने लागू होगी सेवा शर्त!

बिहार में नियोजित शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है. सरकार ने आज सभी संघों को वार्ता के लिए बुलाया है. इसमें शिक्षकों संघों के प्रतिनिधि अपनी मांगें सरकार के सामने रख रहे हैं. इसके बाद सेवा शर्त पर बनी कमिटी फैसला लेगी और इसी महीने इसे लागू किया जा सकता है. वार्ता के लिए पहुंचे शिक्षक नेता वार्ता में शामिल संघों के नेताओं ने कहा कि पिछले 2 साल से ये मामला लंबित है जब सरकार ने सेवा शर्त लागू करने के लिए एक कमिटी का गठन किया था. क्या हैं नियोजित शिक्षकों और पुस्तकालयाध्क्षों की मुख्य मांगें- समान काम के लिए समान वेतन सहायक शिक्षक का दर्जा सेवा काल में कम-से-कम एक बार अंतर प्रमंडलीय ट्रांसफर की सुविधा आज कमिटी से सभी 12 संघों के प्रतिनिधियों ने मुलाकात की और उनके समक्ष अपनी मांगें लिखित रुप में रखीं. इनमें से एक बिहार नियोजित शिक्षक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव नारायण पाल ने बताया कि गृह सचिव आमिर सुबहानी और शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आर के महाजन के सामने उनलोगों ने अपनी मांगें रखी हैं और इसे जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार द्वारा बनाई (वर्ष 2015 में ) गई ये कमिटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी और इस महीने ही इसे लागू किया जा सकता है.

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