कविता -मजदूर की डायरी एंट्री

युवा कवियत्री रति अग्निहोत्री इन दिनों अपनी पुस्तक द सन सेट सोनाटा और कविताओं को लेकर हिंदी साहित्य जगत में चर्चा में है उनकी कविताओं को लोग पसंद कर रहे है.उनकी कविताएँ जन मानस को झकझोरती हैं साथ ही सोचने पर मजबुर करती है कि कैसा है मेहनतकश लोगों का जीवन .

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मज़दूर की डायरी एंट्री

कुछ भी नहीं

सिवाय पसीने की बहुत सी बूंदों के

कुछ छोटी छोटी दमित इच्छाओं के निशान

जिनके सपने उसने कभी देखे थे,

मशीनीकरण और पूंजीवाद पर

मज़दूर की कोई टिप्पणी नहीं

दूर जाती मानवीय संवेदनाओ के बारे में भी

उसने कुछ नहीं लिखा अपनी डायरी में

मज़दूर की डायरी एंट्री निरी औसत

रच्नात्मकता और बौद्धिकता से एकदम परे,

किस दिन खाना मिला, किस दिन नहीं

इस सब का ब्यौरा भी उस डायरी में

कितनी लोगों की घृणा और गाली गलौच को

सामान्य मानवीय व्यवहार की तरह सहा उसने

इसकी भी कुछ झलकियां उसकी डायरी एंट्री में

मज़दूर की डायरी

कागज़ की नहीं

उसका शरीर, उसकी आंखे, उसके समस्त अंग प्रत्यंग

यही उसकी डायरी के बेहिसाब पन्ने

और उसकी सांसों का आरोह अवरोह

समेटता अपने अंदर उसके सारे जीवन वृतांत को .

रति अग्निहोत्री